Kala Chana Kadhi Recipe: कढ़ी में लाएं राजस्थानी स्वाद, काले चने वाली ये रेसिपी बार-बार बनाएंगे
Kala Chana Kadhi Recipe: राजस्थानी काला चना कढ़ी पारंपरिक कढ़ी से थोड़ी अलग होती है। इसमें बेसन और दही की खट्टी-मसालेदार ग्रेवी के साथ उबले हुए काले चने मिलाए जाते हैं। जीरा, सूखी लाल मिर्च, करी पत्ता, अदरक और लहसुन का तड़का इसके स्वाद को और बढ़ा देता है। इसे चावल, रोटी या पराठे के साथ लंच या डिनर में परोसा जा सकता है। राजस्थानी काला चना कढ़ी घर पर आसान तरीके से बनाएं।
राजस्थानी काला चना कढ़ी के लिए सामग्री
- काला चना – 200 ग्राम
- पानी – जरूरत के अनुसार
- नमक – स्वादानुसार
- कढ़ी के लिए
- दही – 350 ग्राम
- बेसन – 60 ग्राम
- हल्दी पाउडर – 1 छोटा चम्मच
- लाल मिर्च पाउडर – 1 छोटा चम्मच
- धनिया पाउडर – 1 छोटा चम्मच
- पानी – 800 मिलीलीटर
- नमक – स्वादानुसार
तड़के के लिए
- घी – जरूरत के अनुसार
- जीरा – 1 छोटा चम्मच
- सूखी लाल मिर्च – 2
- हरी मिर्च – 2, बीच से कटी हुई
- करी पत्ता – 15-20
- अदरक – 1 बड़ा चम्मच, बारीक कटा हुआ
- लहसुन – 1 बड़ा चम्मच, बारीक कटा हुआ
- हींग – 1/4 छोटा चम्मच
- आखिर में डालें
- गरम मसाला – 1 छोटा चम्मच
- कसूरी मेथी – 1 छोटा चम्मच
- ताजा हरा धनिया – जरूरत के अनुसार
ऐसे बनाएं राजस्थानी काला चना कढ़ी
स्टेप 1: सबसे पहले 200 ग्राम काले चने को एक बड़े बाउल में लें। इसमें पर्याप्त पानी डालकर रातभर भिगोकर रखें।
स्टेप 2: अगले दिन भीगे हुए चनों को प्रेशर कुकर में डालें। इसमें पानी और थोड़ा नमक डालकर करीब 4 सीटी आने तक पकाएं। कुकर का प्रेशर निकलने के बाद चने निकालकर अलग रख दें।
स्टेप 3: अब एक बड़े बाउल में 350 ग्राम दही लें। इसमें 1 छोटा चम्मच हल्दी, 1 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर और 1 छोटा चम्मच धनिया पाउडर डालें। इसके बाद 60 ग्राम बेसन डालकर अच्छी तरह फेंटें, ताकि इसमें गांठें न रहें।
स्टेप 4: अब दही-बेसन के मिश्रण में करीब 800 मिलीलीटर पानी डालें और इसे अच्छी तरह फेंट लें। मिश्रण जितना स्मूद होगा, कढ़ी उतनी ही अच्छी बनेगी।
स्टेप 5: अब एक पैन में घी गर्म करें। इसमें जीरा डालें और चटकने दें। इसके बाद 2 सूखी लाल मिर्च, कटी हुई हरी मिर्च और करी पत्ता डालें। अब इसमें बारीक कटा हुआ अदरक और लहसुन डालकर भूनें।
स्टेप 6: अब इसमें 1/4 छोटा चम्मच हींग डालें और करीब एक मिनट तक भूनें। तड़के से खुशबू आने लगे तो अगला स्टेप करें।
स्टेप 7: अब तैयार दही-बेसन का घोल पैन में डालें। इसे डालते समय लगातार चलाते रहें, ताकि दही फटे नहीं और बेसन की गांठें न बनें। कढ़ी को अच्छी तरह उबाल आने तक पकाएं।
स्टेप 8: अब इसमें उबले हुए काले चने डालें और स्वादानुसार नमक मिलाएं। कढ़ी को ढककर करीब 10-15 मिनट धीमी आंच पर पकने दें, ताकि चने मसालेदार कढ़ी का स्वाद अच्छी तरह सोख लें।
स्टेप 9: अब इसमें 1 छोटा चम्मच गरम मसाला और 1 छोटा चम्मच कसूरी मेथी डालें। सभी चीजों को अच्छी तरह मिलाएं। आखिर में ताजा कटा हुआ हरा धनिया डालें और गैस बंद कर दें।
गरमा-गरम राजस्थानी काला चना कढ़ी को चावल, रोटी या पराठे के साथ सर्व करें। ऊपर से थोड़ा हरा धनिया डालने से इसका स्वाद और लुक दोनों बेहतर हो जाएंगे।
कढ़ी बनाते समय इन बातों का रखें ध्यान
- काले चने को रातभर भिगोना न भूलें, इससे चने अच्छी तरह पकेंगे।
- दही और बेसन को पानी डालने से पहले अच्छी तरह फेंटें।
- कढ़ी में दही-बेसन का घोल डालते समय लगातार चलाते रहें।
- मसालों को बहुत तेज आंच पर न भूनें।
- कढ़ी को धीमी आंच पर पकाने से स्वाद अच्छी तरह उभरता है।
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Kidney Stone Causes: किडनी स्टोन से बचना है तो आज से बदलें ये आदतें! जानें क्या खाएं-क्या नहीं
Kidney Stone Causes: किडनी स्टोन यानी गुर्दे की पथरी की समस्या काफी तकलीफदेह हो सकती है। पथरी तब बनती है जब पेशाब में मौजूद कुछ खनिज और दूसरे पदार्थ इतनी मात्रा में जमा हो जाते हैं कि क्रिस्टल बनने लगते हैं। धीरे-धीरे यही क्रिस्टल पथरी का रूप ले सकते हैं। कम पानी पीना, ज्यादा नमक खाना और कुछ खास तरह के खान-पान की आदतें इसका जोखिम बढ़ा सकती हैं।
कई बार छोटी पथरी बिना किसी खास लक्षण के शरीर से निकल भी जाती है, लेकिन अगर स्टोन मूत्र मार्ग में फंस जाए तो कमर या पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द, पेशाब में खून और पेशाब करने में परेशानी हो सकती है। अच्छी बात यह है कि पर्याप्त पानी पीने और डाइट में कुछ बदलाव करके कई मामलों में पथरी बनने या दोबारा होने का खतरा कम किया जा सकता है।
सबसे पहले बदलें कम पानी पीने की आदत
किडनी स्टोन से बचाव में पर्याप्त तरल पदार्थ लेना सबसे अहम उपायों में शामिल है। शरीर में पानी कम होने पर पेशाब ज्यादा गाढ़ा हो जाता है और उसमें मौजूद खनिजों के क्रिस्टल बनने की संभावना बढ़ सकती है। इसलिए पूरे दिन थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पानी पीते रहें। सामान्य स्वस्थ लोगों के लिए अक्सर 6-8 गिलास तरल लेने की सलाह दी जाती है, लेकिन जरूरत व्यक्ति की उम्र, गतिविधि, मौसम और स्वास्थ्य पर निर्भर करती है। किडनी फेल्योर या अन्य ऐसी बीमारी होने पर पानी की मात्रा डॉक्टर से पूछकर तय करनी चाहिए।
खाने में नमक कम करना है जरूरी
बहुत ज्यादा सोडियम यानी नमक का सेवन कैल्शियम वाली पथरी का जोखिम बढ़ा सकता है। पैकेज्ड फूड, इंस्टेंट स्नैक्स, नमकीन, फास्ट फूड और कई प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों में छिपा हुआ सोडियम भी काफी हो सकता है। इसलिए स्वाद के लिए बार-बार ऊपर से नमक डालने और बहुत अधिक नमकीन चीजें खाने की आदत को कम करें।
बहुत ज्यादा नॉनवेज से भी बचें
अत्यधिक पशु प्रोटीन, खासकर मीट और ऑर्गन मीट का सेवन कुछ लोगों में किडनी स्टोन का खतरा बढ़ा सकता है। खासतौर पर यूरिक एसिड स्टोन में डाइट महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसलिए भोजन में प्रोटीन की मात्रा संतुलित रखें और डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह के अनुसार पशु प्रोटीन के साथ पौधों से मिलने वाले प्रोटीन को भी शामिल करें।
पालक और नट्स को लेकर रखें सावधानी
कैल्शियम ऑक्सलेट स्टोन की समस्या वाले लोगों को कुछ अधिक ऑक्सलेट वाले खाद्य पदार्थों की मात्रा कम करने की सलाह दी जा सकती है। पालक, मूंगफली, कुछ नट्स और गेहूं का चोकर इसके उदाहरण हैं। लेकिन हर व्यक्ति को इन चीजों को पूरी तरह बंद करने की जरूरत नहीं होती। कौन-सी चीज कितनी मात्रा में लेनी है, यह पथरी के प्रकार पर निर्भर करता है।
कैल्शियम पूरी तरह बंद करना सही नहीं
कैल्शियम स्टोन का नाम सुनकर दूध और अन्य कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थ छोड़ देना सही तरीका नहीं है। पर्याप्त मात्रा में आहार से मिलने वाला कैल्शियम कुछ मामलों में ऑक्सलेट के आंतों से अवशोषण को कम करने में मदद कर सकता है। इसलिए कैल्शियम का सेवन अपनी मर्जी से बंद करने के बजाय डॉक्टर की सलाह के अनुसार करें।
क्या खाएं और क्या कम करें?
पानी को अपनी दिनचर्या का अहम हिस्सा बनाएं। ताजे फल, सब्जियां और संतुलित आहार लें। नमक, अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड और जरूरत से ज्यादा पशु प्रोटीन को सीमित करें। अगर पहले किडनी स्टोन हो चुका है तो पथरी का प्रकार जानना बेहद जरूरी है, क्योंकि कैल्शियम ऑक्सलेट, कैल्शियम फॉस्फेट, यूरिक एसिड और अन्य प्रकार की पथरी में डाइट संबंधी सलाह अलग हो सकती है।
(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी विशेषज्ञ/डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)
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लेखक: (कीर्ति)
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