अब चुटकी में लीजिये Facebook और Instagram पर ब्लू टिक; मार्क जुकरबर्ग ने खुद बताया कैसे ?
मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने हाल ही में मेटा verifcation की घोषणा की। मतलब अब ट्विटर की तर्ज़ पर फ़ेसबुक और इंस्टा पर कोई भी यूजर सरकारी आईडी मुहैया कराकर अपना अकाउंट वेरिफाई करवा सकेगा।
ट्विटर ब्लू की तरह यह भी यूजर्स को वेब और ios में वेरिफिकेशन के लिए अलग से भुगतान करना होगा। जुकरबर्ग ने अपने पोस्ट में कहा कि वेब पर हर महीने 11.99 डॉलर यानी करीब 1,000 रुपये खर्च होंगे। इसी तरह iOS यूजर्स को 14.99 डॉलर चुकाने होंगे जो कि 240 रुपये ज्यादा है।
दी गई जानकारी के अनुसार यह सर्विस इसी हफ्ते से शुरू हो जाएगी। जुकरबर्ग के मुताबिक यह सब्सक्रिप्शन आधारित सर्विस है। इसमें ब्लू वेरिफ़्केशन बैज मिलेगा। साथ ही पहले से बेहतर सुरक्षा मिलेगी। साथ ही कस्टमर केयर पर भी सीधी पहुंच भी उपलब्ध होगी। शुरुआत में इसे ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में लॉन्च किया जा रहा है। इसे जल्द ही अन्य देशों में लॉंच किया जाएगा।
मार्क के इस बयान के बाद अब हर यूजर इस नए सब्सक्रिप्शन से इंस्टाग्राम और फेसबुक दोनों पर ब्लू टिक प्राप्त कर सकेंगे। हालाँकि अभी तक यह सुविधा केवल लोकप्रिय या प्रसिद्ध लोगों जैसे राजनेताओं, अभिनेताओं, पत्रकारों या सरकारी अधिकारियों के लिए ही थी ।
Indian Cricket: BCCI पर फिर सुप्रीम कोर्ट की नजर, Sports Governance Act के दायरे में आने पर मांगा जवाब
Supreme Court on BCCI: भारतीय क्रिकेट के प्रशासन को लेकर एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में बड़ा मामला सामने आया है। शीर्ष अदालत ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और राज्य क्रिकेट संघों से पूछा है कि उन्हें National Sports Governance Act, 2025 के दायरे से बाहर क्यों रखा जाना चाहिए। कोर्ट ने यह सवाल ऐसे समय में उठाया है, जब नया कानून लागू हो चुका है और देश में खेल संस्थाओं के प्रशासन को लेकर न्यायिक निगरानी बढ़ी है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने मंगलवार को इस मामले की सुनवाई की। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने BCCI और राज्य क्रिकेट संघों के वकीलों से इस संबंध में अपने पक्ष पर निर्देश लेने को कहा।
सुप्रीम कोर्ट ने खास तौर पर यह भी पूछा कि BCCI और राज्य क्रिकेट संघों के पदाधिकारियों की सेवा से जुड़े नियम और शर्तें 2025 के कानून के तहत क्यों नहीं आनी चाहिए। अदालत के इस सवाल के बाद भारतीय क्रिकेट के प्रशासनिक ढांचे की एक बार फिर न्यायिक समीक्षा की संभावना बढ़ गई है।
BCCI से जुड़ा यह मामला नया नहीं है। सुप्रीम कोर्ट वर्ष 2014 से बोर्ड के कामकाज और प्रशासन से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई करता आ रहा है। इसी मामले के चलते भारतीय क्रिकेट में कई बड़े प्रशासनिक बदलाव हुए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता में एक समिति बनाई थी। समिति को BCCI में सुधारों की सिफारिश करने और क्रिकेट बोर्ड के लिए नया संविधान तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी। बाद में अदालत ने समिति की सिफारिशों को स्वीकार किया, जिसके बाद BCCI की संगठनात्मक संरचना और कामकाज में कई बदलाव किए गए।
पदाधिकारियों के कार्यकाल को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट ने अहम बदलाव किए थे। सितंबर 2022 में अदालत ने BCCI के संविधान में संशोधन को मंजूरी दी थी। इसके तहत कोई पदाधिकारी राज्य क्रिकेट संघ में 6 और BCCI में 6 साल, यानी लगातार कुल 12 साल तक पद पर रह सकता है। इसके बाद तीन साल का कूलिंग-ऑफ पीरियड लागू होता है।
अदालत ने राज्य संघ और BCCI, दोनों स्तरों पर एक ही पद पर लगातार दो कार्यकाल की अनुमति भी दी थी। इसके बाद तीन साल का कूलिंग-ऑफ पीरियड रखा गया। इससे पहले के BCCI संविधान में किसी राज्य संघ या BCCI में लगातार दो तीन-वर्षीय कार्यकाल पूरे करने के बाद तीन साल का ब्रेक अनिवार्य था।
अब National Sports Governance Act, 2025 को लेकर सुप्रीम कोर्ट के ताजा सवालों ने BCCI के प्रशासन पर बहस फिर तेज कर दी है। आने वाली सुनवाई में यह साफ हो सकता है कि भारतीय क्रिकेट का मौजूदा प्रशासनिक ढांचा नए कानून के तहत किस तरह प्रभावित होगा।
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