कर्नाटक के विज्ञान केंद्रों में छात्रों और इसरो वैज्ञानिकों की सीधी बातचीत कराने की पहल, मंत्री ने इसरो से मांगा सहयोग
बेंगलुरु, 9 सितंबर (आईएएनएस)। कर्नाटक के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अजय धरम सिंह ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) से राज्य के विज्ञान केंद्रों में छात्रों और वैज्ञानिकों के बीच सीधे संवाद कार्यक्रम आयोजित करने में सहयोग मांगा है। इस पहल का उद्देश्य विज्ञान की पढ़ाई को किताबों तक सीमित रखने के बजाय उसे व्यावहारिक और अनुभव आधारित बनाना है।
मंत्री ने इसरो अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन से मुलाकात के दौरान यह प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों के जरिए छात्र अंतरिक्ष विज्ञान, अनुसंधान, उपग्रह तकनीक और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में करियर की संभावनाओं के बारे में सीधे इसरो के वैज्ञानिकों से जानकारी हासिल कर सकेंगे।
अजय धरम सिंह ने कहा कि जब छात्रों को वैज्ञानिकों से सीधे बातचीत का अवसर मिलता है, तो विज्ञान केवल पाठ्यपुस्तक का विषय नहीं रह जाता, बल्कि भविष्य के अवसर के रूप में दिखाई देता है। इसरो वैज्ञानिकों के अनुभव और उपलब्धियां छात्रों में जिज्ञासा, शोध की सोच और बड़े लक्ष्य हासिल करने की प्रेरणा जगाती हैं।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार छात्रों के बीच विज्ञान को लोकप्रिय बनाने के लिए विज्ञान केंद्रों, मोबाइल डिजिटल प्लैनेटोरियम और दूरबीन आधारित शिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार कर रही है।
मंत्री के अनुसार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का मोबाइल डिजिटल प्लैनेटोरियम कार्यक्रम अब तक राज्य के 3,282 स्कूलों तक पहुंच चुका है और इससे 5.46 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं और शिक्षक लाभान्वित हुए हैं।
इसके अलावा, प्रोवाइडिंग एक्सेस टू टेलीस्कोप्स (पीएटी) कार्यक्रम के तहत कर्नाटक आवासीय शैक्षणिक संस्थान के स्कूलों और कॉलेजों को दूरबीन उपलब्ध कराई गई हैं तथा विज्ञान शिक्षकों को प्रशिक्षण भी दिया गया है।
उन्होंने कहा कि अगला कदम विज्ञान केंद्रों में इसरो वैज्ञानिक-छात्र संवाद कार्यक्रम शुरू करना है, ताकि अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी को छात्रों के लिए अधिक रोचक और सुलभ बनाया जा सके।
मंत्री ने कहा कि विज्ञान को केवल पढ़ाया नहीं, बल्कि दिखाया, समझाया और सवालों के जरिए अनुभव कराया जाना चाहिए। वैज्ञानिकों के साथ सीधा संवाद छात्रों में वैज्ञानिक सोच को मजबूत करेगा और भविष्य के वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं तथा तकनीकी विशेषज्ञों की नई पीढ़ी तैयार करने में मदद करेगा।
उन्होंने कहा कि इसरो के सहयोग से राज्य सरकार इन संवाद कार्यक्रमों को कर्नाटक के सभी विज्ञान केंद्रों तक पहुंचाना चाहती है, ताकि शहरों के साथ-साथ जिलों और तालुकों के छात्र भी वैज्ञानिकों से सीधे जुड़ सकें।
--आईएएनएस
डीएससी
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अमरावती अस्पताल अग्निकांड: तीन नवजातों की मौत पर पांच वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी निलंबित
मुंबई, 9 सितंबर (आईएएनएस)। महाराष्ट्र सरकार ने अमरावती जिला महिला अस्पताल की विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) में 24 अगस्त को लगी आग में तीन नवजात शिशुओं की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग के पांच वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित करने का आदेश दिया है।
निलंबित किए गए अधिकारियों में अकोला सर्कल के उप स्वास्थ्य सेवा निदेशक, अमरावती महिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक, अतिरिक्त जिला सिविल सर्जन (अमरावती), प्रशासनिक अधिकारी और अस्पताल के इलेक्ट्रीशियन शामिल हैं।
सरकार ने इन्हें प्रथम दृष्टि में निगरानी और पर्यवेक्षण में हुई लापरवाही के लिए जिम्मेदार माना है। राज्य सरकार का यह कदम एक उच्चस्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद उठाया गया है। जांच रिपोर्ट सरकार को सौंपे जाने के बाद सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
बता दें कि आग लगने की इस घटना के दौरान 36 नवजात शिशुओं को सुरक्षित बचाकर अन्य अस्पतालों में स्थानांतरित कर दिया गया था।
जांच समिति की रिपोर्ट में तकनीकी निरीक्षण और उपकरणों के रखरखाव में गंभीर लापरवाही सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, वेंटिलेटरों की समय पर सर्विसिंग नहीं की गई थी, फायर अलार्म और स्प्रिंकलर सिस्टम काम नहीं कर रहे थे, तथा फायर पंप हाउस बंद पाया गया।
रिपोर्ट में सामने आई लापरवाही, गैर-जिम्मेदाराना रवैये और निगरानी में विफलता को देखते हुए संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ महाराष्ट्र सिविल सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1979 के नियम-8 के तहत विभागीय कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके अलावा, संविदा कर्मचारियों के खिलाफ भी प्रशासनिक कार्रवाई के आदेश जारी किए गए हैं। साथ ही लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के जिम्मेदार अधिकारियों पर भी दंडात्मक कार्रवाई करने को कहा गया है।
जांच में एम/एस एओवी इंटरनेशनल एलएलपी को दोषी पाया गया है, जिसके बाद कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके अतिरिक्त, शिलार कंपनी की सेवाओं में भी प्रथम दृष्टया खामियां पाए जाने पर फॉरेंसिक रिपोर्ट जल्द उपलब्ध कराने और उसे भी ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू करने के आदेश दिए गए हैं।
भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए राज्य सरकार ने सरकारी अस्पतालों में सुरक्षा और संरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने का फैसला किया है।
सरकार ने सभी एसएनसीयू और एनआईसीयू में सीसीटीवी कैमरे लगाने तथा प्रत्येक अस्पताल में नियमित फायर सेफ्टी मॉक ड्रिल अनिवार्य करने के निर्देश दिए हैं।
इसके साथ ही अग्नि सुरक्षा, विद्युत सुरक्षा और चिकित्सा उपकरणों के रखरखाव से संबंधित मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) को सख्ती से लागू करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
स्वास्थ्य सेवा आयुक्त संजय काटकर को लोक निर्माण विभाग, विद्युत, अग्निशमन, बायोटेक्निकल और रखरखाव विभागों के साथ नियमित समीक्षा बैठकें करने और अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था पर प्रभावी निगरानी रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
राज्य के सभी जिला कलेक्टरों, जिला परिषदों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और नगर आयुक्तों को भी अपने-अपने क्षेत्रों के सभी अस्पतालों का विद्युत और अग्नि सुरक्षा ऑडिट तीन महीने के भीतर पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार ने यह भी कहा कि सार्वजनिक और निजी दोनों तरह के अस्पतालों में फायर सेफ्टी ऑडिट, निगरानी और अनुपालन रिपोर्टिंग सुनिश्चित की जाएगी।
वहीं, घटना के दौरान अपनी जान जोखिम में डालकर नवजात शिशुओं को बचाने और सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मानित करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
--आईएएनएस
एएमटी/डीकेपी
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