CBSE में कक्षा 6th के छात्रों को मिल सकती है बड़ी राहत, सुप्रीम कोर्ट ने त्रि-भाषा नियम पर बोर्ड से मांगा जवाब
Supreme Court On CBSE: देश भर के सीबीएसई स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए एक बहुत बड़ी खबर सामने आई है. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड को सुझाव दिया है कि वह इस मौजूदा शैक्षणिक सत्र में कक्षा 6 के छात्रों को तीन भाषाएं पढ़ने की अनिवार्यता से राहत देने पर गंभीरता से विचार करे. अदालत का साफ मानना है कि सत्र के बीच में अचानक नए नियम थोपने से नन्हे बच्चों पर मानसिक दबाव बढ़ता है. किसी भी नई व्यवस्था को जमीन पर उतारने से पहले स्कूलों की तैयारी और बच्चों की मानसिक स्थिति को समझना बेहद जरूरी होता है. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की विशेष पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए यह अहम बात कही है.
अदालत में सुनवाई और तारीख आगे बढ़ना
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को लेकर कई याचिकाएं दायर की गई थीं, जिनमें सीबीएसई की इस नई भाषा नीति को सीधे तौर पर चुनौती दी गई है. बुधवार को जब यह मामला अदालत के सामने आया, तो सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से सुनवाई को कुछ दिनों के लिए आगे बढ़ाने का आग्रह किया. उन्होंने पीठ को बताया कि इस मामले में अतिरिक्त सालिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी की मौजूदगी जरूरी है, जो फिलहाल उपलब्ध नहीं हैं. अदालत ने उनके इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए मामले की अगली तारीख सत्रह सितंबर तय कर दी. हालांकि, तारीख आगे बढ़ाने के साथ ही मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने केंद्र और बोर्ड को एक बहुत ही संवेदनशील और जरूरी मशविरा भी दे दिया.
कक्षा 6 के बच्चों को क्यों मिलनी चाहिए छूट
पीठ ने सालिसिटर जनरल से सीधे तौर पर कहा कि बोर्ड को इस पूरे साल के लिए कक्षा छह के बच्चों को कुछ ढील या समायोजन देने पर सोचना चाहिए. अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि बोर्ड ने कक्षा छह को इस नीति की शुरुआत के लिए चुना है, तो इस सत्र के बच्चों को इससे बाहर रखा जा सकता है. इस नियम को अगले साल से पूरी तैयारी के साथ लागू किया जा सकता है. अदालत ने पिछली सुनवाई के दौरान भी इस बात को रेखांकित किया था कि बच्चों को किसी भी हालत में तनाव या दबाव का सामना नहीं करना चाहिए. जब बच्चे एक कक्षा से दूसरी कक्षा में जाते हैं, तो उनके लिए पाठ्यक्रम का भार वैसे ही बढ़ जाता है. ऐसे में अचानक एक नई भाषा को अनिवार्य रूप से जोड़ देना उनके सीखने की स्वाभाविक गति को प्रभावित कर सकता है.
माता-पिता की चिंता और शिक्षकों की कमी का संकट
याचिकाकर्ताओं की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकीलों ने अदालत में इस बात पर जोर दिया कि मामले में बार-बार तारीख पड़ने से असमंजस की स्थिति बनी रहती है. बच्चों को साल के अंत में परीक्षाएं देनी हैं और पाठ्यक्रम तय न होने से माता-पिता दिन-रात चिंता में डूबे हुए हैं. इसके अलावा, अदालत ने इस बड़े संकट की ओर भी ध्यान दिलाया कि देश भर के स्कूलों में तीसरी भाषा पढ़ाने के लिए जरूरी शिक्षक और बुनियादी ढांचा मौजूद है भी या नहीं. कई स्कूलों में अलग-अलग भारतीय भाषाओं को पढ़ाने वाले योग्य शिक्षक ही नहीं हैं. जब तक पर्याप्त मानव संसाधन तैयार नहीं हो जाते, तब तक बच्चों पर कोई भी नया विषय जबरन थोपना सही नहीं ठहराया जा सकता.
सीबीएसई की त्रि-भाषा नीति का पूरा विवाद
दरअसल, यह पूरा विवाद सीबीएसई के उस परिपत्र के बाद शुरू हुआ, जिसमें नौवीं कक्षा तक के छात्रों के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य किया गया है. इस नियम के तहत छात्रों को कम से कम दो भारतीय भाषाएं पढ़ना जरूरी बनाया गया है, जिसे इसी साल एक जुलाई से लागू किया जाना था. याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि बिना किसी पूर्व सूचना और पर्याप्त तैयारी के इसे लागू करने से छात्रों के परीक्षा परिणाम और पढ़ाई दोनों पर बुरा असर पड़ेगा. सरकार की तरफ से सालिसिटर जनरल ने पीठ को भरोसा दिलाया है कि संबंधित अधिकारी अदालत के इस मानवीय सुझाव पर गंभीरता से विचार करेंगे. अब सबकी निगाहें सत्रह सितंबर की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि बोर्ड छोटे बच्चों को इस भारी भरकम दबाव से राहत देता है या नहीं.
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UP Special TET 2026: TET-CTET पास शिक्षकों को बड़ी राहत, नहीं देनी होगी दोबारा स्पेशल टीईटी परीक्षा
उत्तर प्रदेश में स्पेशल टीईटी (Special TET) 2026 को लेकर शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। योगी सरकार ने कार्यरत शिक्षकों और विशेष शिक्षकों के लिए अध्यापक पात्रता से जुड़ी प्रक्रिया को स्पष्ट कर दिया है।
अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग पार्थ सारथी सेन शर्मा की ओर से जारी निर्देशों के बाद उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने स्पेशल टीईटी का विज्ञापन जारी कर दिया है। इस परीक्षा का आयोजन प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर कार्यरत शिक्षकों तथा विशेष शिक्षकों (CwSN) के लिए किया जाएगा।
TET-CTET पास शिक्षकों को नहीं देना होगा दोबारा एग्जाम
स्पेशल टीईटी को लेकर सबसे बड़ी राहत उन शिक्षकों को मिली है, जो पहले ही TET या CTET उत्तीर्ण कर चुके हैं। जारी निर्देशों के अनुसार, ऐसे शिक्षकों के लिए स्पेशल टीईटी को दोबारा पास करना अनिवार्य नहीं होगा। वहीं, जिन शिक्षकों ने अभी तक TET या CTET उत्तीर्ण नहीं किया है, उन्हें निर्धारित विज्ञापन के तहत रजिस्ट्रेशन और आवेदन कर परीक्षा में शामिल होना होगा।
3 नवंबर को होगी स्पेशल टीईटी
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक स्पेशल टीईटी परीक्षा 3 नवंबर 2026 को आयोजित की जाएगी। इसके लिए विज्ञापन 3 सितंबर 2026 को जारी किया गया था। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन/OTR और आवेदन प्रक्रिया 5 सितंबर 2026 से शुरू हो चुकी है।
आवेदन से जुड़ी प्रमुख तारीखें इस प्रकार हैं:
प्रक्रिया तारीख
विज्ञापन जारी 3 सितंबर 2026
ऑनलाइन OTR/आवेदन शुरू 5 सितंबर 2026
आवेदन शुल्क जमा करने की अंतिम तारीख 4 अक्टूबर 2026
आवेदन में संशोधन की अंतिम तारीख 8 अक्टूबर 2026
स्पेशल टीईटी परीक्षा 3 नवंबर 2026
कौन-कौन से शिक्षक कर सकते हैं आवेदन?
प्राथमिक स्तर पर उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों, स्थानीय निकायों के विद्यालयों, राज्य सरकार/बेसिक शिक्षा परिषद से मान्यता या संबद्धता प्राप्त विद्यालयों, राज्य सरकार से सहायता प्राप्त विद्यालयों और विशेष एजुकेटर्स के कक्षा 1 से 5 तक के शिक्षक पात्र होंगे।
वहीं उच्च प्राथमिक स्तर पर बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों, स्थानीय निकायों, मान्यता या संबद्धता प्राप्त विद्यालयों, राज्य सरकार से सहायता प्राप्त विद्यालयों और विशेष एजुकेटर्स के कक्षा 6 से 8 तक के शिक्षक परीक्षा में शामिल हो सकेंगे।
जिन शिक्षकों ने TET-CTET नहीं किया, उनके लिए क्या?
जिन कार्यरत शिक्षकों ने अब तक TET या CTET उत्तीर्ण नहीं किया है, उन्हें स्पेशल टीईटी के लिए निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पंजीकरण कर आवेदन करना होगा।
यानी सरकार की ओर से पात्र शिक्षकों को उनकी स्थिति के आधार पर प्रक्रिया पूरी करने का अवसर दिया जा रहा है। ऐसे अभ्यर्थियों को आवेदन की अंतिम तारीख का विशेष ध्यान रखना होगा।
शिक्षकों तक जानकारी पहुंचाने के निर्देश
शिक्षा विभाग ने संबंधित बेसिक शिक्षा अधिकारियों को सभी पात्र शिक्षकों तक स्पेशल टीईटी से जुड़ी जानकारी पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पात्र शिक्षक समय रहते OTR, आवेदन और शुल्क जमा करने की प्रक्रिया पूरी कर सकें।
इस व्यवस्था से कार्यरत शिक्षकों और विशेष शिक्षकों के लिए पात्रता को लेकर स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो गई है। TET/CTET पहले से पास कर चुके शिक्षकों को दोबारा परीक्षा देने की अनिवार्यता से राहत दी गई है, जबकि बिना TET/CTET वाले पात्र शिक्षकों के लिए Special TET में शामिल होने का रास्ता खुला है।
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