3500 किलो मेहंदी और अविवाहित युवाओं की भीड़... जयपुर के मोती डूंगरी गणेश मंदिर की सिंजारा रस्म क्यों है खास?
Moti Dungri Ganesh Temple: देशभर में आज गणेश चतुर्थी का त्योहार मनाया जा रहा है. भक्तों ने घर और पंडालों में गणेश जी की स्थापना की है. इस दिन उनका जन्मोत्सव होता है और भव्य पूजा-अर्चना की जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गणेश चतुर्थी पर ही माता पार्वती ने उबटन से गणेश जी का निर्माण किया था और उन्हें जीवन दिया था. हालांकि, गणेश चतुर्थी का त्योहार महाराष्ट्र में बहुत ज्यादा प्रचलित और गहरी आस्था से जुड़ा हुआ है. मगर राजस्थान की राजधानी जयपुर में मोती डूंगरी मंदिर में सिंधारा रस्म की विशेष मान्यता है. इस रस्म के लिए मंदिर में बड़ी संख्या में अविवाहित युवा आते हैं और प्रसाद के रूप में मेहंदी लेकर जाते हैं. सिंजारा या सिंधारा जयपुर की एक पुरानी परंपरा है. कहा जाता है कि जिन लोगों की शादी नहीं हो रही है, उन्हें ये मेहंदी लगानी चाहिए. इसलिए, हर साल बड़ी संख्या में अविवाहित युवक-युवती यहां पहुंचते हैं.
मेहंदी की है विशेष आस्था
मंदिर के पुजारियों ने बताया कि गणेश चतुर्थी से एक दिन पहले सिंधारा की रस्म होती है. इस रस्म की मेहंदी को लेकर गहरी आस्था है. इस अवसर पर गणपति जी को विशेष पोशाक पहनाई जाती है. उन्हें स्वर्ण मुकुट, नौलखा हार तथा चांदी के सिंहासन से सजाया जाता है. इसके बाद भगवान को चढ़ाए जाने के बाद मेहंदी भक्तों को बांटी जाती है. इस मंदिर में सिर्फ राजस्थान नहीं बल्कि हरियाणा, गुजरात और पंजाब से भी युवक आते हैं. इस परंपरा के लिए गणेश चतुर्थी का उत्सव प्रमुख माना गया है.
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पूरी होती है मनोकामना
धार्मिक मान्यता है कि मेहंदी सिंधारे पर भक्त जो भी मनोकमना लेकर आते हैं, वह पूरी हो जाती है. मेहंदी का संबंध से होता है इसलिए जो लोग विवाह करने की सोच रहे हैं और उनका विवाह काफी समय से नहीं हो रहा है. उन्हें विवाह करना होता है, अगर वे हाथों पर प्रसाद की मेहंदी रचाते हैं तो एक साल के अंदर ही विवाह संपन्न हो जाता है.
इस साल 3500 किलो मेहंदी बांटी गई
मोती डूंगरी मंदिर के पुजारियों ने बताय है कि इस बार मेहंदी सिंधारे की रस्म के लिए 3500 किलो मेहंदी आई है. मंदिर में दर्शनार्थियों का तांता लगेगा और 8 जगहों पर मेहंदी बांटी जाएगी. ऐसे में मंदिर प्रशासन की कोशिश रहती है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों की बांटी जाए और कोई हाथ खाली न जाए. गणेश चतुर्थी के उत्सव का शुभारंभ होते ही इस मंदिर की भी चर्चाएं तेज हो जाती हैं.
क्या है इस मंदिर का इतिहास?
जयपुर के मोती डूंगली मंदिर को प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है. इस गणेश मंदिर का इतिहास सालों पुराना है. मंदिर में स्थापित गणेश जी की प्रतिमा को लेकर मान्यता है कि इसे राजस्थान के मावली क्षेत्र से जयपुर लाया गया. कहते हैं कि एक बैलगाड़ी में प्रतिमा को जयपुर लाया जा रहा था और बैलगाड़ी जहां रुकी, वहीं पर भगवान गणेश की स्थापना करने का निर्णय लिया गया. बाद में मोती डूंगरी की पहाड़ी के नीचे मंदिर निर्माण हुआ. वर्तमान मंदिर का 18वीं शताब्दी में निर्माण हुआ था.
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'सेमीकॉन इंडिया 2026' का 17 सितंबर को उद्घाटन करेंगे पीएम मोदी, 600 से अधिक कंपनियां होंगी शामिल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 सितंबर को नई दिल्ली स्थित यशोभूमि में आयोजित होने वाले 'सेमीकॉन इंडिया 2026' के पांचवें संस्करण का उद्घाटन करेंगे। 17 से 19 सितंबर तक चलने वाला यह तीन दिवसीय आयोजन वैश्विक सेमीकंडक्टर कंपनियों, नीति निर्माताओं, निवेशकों, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स और शिक्षाविदों को एक मंच पर लाएगा, जहां भारत की सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मूल्य शृंखला में बढ़ती क्षमताओं को प्रदर्शित किया जाएगा।
सोमवार को जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि "सिलिकॉन टू सिस्टम्स: बिल्डिंग द इकोसिस्टम" थीम पर आधारित यह सम्मेलन ऐसे समय आयोजित हो रहा है जब भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति शृंखला में अपनी भूमिका मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार की नीतिगत सहायता, बढ़ते निवेश और विविध एवं लचीली वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं की बढ़ती मांग ने भारत के लिए नए अवसर पैदा किए हैं।
यह कार्यक्रम इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम), इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) और वैश्विक उद्योग संगठन एसईएमआई द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जा रहा है। एसईएमआई दुनिया के सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स डिजाइन और विनिर्माण उद्योग का प्रमुख प्रतिनिधि संगठन है।
300 अंतरराष्ट्रीय कंपनियां होंगी शामिल
बयान में कहा गया है कि इस वर्ष के आयोजन में 600 से अधिक प्रदर्शक भाग लेंगे, जिनमें लगभग 300 अंतरराष्ट्रीय कंपनियां शामिल होंगी। प्रदर्शनी को 15,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में आयोजित किया जाएगा। इसके अलावा, 150 से अधिक विशेषज्ञ और उद्योग नेता विभिन्न तकनीकी और रणनीतिक विषयों पर चर्चा करेंगे।
6 देशों के पवेलियन होंगे स्थापित
इसके साथ ही, प्रदर्शनी में 6 देशों के पवेलियन और 12 राज्य सरकारों के पवेलियन स्थापित किए जाएंगे। साथ ही स्टार्टअप, नवाचार, छात्रों, कौशल विकास और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए विशेष मंच भी बनाए जाएंगे। स्टार्टअप पवेलियन में लगभग 40 स्टार्टअप्स अपनी तकनीक और नवाचार प्रदर्शित करेंगे। वहीं वर्कफोर्स डेवलपमेंट पवेलियन में माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में कौशल विकास, रोजगार और करियर अवसरों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
सेमीकंडक्टर उद्योग की मूल्य शृंखला का अनुभव
इस बार आयोजन का एक प्रमुख आकर्षण "सैंड टू सिलिकॉन टू सिस्टम्स वैल्यू चेन एक्सपीरियंस" होगा। इसके माध्यम से आगंतुकों को सेमीकंडक्टर उद्योग की पूरी मूल्य शृंखला का अनुभव मिलेगा, जिसमें कच्चे पदार्थों से लेकर विनिर्माण, एडवांस्ड पैकेजिंग, चिप डिजाइन, इलेक्ट्रॉनिक्स और अंतिम सिस्टम निर्माण तक की प्रक्रिया को प्रदर्शित किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान स्टार्टअप पिच प्रतियोगिता, स्टूडेंट हैकाथॉन और इनोवेशन शोकेस भी आयोजित किए जाएंगे, जहां युवा उद्यमी, शोधकर्ता और छात्र अपने विचारों और तकनीकों को प्रस्तुत कर सकेंगे।
इन मुद्दों पर होगी चर्चा
सम्मेलन में सेमीकंडक्टर विनिर्माण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), सप्लाई चेन रेजिलिएंस, एडवांस्ड पैकेजिंग, सामग्री एवं उपकरण, चिप डिजाइन, अनुसंधान एवं विकास, स्टार्टअप्स, नवाचार और प्रतिभा विकास जैसे विषयों पर मुख्य भाषण, पैनल चर्चा और विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे।
इसके अलावा, छह अंतरराष्ट्रीय देशों के साथ विशेष राउंडटेबल बैठकें भी होंगी। महिलाओं के नेतृत्व और सशक्तिकरण, कार्यबल विकास तथा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन और विनिर्माण (ईएसडीएम) क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी विशेष चर्चा की जाएगी।
(DISCLAIMER: खबर IANS न्यूज फीड से ली गई है. न्यूजनेशन खबर में किए गए किसी भी डेटा और फैक्ट्स की पुष्टि नहीं करता है.)
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