Indori Poha Recipe: नाश्ते में परोसें इंदौरी पोहा , पाचन में हल्का, स्वाद में लाजवाब, जानें बनाने का तरीका
Indori Poha Recipe: सुबह के नाश्ते में अगर कुछ ऐसा मिल जाए जो स्वादिष्ट होने के साथ जल्दी तैयार भी हो जाए, तो दिन की शुरुआत और भी बेहतर हो जाती है। इंदौरी पोहा इसी वजह से नाश्ते की पसंदीदा डिश में शामिल है। पोहे में प्याज, हरी मिर्च, राई और करी पत्ते का तड़का इसके स्वाद को खास बना देता है। ऊपर से सेव, हरा धनिया और नींबू डालकर परोसने पर इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है।
इंदौर की पहचान बन चुका पोहा सिर्फ स्वाद के लिए ही मशहूर नहीं है, बल्कि इसे हल्के नाश्ते के तौर पर भी पसंद किया जाता है। चावल से बने पोहे को भिगोकर नरम किया जाता है और फिर हल्के मसालों के साथ पकाया जाता है। अगर इसे कम तेल और संतुलित मात्रा में सामग्री के साथ बनाया जाए, तो यह सुबह के समय एक आसान और स्वादिष्ट विकल्प हो सकता है।
इंदौरी पोहा बनाने के लिए सामग्री
- 2 कप मोटा पोहा
- 1 मध्यम प्याज, बारीक कटा हुआ
- 1-2 हरी मिर्च, बारीक कटी हुई
- 2 बड़े चम्मच मूंगफली
- 1 छोटा चम्मच राई
- 8-10 करी पत्ते
- 1/2 छोटा चम्मच हल्दी
- 1 छोटा चम्मच चीनी
- नमक स्वादानुसार
- 1 बड़ा चम्मच तेल
- 1/2 नींबू का रस
- हरा धनिया बारीक कटा हुआ
- सेव और अनार के दाने सजाने के लिए
इंदौरी पोहा बनाने का तरीका
पोहा भिगोने की सही विधि
सबसे पहले पोहे को छलनी में डालकर पानी से हल्के हाथ से धो लें। इसे पानी में ज्यादा देर तक भिगोने की जरूरत नहीं है। पानी निकालने के बाद पोहे को करीब 5 से 10 मिनट के लिए अलग रख दें। इससे पोहा नरम हो जाएगा, लेकिन उसके दाने आपस में चिपकेंगे नहीं।
ऐसे तैयार करें इंदौरी पोहा
कड़ाही में तेल गर्म करें। इसमें राई डालें और चटकने दें। अब मूंगफली डालकर हल्की कुरकुरी होने तक भूनें। इसके बाद करी पत्ता, हरी मिर्च और प्याज डालें। प्याज को हल्का पारदर्शी होने तक भूनें।
अब इसमें हल्दी, नमक और थोड़ी-सी चीनी डालकर अच्छी तरह मिलाएं। इसके बाद भीगा हुआ पोहा कड़ाही में डालें। गैस की आंच धीमी रखें और पोहे को हल्के हाथ से मिलाएं, ताकि दाने टूटें नहीं।
कड़ाही को ढककर करीब 2-3 मिनट पकाएं। गैस बंद करने के बाद नींबू का रस और हरा धनिया डालें। तैयार पोहे को प्लेट में निकालकर ऊपर से सेव, हरा धनिया और अनार के दानों से सजाएं।
स्वाद बढ़ाने के लिए ये ट्रिक आजमाएं
इंदौरी स्वाद के लिए पोहे में थोड़ी-सी चीनी डालना जरूरी माना जाता है। चीनी की मात्रा बहुत ज्यादा न रखें, बल्कि हल्की मिठास के लिए ही इस्तेमाल करें। पोहा परोसते समय ऊपर से सेव और नींबू डालने से इसका स्वाद और बेहतर हो जाता है।
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लेखक: (कीर्ति)
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Darsh Amavasya Vrat Katha 2026: आज है दर्श अमावस्या, जानें व्रत कथा और पितरों से जुड़ी यह खास मान्यता
दर्श अमावस्या को हिंदू धर्म में पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने वाली महत्वपूर्ण तिथि माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन पूर्वजों के लिए तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करने से उन्हें तृप्ति मिलती है। कई श्रद्धालु अमावस्या के दिन व्रत भी रखते हैं और भगवान विष्णु, भगवान शिव तथा चंद्र देव की पूजा करते हैं।
इस दिन पवित्र नदी या किसी तीर्थ स्थान पर स्नान करने के बाद पूर्वजों के नाम से जल अर्पित करने की परंपरा है। इसके अलावा गरीबों, जरूरतमंदों और ब्राह्मणों को अन्न, वस्त्र, काले तिल, दीपक और सामर्थ्य के अनुसार दूसरी उपयोगी वस्तुओं का दान किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा के साथ किए गए इन कार्यों से पुण्य की प्राप्ति होती है और पितरों का आशीर्वाद मिलता है।
अछोदा और राजा अमावसु की कथा
दर्श अमावस्या से जुड़ी एक पौराणिक कथा अछोदा नाम की कन्या से संबंधित है। कथा के अनुसार प्राचीन समय में पितृलोक में रहने वाली आत्माओं में से एक आत्मा ने गर्भ धारण किया और एक कन्या को जन्म दिया। उसका नाम अछोदा रखा गया।
अछोदा अपनी मां के संरक्षण में बड़ी हुईं। बचपन से ही उन्हें पिता के स्नेह की कमी महसूस होती थी। पिता के प्रेम की चाहत को देखते हुए पितृलोक की आत्माओं ने उन्हें धरती पर राजा अमावसु की पुत्री के रूप में जन्म लेने का मार्ग बताया।
राजा अमावसु ने अछोदा का बेहद स्नेह के साथ पालन-पोषण किया। पिता का प्रेम मिलने के बाद अछोदा का जीवन खुशियों से भर गया। इसके बाद उनके मन में उन पितृ आत्माओं के प्रति कृतज्ञता का भाव पैदा हुआ, जिनकी वजह से उन्हें पिता का स्नेह प्राप्त हुआ था।
अमावस्या की रात किया श्राद्ध
कथा के अनुसार अछोदा ने पितरों के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करने के लिए श्राद्ध का संकल्प लिया। उन्होंने इसके लिए उस रात को चुना, जब आकाश में चंद्रमा दिखाई नहीं देता था। इसी अंधेरी रात में उन्होंने पितृ आत्माओं की विधि-विधान से पूजा की और उनके लिए श्राद्ध कर्म किया।
कहा जाता है कि अछोदा की भक्ति और समर्पण से पितृ आत्माएं प्रसन्न हुईं। उन्हें ऐसा पुण्य और सुख प्राप्त हुआ, जिसे स्वर्ग में भी प्राप्त करना कठिन माना गया। इसी प्रसंग से अमावस्या तिथि के नाम को राजा अमावसु से जोड़कर देखा जाता है।
पितरों के लिए क्यों खास है अमावस्या?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अमावस्या के दिन पितरों का स्मरण और उनके निमित्त किए गए धार्मिक कर्म विशेष फलदायी माने जाते हैं। यह भी मान्यता है कि इस दिन पितृ अपने लोक से धरती पर आते हैं और अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं।
इसी वजह से अमावस्या के दिन तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान और दान-पुण्य करने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। दर्श अमावस्या पर श्रद्धालु अपने पूर्वजों को याद करते हैं और उनकी शांति व तृप्ति की कामना करते हैं।
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