भगवान को चढ़ाई माला में विषम संख्या के फूल क्यों नहीं होने चाहिए? जानें इसका धार्मिक महत्व और नियम
Mala banane ka niyam: हिंदू धर्म में भगवान को अर्पित की जाने वाली फूलों की माला बनाते समय फूलों की संख्या का भी विशेष ध्यान रखा जाता है। मान्यता है कि माला में हमेशा सम संख्या यानी 2, 4, 6, 8 आदि में ही फूल पिरोने चाहिए, जबकि विषम संख्या में फूलों वाली माला अर्पित करना अशुभ माना जाता है। यही कारण है कि पूजा-पाठ के लिए माला तैयार करते समय इस नियम का विशेष ख्याल रखा जाता है।
सम संख्या को क्यों माना जाता है शुभ?
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, सम संख्या को पूर्णता और संतुलन का प्रतीक माना जाता है, जबकि विषम संख्या को अपूर्णता से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि भगवान को अर्पित की जाने वाली हर वस्तु संपूर्णता का प्रतीक होनी चाहिए, इसी वजह से माला में सम संख्या में फूल पिरोने की परंपरा बनी। कथाओं में यह भी उल्लेख मिलता है कि पूजा में इस्तेमाल होने वाली हर सामग्री का एक निश्चित गणितीय और आध्यात्मिक महत्व होता है, जिसे नजरअंदाज करना उचित नहीं माना जाता।
माला बनाने का सही नियम
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, माला बनाते समय हमेशा ताजे और साबुत फूलों का इस्तेमाल करना चाहिए, मुरझाए या कीड़े लगे फूलों को माला में शामिल नहीं करना चाहिए। मान्यता है कि माला पिरोते समय मन में भगवान का ध्यान करना और स्वच्छता का पूरा ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक माना जाता है। इसके अलावा कुछ परंपराओं में माला बनाते समय मंत्रों का जाप करने की भी प्रथा है, जिसे विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
किस देवता को कौन सा फूल है प्रिय?
हिंदू परंपरा में हर देवी-देवता को अलग-अलग प्रकार के फूल विशेष रूप से प्रिय माने जाते हैं। मान्यता है कि भगवान विष्णु को कमल और तुलसी की माला अत्यंत प्रिय है, जबकि देवी दुर्गा को लाल गुड़हल और गुलाब की माला विशेष रूप से पसंद मानी जाती है। इसी तरह भगवान शिव को धतूरे के फूल और बेलपत्र की माला प्रिय बताई जाती है, जबकि भगवान गणेश को लाल फूलों की माला शुभ मानी जाती है।
किन फूलों का इस्तेमाल है वर्जित?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुछ विशेष फूलों को कुछ देवी-देवताओं की पूजा में वर्जित भी माना जाता है। जैसे भगवान गणेश की पूजा में तुलसी पत्र का इस्तेमाल नहीं किया जाता, जबकि देवी दुर्गा की पूजा में कुछ खास सफेद फूलों से परहेज करने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि हर देवता से जुड़े इन नियमों का पालन करने से पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
आज भी हर पूजा में रखा जाता है यह ध्यान
समय के साथ भले ही पूजा-पाठ के तरीकों में कुछ बदलाव आया हो, लेकिन माला बनाते समय फूलों की संख्या और प्रकार को लेकर यह परंपरागत नियम आज भी अनेक श्रद्धालुओं द्वारा श्रद्धापूर्वक निभाया जाता है। आज भी मंदिरों और घरों में पूजा के लिए माला तैयार करते समय इन धार्मिक मान्यताओं का विशेष ध्यान रखा जाता है।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक ग्रंथों और लोक-परंपराओं पर आधारित है। Haribhoomi.com इनकी किसी भी तरह की सटीकता या तथ्य की पुष्टि नहीं करता है। इन्हें केवल सामान्य जानकारी के तौर पर प्रस्तुत किया जा रहा है।
Bihar Assistant Professor Recruitment: भर्ती नियमों में होगा बड़ा बदलाव? 4 सदस्यीय कमेटी करेगी समीक्षा, 90 दिन में रिपोर्ट
बिहार के विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक की भर्ती प्रक्रिया में बदलाव की तैयारी है। राज्यपाल एवं कुलाधिपति सय्यद अता हसनैन ने मौजूदा नियुक्ति नियमों की समीक्षा के लिए चार सदस्यीय हाई लेवल कमेटी गठित की है। समिति भर्ती नियमों की खामियों और विवादित पहलुओं की जांच कर उनमें सुधार के सुझाव देगी। कमेटी को अपनी रिपोर्ट 90 दिनों के भीतर सौंपनी होगी।
Bihar Assistant Professor Recruitment: भर्ती नियमों की होगी समीक्षा
बिहार के विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर राज्यपाल सचिवालय की ओर से बड़ा कदम उठाया गया है। मौजूदा भर्ती नियमों की समीक्षा और उनमें सुधार के सुझाव देने के लिए चार सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है।
इस समिति में प्रशासन, शिक्षा और अकादमिक क्षेत्र से जुड़े अनुभवी लोगों को शामिल किया गया है। कमेटी को अपनी रिपोर्ट तैयार कर 90 दिन के भीतर सौंपनी होगी। यह निर्णय 24 अगस्त को राज्यपाल और प्रदर्शन कर रहे छात्रों के बीच हुए समझौते के बाद लिया गया है।
कमेटी में कौन-कौन शामिल?
हाई लेवल कमेटी में चार सदस्य हैं। इनमें पूर्व IAS अधिकारी अमरजीत सिन्हा, संजय कुमार, पद्मश्री प्रो. H.C. वर्मा, शिक्षाविद डॉ. P.K. रॉय शामिल हैं। राज्यपाल सचिवालय में अपर सचिव (विश्वविद्यालय) संजय कुमार को समिति का सदस्य सचिव बनाया गया है।
प्रशासन और शिक्षा के अनुभवी लोगों को मिली जगह
समिति में शामिल अमरजीत सिन्हा बिहार और केंद्र सरकार में शिक्षा सहित कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। वह बिहार सरकार में अपर मुख्य सचिव के पद पर भी रह चुके हैं।
संजय कुमार भी बिहार और केंद्र सरकार में कई अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। वह हाल ही में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के सचिव पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। वहीं पद्मश्री प्रो. H.C. वर्मा देश के प्रसिद्ध फिजिसिस्ट हैं और IIT कानपुर में प्रोफेसर रह चुके हैं। समिति में शामिल डॉ. P.K. रॉय शिक्षाविद के तौर पर जाने जाते हैं।
इन मुद्दों पर होगी जांच
समिति विश्वविद्यालय सेवा आयोग और हायर एजुकेशन विभाग की भर्ती नियमावली के अहम पहलुओं की समीक्षा करेगी। इसमें असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए निर्धारित मौजूदा एज लिमिट भी जांच के दायरे में होगी। इसके अलावा UGC के मानकों के अनुरूप PhD, NET और SLET जैसी शैक्षणिक योग्यताओं और पात्रता की शर्तों की भी समीक्षा की जाएगी।
लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के नियम भी जांचे जाएंगे
सहायक प्राध्यापक भर्ती में होने वाली लिखित परीक्षा और इंटरव्यू की व्यवस्था पर भी समिति विचार करेगी। दोनों चरणों में अंकों के बंटवारे और चयन प्रक्रिया में इनके वेटेज को लेकर भी सुझाव दिए जाएंगे। समिति यह भी देखेगी कि उम्मीदवारों के शैक्षणिक रिकॉर्ड, रिसर्च पब्लिकेशन और इंटरव्यू को चयन प्रक्रिया में कितना महत्व दिया जाना चाहिए।
गेस्ट लेक्चरर के अनुभव के अंकों पर भी मंथन
विश्वविद्यालयों में काम कर रहे गेस्ट लेक्चरर को अनुभव के आधार पर मिलने वाले अंकों को लेकर सामने आने वाले विवाद भी समिति की समीक्षा में शामिल होंगे।
कमेटी इन सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी। माना जा रहा है कि इसके सुझावों से बिहार के विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक भर्ती प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट और व्यवस्थित बनाने में मदद मिल सकती है।
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