'वंदे मातरम' पर कांग्रेस के रुख से खुद को अलग करते हुए, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार को कहा कि सभी सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत गाना एक संवैधानिक ज़िम्मेदारी है और वह इस पर राजनीति करने से बचना चाहेंगे। उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस सत्ता में लौटती है तो वह इसे रद्द कर सकती है और नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) इस मामले में उस पुरानी पार्टी का समर्थन करके बहुत खुश होगी। हालांकि, NC नेता ने कांग्रेस की आलोचना करते हुए कहा कि जब संसद में बिल पेश किया गया था, तभी पार्टी को 'वंदे मातरम' का विरोध करना चाहिए था।
उन्होंने पत्रकारों से कहा कि वे संसद के ज़रिए इसे रोक सकते थे। लेकिन कानून पहले से ही लागू है। जब किसी कार्यक्रम में दो गवर्नर, एक उप-राज्यपाल और हमारे हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश शामिल हों, तो ज़ाहिर है कि राष्ट्रगान बजाया जाएगा। अब, कानून के तहत, जहाँ भी राष्ट्रगान बजाया जाता है, वहाँ 'वंदे मातरम' के लिए तय नियम भी अनिवार्य हो गए हैं। उन्होंने आगे कहा कि तो, कांग्रेस क्या चाहती है? यह एक कानूनी ज़िम्मेदारी है। अगर कांग्रेस सत्ता में आती है, तो वे संसद में इसे रद्द कर सकते हैं। हमें इससे कोई दिक्कत नहीं होगी। एक पार्टी के तौर पर हमने कभी 'वंदे मातरम' को स्वीकार नहीं किया है, लेकिन हमें संवैधानिक ज़िम्मेदारियों को पूरा करना होगा।
जम्मू-कश्मीर में आयोजित इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के उद्घाटन समारोह में वंदे मातरम् के पूरे छह अंतरों के गायन ने जिस तरह कांग्रेस और उसकी सहयोगी नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच राजनीतिक खींचतान पैदा की है, उसने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आजादी की लड़ाई के प्रतीकों को भी दलगत राजनीति के चश्मे से देखा जाएगा? हम आपको बता दें कि मामला तब गरम हुआ, जब समारोह में वंदे मातरम् का पूर्ण संस्करण गाया गया। इसके बाद कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने नेशनल कॉन्फ्रेंस से अपने फैसले पर विचार करने की अपील करते हुए कहा कि विपक्षी INDIA ब्लॉक को वंदे मातरम् की केवल पहले दो अंतरों तक सीमित रहना चाहिए। कांग्रेस का तर्क है कि गीत के बाद के अंतरों में हिंदू धार्मिक प्रतीकों का उल्लेख है और इसका पूर्ण संस्करण भारत के “समन्वयवादी और बहुलतावादी” चरित्र के अनुकूल नहीं है। यहीं से कांग्रेस से कुछ कड़े सवाल बनते हैं।
अगर वंदे मातरम् का पूरा संस्करण इतना आपत्तिजनक है तो कांग्रेस के अपने मुख्यमंत्री और नेता अतीत में इसके पूर्ण संस्करण का गायन क्यों करते रहे हैं? हम आपको बता दें कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी और कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के ऐसे सार्वजनिक कार्यक्रमों के वीडियो सामने आए हैं, जिनमें वह वंदे मातरम् के पूर्ण संस्करण के दौरान मौजूद रहे और उसके सम्मान में खड़े दिखाई दिए। नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता तनवीर सादिक ने इन्हीं वीडियो को साझा करते हुए जम्मू-कश्मीर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष तारिक हामिद कर्रा से पूछा कि आखिर अपने ही कांग्रेस मुख्यमंत्रियों के इस आचरण पर उनकी क्या राय है? सवाल इसलिए और गंभीर है क्योंकि 19 अगस्त 2026 को कांग्रेस कार्यसमिति ने बाकायदा फैसला किया था कि पार्टी के कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के केवल पहले दो अंतरे गाए जाएंगे। कांग्रेस ने इसके लिए 1937 के अपने फैसले का हवाला दिया है।
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मणिपुर के मुख्यमंत्री वाई खेमचंद सिंह ने बृहस्पतिवार को मारे गए संगीतकार चोंगथाम विक्रम सिंह के परिवार को आश्वासन दिया कि उन्हें न्याय मिलेगा और उनकी मौत के लिए जिम्मेदार लोगों को कानून के दायरे में लाया जाएगा। एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई। मुख्यमंत्री ने यह आश्वासन इंफाल पश्चिम जिले के थांगमेइबंद स्थित चोंगथाम के आवास पर पहुंचकर दिया।
मुख्यमंत्री ने शोकाकुल परिजनों से बातचीत करते हुए इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया और कहा कि इसमें एक ऐसे निर्दोष व्यक्ति की जान चली गई, जिसने कोई गलत काम नहीं किया था। सिंह ने चोंगथाम के माता-पिता, पत्नी और बेटे से मुलाकात की तथा उन्हें सरकार की ओर से हरसंभव सहायता और सहयोग का भरोसा दिया। दिल्ली के किलोकरी इलाके में मंगलवार को 54 वर्षीय संगीतकार की कथित तौर पर पीट-पीटकर हत्या कर दी गई।
उन्होंने अपने घर के बाहर एक ढाबे से आ रहे शोर पर आपत्ति जताई थी। पुलिस ने मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया है और एक नाबालिग को हिरासत में लिया है। किलोकरी में दो दशक से भी अधिक समय से रह रहे सिंह एक जाने-माने संगीतकार और गिटारवादक थे।
वह 1980 के दशक की शुरुआत में मणिपुर रॉक बैंड फीनिक्स के मुख्य गिटारवादक थे। उन्होंने बाद में दिल्ली में एक संगीत शिक्षक और कलाकार के रूप में काम किया।
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