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सरकारी नौकरियों में Reservation Rule साफ, Supreme Court बोला- छूट ली तो General Quota का हक नहीं

सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया है कि आरक्षित श्रेणी का कोई उम्मीदवार जो प्रारंभिक परीक्षा में छूट का लाभ उठाता है, उसे कैडर आवंटन के उद्देश्य से "सामान्य मानक" पर चयनित उम्मीदवार के रूप में नहीं माना जा सकता है, भले ही वह अंतिम योग्यता सूची में सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार से उच्च रैंक प्राप्त कर ले। न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (सीएटी) और कर्नाटक उच्च न्यायालय के एक समान निष्कर्षों को रद्द कर दिया, जिसमें केंद्र सरकार की उस अधिसूचना को बरकरार रखा गया था जिसमें कर्नाटक कैडर को सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार को आवंटित किया गया था, जबकि प्रारंभिक परीक्षा में शिथिल मानकों के आधार पर उत्तीर्ण होने वाले अधिक योग्य अनुसूचित जाति (एससी) उम्मीदवार को यह पद मिलना चाहिए था।

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सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय वन सेवा (IFS) के अनारक्षित (जनरल) कैडर में अनुसूचित जाति (SC) वर्ग की नियुक्ति पर विचार करने से इनकार कर दिया। क्योंकि, अभ्यर्थी ने प्रारंभिक परीक्षा के स्तर पर छूट का लाभ लिया था। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा, एक बार जब किसी आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी ने छूट ले ली, तो वह अनारक्षित रिक्तियों के लिए योग्य नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने केंद्र सरकार की उस अपील को स्वीकार करते हुए यह व्यवस्था दी, जिसमें कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी। हाई कोर्ट ने केवल इस आधार पर प्रतिवादी (SC वर्ग) अभ्यर्थी को अनारक्षित श्रेणी में नियुक्ति की अनुमति दे दी थी कि उसने सामान्य वर्ग के अभ्यर्थी से अधिक अंतिम रैंक प्राप्त की थी।

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2013 की IFS परीक्षा का है मामला

यह मामला 2013 की IFS परीक्षा के बाद आया था। प्रारंभिक परीक्षा में सामान्य वर्ग के लिए कट-ऑफ 267 अंक थी, जबकि SC अभ्यर्थियों के लिए कट ऑफ 233 अंक थी। SC वर्ग के प्रतिवादी ने 247.15 अंक प्राप्त कर रियायती कट-ऑफ के आधार पर पात्रता प्राप्त की। जनरल कैटिगरी के कैंडिडेट ने 270.68 अंक के साथ सामान्य कट ऑफ पर परीक्षा पास की। 

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TMC सांसद की SC में अर्जी, ममता का EC पर आक्रमक रुख, पश्चिम बंगाल में कितना बड़ा चुनावी मुद्दा बनेगा SIR!

तृणमूल कांग्रेस सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने सुप्रीम कोर्ट से बंगाल में चल रही एसआईआर प्रक्रिया को 15 जनवरी से आगे बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस अभियान से बड़े पैमाने पर मताधिकार से वंचित होने की आशंका है, क्योंकि चुनाव आयोग को कथित तौर पर 1.36 करोड़ मतदाताओं के खिलाफ तार्किक विसंगतियां मिली हैं। याचिका में एसआईआर प्रक्रिया में शामिल बीएलओ और अन्य कर्मचारियों के साथ आधिकारिक संचार के लिए व्हाट्सएप के व्यापक उपयोग की भी आलोचना की गई है, जो आधिकारिक परिपत्र और पत्र जारी करने के नियम के विपरीत है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ, जिनके समक्ष तृणमूल नेता की याचिका को संबंधित एसआईआर मामलों के साथ सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया था, बुधवार या गुरुवार को इस पर सुनवाई कर सकती है। समय की कमी के कारण मंगलवार को इस मामले की सुनवाई नहीं हो सकी।

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अदालत में याचिका दायर 

डेरेक ओ'ब्रायन ने यह आवेदन अपनी लंबित याचिका में दायर किया है, जिसमें उन्होंने पश्चिम बंगाल सहित विभिन्न राज्यों में एसआईआर कराने के लिए चुनाव आयोग द्वारा जारी आदेशों और दिशानिर्देशों को चुनौती दी है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को घोषणा की थी कि वह SIR के खिलाफ अदालत जाएंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के कारण भय, उत्पीड़न और प्रशासनिक मनमानी फैली है, जिसके परिणामस्वरूप मौतें, अस्पताल में भर्ती होने की घटनाएं और आत्महत्या के प्रयास तक हुए हैं।

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हर तरह के हथकंडे अपना रहा आयोग, ममता का आरोप

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग राज्य में जारी एसआईआर कवायद को संचालित करने के लिए बीजेपी के आईटी प्रकोष्ठ द्वारा विकसित मोबाइल ऐप का उपयोग कर रहा है। दक्षिण 24 परगना जिले के सागर द्वीप में आगामी गंगासागर मेले की तैयारियों का जायजा लेने के लिए अपने दो दिवसीय दौरे के समापन से पहले बनर्जी ने पत्रकारों के साथ बातचीत में कहा कि निर्वाचन आयोग मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान हर तरह के गलत हथकडे अपना रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि निर्वाचन आयोग योग्य मतदाताओं को मृत घोषित कर है और बुजुर्गों, बीमारो और अस्वस्थ लोगों को सुनवाई में शामिल होने के लिए मजबूर कर रहा है। इसके लिए वह बीजेपी के आईटी प्रकोष्ठ द्वारा विकसित मोबाइल ऐप का इस्तेमाल कर रहा है। यह गैरकानूनी, असंवैधानिक और अलोकतात्रिक है। यह अब और नहीं चल सकता। बनर्जी ने कहा, 'मैं लोगों से आग्रह करती हूं कि वे एसआईआर में भाग लेते समय सावधानी बरतें। 

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शनि और राहु दोष से पाना चाहते हैं मुक्ति? माघ माह में करें इन चीजों का दान

हिंदू धर्म में माघ महीने का बहुत अधिक महत्व माना गया है। इसे शुद्धि और सिद्धि के महीने के रूप में पहचाना जाता है। साल 2026 में 4 जनवरी से इस महीने की शुरुआत हो गई है। यह 1 फरवरी तक चलेगा। ज्योतिष के अनुसार कुछ महीने ग्रह दोषों की शांति के लिए विशेष माने … Thu, 08 Jan 2026 14:31:19 GMT

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