'छक्का-हिजड़ा' कहने वाले अब इज्जत से जोड़ते हैं हाथ, मिलिए कोल्हापुर की जांबाज ट्रांसवुमेन रेस्क्यू स्क्वाड से
कोल्हापुर में पहली ट्रांसवुमन रेस्क्यू स्क्वाड बनाई गई है. जिसमें 15 किन्नरों को आपदा राहत कार्य में कुशल बनाया गया है. आज ये बाढ़ से लेकर किसी भी आपदा में लोगों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं. पहले जो लोग इन्हें तिरस्कार की भावना से देखते थे, अब वे उनका सम्मान करते नहीं थक रहे.
फरीदाबाद के सोतई गांव में 51 साल से लोग पक्की सड़क का कर रहे इंतजार, जेवर एयरपोर्ट फ्लाईओवर के पास भी कच्चा रास्ता
फरीदाबाद के सोतई गांव की एक तस्वीर ऐसी भी है, जहां लोग आज भी पक्की सड़क के इंतजार में हैं. जिस रास्ते से परिवार पिछले 51 सालों से आना-जाना कर रहा है, वह आज तक पक्का नहीं हो सका है. हैरानी की बात यह है कि इसी रास्ते से महज 25 से 30 मीटर की दूरी पर जेवर एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी से जुड़ा फ्लाईओवर बन रहा है, लेकिन यहां रहने वाले परिवारों के लिए सड़क अब भी कच्ची है. बरसात आते ही हालात और खराब हो जाते हैं और लोगों का निकलना तक मुश्किल हो जाता है.
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