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भाषण के आखिर में मोदी ने जो बोला, सुनकर ताली बजाने लगे जिनपिंग-पुतिन

पीएम मोदी ने कहा कि ब्रिक्स कोऑपरेशन को और सुदृढ़ करने की प्राथमिकताएं समाहित है। यदि किसी सदस्य को कोई आपत्ति ना हो तो मैं डिक्लेरेशन को एडप्ट करने का प्रस्ताव रखता हूं। किसी सदस्य की ओर से आपत्ति व्यक्त नहीं की गई है। न्यू दिल्ली डिक्लेरेशन 2026 को सर्वस्मति से एड किया जाता है। 

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पीएम मोदी ने कहा कि मैं सबको रिक्वेस्ट करता हूं जरा अपने टेबल पर इसको प्लीज आप सब से मेरा अनुरोध है कि इसको आप इस प्रकार से खोल करके थैंक फ्रेंड्स आज की हमारी बैठक अत्यंत सार्थक और रचनात्मक रही। हमारे विचारों की विविधता के साथसाथ ब्रिक्स सहयोग के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता भी स्पष्ट रूप से सामने आई है। आज की चर्चा से स्पष्ट है कि बदलते हुए विश्व का संचालन पुराने संस्थानों से नहीं किया जा सकता। रिप्रेजेंटेशन रिस्पांसिवनेस और रूल मेकिंग तीनों में सुधार आवश्यक है। हमने इस बात पर भी बल दिया कि भविष्य की टेक्नोलॉजी और उनके नियमों के निर्माण में ग्लोबल साउथ की बराबर भागीदारी होनी चाहिए। निर्णयों और उनके परिणामों के बीच जो दूरी बनी हुई है उसे पार्टनरशिप और कलेक्टिव एक्शन से काम करना होगा। आज एडप किया गया न्यू दिल्ली डिक्लेरेशन हमारे साझा संकल्प को स्पष्ट दिशा देता है। अब हमारी जिम्मेदारी है कि इन संकल्पों को ठोस परिणामों में बदले। ब्रिक्स चेयर के रूप में आपके बहुमूल्य योगदान, कंस्ट्रक्टिव स्पिरिच और आपकी प्रतिबद्धता के लिए मैं आप सभी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। इसी के साथ इस सेशन के समापन की घोषणा करता हूं। 

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पीएम मोदी  ने कहा कि भारत में आप सभी का स्वागत और अभिनंदन करते हुए मुझे अत्यंत खुशी हो रही है। भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता पीपल सेंट्रिक और ह्यूमैनिटी फर्स्ट अप्रोच पर आधारित है। रिजिलियंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन और सस्टेनेबिलिटी हमारी प्राथमिकताएं रही हैं। इन प्राथमिकताओं के साथ हमने ब्रिक्स सहयोग को सामान्य जन से जोड़ने का विशेष बल दिया है। इसी सोच के साथ 350 से अधिक बैठकों का आयोजन किया गया। लगभग 30 शहरों में आपकी टीम्स का स्वागत करने का हमें अवसर मिला। भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता को सफल बनाने में सक्रिय योगदान और समर्थन के लिए मैं आप सभी का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं। फ्रेंड्स, इस वर्ष की ब्रिक्स समिट एक ऐतिहासिक पड़ाव है। हम ब्रिक्स की 20वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। मानव जीवन में 20 वर्ष की आयु मैच्योरिटी और रिस्पांसिबिलिटी के नए चरण का आरंभ करती है। यह वह अवस्था होती है जब सपनों के साथ जिम्मेदारियां जुड़ती है। सामर्थ्य को नई दिशा मिलती है। आज ब्रिज भी अपने कमिंग ऑफ एज के क्षण में है। पिछले वर्ष पिछले 20 वर्षों में ब्रिक्स ने वैश्विक मंच पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। हम एक दूसरे के दृष्टिकोण का सम्मान करते हैं और कंसेंसस से आगे बढ़ते हैं। हम किसी के विरुद्ध नहीं बल्कि सबको साथ लेकर चलने का की सोच के साथ आगे बढ़ने का प्रयास करते हैं। अब समय है कि हम ब्रिक्स में हमारी एकता और सहमति को वैश्विक मंच पर ठोस परिणामों में बदले। अगले 20 वर्षों के लिए हमें एक नए और एंबिशियस एजेंडा पर काम करना होगा। इसकी शुरुआत हमें अपने खुद के वर्किंग सिस्टम से करनी होगी। ब्रिक्स की अध्यक्षता हर वर्ष बदलती है। किंतु इसकी वजह से हमारा इंस्टीट्यूशनल मोमेंटम नहीं रुकना चाहिए। मैं ब्रिक्स कम कंटिन्यूटी एंड इंप्लीमेंटेशन मैकेनिज्म का प्रस्ताव रखता हूं। इसके तहत ट्रका के माध्यम से सभी इनिशिएटिव और आउटकम्स का फॉलो अप हो सकेगा। हम एक सिक्योर डिजिटल रिपोजिटरी बना सकते हैं। 

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क्या AI इंसानों की जान ले सकता है? Anthropic CEO Dario Amodei ने दी बड़ी चेतावनी

एंथ्रोपिक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डारियो अमोडेई ने एक बार फिर कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विकास की रफ्तार थोड़ी धीमी करने की जरूरत है। उनका कहना है कि जैसे-जैसे एआई ज्यादा ताकतवर हो रहा है, वैसे-वैसे उसकी सुरक्षा के लिए जरूरी इंतजाम करने का समय भी मिलना चाहिए।

सही रास्ता चुना तो खतरा बहुत कम होगा

डारियो अमोडेई ने कहा कि अगर एआई को लेकर सही फैसले लिए जाते हैं तो कुछ गलत होने की संभावना बहुत कम हो सकती है। लेकिन अगर गलत रास्ता चुना गया तो खतरा काफी बढ़ सकता है। उनके मुताबिक, इसलिए सिर्फ इस बात पर चर्चा नहीं होनी चाहिए कि एआई से कितना खतरा है, बल्कि यह भी देखना चाहिए कि कंपनियां और सरकारें आगे क्या फैसले लेती हैं।

क्या एआई इंसानों की जान ले सकता है?

अमोडेई से जब पूछा गया कि क्या भविष्य में एआई इंसानों की जान ले सकता है, तो उन्होंने कहा कि वह इस चिंता से काफी हद तक सहमत हैं। उन्होंने एंथ्रोपिक के पूर्व कर्मचारी जैकब कॉक्सन की चिंताओं का भी जिक्र किया।

कॉक्सन ने हाल ही में एंथ्रोपिक की नौकरी छोड़ दी थी। इसके बाद उन्होंने खुले तौर पर एआई के बढ़ते खतरे को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि बड़ी एआई कंपनियां ज्यादा ताकतवर तकनीक बनाने की दौड़ में ऐसे खतरे उठा रही हैं, जिन्हें स्वीकार नहीं किया जा सकता।

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पूर्व कर्मचारी की बात से सहमत हैं अमोडेई

अमोडेई ने कहा कि वह जैकब कॉक्सन की बातों से असहमत होने के बजाय उनसे ज्यादा सहमत हैं। उन्होंने बताया कि कॉक्सन ने एंथ्रोपिक को गैर-जिम्मेदार कंपनी नहीं बताया था। उनका कहना था कि एंथ्रोपिक इन खतरों को लेकर काफी जागरूक है, लेकिन पूरी एआई इंडस्ट्री बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है।

सिर्फ प्रतिशत बताने से बात साफ नहीं होगी

अमोडेई ने कहा कि एआई के खतरे को सिर्फ किसी प्रतिशत के रूप में बताना सही तरीका नहीं है। जैसे अगर कोई कहे कि खतरा 10 प्रतिशत है, तो ऐसा लगता है जैसे सब कुछ किस्मत के भरोसे है। उनके मुताबिक, असल सवाल यह है कि हम कौन सा रास्ता चुनते हैं। अगर सही फैसले लिए गए तो खतरा कम किया जा सकता है। वहीं गलत फैसलों से स्थिति ज्यादा खराब हो सकती है।

सरकारों और कंपनियों को मिलकर काम करना होगा

अमोडेई ने कहा कि एआई को सुरक्षित बनाने के लिए कंपनियों और सरकारों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने माना कि एआई के विकास को बहुत ज्यादा धीमा करना भी सही नहीं होगा। उनका मानना है कि अगर जिम्मेदार लोग इस तकनीक के विकास से पीछे रह गए, तो गलत लोगों के हाथ में इसकी कमान जाने का खतरा बढ़ सकता है।

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पूर्व कर्मचारी के इस्तीफे के बाद बढ़ी बहस

अमोडेई का यह बयान जैकब कॉक्सन के इस्तीफे के बाद आया है। कॉक्सन एंथ्रोपिक और ओपनएआई दोनों में काम कर चुके हैं। नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने बड़ी एआई कंपनियों पर बेहद ताकतवर तकनीक बनाने की दौड़ में ज्यादा जोखिम लेने का आरोप लगाया था।

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  Sports

दिल्ली कैपिटल्स में 761 इंटरनेशनल विकेट लेने वाले दिग्गज की एंट्री, टीम को मिल गया घातक कोच

श्रीलंका के क्रिकेट टीम के पूर्व दिग्गज तेज गेंदबाज चामिंडा वास इंडियन प्रीमियर लीग में दिल्ली कैपिटल्स के बॉलिंग कोच बनने के लिए तैयार हैं. चामिंडा वास से पहले फ्रेंचाइजी ने भारतीय दिग्गज अनिल कुंबले और जहीर खान जैसे पूर्व तेज गेंदबाजों से भी बात की थी, लेकिन डील नहीं हो पाई है. ऐसे में टीम ने चामिंडा वास को चुना है. Sun, 13 Sep 2026 11:20:50 +0530

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