SC On Child Kidnapping: बच्चों के अपहरण पर SC सख्त; केंद्र और सभी राज्यों को जारी किया नोटिस
देशभर में बच्चों के अपहरण और उनके लापता होने की घटनाओं पर प्रभावी और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम कदम उठाया है। प्रधान न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने बच्चों के अपहरण मामलों की जांच के लिए पूरे देश में एक समान व्यवस्था बनाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई की।
अदालत ने इस मामले में केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, गृह मंत्रालय, कानून मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय और भारतीय विधि आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
देशभर में एक समान और समयबद्ध जांच की मांग
यह जनहित याचिका वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड अश्वनी कुमार दुबे के माध्यम से दाखिल की गई है। याचिका में तर्क दिया गया है कि अलग-अलग राज्यों में बच्चों के अपहरण और गायब होने के मामलों की जांच का तरीका अलग-अलग है, जिससे जांच में देरी होती है। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई है कि पूरे देश में ऐसे मामलों से निपटने के लिए एक निश्चित समयसीमा और विशेष जांच प्रक्रिया लागू की जाए।
समर्पित अदालतें बनाने की पैरवी
याचिका में केवल जांच तक ही बात सीमित नहीं रखी गई है, बल्कि त्वरित न्याय के लिए समर्पित विशेष अदालतें गठित करने का भी अनुरोध किया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि जब तक बच्चों के खिलाफ होने वाले इन अपराधों के लिए अलग से विशेष अदालतें नहीं होंगी, तब तक पीड़ितों को त्वरित न्याय मिलना कठिन होगा और दोषियों में कानून का डर कायम नहीं हो सकेगा।
मौजूदा व्यवस्था की खामियों पर उठाये सवाल
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में यह रेखांकित किया गया है कि वर्तमान समय में राज्यों के बीच जांच एजेंसियों के समन्वय और सूचना साझा करने में काफी ढिलाई देखने को मिलती है। कई मामलों में पुलिस की धीमी और असंवेदनशील कार्रवाई के कारण अपहृत बच्चों को सही समय पर सुरक्षित वापस नहीं लाया जा पाता।
याचिका में कहा गया है कि अंतरराज्यीय नेटवर्क के जरिए बच्चों का अपहरण कर उन्हें बाल मजदूरी या मानव तस्करी में धकेल दिया जाता है, जिसके लिए एक एकीकृत राष्ट्रीय तंत्र की सख्त जरूरत है।
सुप्रीम कोर्ट का रुख और आगे की कार्रवाई
सीजेआई की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिका में उठाए गए बिंदुओं को गंभीर मानते हुए सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर दिया है। राज्यों और केंद्र सरकार की ओर से दाखिल होने वाले जवाबों के बाद सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर आगे की सुनवाई करेगा और बच्चों की सुरक्षा के लिए दिशानिर्देश तय कर सकता है।
Modi-Xi Bilateral At BRICS Summit: गलवान झड़प के बाद पहली द्विपक्षीय वार्ता; 12 सितंबर को मिलेंगे पीएम मोदी और शी जिनपिंग
भारत की अध्यक्षता में 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित हो रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान वैश्विक कूटनीति का सबसे बड़ा केंद्र भारत मंडपम बनने जा रहा है। इस सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली प्रस्तावित द्विपक्षीय वार्ता पर दुनिया भर की निगाहें टिकी हैं।
वर्ष 2020 में लद्दाख की गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हुई सैन्य झड़प के बाद से भारत और चीन के रिश्ते बेहद निचले स्तर पर पहुंच गए थे, जिसके बाद से दोनों नेताओं के बीच कोई पूर्ण द्विपक्षीय बैठक नहीं हुई थी।
सात साल बाद भारत आ रहे हैं चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 12 सितंबर की सुबह एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ नई दिल्ली पहुंचेंगे। अक्टूबर 2019 में महाबलीपुरम तमिलनाडु में हुए अनौपचारिक शिखर सम्मेलन के बाद यह शी जिनपिंग की पहली भारत यात्रा है।
चीनी प्रतिनिधिमंडल में वरिष्ठ सरकारी मंत्रियों, कूटनीतिक सलाहकारों के अलावा प्रमुख चीनी व्यापारिक कंपनियों के प्रतिनिधि भी शामिल हैं। जिनपिंग की इस संक्षिप्त भारत यात्रा को दोनों देशों के बीच लंबे समय से बने तनाव को कम करने की एक बड़ी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
गलवान विवाद और एलएसी पर जारी गतिरोध को सुलझाने पर रहेगा जोर
इस बैठक का मुख्य फोकस वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर सैन्य तनाव को कम करना और सीमावर्ती क्षेत्रों में पूर्ण शांति व स्थिरता बहाल करना होगा। जून 2020 में हुए गलवान संघर्ष के बाद दोनों देशों ने सीमा पर भारी संख्या में सैनिकों और सैन्य हथियारों की तैनाती की थी।
हालांकि सैन्य और राजनयिक स्तर की कई दौर की वार्ताओं के बाद कुछ पेट्रोलिंग पॉइंट्स से सैनिकों की वापसी हुई है, लेकिन दोनों देशों के बीच सीमा प्रबंधन, गश्त के अधिकारों और बफर जोन को लेकर औपचारिक सहमति और भरोसे का माहौल बनाना अभी भी मुख्य चुनौती बना हुआ है।
व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला और आर्थिक रिश्तों की बहाली पर मंथन
सीमा विवाद के अलावा दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय आर्थिक और व्यापारिक संबंधों पर भी चर्चा हो सकती है। सीमा तनाव के बाद भारत ने ऐप बैन, चीनी निवेश की कड़ी जांच और वीजा नियमों को सख्त किया था। इस द्विपक्षीय वार्ता में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को सुचारू बनाने, दुर्लभ खनिजों के व्यापार, भारतीय बाजार में रणनीतिक संतुलन और व्यापार घाटे को कम करने जैसे महत्वपूर्ण आर्थिक मुद्दों पर सकारात्मक प्रगति की उम्मीद जताई जा रही है।
वैश्विक कूटनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी वार्ता
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मंच पर पीएम मोदी और शी जिनपिंग के अलावा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी मौजूद रहेंगे। ऐसे में बदलती वैश्विक परिस्थितियों और बहुध्रुवीय दुनिया की अवधारणा को मजबूती देने के लिहाज से भारत-चीन के बीच होने वाली यह सीधी बातचीत बेहद अहम मानी जा रही है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह वार्ता सफल रहती है, तो इससे न केवल दक्षिण एशिया में शांति और स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि दोनों एशियाई महाशक्तियों के बीच संवाद के नए रास्ते भी खुलेंगे।
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