Akash Anand और ईशान को नहीं मिलेगा पद, मायावती ने BSP में लिया कड़ा संकल्प, सिर्फ भतीजी दीपिका आनंद को ही एंट्री का हक
बहुजन समाज पार्टी (BSP) की प्रमुख मायावती ने एक बड़ा फ़ैसला लिया है। उन्होंने कहा है कि उनके दोनों भतीजों, आकाश और ईशान, को पार्टी में कोई राजनीतिक पद नहीं दिया जाएगा। भविष्य में भी उनके बच्चों को कोई पद नहीं दिया जाएगा। अगर उनके भाई आनंद कुमार को मदद के लिए पार्टी के किसी सदस्य की ज़रूरत पड़ती है, तो वह अपनी इकलौती बेटी दीपिका आनंद की मदद ले सकते हैं। दीपिका अभी लॉ की पढ़ाई कर रही हैं। भविष्य में उनकी ईमानदारी, लगन और काबिलियत के आधार पर उन्हें पार्टी में कोई ज़िम्मेदारी दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि कांशी राम की तरह वह भी परिवारवाद की राजनीति का कड़ा विरोध करती रहेंगी।
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उन्होंने आगे कहा कि इस क्रम में, सड़क, बिजली पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य सम्बंधी लोगों की अहम ज़रूरतों के साथ ही सरकारी नौकरी, रोज़गार, स्कूल, अस्पताल, शहरी व ग्रामीण विकास आदि के साथ ही ’जेन-जी’ व ’जेन-अल्फा’ की भी बुनियादी ज़रूरतों पर मज़बूत इच्छाशक्ति के साथ कार्य किया गया और जिस क्रम में अनेकों स्कूल, कालेज, यूनिवर्सिटी, छात्रावास, ट्रेनिंग सेन्टर व पार्क आदि की स्थापना की गयी और इन प्रयासों के कारण लोगों का मजबूरी का पलायन होना भी काफी रूका हैै, जिससे कोई इंकार नहीं कर सकता है, किन्तु विरोधी पार्टियों के घोर जातिवादी रवैयों के कारण बी.एस.पी. की सरकार सन 2012 में पाँचवी बार यहाँ सत्ता में नहीं आ सकी, जिसका पछतावा सर्वसमाज के लोगों को अभी तक भी है, क्योंकि बी.एस.पी. सरकार के जाने के बाद से यहाँ पूरे प्रदेश में क़ानून द्वारा क़ानून का राज कायम नहीं होने से लोगों का जीवन दुखी ही नहीं बल्कि काफी त्रस्त भी बना हुआ है तथा विकास का सरकारी ढिंढोरा लोगों का पेट भी सही से नहीं भर पा रहा है।
बसपा प्रमुख ने कहा कि ऐसे में पार्टी के लोगों को फिर से यह कहना है कि वे बीएसपी का उम्मीदवार चुनते समय सर्वसमाज के अच्छे लोगों को ही चुनें तथा युवा वर्ग को भी प्राथमिकता दें जिसमें महिला व पुरुष दोनों होने चाहिये, तो यह उचित होगा। इसके साथ ही, यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि बी.एस.पी. द्वारा परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के आत्म-सम्मान व स्वाभिमान के जिस कारवाँ को लगातार मज़बूत करने व आगे बढ़ाकर सत्ता की मास्टर चाबी प्राप्त करके ’अपना उद्धार स्वंय करने योग्य’ बनाने के मिशन की बात है तो इसकी सफलता हेतु किसी का भी रोड़ा बनना मुझे कतई भी स्वीकार नहीं है अर्थात मुझे केवल अपने ’बहुजन समाज परिवार’ के हित, कल्याण व उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करने की ही रात-दिन चिन्ता रहती है, अपने किसी भी सगे भाई-बहन व उनके परिवार के युवा सदस्यों, तथा नज़दीकी रिश्ते-नातों आदि को भी मान्यवर श्री कांशीराम जी की तरह मैंने भी, उन्हें पार्टी के कार्यों तक सीमित करके उन्हें सांसदी, विधायकी, मंत्री पद व अन्य किसी भी राजनैतिक लाभ आदि के पदों से हमेशा दूर रखा है।
उन्होंने कहा कि इतना ही नहीं बल्कि मेरे अविवाहित होने के नाते मुझे मजबूरी में, अपने सभी सगे भाई-बहनों में से किसी एक को और अन्ततः सबसे छोटे भाई श्री आनन्द कुमार को अपने साथ रखने की भी ज़रूरत पड़ी है जो यह मेरी देखभाल करने के साथ-साथ मेरी पूरी निगरानी में पार्टी की अहम ज़िम्मेदारियों को भी काफी लम्बे समय से निभा रहे हैं, लेकिन इसका लाभ अब उनके परिवार के लोग भी उठायें तो यह पार्टी व मूवमेन्ट के हित में सही नहीं होगा। इसीलिए आज मेरा अन्तिम यही फैसला व प्रतिज्ञा भी है कि इसके एवज में, अब इनके ख़ासकर किसी भी बेटे को बी.एस.पी. में किसी भी छोटे-बड़े पद पर बने रहकर राजनीति करने का मौका नहीं दिया जायेगा। यदि आगे चलकर मेरे साथ रहते हुये श्री आनन्द कुमार को मेरी मदद के लिए किसी और सदस्य की भी ज़रूरत पड़ती है तो फिर वह वर्तमान राजनैतिक हालात में केवल अपनी इकलौती बेटी कुमारी दीपिका आनन्द को, जो इस समय वकालत की पढ़ाई कर रही है, उसे आगे चलकर उसकी मदद ले सकते हैं और फिर उसकी ईमानदारी, वफादारी व कार्य क्षमता आदि को देखकर पार्टी में उसे ज़रूरतानुसार अपनी ख़ुद की ज़िम्मेवारी भी सौंप सकते हैं।
उन्होंने कहा कि लेकिन वे अपने दोनों बेटों को व आगे चलकर उनके युवा बच्चो में से किसी को भी अपनी यह ज़िम्मेवारी नहीं सौपेंगे। साथ ही, यह भी कहना है कि अपनी बेटी के तैयार नहीं होने पर फिर वे पार्टी की आम सहमति से केवल पार्टी के दलित वर्ग में से ही अन्य किसी मिशनरी कार्यकर्ता को भी अपनी यह ज़िम्मेवारी सौंप सकते हैं अर्थात् अपने किसी भी बेटे को व उनके बच्चों के बड़े होने पर उन्हें भी यह ज़िम्मेवारी नहीं सौंपेंगे। यही वर्तमान में समय की जरुरत है व पार्टी के हित में भी है। ताकि मान्यवर श्री कांशीराम जी जिस प्रकार से ’परिवारवाद’ आदि के विरुद्ध कायम रहे, उनकी शिष्या होने के नाते मैं भी उसी प्रकार से पूरी तरह डटी हूँ , और जैसाकि मैंने काफी कुछ इस पर अमल करके भी दिखाया है और यदि मैं लड़की नहीं होती, तो मैं फिर मान्यवर श्री कांशीराम जी की तरह ही अपने भाई-बहिनों आदि में से किसी को भी अपने साथ नहीं रखती। लेकिन मैं लड़की होने की वजह से अपनी सुरक्षा सम्बन्धी, हर परेशानी से मुक्त होकर व पूरे मान-सम्मान के साथ पार्टी में आगे बढ़ती रहूँ तभी मुझे अपने सबसे छोटे भाई श्री आनन्द कुमार को मजबूरी में अपने साथ रखना पड़ा है। और अब इनके बच्चों के बड़े व शादीशुदा होने पर काफी कुछ मुझे भी झेलना पड़ रहा है, लेकिन फिर भी मैं किसी के भी मोह आदि के चक्कर में ना पड़कर पार्टी को कोई भी नुकसान नहीं पहुचने दूँगी।
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उन्होंने कहा कि इसी प्रकार पार्टी संगठन में व आगे सरकार बनने पर भी, चाहे वह कोई भी हो, केवल सम्बन्धित उसी एक व्यक्ति को ही मौक़ा दिया जायेगा, लेकिन उसकी आड़ में उसके परिवार के अन्य किसी भी सदस्य को कोई भी लाभ आदि नहीं दिया जायेगा, ताकि बी.एस.पी. अब आगे परिवारवाद से मुक्त रहे तथा सर्वसमाज में से ज़्यादा से ज़्यादा लोग ’सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक मुक्ति’ आन्दोलन के सहभागी बन सकें, जो कि अम्बेडकरवादी राजनीति के लिये बहुत ज़रूरी है। इसके साथ ही बी.एस.पी. के लोगों से यह भी कहना है कि वे बी.एस.पी. विरोधी पार्टियों/संगठनों तथा जातिवादी मीडिया व सोशल मीडिया आदि के भी विषैले एवं साज़िशी तथा प्रायोजित व पेड paid प्रोपेगण्डा आदि से ज़रूर सावधान रहें क्योंकि इनका मक़सद केवल साम, दाम, दण्ड, भेद आदि सभी प्रकार के घिनौने हथकण्डे अपनाकर बी.एस.पी. को यूपी में सरकार बनाने से रोकना है, जिसे किसी भी हाल में सफल नहीं होने देना है और इन्हें पूरे तन, मन, धन से लगातार अपने अम्बेडकरवादी मिशन में लगे रहना है, इसी में ही सबकी भलाई है यानी कि व्यापक देश व जनहित निहित है।
उन्होंने कहा कि अन्त में यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया आदि में यह भी प्रचारित किया जा रहा है कि अनुशासनहीनता अपनाने व पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने आदि के कारण बी.एस.पी से निष्कासित लोगों को वापस लिया जायेगा, यह पूरी तरह से ग़लत एवं मिथ्या प्रचार है यानी कि यह फेक न्यूज़ है अर्थात ऐसे लोगों को बी.एस.पी में कतई भी वापस नहीं लियाा जायेगा।
सूरत, बेंगलुरु के बाद प्रतापगढ़ में हॉस्टल की शिकायत:कच्ची और जली रोटी मिलती है, हॉस्टल में पोछा और बाथरूम साफ करने का काम भी हमारा
प्रतापगढ़ के अचलपुर स्थित राजकीय जनजातीय बालिका आश्रम छात्रावास की छात्राएं खराब प्रबंधन से इस तरह परेशान हुई कि जिला कलेक्टर से शिकायत करने पहुंच गईं। छात्राओं ने हॉस्टल में खराब खाने और साफ-सफाई से जुड़ी समस्याओं को लेकर शिकायत की। इस हॉस्टल में करीब 50 छात्राएं रहती हैं। इनमें से 15 छात्राएं पैदल चलकर कलेक्टर ऑफिस पहुंची और स्कूल से संबंधित शिकायतें की। छात्राओं का कहना है कि वार्डन बिस्किट का लालच देकर उनसे ही साफ-सफाई करवाती है। खाने की शिकायत करते हुए एक छात्रा ने कहा कि हमें जो रोटी मिलती है वो एक तरह से कच्ची और दूसरी तरफ से जली हुई होती हैं। छात्राओं से स्कूल में पोछा लगवाया जाता है और बाथरूम साफ करने का काम भी इन बच्चों को ही करना पड़ता है। छात्राओं ने बताया कि उन्हें समय पर और पर्याप्त भोजन नहीं मिलता है। सुबह के नाश्ते में सिर्फ पोहा दिया जाता है। शिकायत में छात्राओं ने कहा कि छात्रावास की जिम्मेदार मैडम नियमित रूप से मौजूद नहीं रहती हैं। वे सिर्फ भोजन के समय फोटो खिंचवाने के लिए आती हैं। उनकी तबियत खराब होने पर उनके परिवार को सूचना देने में भी परेशानी होती है। छात्राओं ने मैडम के समय पर छात्रावास नहीं पहुंचने का आरोप लगाते हुए उन्हें हटाने की मांग की है। सूरत के गर्ल्स हॉस्टल में रामधुन गाकर किया प्रदर्शन 1 सितंबर को हॉस्टल के खराब मैनेजमेंट से परेशान ऐसी ही छात्राओं ने सूरत में प्रदर्शन किया था। इस हॉस्टल का नाम सरकारी समरस गर्ल्स हॉस्टल है जहां छात्राओं ने 1 सितंबर की रात को विरोध प्रदर्शन किया। उनका ये प्रदर्शन खाने की खराब क्वालिटी, पानी की सप्लाई और रहने की खराब व्यवस्थाओं को लेकर था। छात्राओं ने "रामधुन" गाया और कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक विरोध जारी रहेगा। विरोध करने वाली एक छात्रा ने कहा - इस हॉस्टल के खाने में कीड़े और खराब पानी के अलावा भी कई समस्याएं हैं। ये विरोध हमारी मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा। हॉस्टल परिसर के आस-पास कैमरे लगाने की मांग अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की भावनगर जिला इकाई की अध्यक्ष दीपिका कचोट ने आरोप लगाया कि गर्ल्स हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं को अपने खाने में प्लास्टिक और सिगरेट के टुकड़े मिले हैं। उन्होंने कहा - पानी की क्वालिटी खराब है। नौ मंजिल के इस हॉस्टल में सिर्फ दो या तीन मंजिलों पर ही पानी मिलता है। ABVP अध्यक्ष ने यह भी कहा कि हॉस्टल परिसर के आस-पास CCTV कैमरे लगाने चाहिए। कॉलेज जाने के लिए हॉस्टल से बाहर निकलने पर छात्राओं को लड़कों की छेड़छाड़ का सामना करना पड़ता है। वार्डन के बुरे बर्ताव से परेशान छात्राएं एक छात्रा ने आरोप लगाया कि जब छात्राओं ने वार्डन से घर जाने की इजाजत मांगी, तो वार्डन ने उनके साथ बुरा बर्ताव किया। उन्होंने यह भी कहा कि खाने में कीड़े मिलने की उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। खराब पानी पीने से कई बार बीमार हुई छात्राएं इतना ही नहीं छात्राओं ने हॉस्टल के पानी को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। पहले भी छात्राओं ने कहा था कि पानी का रंग कई बार हरा दिखाई देता है। इस पानी को पीने से कई छात्राओं की तबियत खराब हो गई है। उन्होंने आगे बताया कि जब हॉस्टल में निरीक्षण के लिए अधिकारी आते हैं, तो अचानक सारी व्यवस्था सुधर जाती हैं। 1200 महिलाओं के लिए सिर्फ 1 घंटे आता है पानी हॉस्टल और मेस की साफ-सफाई को लेकर भी छात्राओं में नाराजगी है। पानी की सप्लाई यहां सिर्फ एक घंटे के लिए होती है। छह मंजिला इस हॉस्टल की तीन मंजिल तक भी पानी नहीं चढ़ता। फिलहाल यहां 1200 महिलाएं रहती है। हॉस्टल अथॉरिटी का कहना है कि एक घंटे जो पानी आता है, उसी दौरान महिलाएं नहा लें, अपने कपड़े वगैरह भी धो लें और उसी टाइम लिमिट के अंदर पानी स्टोर करके भी रखें। डिप्टी कलेक्टर ने छात्राओं को भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं का समाधान किया जाएगा। इसके बाद अगले दिन विरोध प्रदर्शन खत्म कर दिया गया। पिछले महीने बेंगलुरु में किया था छात्रों ने प्रदर्शन बेंगलुरु की दयानंद सागर यूनिवर्सिटी (DSU) के S-रेसिडेंसी गर्ल्स हॉस्टल में छात्राओं ने बुनियादी सुविधाओं को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन 26 और 31 अगस्त को हुआ। इस प्रदर्शन के दौरान छात्राओं ने करीब एक महीने से बंद वाई - फाई, सुबह के समय गर्म पानी की कमी, पीने के पानी की क्वालिटी, सफाई और मच्छरों की समस्या उठाई। इसके अलावा बिजली में उतार-चढ़ाव, लीक ओवरफ्लो होती पाइपलाइन, खराब लिफ्ट और खाली वेंडिंग मशीनों की शिकायत भी की। 26 अगस्त की रात को करीब 9:30 बजे छात्रों ने गर्म पानी की शिकायत को लेकर वार्डन से शिकायत की। करीब 300–350 लड़कियों ने विरोध प्रदर्शन किया। लड़कों ने अंडे और पटाखे भी फेंके छात्राओं का आरोप था कि उनकी सुविधाओं की शिकायतों के बजाय हॉस्टल के 9:30 बजे के एंट्री टाइम के बाद बाहर रहने पर ज्यादा जोर दिया गया। प्रदर्शन के दौरान पास के बॉयज हॉस्टल से कुछ लड़कों ने अंडे और पटाखे भी फेंके। छात्रों को कुछ समस्याएं 30 अगस्त तक दूर करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन छात्रों का कहना है कि पर्याप्त सुधार नहीं हुआ। इसके बाद 31 अगस्त को दोबारा प्रदर्शन हुआ, जिसमें लड़के और लड़कियां दोनों शामिल हुए। छात्रों की मांग है कि उन्हें हॉस्टल में बेहतर सुविधाएं, सही मैनेजमेंट और रहने का अच्छा माहौल मिले। हॉस्टल नियमों को लेकर भी सवाल छात्राओं ने सुविधाओं के साथ-साथ लड़के और लड़कियों के हॉस्टल के अलग-अलग नियमों पर भी सवाल उठाए। यहां लड़कियों के लिए 9:30 बजे और लड़कों के लिए 10 बजे की एंट्री सीमा तय की गई है। छात्राएं बाहर का खाना और इलेक्ट्रिक केतली जैसे नियमों को लेकर भी नाखुश हैं। ये खबर भी पढ़ें इंडियन आर्मी में अग्निवीर रैली के लिए टैटू पॉलिसी जारी:ट्राइबल कम्युनिटी और धार्मिक टैटू बनवा सकते हैं, ये 6 तरह के टैटू प्रतिबंधित इंडियन आर्मी ने अग्निवीर रैली के लिए टैटू पॉलिसी जारी की है। इसमें बताया गया है कि शरीर पर कहां टैटू बनवाया जा सकता है और कहां नहीं। अग्निवीर भर्ती में शारीरिक गतिविधियों के साथ उम्मीदवारों के पूरे शरीर की जांच की जाती है। साथ में शरीर पर टैटू भी देखा जाता है क्योंकि सेना में टैटू को लेकर कड़े नियम तय किए गए हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें
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