Pakistan New Stunt On Terror: FATF की बैठक से पहले पाकिस्तान की नई पैंतरेबाजी; आतंकी मसूद अजहर पर घोषित किया 70 लाख का इनाम
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकी फंडिंग को लेकर FATF की संभावित सख्ती से बचने के लिए पाकिस्तान ने एक बार फिर नया पैंतरा अपनाया है। फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की महत्वपूर्ण बैठक से ठीक पहले पाकिस्तान की संघीय जांच एजेंसी (FIA) ने अपनी वांछित अपराधियों की 'रेड बुक' को अपडेट किया है। इस सूची में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मौलाना मसूद अजहर पर इनाम की राशि को 50 लाख पाकिस्तानी रुपये से बढ़ाकर 70 लाख पाकिस्तानी रुपये कर दिया गया है।
एफएटीएफ की बैठक से ठीक पहले उठाया गया कदम
कूटनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान द्वारा उठाया गया यह कदम सीधे तौर पर एफएटीएफ के वैश्विक मानकों और जांच से बचने की एक रणनीति है। पाकिस्तान पर लंबे समय से आतंकी संगठनों और उनके सरगनाओं को पनाह देने और टेरर फंडिंग पर प्रभावी रोक न लगाने के आरोप लगते रहे हैं। बैठक से ठीक पहले ऐसी कार्रवाइयां दिखाकर पाकिस्तान यह साबित करने की कोशिश करता है कि वह आतंकवाद के खिलाफ सख्त कदम उठा रहा है।
भारत में हुए कई बड़े आतंकी हमलों का मास्टरमाइंड है मसूद अजहर
मसूद अजहर भारत में हुए कई विनाशकारी आतंकी हमलों का मुख्य सूत्रधार रहा है। वह 2001 के भारतीय संसद हमला, 2016 का पठानकोट एयरबेस हमला और 2019 के पुलवामा फिदायीन हमले का मुख्य साजिशकर्ता है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) द्वारा उसे पहले ही वैश्विक आतंकवादी घोषित किया जा चुका है।
पाकिस्तान का 'आईवॉश' ड्रामा और हकीकत
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि मसूद अजहर पर इनाम बढ़ाना और रेड बुक में नाम शामिल करना महज एक दिखावा या 'आईवॉश' है। पाकिस्तान लगातार दावा करता रहा है कि मसूद अजहर देश में मौजूद नहीं है या लापता है, जबकि विभिन्न खुफिया रिपोर्टों के अनुसार वह पाकिस्तान के बहावलपुर और अन्य सुरक्षित ठिकानों से अपना नेटवर्क चला रहा है।
एफआईए ने सूची में अन्य वांछित आतंकियों के नाम भी किए शामिल
संसोधित रेड बुक में मसूद अजहर के अलावा अन्य आतंकी संगठनों से जुड़े वांछित अपराधियों के नामों और इनाम की राशियों को भी अपडेट किया गया है। एफआईए ने अदालत द्वारा जारी गैर-जमानती वारंट का हवाला देते हुए मसूद अजहर की गिरफ्तारी की बात दोहराई है, हालांकि पूर्व के अनुभवों को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसे पाकिस्तान का एक और कूटनीतिक हथकंडा मान रहा है।
जीतू पटवारी ने सीएम डॉ. मोहन यादव को लिखा पत्र, NEET-2026 में 2 लाख की एग्जिट पेनल्टी वापस लेने की मांग
मध्यप्रदेश कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखा है। अपने पत्र में उन्होंने यूजी नीट-2026 की एमबीबीएस काउंसलिंग में विद्यार्थियों पर लगाई गई 2 लाख रुपये की एग्जिट पेनल्टी को अन्यायपूर्ण बताते हुए तत्काल वापस या स्थगित करने की मांग की है।
कांग्रेस नेता ने पत्र में कहा है कि 3 सितंबर 2026 के राउंड-2 नोटिस में आवंटित सीट छोड़ने पर 2 लाख रुपये की पेनल्टी का प्रावधान किया गया, जबकि 3 अगस्त 2026 को जारी नियम पुस्तिका के पेज 8 के क्रमांक 15 में राउंड-2 तक आवंटित सीट छोड़ने पर सिर्फ प्रवेश शुल्क देय बताया गया था। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों ने इसी नियम पुस्तिका के आधार पर काउंसलिंग प्रक्रिया में हिस्सा लिया था।
एमसीसी काउंसलिंग के बीच फ्री एग्जिट की समयसीमा पर किए सवाल
जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में काउंसलिंग की समयसीमा पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ऑल इंडिया एमसीसी की काउंसलिंग प्रक्रिया उस समय जारी थी और राउंड-2 का सीट आवंटन 11 सितंबर को होना था, जबकि मध्यप्रदेश डीएमई ने फ्री एग्जिट की अंतिम तारीख 3-4 सितंबर निर्धारित कर दी। ऐसे में विद्यार्थियों के सामने एमसीसी के परिणाम और अपग्रेडेशन की संभावना जाने बिना अपनी राज्य काउंसलिंग की सीट को लेकर अंतिम निर्णय लेने की स्थिति बन गई।
2 लाख की पेनल्टी को बताया विद्यार्थियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि 2 लाख रुपये की पेनल्टी अन्य काउंसलिंग व्यवस्थाओं की तुलना में भी काफी अधिक है। उन्होंने पत्र में एमसीसी की व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि राउंड-2 से बाहर निकलने पर सामान्य श्रेणी के विद्यार्थी के लिए अधिकतम 10 हजार रुपये तक का आर्थिक नुकसान होता है। ऐसे में मध्यप्रदेश में 2 लाख रुपये की देनदारी विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन रही है।
काउंसलिंग के बीच नियम बदलने का विरोध
उन्होंने कहा कि काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू होने से पहले सभी नियम स्पष्ट होने चाहिए और प्रक्रिया के बीच में नियमों में बदलाव विद्यार्थियों के हित में नहीं है।कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि नीट-यूजी के री-एग्जाम और काउंसलिंग में हुई देरी से पहले ही विद्यार्थी प्रभावित हुए हैं और ऐसे में अतिरिक्त आर्थिक दंड से उनपर मानसिक और आर्थिक दबाव बढ़ेगा।
अपने पत्र में जीतू पटवारी ने सुप्रीम कोर्ट के एस. गुणसेकरन बनाम अंडर सेक्रेटरी टू गवर्नमेंट मामले में दिए गए सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा कि विरोधाभासी काउंसलिंग प्रावधानों के कारण उम्मीदवारों को नुकसान नहीं होना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि राज्य और ऑल इंडिया एमसीसी के संबंधित काउंसलिंग राउंड पूरे होने तक विद्यार्थियों को आवंटित सीट छोड़ने या एमसीसी में अपग्रेडेशन का अवसर लेने पर इस तरह का आर्थिक दंड नहीं लगाया जाए।
15 सितंबर से पहले विद्यार्थियों के हित में फैसला लेने की मांग
उन्होंने मुख्यमंत्री से 2 लाख रुपये की एग्जिट पेनल्टी वापस या स्थगित करने, 3 अगस्त की नियम पुस्तिका के अनुसार देयता सिर्फ प्रवेश शुल्क तक सीमित रखने, अतिरिक्त वसूली गई राशि लौटाने और राउंड-2 समाप्त होने से पहले सीट छोड़ने के लिए उचित समय-सीमा देने की मांग की है। उन्होंने भविष्य में काउंसलिंग प्रक्रिया के बीच विद्यार्थियों को प्रभावित करने वाले नियमों में बदलाव नहीं करने की मांग भी की है। कांग्रेस नेता ने मुख्यमंत्री से विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के हित में 15 सितंबर से पहले इस मामले पर तत्काल सकारात्मक निर्णय लेने का आग्रह किया है।
मुख्यमंत्री जी,
मप्र में UG NEET-2026 की #MBBS काउंसलिंग में आवंटित सीट छोड़ने के लिए दो रुपए का एग्जिट पेनल्टी अन्यायपूर्ण है! इस निर्णय को तत्काल वापस लें!@DrMohanYadav51 pic.twitter.com/2HM7etKYiL— Jitendra (Jitu) Patwari (@jitupatwari) September 14, 2026
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