CIA Briefs Bin Laden Target List: CIA ने सार्वजनिक किए 70 से ज्यादा सीक्रेट दस्तावेज, ओसामा की हिट लिस्ट में था भारत
अमेरिका की खुफिया एजेंसी सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (CIA) द्वारा सार्वजनिक किए गए लगभग 70 से अधिक प्रेसिडेंशियल डेली ब्रीफ (PDB) दस्तावेजों ने 9/11 हमलों से पहले की वैश्विक सुरक्षा स्थिति की परतें खोल दी हैं।
तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपतियों को सौंपे गए इन अति-गोपनीय दस्तावेजों से स्पष्ट होता है कि अल-कायदा का नेटवर्क अमेरिका ही नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया और मध्य पूर्व के कई देशों को अपने निशाने पर लेने की योजना बना रहा था।
28 अगस्त 1998 का दस्तावेज: भारत था हिट लिस्ट में
सीआईए द्वारा 28 अगस्त 1998 को तैयार किए गए एक खुफिया दस्तावेज (शीर्षक: "Bin Ladin Terrorist Network Still a Threat") में विशेष रूप से भारत का जिक्र किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, लादेन का नेटवर्क केवल पश्चिमी देशों के खिलाफ ही नहीं, बल्कि भारत में भी बड़े हमलों को अंजाम देने की फिराक में था।
हालांकि, इस दस्तावेज में किसी विशिष्ट स्थान या ऑपरेशन की तारीख का विस्तृत ब्योरा नहीं था, लेकिन लादेन की मंशा और भारत के प्रति उसके खतरे को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया था।
भारत के अलावा इन देशों पर भी थी अल-कायदा की नजर
खुफिया ब्रीफिंग में खुलासा किया गया है कि बिन लादेन भारत के साथ-साथ पाकिस्तान, सऊदी अरब, कुवैत, मिस्र, यमन, युगांडा और नाइजीरिया में भी अमेरिकी ठिकानों या स्थानीय सरकारों को निशाना बनाने की योजना बना रहा था।
सीआईए ने अमेरिकी नेतृत्व को आगाह किया था कि अल-कायदा का बुनियादी ढांचा तेजी से फैल रहा है और वह अपरंपरागत हथियारों को हासिल करने का प्रयास कर रहा है।
9/11 की 25वीं बरसी पर सार्वजनिक हुए 100 से ज्यादा पन्ने
वर्ष 2001 के भयानक हमलों की 25वीं बरसी के मौके पर सीआईए ने 100 से अधिक पन्नों के ऐतिहासिक दस्तावेजों को डीक्लासिफाइड किया है। इन फाइलों से पता चलता है कि 1990 के दशक के उत्तरार्ध से ही अमेरिकी खुफिया समुदाय को अल-कायदा की गतिविधियों, उसके फंडिंग नेटवर्क और वैश्विक खतरे के बारे में लगातार जानकारियां मिल रही थीं।
दक्षिण एशियाई सुरक्षा परिदृश्य पर पड़ा था असर
विशेषज्ञों का मानना है कि 1998 के आसपास लादेन द्वारा भारत को निशाना बनाने की बात सामने आना इस बात की पुष्टि करता है कि अल-कायदा उस दौर में जम्मू-कश्मीर और भारतीय उपमहाद्वीप में मौजूद अन्य चरमपंथी संगठनों के साथ संपर्क साधने की कोशिश कर रहा था। सीआईए की इस रिपोर्ट से साबित होता है कि 9/11 से बहुत पहले ही भारत वैश्विक इस्लामी आतंकवाद की हिट लिस्ट में शामिल हो चुका था।
BRICS 2026: 'मतभेदों को विवाद न बनने दें...', जिनपिंग के सामने पीएम मोदी ने रखी भारत की स्पष्ट नीति
PM Modi Xi Jinping bilateral meeting: दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक हुई। इस दौरान दोनों शीर्ष नेताओं ने आपसी संबंधों, सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और व्यापार से जुड़े तमाम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों के निरंतर विकास के लिए सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता बनाए रखना बेहद आवश्यक है।
सीमा विवाद और समझौतों के पालन पर बनी सहमति
प्रधानमंत्री मोदी ने चीनी राष्ट्रपति के साथ चर्चा के दौरान इस बात को रेखांकित किया कि दोनों पक्षों को सीमा से जुड़े मुद्दों पर हुए 'मौजूदा समझौतों और समझ' का कड़ाई से पालन करना चाहिए। दोनों नेताओं ने यह भी प्रतिबद्धता जताई कि द्विपक्षीय संबंधों के समग्र राजनीतिक दृष्टिकोण और दोनों देशों के नागरिकों के दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखते हुए सीमा विवाद का एक 'निष्पक्ष, तर्कसंगत और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान' निकाला जाना चाहिए। इसके अलावा, नेताओं ने माना कि दोनों देशों को क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों और चुनौतियों का सामना करने के लिए आपसी सहयोग के दायरे को लगातार बढ़ाना चाहिए।
व्यापारिक असंतुलन और बाजार पहुंच पर चर्चा
आर्थिक मोर्चे पर बात करते हुए पीएम मोदी और शी जिनपिंग ने एक-दूसरे की चिंताओं को दूर करने की आवश्यकता पर बल दिया। इसमें विशेष रूप से संरचनात्मक व्यापार असंतुलन (Structural trade imbalance), आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े मुद्दों का समाधान और दोनों देशों के बीच सार्थक एवं अनुमानित बाजार पहुंच (Predictable market access) को सुगम बनाना शामिल रहा।
विदेश मंत्रालय (MEA) की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि दोनों नेताओं ने अगस्त 2025 में तियानजिन में हुई अपनी पिछली मुलाकात के बाद से भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों में हुई निरंतर प्रगति का स्वागत किया। साथ ही, इस बात पर भी जोर दिया गया कि दोनों देशों को अपने संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से देखना चाहिए तथा आपसी मतभेदों को विवादों में नहीं बदलने देना चाहिए।
चीनी राष्ट्रपति का दिल्ली आगमन और उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग दोपहर 12:25 बजे नई दिल्ली के पालम हवाई अड्डे पर उतरे। आधिकारिक चीनी मीडिया के अनुसार, उनके साथ पोलित ब्यूरो की स्थायी समिति के सदस्य काई क्यू, विदेश मंत्री वांग यी और अधिकारियों, राजनयिकों, सुरक्षा तथा चिकित्सा कर्मचारियों समेत 67 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने भारत की यात्रा की है।
हालांकि, चीनी सरकार द्वारा पुष्टि न की गई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन का कुल प्रतिनिधिमंडल 400 सदस्यों का था, जो साल 2019 में महाबलीपुरम में हुई मोदी-शी द्विपक्षीय शिखर वार्ता के समय आए प्रतिनिधिमंडल से दोगुना है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 'एक्स' पर पोस्ट कर चीनी राष्ट्रपति का गर्मजोशी से स्वागत किया और बताया कि हवाई अड्डे पर राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने उनकी अगवानी की।
दोनों देशों के बीच सुधरते कूटनीतिक और आवागमन के संबंध
ब्रिक्स के संयुक्त घोषणापत्र के जारी होने के बाद शिखर सम्मेलन के इतर यह द्विपक्षीय वार्ता बेहद सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुई। अधिकारियों का कहना था कि शी जिनपिंग की भारत यात्रा से पहले उठाए गए सद्भावना कदमों के मद्देनजर ऐसी सकारात्मक बातचीत की उम्मीद पहले से ही थी। इससे पहले, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोवाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच हुई विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता के दौरान आठ सूत्रीय आम सहमति बनी थी। उल्लेखनीय है कि इसी कड़ी में साल 2025 में कैलाश मानसरोवर यात्रा को पुनर्जीवित किया गया था, और हाल ही में चीन साउदर्न एयरलाइंस ने 21 सितंबर से गुआंगज़ौ-नई दिल्ली रूट पर सीधी उड़ानों को फिर से शुरू करने की घोषणा की है।
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