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जालंधर विधानसभा का इतिहास, 9 सीटों में कैसे बंटा सियासी मैदान?

पंजाब की राजनीति में जालंधर का स्थान बेहद महत्वपूर्ण है. दोआबा क्षेत्र का यह जिला न सिर्फ उद्योग, कारोबार और प्रवासी भारतीयों से जुड़े संबंधों के लिए जाना जाता है, बल्कि चुनावी लिहाज से भी काफी अहम है. जालंधर जिले में एक लोकसभा और नौ विधानसभा सीटें हैं. इनमें ग्रामीण और शहरी इलाकों का अलग-अलग राजनीतिक मिजाज दिखाई देता है. अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीटों की संख्या भी यहां महत्वपूर्ण है.

जालंधर जिले की मौजूदा विधानसभा संरचना परिसीमन के बाद तय हुई. जिला प्रशासन के अनुसार यहां विधानसभा की नौ सीटें हैं फिल्लौर, नकोदर, शाहकोट, करतारपुर, जालंधर वेस्ट, जालंधर सेंट्रल, जालंधर नॉर्थ, जालंधर कैंट और आदमपुर.

जालंधर विधानसभा का इतिहास समझना क्यों जरूरी?

जालंधर का चुनावी इतिहास काफी उतार-चढ़ाव वाला रहा है. एक समय जिले की राजनीति में कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल का मजबूत प्रभाव रहा, लेकिन 2022 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने भी कई सीटों पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई.

2008 के परिसीमन के बाद विधानसभा क्षेत्रों की मौजूदा सीमाएं और आरक्षण व्यवस्था अस्तित्व में आई. वर्तमान व्यवस्था में जालंधर की चार सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं फिल्लौर, करतारपुर, जालंधर वेस्ट और आदमपुर.

दोआबा क्षेत्र में अनुसूचित जाति की बड़ी आबादी होने के कारण इन सीटों का राजनीतिक महत्व और बढ़ जाता है. चुनावी विश्लेषण में जालंधर की आरक्षित सीटों को लंबे समय से निर्णायक माना जाता रहा है.

जालंधर की आबादी कितनी है?

2011 की जनगणना के मुताबिक जालंधर जिले की कुल आबादी 21,93,590 थी. इसमें पुरुषों की संख्या 11,45,211 और महिलाओं की संख्या 10,48,379 थी. यानी जिले में पुरुषों की हिस्सेदारी करीब 52.21 फीसदी और महिलाओं की करीब 47.79 फीसदी है.

जिले का लिंगानुपात 915 महिलाएं प्रति 1000 पुरुष है. कुल आबादी में 10.32 फीसदी यानी 2,26,302 लोग 0-6 वर्ष आयु वर्ग में थे. जालंधर की करीब 52.93 फीसदी आबादी शहरी और 47.07 फीसदी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती थी.

जालंधर की आबादी, लिंग के आधार पर

श्रेणी   

 आबादी

कुल आबादी   21,93,590
पुरुष    11,45,211
महिला    10,48,379
लिंगानुपात   915 महिलाएं/1000 पुरुष
ग्रामीण आबादी  10,32,419
शहरी आबादी   11,61,171

नोट: ये आंकड़े 2011 Census पर आधारित हैं

जालंधर की साक्षरता दर क्या है?

जालंधर की साक्षरता दर भी पंजाब के महत्वपूर्ण सामाजिक संकेतकों में शामिल है. 2011 के आंकड़ों के अनुसार जिले की प्रभावी साक्षरता दर 82.48 फीसदी थी. पुरुष साक्षरता दर 86.15 फीसदी और महिला साक्षरता दर 78.48 फीसदी थी.

यानी पुरुषों और महिलाओं की साक्षरता में करीब 7.67 प्रतिशत अंक का अंतर था. जिले में कुल 16,22,537 लोग साक्षर थे, जिनमें 8,82,581 पुरुष और 7,39,956 महिलाएं थीं.

जालंधर की साक्षरता दर, जेंडर वाइज

श्रेणी     साक्षरता दर
कुल     82.48%
पुरुष  86.15%
महिला     78.48%

 

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि साक्षरता दर निकालते समय 0-6 वर्ष के बच्चों को आधार आबादी से अलग किया जाता है. इसी वजह से कुछ वेबसाइटों पर कुल आबादी के मुकाबले साक्षर लोगों का प्रतिशत अलग दिखाई दे सकता है.

जालंधर की धार्मिक आबादी

जालंधर सामाजिक और धार्मिक रूप से विविध जिला है. 2011 की जनगणना के अनुसार यहां हिंदू आबादी सबसे अधिक है, जबकि सिख समुदाय भी जिले की आबादी का बड़ा हिस्सा है.

धार्मिक आंकड़ों के मुताबिक जिले में हिंदुओं की संख्या 13,94,329 यानी करीब 63.56 फीसदी है. सिख आबादी 7,18,363 यानी 32.75 फीसदी है. मुस्लिम आबादी 30,233 यानी 1.38 फीसदी और ईसाई आबादी 26,016 यानी 1.19 फीसदी है. बौद्ध, जैन, अन्य धर्मों और धर्म नहीं बताने वालों को मिलाकर शेष आबादी आती है.

धार्मिक संरचना में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों का अंतर भी दिखाई देता है. उदाहरण के लिए शाहकोट तहसील में सिख आबादी का अनुपात काफी अधिक है, जबकि जालंधर-I में हिंदू आबादी का अनुपात ज्यादा है.

जालंधर की सभी 9 विधानसभा सीटें

जालंधर जिले की नौ विधानसभा सीटें मौजूदा चुनावी नक्शे में 30 से 38 तक क्रमांकित हैं. इनमें चार सीटें SC आरक्षित हैं.

 

*जालंधर वेस्ट में 2024 में उपचुनाव हुआ, जिसमें AAP के मोहिंदर भगत ने जीत दर्ज की.

2022 में कैसा था जालंधर का चुनावी समीकरण?

2022 के विधानसभा चुनाव में जालंधर की नौ सीटों पर मुकाबला काफी दिलचस्प रहा. फिल्लौर, शाहकोट, जालंधर नॉर्थ, जालंधर कैंट और आदमपुर में कांग्रेस ने जीत दर्ज की. वहीं नकोदर, करतारपुर, जालंधर वेस्ट और जालंधर सेंट्रल पर आम आदमी पार्टी ने कब्जा किया. इस तरह 2022 में कांग्रेस को जिले की पांच और AAP को चार सीटें मिली थीं.

नकोदर में AAP की जीत बेहद करीबी रही, जबकि जालंधर सेंट्रल में भी मुकाबला सिर्फ कुछ सौ वोटों के अंतर से तय हुआ. इससे पता चलता है कि जिले की शहरी सीटों पर मुकाबला कितना कड़ा हो सकता है.

जालंधर वेस्ट में बदला सियासी समीकरण

जालंधर वेस्ट सीट ने 2024 में पूरे पंजाब का ध्यान खींचा. 2022 में AAP के शीतल अंगुराल यहां से विधायक बने थे, लेकिन मार्च 2024 में उन्होंने विधानसभा से इस्तीफा देकर बीजेपी का दामन थाम लिया. इसके बाद सीट पर उपचुनाव हुआ.

उपचुनाव में AAP के मोहिंदर भगत ने 55,246 वोट हासिल कर बीजेपी के शीतल अंगुराल को 37,325 वोटों के बड़े अंतर से हराया. कांग्रेस की सुरिंदर कौर तीसरे स्थान पर रहीं. इस नतीजे ने यह दिखाया कि जालंधर वेस्ट में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल सकते हैं.

SC वोट बैंक क्यों है जालंधर की राजनीति में अहम?

जालंधर की चार आरक्षित विधानसभा सीटें आदमपुर, करतारपुर, जालंधर वेस्ट और फिल्लौर राजनीतिक दलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं. दोआबा क्षेत्र में अनुसूचित जाति की आबादी का प्रभाव पंजाब की चुनावी राजनीति में खासा बड़ा माना जाता है.

2011 की जनगणना के अनुसार जालंधर जिले में अनुसूचित जाति की आबादी 8,54,444, यानी करीब 38.95 फीसदी थी. यही वजह है कि यहां SC वोटरों से जुड़े मुद्दे, सामाजिक प्रतिनिधित्व, रोजगार, शिक्षा और कल्याणकारी योजनाएं चुनावी रणनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं.

शहरी बनाम ग्रामीण सीटों का अलग मिजाज

जालंधर की राजनीति को मोटे तौर पर शहरी और ग्रामीण समीकरणों में भी समझा जा सकता है. जालंधर सेंट्रल, नॉर्थ, वेस्ट और कैंट जैसे क्षेत्रों में शहरी मुद्दे अधिक प्रभावी रहते हैं. रोजगार, कारोबार, ट्रैफिक, स्थानीय विकास, नगर सुविधाएं और औद्योगिक गतिविधियां यहां महत्वपूर्ण चुनावी मुद्दे बनते हैं.

दूसरी तरफ नकोदर, शाहकोट, फिल्लौर, करतारपुर और आदमपुर के बड़े हिस्से ग्रामीण हैं. यहां कृषि, ग्रामीण सड़कें, रोजगार, नशे की समस्या, सिंचाई और स्थानीय विकास जैसे मुद्दे ज्यादा प्रभाव डाल सकते हैं.

जालंधर का सियासी भविष्य किस ओर?

जालंधर की चुनावी तस्वीर को देखें तो यहां किसी एक दल के लिए स्थायी बढ़त का दावा करना आसान नहीं है. कांग्रेस की पुरानी संगठनात्मक पकड़, AAP का उभार, अकाली दल का ग्रामीण आधार और बीजेपी का शहरी क्षेत्रों में प्रभाव ये सभी मिलकर मुकाबले को बहुकोणीय बनाते हैं.

2024 के लोकसभा चुनाव में जालंधर लोकसभा क्षेत्र के सभी नौ विधानसभा सेगमेंट में कांग्रेस आगे रही थी, हालांकि अलग-अलग सीटों पर बीजेपी और AAP ने भी उल्लेखनीय वोट हासिल किए.

इसलिए आने वाले चुनावों में जालंधर की नौ विधानसभा सीटों पर शहरी बनाम ग्रामीण मुद्दे, SC वोट बैंक, कांग्रेस-AAP की सीधी टक्कर, अकाली दल का ग्रामीण प्रभाव और बीजेपी की शहरी पकड़ अहम भूमिका निभा सकती है.

जालंधर आर्थिक के साथ सियासी गढ़ 

जालंधर सिर्फ पंजाब का एक प्रमुख औद्योगिक शहर और दोआबा का महत्वपूर्ण जिला नहीं है, बल्कि राज्य की चुनावी राजनीति का भी अहम केंद्र है. 21.93 लाख की आबादी, 82.48 फीसदी साक्षरता, करीब 39 फीसदी SC आबादी और नौ विधानसभा सीटों वाला यह जिला कई सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को एक साथ समेटे हुए है.

2022 के चुनाव में कांग्रेस और AAP के बीच सीटों का मुकाबला, 2024 में जालंधर वेस्ट के उपचुनाव में AAP की बड़ी जीत और लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन बताते हैं कि यहां राजनीतिक जमीन लगातार बदल रही है. ऐसे में जालंधर की नौ सीटें पंजाब की अगली चुनावी कहानी में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं.

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  Sports

Women’s Asia Cup 2026: शेफाली वर्मा के तूफानी अर्धशतक से भारत फाइनल में, बांग्लादेश को 40 रन से हराया

Women’s Asia Cup 2026: भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बांग्लादेश को 40 रन से हराकरWomen’s Asia Cup 2026 के फाइनल में जगह बना ली है। दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए पहले सेमीफाइनल में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 149/6 रन बनाए। जवाब में बांग्लादेश की टीम 20 ओवर में 109/7 रन ही बना सकी।

भारत की जीत की सबसे बड़ी स्टार शेफाली वर्मा रहीं। उन्होंने मुश्किल और धीमी पिच पर शानदार बल्लेबाजी करते हुए 40 गेंदों में 64 रन की तेजतर्रार पारी खेली। उनकी पारी में सात चौके और तीन छक्के शामिल रहे। बांग्लादेश ने शेफाली को कई मौके दिए और भारतीय ओपनर ने इसका पूरा फायदा उठाते हुए टीम को चुनौतीपूर्ण स्कोर तक पहुंचा दिया।

शेफाली वर्मा ने संभाला मोर्चा
टॉस जीतकर बांग्लादेश ने भारत को पहले बल्लेबाजी के लिए बुलाया। भारतीय टीम को शुरुआत में कुछ झटके लगे, लेकिन शेफाली वर्मा ने एक छोर संभाले रखा। उन्होंने परिस्थिति के मुताबिक अपनी पारी को आगे बढ़ाया और फिर आक्रामक अंदाज अपनाते हुए बांग्लादेशी गेंदबाजों पर दबाव बना दिया।

शेफाली ने 40 गेंदों पर 64 रन बनाए और उनका स्ट्राइक रेट 160 का रहा। उनके अलावा प्रतिका रावल ने 20, ऋचा घोष ने 21 और कप्तान हरमनप्रीत कौर ने नाबाद 24 रन का योगदान दिया। इन पारियों की मदद से भारत 20 ओवर में 149 रन तक पहुंचने में सफल रहा।

भारत की गेंदबाजी के सामने बांग्लादेश बेबस
149 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी बांग्लादेश की शुरुआत भारत के मुकाबले कमजोर रही। भारतीय गेंदबाजों ने नियमित अंतराल पर विकेट लेकर विपक्षी टीम पर दबाव बनाए रखा।

दीप्ति शर्मा भारत की सबसे सफल गेंदबाज रहीं। उन्होंने 26 रन देकर तीन विकेट झटके। स्पिनरों ने दुबई की धीमी पिच का शानदार फायदा उठाया और बांग्लादेशी बल्लेबाजों को खुलकर शॉट खेलने का मौका नहीं दिया।

बांग्लादेश की टीम 20 ओवर में सात विकेट गंवाकर 109 रन ही बना सकी। इस तरह भारत ने मुकाबला 40 रन से जीत लिया और फाइनल का टिकट कटाया।

भारत की लगातार 10वीं फाइनल एंट्री
इस जीत के साथ भारतीय महिला टीम ने Women’s Asia Cup के इतिहास में रिकॉर्ड 10वीं बार फाइनल में जगह बनाई है। भारत की नजर अब खिताब पर है।

टूर्नामेंट का दूसरा सेमीफाइनल पाकिस्तान और श्रीलंका के बीच खेला जाना है। इसी मुकाबले से भारत को फाइनल में अपने प्रतिद्वंद्वी का पता चलेगा। फाइनल 13 सितंबर को खेला जाएगा।

IND vs BAN Women: मैच के अहम आंकड़े

  • भारत - 149/6 (20 ओवर)   
  • बांग्लादेश - 109/7 (20 ओवर)    
  • शेफाली वर्मा - 64 (40 गेंद)    
  • दीप्ति शर्मा - 3 विकेट    

भारत ने 40 रन से जीत दर्ज कर Women’s Asia Cup 2026 के फाइनल में प्रवेश कर लिया है। अब सभी की नजरें दूसरे सेमीफाइनल और 13 सितंबर को होने वाले खिताबी मुकाबले पर रहेंगी।

Thu, 10 Sep 2026 23:47:50 +0530

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