UP PET 2026: 23 से 25 अक्टूबर तक होगी यूपी पीईटी परीक्षा, एग्जाम शेड्यूल जारी
उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए UP PET 2026 से जुड़ा अहम अपडेट सामने आया है। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) ने प्रारंभिक अर्हता परीक्षा की तारीख घोषित कर दी है। आयोग की ओर से जारी शेड्यूल के मुताबिक PET परीक्षा 23, 24 और 25 अक्टूबर 2026 को आयोजित की जाएगी।
परीक्षा तीन दिनों तक चलेगी और इसे दो शिफ्ट में कराया जाएगा। पहली शिफ्ट सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक, जबकि दूसरी शिफ्ट दोपहर 3 बजे से शाम 5 बजे तक होगी। ऐसे में अभ्यर्थियों को अपने एडमिट कार्ड पर दी गई परीक्षा तारीख, शिफ्ट और परीक्षा केंद्र की जानकारी ध्यान से जांचनी होगी।
100 अंकों के होंगे 100 सवाल
UP PET 2026 में अभ्यर्थियों से अलग-अलग विषयों से कुल 100 प्रश्न पूछे जाएंगे। परीक्षा 100 अंकों की होगी। इसमें भारतीय इतिहास, भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन, भूगोल, भारतीय अर्थव्यवस्था, भारतीय संविधान एवं लोक प्रशासन, सामान्य विज्ञान, प्रारंभिक अंकगणित, सामान्य हिंदी, सामान्य अंग्रेजी, रीजनिंग और सामान्य जागरूकता जैसे विषय शामिल होंगे।
परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग भी लागू रहेगी। प्रत्येक गलत उत्तर के लिए अभ्यर्थी के प्राप्त अंकों में एक-चौथाई अंक काटे जाएंगे। इसलिए उम्मीदवारों के लिए सिर्फ ज्यादा सवाल हल करना ही नहीं, बल्कि सही उत्तर देने पर भी फोकस करना जरूरी होगा।
कब आएगा UP PET Admit Card?
परीक्षा की तारीख घोषित होने के बाद अब अभ्यर्थियों को UP PET 2026 Admit Card का इंतजार है। एडमिट कार्ड परीक्षा से कुछ दिन पहले जारी किए जाने की उम्मीद है। जारी होने के बाद उम्मीदवार इसे UPSSSC की आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड कर सकेंगे।
एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के लिए उम्मीदवारों को वेबसाइट के नोटिस बोर्ड सेक्शन में जाना होगा। यहां UP PET 2026 Admit Card से संबंधित लिंक उपलब्ध होने के बाद उस पर क्लिक करके मांगी गई लॉगिन डिटेल दर्ज करनी होगी। इसके बाद एडमिट कार्ड स्क्रीन पर दिखाई देगा, जिसे डाउनलोड करके उसका प्रिंट सुरक्षित रखना होगा।
परीक्षा में अब ज्यादा समय नहीं बचा है, इसलिए उम्मीदवारों को रिवीजन के साथ मॉक टेस्ट और पिछले प्रश्नों की प्रैक्टिस पर भी ध्यान देना चाहिए। खासतौर पर नेगेटिव मार्किंग को देखते हुए समय प्रबंधन और प्रश्नों के सही चयन की रणनीति परीक्षा में काफी महत्वपूर्ण रहेगी।
Ganesh Chaturthi 2026: बप्पा को क्यों इतना पसंद है मोदक? जानें इससे जुड़ी दिलचस्प पौराणिक कहानी
Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी के मौके पर घरों और पंडालों में बप्पा के लिए तरह-तरह के भोग तैयार किए जाते हैं। इनमें मोदक की खास जगह होती है। नारियल और गुड़ से बने पारंपरिक उकड़ीचे मोदक से लेकर अलग-अलग स्वाद वाले मोदक आज गणपति उत्सव का अहम हिस्सा बन चुके हैं।
धार्मिक मान्यताओं में भगवान गणेश को ‘मोदकप्रिय’ भी कहा जाता है, यानी जिन्हें मोदक बेहद प्रिय हैं। लेकिन इसके पीछे सिर्फ स्वाद की बात नहीं, बल्कि ज्ञान और बुद्धिमानी से जुड़ी एक पौराणिक कथा भी सुनाई जाती है।
भगवान गणेश को क्यों मिला था खास मोदक?
पौराणिक कथा के अनुसार, देवताओं ने एक विशेष दिव्य मोदक माता पार्वती को दिया था। इस मोदक को लेकर भगवान गणेश और उनके भाई कार्तिकेय के बीच बात हुई।
माता-पिता ने दोनों भाइयों के सामने एक शर्त रखी कि जो पूरी दुनिया का चक्कर लगाकर सबसे पहले वापस आएगा, वही इस विशेष मोदक को पाएगा।
कार्तिकेय निकल पड़े दुनिया की यात्रा पर
कथा के अनुसार, कार्तिकेय अपने वाहन मोर पर सवार होकर दुनिया का चक्कर लगाने निकल गए। वहीं भगवान गणेश ने कुछ अलग सोचा। गणेश जी ने अपने माता-पिता भगवान शिव और माता पार्वती की परिक्रमा की और कहा कि उनके लिए माता-पिता ही पूरी दुनिया के समान हैं।
गणेश जी की इस बुद्धिमानी और माता-पिता के प्रति भक्ति से शिव-पार्वती प्रसन्न हुए और उन्हें वह दिव्य मोदक प्रदान किया। इसी कथा को गणेश जी की बुद्धि और भक्ति से भी जोड़ा जाता है।
इसलिए कहा जाता है ‘मोदकप्रिय’
पौराणिक मान्यताओं में मोदक भगवान गणेश से इतना जुड़ गया कि उन्हें ‘मोदकप्रिय’ नाम से भी पुकारा जाने लगा। गणेश चतुर्थी के दौरान मोदक का भोग इसी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा माना जाता है।
मोदक के अंदर छिपा है एक खास संदेश
मोदक को सिर्फ मिठाई नहीं माना जाता। इससे जुड़ी व्याख्याओं में इसके बाहरी आवरण को जीवन की चुनौतियों और अंदर की मीठी भरावन को ज्ञान, खुशी और संतोष का प्रतीक बताया जाता है।
यानी बाहर से जीवन कितना भी कठिन क्यों न लगे, उसके भीतर ज्ञान और खुशी पाने का रास्ता छिपा हो सकता है। इसी वजह से गणपति को मोदक चढ़ाने की परंपरा को एक खास आध्यात्मिक अर्थ से भी जोड़ा जाता है।
गणेश चतुर्थी पर कौन सा मोदक बनाएं?
गणेश उत्सव में उकड़ीचे मोदक सबसे लोकप्रिय पारंपरिक विकल्पों में से एक हैं। इन्हें चावल के आटे की बाहरी परत और नारियल-गुड़ की भरावन से बनाया जाता है और भाप में पकाया जाता है।
इसके अलावा आजकल ड्राई फ्रूट, चॉकलेट और मावा जैसे कई स्वादों में भी मोदक बनाए जाते हैं। घर पर मोदक बनाकर बप्पा को भोग लगाना और फिर परिवार के साथ इसे प्रसाद के रूप में बांटना गणेश उत्सव की खूबसूरत परंपराओं में से एक है।
(Disclaimer): यह खबर धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं में प्रचलित कथाओं पर आधारित है। अलग-अलग ग्रंथों और क्षेत्रों में इस कथा के अलग-अलग रूप मिलते हैं। इसे ऐतिहासिक या वैज्ञानिक तथ्य के रूप में न लें।
यह भी पढ़ें: गणेश चतुर्थी पर बप्पा को लगाएं मोदक का पसंदीदा भोग, मिनटों में तैयार होगी
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
Haribhoomi






