MP Police Admit Card 2026: ASI और हेड कॉन्स्टेबल परीक्षा का एडमिट कार्ड जारी, ऐसे करें डाउनलोड
मध्य प्रदेश पुलिस में ASI और हेड कॉन्स्टेबल (कंप्यूटर) पदों की प्रैक्टिकल परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों के लिए काम की खबर है। मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) ने परीक्षा का एडमिट कार्ड जारी कर दिया है। जिन अभ्यर्थियों ने इस परीक्षा के लिए आवेदन किया था, वे अब अपना हॉल टिकट मंडल की आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड कर सकते हैं।
एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के लिए उम्मीदवारों को एप्लीकेशन नंबर, जन्मतिथि और कैप्चा कोड जैसी जरूरी जानकारी दर्ज करनी होगी। हॉल टिकट डाउनलोड करने के बाद उसमें दी गई सभी जानकारियों को ध्यान से जांचना जरूरी है।
ऐसे डाउनलोड करें MP Police Admit Card
उम्मीदवार नीचे बताए गए आसान स्टेप्स की मदद से अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं:
- सबसे पहले MPESB की आधिकारिक वेबसाइट esb.mp.gov.in पर जाएं।
- होमपेज पर दिए गए Admit Card सेक्शन पर क्लिक करें।
- अब MP Police ASI/Head Constable Practical Exam Admit Card के लिंक को चुनें।
- मांगी गई जानकारी में एप्लीकेशन नंबर, जन्मतिथि और कैप्चा कोड दर्ज करें।
- सबमिट करने के बाद आपका एडमिट कार्ड स्क्रीन पर दिखाई देगा।
- एडमिट कार्ड डाउनलोड करें और भविष्य के लिए इसका प्रिंटआउट निकालकर सुरक्षित रख लें।
एडमिट कार्ड में इन चीजों को जरूर जांचें
एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के बाद उम्मीदवार उसमें अपना नाम, रोल नंबर, परीक्षा का नाम, परीक्षा केंद्र, परीक्षा की तारीख और शिफ्ट जैसी जानकारी अच्छी तरह जांच लें। अगर किसी जानकारी में गलती दिखाई देती है तो समय रहते संबंधित विभाग या परीक्षा प्राधिकरण से संपर्क करना बेहतर होगा।
इसके अलावा, परीक्षा केंद्र पर पहुंचने से पहले एडमिट कार्ड में दिए गए परीक्षा संबंधी दिशा-निर्देश जरूर पढ़ लें। परीक्षा के दिन अभ्यर्थियों को एडमिट कार्ड के साथ निर्धारित वैध फोटो आईडी भी लेकर जाना चाहिए।
ध्यान रखें कि परीक्षा केंद्र पर रिपोर्टिंग टाइम और जरूरी दस्तावेजों से जुड़ी जानकारी एडमिट कार्ड पर ही दी गई होगी। इसलिए परीक्षा वाले दिन निकलने से पहले हॉल टिकट को एक बार फिर जरूर चेक कर लें।
SC On Child Kidnapping: बच्चों के अपहरण पर SC सख्त; केंद्र और सभी राज्यों को जारी किया नोटिस
देशभर में बच्चों के अपहरण और उनके लापता होने की घटनाओं पर प्रभावी और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम कदम उठाया है। प्रधान न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने बच्चों के अपहरण मामलों की जांच के लिए पूरे देश में एक समान व्यवस्था बनाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई की।
अदालत ने इस मामले में केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, गृह मंत्रालय, कानून मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय और भारतीय विधि आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
देशभर में एक समान और समयबद्ध जांच की मांग
यह जनहित याचिका वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड अश्वनी कुमार दुबे के माध्यम से दाखिल की गई है। याचिका में तर्क दिया गया है कि अलग-अलग राज्यों में बच्चों के अपहरण और गायब होने के मामलों की जांच का तरीका अलग-अलग है, जिससे जांच में देरी होती है। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई है कि पूरे देश में ऐसे मामलों से निपटने के लिए एक निश्चित समयसीमा और विशेष जांच प्रक्रिया लागू की जाए।
समर्पित अदालतें बनाने की पैरवी
याचिका में केवल जांच तक ही बात सीमित नहीं रखी गई है, बल्कि त्वरित न्याय के लिए समर्पित विशेष अदालतें गठित करने का भी अनुरोध किया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि जब तक बच्चों के खिलाफ होने वाले इन अपराधों के लिए अलग से विशेष अदालतें नहीं होंगी, तब तक पीड़ितों को त्वरित न्याय मिलना कठिन होगा और दोषियों में कानून का डर कायम नहीं हो सकेगा।
मौजूदा व्यवस्था की खामियों पर उठाये सवाल
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में यह रेखांकित किया गया है कि वर्तमान समय में राज्यों के बीच जांच एजेंसियों के समन्वय और सूचना साझा करने में काफी ढिलाई देखने को मिलती है। कई मामलों में पुलिस की धीमी और असंवेदनशील कार्रवाई के कारण अपहृत बच्चों को सही समय पर सुरक्षित वापस नहीं लाया जा पाता।
याचिका में कहा गया है कि अंतरराज्यीय नेटवर्क के जरिए बच्चों का अपहरण कर उन्हें बाल मजदूरी या मानव तस्करी में धकेल दिया जाता है, जिसके लिए एक एकीकृत राष्ट्रीय तंत्र की सख्त जरूरत है।
सुप्रीम कोर्ट का रुख और आगे की कार्रवाई
सीजेआई की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिका में उठाए गए बिंदुओं को गंभीर मानते हुए सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर दिया है। राज्यों और केंद्र सरकार की ओर से दाखिल होने वाले जवाबों के बाद सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर आगे की सुनवाई करेगा और बच्चों की सुरक्षा के लिए दिशानिर्देश तय कर सकता है।
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