PM Modi चीन से लद्दाख और गलवान की जमीन वापस लें, Sanjay Raut ने की मांग
शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की है कि वे चीन के नेताओं पर दबाव डालें कि वे लद्दाख और गलवान के उन इलाकों से पीछे हटें जहां भारत ने घुसपैठ का आरोप लगाया है, और भारत की ज़मीन वापस करें। 12 सितंबर को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए, राउत ने कहा कि पिछले दो सालों में भारत और चीन के बीच बातचीत के 25 दौर हो चुके हैं, लेकिन उन्होंने दोनों देशों के रिश्तों में हुई प्रगति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी को भारत आ रहे चीन के राष्ट्रपति से साफ़ तौर पर कहना चाहिए कि वे सबसे पहले लद्दाख और गलवान के उन इलाकों से पीछे हटें जहां उन्होंने घुसपैठ की है, और हमारी ज़मीन हमें वापस करें।
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उन्होंने आगे कहा कि पिछले दो सालों में चीन के साथ बातचीत के 25 दौर हो चुके हैं – फिर भी रिश्तों में क्या सुधार हुआ है? दूसरी ओर, ईरान के राष्ट्रपति का दौरा बहुत अहम है। मैंने देखा कि ईरान के राष्ट्रपति शेर की तरह दिल्ली पहुंचे... ईरान ने इज़राइल और अमेरिका के सामने अपनी ताकत, जज़्बे और आत्म-सम्मान का प्रदर्शन किया है... बाकी सब तो बस व्यापारी हैं – चीन एक व्यापारी है, और अमेरिका भी एक व्यापारी है।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए 12 सितंबर को नई दिल्ली पहुंचे और उसी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी मुलाकात होनी है। पहुंचने पर शी का गर्मजोशी से स्वागत किया गया, जिसमें पूर्वोत्तर और भारत के अन्य राज्यों के समूहों द्वारा शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुतियां भी शामिल थीं। चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार, शी के साथ आए प्रतिनिधिमंडल में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के पोलित ब्यूरो की स्थायी समिति के सदस्य और सीपीसी केंद्रीय समिति के सामान्य कार्यालय के निदेशक काई ची, और साथ ही चीनी विदेश मंत्री तथा सीपीसी केंद्रीय समिति के पोलित ब्यूरो के सदस्य वांग यी शामिल हैं।
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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए आर्थिक नीतियों में तालमेल बिठाने और वैश्विक शासन पर एक साझा रुख रखने का मंच है। यह विकास, वित्त, तकनीक, व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर ध्यान केंद्रित करते हुए, बहुपक्षीय संस्थाओं में 'ग्लोबल साउथ' के हितों को आगे बढ़ाने का काम करता है। यह समूह दुनिया भर की उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बढ़ते आर्थिक प्रभाव और उनकी महत्वाकांक्षाओं को दर्शाता है, जिससे सदस्य अपने अनुभव साझा कर सकते हैं और मिलकर चुनौतियों का सामना कर सकते हैं।
BRICS के जरिए भारत का ऐतिहासिक कूटनीतिक दर्जा बहाल करे मोदी सरकार, Congress ने दी सलाह
कांग्रेस ने ब्रिक्स को ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं को आगे बढ़ाने और वैश्विक स्थिति को आकार देने वाला महत्वपूर्ण मंच बताते हुए शनिवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा उनकी सरकार को भारत का ऐतिहासिक कूटनीतिक दर्जा बहाल करने का प्रयास करना चाहिए। ‘ग्लोबल साउथ’ से तात्पर्य उन देशों से है जिन्हें अक्सर विकासशील, कम विकसित अथवा अविकसित के रूप में जाना जाता है और ये मुख्य रूप से अफ्रीका, एशिया और लातिन अमेरिका में स्थित हैं।
पार्टी के विदेश विभाग के प्रमुख सलमान खुर्शीद ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर एक बयान में कहा कि भू-राजनीतिक टकराव, आर्थिक दबाव, आपूर्ति श्रृंखला की कमजोरियों, संघर्ष और जलवायु संकट के दौर में भारत को ब्रिक्स साझेदारों के साथ मिलकर एक न्यायसंगत और संतुलित विश्व व्यवस्था के निर्माण के लिए काम करना चाहिए, जो सभी लोगों के लिए सुरक्षा, समृद्धि और गरिमा सुनिश्चित कर सके। पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद ने कहा कि भारत को ब्रिक्स में नैतिक नेतृत्व और रणनीतिक स्पष्टता प्रदान करनी चाहिए तथा साथ ही अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने
इस बात पर जोर दिया कि, भारत को नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, संप्रभु समानता, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और मानवीय गरिमा के सिद्धांतों को आगे बढ़ाते हुए अपने रणनीतिक और आर्थिक उत्थान पर भी ध्यान देना चाहिए। कांग्रेस नेता ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा सरकार को भारत की ऐतिहासिक कूटनीतिक भूमिका और दर्जे को बहाल करने के लिए विशेष कदम उठाने चाहिए।’’ कांग्रेस नेता के अनुसार, भारत को ग्लोबल साउथ के साझेदारों के बीच विश्वास फिर से कायम करने के लिए यह दिखाना होगा कि संकट के समय भी वह एक विश्वसनीय और मजबूत साझेदार है। खुर्शीद ने कहा कि ब्रिक्स देशों की वैश्विक वस्तु व्यापार में हिस्सेदारी 19.6 प्रतिशत है, लेकिन भारत के ब्रिक्स देशों के साथ व्यापारिक संबंध अभी भी ‘‘काफी असंतुलित’’ हैं।
उन्होंने सरकार से भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का इस्तेमाल भारतीय वस्तुओं और सेवाओं के लिए अधिक बाजार पहुंच सुनिश्चित करने तथा शुल्क और बाजार संबंधी अन्य बाधाओं को दूर करने, के लिए करने की मांग की। उन्होंने ब्रिक्स पे सिस्टम से जुड़े प्रयासों का स्वागत करते हुए कहा कि भारतीय कंपनियों के लिए ब्रिक्स देशों में प्रतिस्पर्धा और विस्तार की निष्पक्ष एवं पूर्वानुमेय परिस्थितियां सुनिश्चित की जानी चाहिए। साथ ही आपूर्ति श्रृंखलाओं की सुरक्षा और समावेशी संपर्क व्यवस्था पर सहमति बनाने की दिशा में प्रयास होने चाहिए। खुर्शीद ने आकस्मिक रिजर्व व्यवस्था (सीआरए) को भी सक्रिय करने की मांग की।
यह व्यवस्था 2014 में स्थापित की गई थी और इसमें भारत ने 18 अरब अमेरिकी डॉलर देने की प्रतिबद्धता जताई थी। खुर्शीद ने कहा कि 2021 में भारत की अध्यक्षता में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में किए गए वादों को भी ठोस तरीके से आगे बढ़ाया जाना चाहिए। इनमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी के लिए मजबूत समर्थन हासिल करना शामिल है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हुई चर्चा और अंतिम रूप दिए गए निर्णयों के बारे में देश को अवगत कराने के लिए एक संवाददाता सम्मेलन करेंगे।
कांग्रेस नेता ने कहा कि 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का इस्तेमाल सदस्य देशों के बीच एकजुटता मजबूत करने के लिए किया जाना चाहिए, लेकिन इसे गुटीय राजनीति का मंच नहीं बनने देना चाहिए। खुर्शीद ने कहा कि भारत को यह प्रदर्शित करना चाहिए कि वह अपने हितों को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त रूप से मजबूत है, अधिक न्यायपूर्ण विश्व व्यवस्था की मांग करने वालों के साथ खड़े होने के लिए सिद्धांतवादी है और ग्लोबल साउथ तथा ग्लोबल नॉर्थ के बीच एक विश्वसनीय सेतु की भूमिका निभाने के लिए पर्याप्त भरोसेमंद है।
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