Sunil Gavaskar: टेस्ट में 20 विकेट क्यों नहीं ले पा रहा भारत? सुनील गावस्कर ने बताई बड़ी वजह
Indian Test Cricket Team: भारतीय क्रिकेट टीम टेस्ट मैच में 20 विकेट लेने के लिए संघर्ष कर रही है। श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो टेस्ट इसका ताजा उदाहरण रहा, जहां शुभमन गिल की कप्तानी वाली टीम आखिरी दिन श्रीलंका के बचे हुए चार विकेट नहीं निकाल सकी। सोनल दिनूषा ने पांचवें दिन तक बल्लेबाजी करते हुए भारत को जीत से रोक दिया। इस ड्रॉ के साथ भारत 2-0 से सीरीज जीतने से चूक गया।
भारत की इस कमजोरी पर पूर्व कप्तान और 1983 वर्ल्ड कप विजेता सुनील गावस्कर ने बड़ा सवाल उठाया है। उनका मानना है कि अच्छी पिचों पर 20 विकेट लेने में भारतीय गेंदबाजों की परेशानी का एक कारण घरेलू क्रिकेट का मौजूदा सिस्टम भी है।
गावस्कर ने हाल ही में हुए दलीप ट्रॉफी फाइनल का उदाहरण दिया। ईशान किशन की कप्तानी वाली ईस्ट जोन ने पहली पारी की बढ़त के आधार पर साउथ जोन को हराकर खिताब जीता। ईस्ट जोन ने करीब दो दिन बल्लेबाजी करते हुए 708 रन बनाए, जिसमें किशन ने शानदार 270 रन की पारी खेली। इसके बाद टीम ने दूसरी पारी में भी काफी समय गंवाया और मैच में सीधे जीत हासिल करने की कोशिश नहीं की।
गावस्कर ने अपने कॉलम में लिखा कि निराशाजनक बात यह रही कि ईस्ट जोन ने मैच जीतने के लिए जोर नहीं लगाया और दूसरी पारी को जरूरत से ज्यादा लंबा खींच दिया। दोनों कप्तानों का तय समय से पहले मैच खत्म करने पर सहमत होना भी उन्हें सही नहीं लगा।
उन्होंने कहा कि अगर खेल जल्दी खत्म करना ही था तो लंच के समय ही क्यों नहीं रोक दिया गया, क्योंकि आखिरी दो सेशन में साउथ जोन के लिए 650 से ज्यादा रन का लक्ष्य हासिल करना लगभग नामुमकिन था।
गावस्कर के मुताबिक पहली पारी की बढ़त को पर्याप्त मानने की परंपरा ही भारत के 20 विकेट न ले पाने की बड़ी वजहों में से एक है। उनका सवाल है कि अगर घरेलू मैच में गेंदबाजों को दूसरी पारी में गेंदबाजी करने का पर्याप्त मौका ही नहीं मिलेगा तो वे टेस्ट में 10 विकेट लेने की कला कैसे सीखेंगे?
उन्होंने समझाया कि दूसरी पारी में 10 विकेट लेना एक अलग स्किल है। जैसे बल्लेबाज को 20-30 रन से अर्धशतक और 70-80 से शतक तक पहुंचना सीखने में समय लगता है, वैसे ही गेंदबाजों को दूसरी पारी में 10 विकेट लेने का तरीका सीखना पड़ता है। इसमें शारीरिक फिटनेस के साथ मानसिक मजबूती और लंबे समय तक दबाव बनाए रखने की क्षमता भी जरूरी है।
गावस्कर का मानना है कि यह अनुभव फर्स्ट क्लास क्रिकेट में ही तैयार होता है। लेकिन अगर बड़ी पहली पारी की बढ़त लेने वाली टीम दूसरी पारी में मैदान पर उतरने में ही दिलचस्पी नहीं दिखाएगी, तो गेंदबाजों को यह जरूरी अनुभव आखिर मिलेगा कैसे?
'लैब में तैयार हीरों के पूरे कारोबार पर हो भारतीयों का नियंत्रण...', मुंबई में बोले गृह मंत्री अमित शाह?
केंद्रीय गृह मंत्री ने उद्योग जगत से यह सुनिश्चित करने को कहा कि लैब में तैयार किए जाने वाले हीरों की पूरी व्यवस्था और निर्माण प्रक्रिया मजबूती से भारतीयों के हाथ में रहे.
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