दिल्ली में BRICS Summit का असर: आज बंद रहेंगे सभी स्कूल और कई सरकारी दफ्तर
BRICS Summit 2026: आज 11 सितंबर 2026 और दिन शुक्रवार है. दिल्ली में आयोजित होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit) में शामिल होने के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पालम एयरपोर्ट पहुंच चुके हैं. मेहमानों और विदेशी प्रतिनिधिमंडलों की सुरक्षा और सुगम आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए आज (11 सितंबर) दिल्ली के सभी स्कूल और कई सरकारी दफ्तर बंद रखे गए हैं.
दूसरी ओर अमेरिका में आगामी मिडटर्म चुनावों को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है. पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वादा किया है कि अगर रिपब्लिकन पार्टी संसद (कांग्रेस) में बहुमत बनाए रखती है, तो वे प्रत्येक अमेरिकी वयस्क को $5,000 (लगभग ₹4.2 लाख) देंगे. उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके जीतने के तुरंत बाद ईरान के साथ चल रहा तनाव खत्म हो जाएगा.
इसके साथ ही आज देश भर के 18 राज्यों के लिए भारी बारिश और आंधी-तूफान का अलर्ट जारी किया गया है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने कहा है कि आने वाले कुछ घंटों में घने बादल छाएंगे और उसके बाद ज़ोरदार बारिश होगी. विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए लोगों को सलाह दी है कि वे घर से निकलने से पहले मौसम का हाल जान लें और जरूरी सावधानी बरतें. IMD के अनुसार, कई राज्यों में बारिश के साथ 60 किमी/घंटा की रफ़्तार से तेज हवाएं भी चल सकती हैं. मौसम की इस खराब स्थिति का असर किसानों पर भी पड़ सकता है. मौसम विभाग ने दिल्ली, यूपी, बिहार, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब, गुजरात, जम्मू-कश्मीर, असम, छत्तीसगढ़ और अरुणाचल प्रदेश के लिए भारी बारिश की चेतावनी जारी की है.
ईरान पर इजरायल का अब तक का सबसे बड़ा हमला, उड़ा दी सबसे बड़ी चौकी, PM नेतन्याहू ने दी जानकारी
Israel Iran War: ईरान अभी तक अमेरिका से सीधी लड़ाई लड़ रहा था. कई दिनों से इजरायल शांत था. अब इजरायल भी लड़ाई में कूद गया है. इजरायल ने ईरान की सबसे बड़ी चौकी को नष्ट कर दिया है. खुद इजरायली पीएम नेतन्याहू ने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी दी. लेबनान इलाके में ईरान की सबसे बड़ी चौकी को इजरायल ने नष्ट करने का दावा किया है.
इजरायली पीएम नेतन्याहू ने एक्स पर एक हमले की वीडियो पोस्ट की है. साथ ही पोस्ट में लिखा कि आज रात हमने ईरान के बाहर ईरान की सबसे बड़ी चौकी लेबनान में अली ताहेर सुरंगों को नष्ट कर दिया. आगे नेतन्याहू ने लिखा कि मिशन पूरा हुआ. नया साल मुबारक हो. यह सुरंग ईरान के लिए बेहद खास थी. हालांकि यह लेबनान के इलाके में थी, लेकिन इसे ईरान की सबसे बड़ी चौकी माना जाता था. इजरायल के इस हमले के बाद अब संघर्ष और तेज होने की आशंका है.
השמדנו הלילה את המוצב האיראני הגדול ביותר מחוץ לאיראן - מנהרות עלי טאהר בלבנון.
— Benjamin Netanyahu - בנימין נתניהו (@netanyahu) September 10, 2026
משלימים את המשימה. שנה טובה! pic.twitter.com/xbDGu7Fhyf
कमांड सेंटर और हथियारों का भंडार थी टनल
इजरायली सीमा से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित अली अल-ताहेर पर्वतमाला इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष का एक अहम और विवादित इलाका बन गई है. जुलाई में रॉयटर्स से बात करने वाले लेबनानी सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक, हिजबुल्लाह ने यहां जमीन के नीचे एक कमांड सेंटर और हथियारों का भंडार बनाया हुआ है.
लेबनान की सरकारी समाचार एजेंसी एनएनए के अनुसार, इजरायली सेना ने इस पहाड़ी पर एक बड़ा विस्फोट किया. विस्फोट की आवाज और उसके झटके नबातीह और आसपास के इलाकों में भी महसूस किए गए. इजरायली सेना ने बताया कि पहाड़ी पर बने ढांचे को नष्ट करने से पहले उसकी सेना ने पहाड़ी के ऊपर और जमीन के नीचे बने हिस्सों पर अपना कंट्रोल कर लिया था. सेना के मुताबिक, यह भूमिगत नेटवर्क 2 किलोमीटर से ज्यादा लंबा था. इसमें दर्जनों रॉकेट, मिसाइल और ड्रोन के अलावा टैंक रोधी मिसाइलें, बारूदी सुरंगें और विस्फोटक भी रखे गए थे. इजरायली सेना ने बताया कि हिजबुल्लाह की बदर यूनिट का एक मुख्य कमान केंद्र जमीन के नीचे बने परिसर में था. इस परिसर में कमान केंद्र, हथियार रखने की जगह और रहने के कमरे थे. इसकी मदद से लड़ाके लंबे समय तक जमीन के नीचे रह सकते थे.
कई ठिकानों पर कब्जा कर चुका है इजरायल
2 मार्च को संघर्ष शुरू होने के बाद से इजरायली सेना दक्षिणी लेबनान में घुस चुकी है और कई अहम रणनीतिक ठिकानों पर कब्जा कर चुकी है. यह पर्वत श्रृंखला इजरायली सेना के प्रमुख ठिकानों में से एक रही है. यह दक्षिणी लेबनान में इजरायल की ओर से बनाए गए विस्तारित बफर जोन के अंदर स्थित है.
जून में हुआ था सीजफायर
जून में हुए युद्धविराम के बाद अमेरिका की मध्यस्थता में हुए समझौते के तहत इजरायली सेना को धीरे-धीरे दक्षिणी लेबनान से पीछे हटना था. वहीं, लेबनानी सेना को हिजबुल्लाह को हथियार छोड़ने के लिए मजबूर करना था. हालांकि, यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी है. हिजबुल्लाह ने अपने हथियार छोड़ने से इनकार कर दिया है, जबकि इजरायल का कहना है कि जब तक हिजबुल्लाह को निरस्त्र नहीं किया जाता, तब तक उसकी सेना दक्षिणी लेबनान से पीछे नहीं हटेगी.
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