Ganesh Chaturthi 2026: बप्पा के स्वागत से पहले घर ले आएं ये 7 शुभ चीजें, सुख-समृद्धि की बनी रहेगी कृपा!
Ganesh Chaturthi 2026: गणपति बप्पा के स्वागत की तैयारियां शुरू होते ही बाजारों में रौनक बढ़ जाती है। घर की साफ-सफाई से लेकर पूजा की सामग्री और गणेश प्रतिमा तक, लोग पहले से तैयारियां करने लगते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गणेश चतुर्थी से पहले कुछ शुभ वस्तुएं घर लाना मंगलकारी माना जाता है। कहा जाता है कि इन चीजों को घर में रखने से सकारात्मक माहौल और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। आइए जानते हैं वे कौन-सी चीजें हैं, जिन्हें बप्पा के आगमन से पहले खरीदना शुभ माना जाता है।
गणेश चतुर्थी का पर्व भगवान गणेश को घर में विराजमान कराने और उनकी विधि-विधान से पूजा करने का विशेष अवसर माना जाता है। इस दिन भक्त बप्पा की स्थापना करते हैं और कई दिनों तक पूजा-अर्चना के साथ उनका गुणगान करते हैं।
गणेश जी के स्वागत से पहले पूजा की तैयारियों के साथ कुछ शुभ वस्तुएं खरीदकर घर लाने की भी परंपरा है। हालांकि, इनसे जुड़े लाभ धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं, इनका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
1. सोना या चांदी खरीदना माना जाता है शुभ
गणेश चतुर्थी के आसपास सोने या चांदी का सिक्का, आभूषण अथवा छोटी प्रतिमा खरीदने की परंपरा कई जगह देखने को मिलती है। धार्मिक मान्यताओं में चांदी को शुद्धता और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। बप्पा के आगमन से पहले चांदी की कोई वस्तु घर लाना शुभ माना जाता है।
2. घर लाएं गणेश जी की सुंदर प्रतिमा
गणेश चतुर्थी पर सबसे महत्वपूर्ण खरीदारी भगवान गणेश की प्रतिमा की होती है। कई परिवार बप्पा की मूर्ति पहले से घर लाकर रखते हैं। पूजा के लिए शांत, सुंदर और मन को प्रसन्न करने वाले स्वरूप वाली गणेश प्रतिमा लेना शुभ माना जाता है।
3. हल्दी की गांठ और सुपारी
गणेश पूजा में हल्दी और सुपारी का विशेष महत्व बताया गया है। हल्दी की गांठ को मंगल और शुभता का प्रतीक माना जाता है। वहीं पूजा में सुपारी का इस्तेमाल भी धार्मिक परंपराओं के अनुसार किया जाता है। गणेश चतुर्थी की तैयारी के दौरान इन्हें पहले से खरीदकर रखा जा सकता है।
4. लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा
भगवान गणेश को बुद्धि, शुभता और मंगल का देवता माना जाता है, जबकि माता लक्ष्मी को धन और ऐश्वर्य से जोड़ा जाता है। इसी वजह से गणेश चतुर्थी के अवसर पर लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा खरीदने की परंपरा भी कई घरों में है। धार्मिक मान्यता के अनुसार लक्ष्मी-गणेश की एक साथ पूजा करने से परिवार में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की जाती है।
5. श्रीयंत्र भी ला सकते हैं घर
धार्मिक परंपराओं में श्रीयंत्र को भी शुभ माना गया है। कुछ लोग गणेश चतुर्थी या अन्य शुभ अवसरों पर श्रीयंत्र खरीदकर पूजा स्थल अथवा घर में रखते हैं। इसे माता लक्ष्मी से जुड़ा पवित्र प्रतीक माना जाता है।
6. बप्पा के लिए दूर्वा और मोदक
भगवान गणेश की पूजा दूर्वा और मोदक के बिना अधूरी मानी जाती है। मान्यता है कि दूर्वा बप्पा को विशेष प्रिय है। इसलिए गणेश चतुर्थी से पहले दूर्वा, मोदक बनाने की सामग्री, फल, फूल और अन्य पूजा सामग्री की व्यवस्था कर लेना अच्छा रहता है।
7. तिजोरी में रख सकते हैं ये शुभ वस्तुएं
गणेश चतुर्थी पर कुछ लोग चांदी का सिक्का, कौड़ी, गोमती चक्र जैसी शुभ मानी जाने वाली वस्तुएं खरीदकर तिजोरी में रखते हैं। धार्मिक मान्यताओं में इन वस्तुओं को धन और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, इन्हें तिजोरी में रखने से धन बढ़ने की कोई गारंटी नहीं है। यह पूरी तरह धार्मिक आस्था और पारंपरिक मान्यताओं का विषय है।
बप्पा के स्वागत से पहले कर लें ये तैयारियां
गणेश चतुर्थी से पहले घर की साफ-सफाई के साथ पूजा स्थल को व्यवस्थित करना, गणेश प्रतिमा, दूर्वा, मोदक, फूल, फल और अन्य आवश्यक सामग्री की व्यवस्था करना बेहतर रहता है। सबसे जरूरी बात यह है कि पूजा श्रद्धा और अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार की जाए।
Parivartini Ekadashi 2026: कब रखा जाएगा परिवर्तिनी एकादशी का व्रत? जानें पूजा मुहूर्त और पारण का समय
Parivartini Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है। सालभर में आने वाली सभी एकादशियों में से भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है और चातुर्मास के दौरान पड़ने के कारण इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चातुर्मास के समय भगवान विष्णु योग निद्रा में रहते हैं। परिवर्तिनी एकादशी के दिन उनके करवट बदलने की मान्यता है। इसी वजह से इस एकादशी को परिवर्तिनी या पार्श्व परिवर्तन एकादशी भी कहा जाता है। इस वर्ष एकादशी तिथि रात के समय शुरू होकर अगले दिन तक रहेगी। ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल है कि आखिर व्रत किस तारीख को रखा जाएगा। आइए पंचांग के आधार पर जानते हैं परिवर्तिनी एकादशी की सही तारीख, शुभ योग, पूजा का समय और पारण का मुहूर्त।
परिवर्तिनी एकादशी 2026 कब है?
पंचांग के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 21 सितंबर 2026 की रात 8 बजे से शुरू होगी और 22 सितंबर की रात 9 बजकर 43 मिनट तक रहेगी। चूंकि 22 सितंबर को सूर्योदय के समय एकादशी तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए उदयातिथि की मान्यता के अनुसार 22 सितंबर, मंगलवार को परिवर्तिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा। व्रत रखने वाले श्रद्धालु इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना कर व्रत का संकल्प ले सकते हैं।
परिवर्तिनी एकादशी पर बनेंगे शुभ योग
इस बार परिवर्तिनी एकादशी पर कई शुभ संयोग बन रहे हैं। पंचांग के अनुसार, दिन की शुरुआत रवि योग से होगी। रवि योग सुबह 6 बजकर 9 मिनट से 7 बजकर 6 मिनट तक रहेगा। इसके बाद सुकर्मा योग आरंभ होगा, जो पूरी रात प्रभावी रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं में सुकर्मा योग को शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। नक्षत्र की बात करें तो उत्तराषाढ़ा नक्षत्र सुबह 7 बजकर 6 मिनट तक रहेगा। इसके बाद श्रवण नक्षत्र शुरू हो जाएगा।
पूजा के लिए कौन सा समय रहेगा शुभ?
परिवर्तिनी एकादशी के दिन सुबह का समय पूजा-पाठ और आध्यात्मिक साधना के लिए विशेष माना जा सकता है। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 35 मिनट से 5 बजकर 22 मिनट तक रहेगा। श्रद्धालु स्नान आदि करने के बाद ब्रह्म मुहूर्त में व्रत का संकल्प लेकर भगवान विष्णु की पूजा कर सकते हैं। वहीं पूजा के लिए सुबह 9 बजकर 11 मिनट से दोपहर 1 बजकर 45 मिनट तक का समय शुभ रहेगा।
- लाभ-उन्नति मुहूर्त: सुबह 10:43 बजे से दोपहर 12:14 बजे तक
- अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त: दोपहर 12:14 बजे से 1:45 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:49 बजे से दोपहर 12:38 बजे तक
23 सितंबर को होगा व्रत का पारण
एकादशी व्रत का समापन द्वादशी तिथि में पारण के साथ किया जाता है। पंचांग के अनुसार इस बार 23 सितंबर, बुधवार को परिवर्तिनी एकादशी व्रत का पारण किया जाएगा। पारण के लिए सुबह 6 बजकर 10 मिनट से 8 बजकर 35 मिनट तक का समय बताया गया है। व्रत रखने वाले श्रद्धालु इस अवधि में भगवान विष्णु की पूजा करने के बाद व्रत खोल सकते हैं।
परिवर्तिनी एकादशी का धार्मिक महत्व
परिवर्तिनी एकादशी को भगवान विष्णु की आराधना के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। चातुर्मास के दौरान आने वाली इस एकादशी का संबंध भगवान विष्णु की योग निद्रा और उनके करवट परिवर्तन से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की भक्ति, व्रत और पूजा करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है। श्रद्धालु इस दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान-पुण्य करते हैं और भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करते हैं। इस दिन सात्विक जीवनशैली अपनाने, भगवान विष्णु का ध्यान करने और जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करने को भी धार्मिक दृष्टि से शुभ माना जाता है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। हरिभूमि.कॉम इसकी पुष्टि नहीं करता है।
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