इंडोनेशिय पांच ओरंगुटान को वापस लाने के लिए भारतीय अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहा
इंडोनेशिय पांच ओरंगुटान को वापस लाने के लिए भारतीय अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहाभारत के लिए क्या खुलेगा होर्मुज? ईरानी राष्ट्रपति ने रखी शर्त, अमेरिकी बर्ताव को लेकर उठाए सवाल
भारत के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता खुलेगा या नहीं? इस पर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अपना मत साफ कर दिया है. उन्होंने कहा कि जलमार्ग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित सिंद्धातों के तहत खोला जाएगा, मगर इसके लिए अमेरिका को अपनी नाकेबंदी और शत्रुतापूर्ण गतिविधियों को बंद करना होगा. इंडिया टुडे से बातचीत में उन्होंने कहा कि ओमान के साथ एक खास समुद्री व्यवस्था पर बातचीत जारी है. आगे अरब देशों के विदेश मंत्री भी ओमान के साथ बैठक करने वाले हैं. इस तरह से समझौता की सूरत बन सकेगी.
जहाजों की सुरक्षा तय की जाएगी
राष्ट्रपति ने कहा कि समझौते के बाद राष्ट्रीय समुद्री संगठन यानी आईएमओ इस हालात का ऐलान करेगा. उनसे पूछा गया कि क्या पीएम मोदी को यह भरोसा दिया गया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले भारतीय नाविकों और जहाजों की सुरक्षा तय की जाएगी. इसके कारण भारत को बड़े ऊर्जा संकट का सामना कर पड़ रहा है. इसके साथ राष्ट्रपति ट्रंप 'स्ट्रेट ऑफ ट्रंप' नाम देने की बात के साथ हूतियों, हिज्बुल्लाह और हमास की सहायता पर सवाल किया गया.
सभी समूह अपना बचाव करने में लगे
इसके जवाब में ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि न तो हिज्बुल्लाह ने और न ही ईरान ने इसकी शुरुआत की. उनके मुताबिक ये सभी समूह अपना बचाव करने में लगे हं. इन पर पहले हमला किसने किया. यह देखना चाहिए. उन्होंने कहा कि दुश्मन हमला कर रहे हैं. क्षेत्र पर वार हो रहे हैं. रास्ते बंद हो रहे हैं और फिर उम्मीद करते हैं कि ईरान कुछ न करे.
गरीबी और असंतोष पैदा करना है
राष्ट्रपति ने कहा, अगर हम जीवित हैं तो हमें जवाब देना होगा. इसलिए हम जीवित हैं और जवाब देंगे. उन्होंने साथ ही कहा कि अगर अमेरिका नाकेबंदी और प्रतिबंध को खत्म करता है तो हालात बदल सकते हैं. उनके मुताबिक प्रतिबंधों का अर्थ मरीजों को मारना नहीं, लोगों को बेरोजगार करना, गरीबी और असंतोष पैदा करना है. अमेरिका को लेकर उन्होंने कहा कि अगर वह युद्ध करना चाहे तो उसे सैन्य कर्मियों से युद्ध करना चाहिए, आम नागरिकों को टारगेट नहीं करना चाहिए. उन्होंने कहा कि अब जब अमेरिका युद्ध के माध्यम से अपना लक्ष्य हासिल नहीं कर पाया तो वह आर्थिक गतिविधियों के माध्यम से ऐसा करने का प्रयास कर रहा है. उसमें भी असफल होगा. उनके अनुसार, ब्रिक्स ऐसा मंच है जो बंद रास्ते को खोलने में सक्षम है. व्यापार के साथ आपसी संपर्क को बढ़ावा दे सकता है.
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