Uttarakhand News: विकास की नई तस्वीर गढ़ रहा राज्य संपत्ति विभाग, पहाड़ से राजधानी तक आधुनिक सुविधाओं पर जोर
Uttarakhand News: उत्तराखंड में सरकारी संपत्तियों की सूरत बदलने के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां शुरू हो गई हैं. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विजन के अनुसार राज्य सरकार अब ऐसे भवनों के निर्माण पर जोर दे रही है जो सिर्फ ईंट-पत्थर के ढांचे न हों, बल्कि आधुनिक तकनीक, पर्यावरण संरक्षण और लंबी उपयोगिता का बेहतरीन नमूना बनें. इसी क्रम में राज्य संपत्ति विभाग ने दो बड़ी योजनाओं पर तेजी से काम आगे बढ़ाया है. रुद्रप्रयाग जिले के रतूड़ा में एक भव्य राज्य अतिथि गृह बनाने की योजना है, वहीं राजधानी देहरादून के रेसकोर्स में सरकारी कर्मचारियों के लिए 48 नए फ्लैट्स बनाए जाएंगे. दोनों ही योजनाओं में आधुनिक सुविधाओं के साथ पर्यावरण का पूरा ध्यान रखा गया है.
रतूड़ा में तैयार होगा अत्याधुनिक राज्य अतिथि गृह
पहाड़ी क्षेत्र रुद्रप्रयाग के रतूड़ा में बनने वाले नए राज्य अतिथि गृह के लिए करीब 48.84 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत तय की गई है. इस परियोजना की रूपरेखा इस तरह बनाई गई है कि यह आने वाले कई दशकों की जरूरतों को पूरा कर सके. यह परिसर सिर्फ ठहरने की जगह नहीं होगा, बल्कि पर्वतीय क्षेत्र में शासन और प्रशासन के लिए एक मजबूत संवाद केंद्र के तौर पर काम करेगा. यहां बनने वाले बड़े हॉल को पूरी तरह हाईटेक बनाया जाएगा, जिसमें बड़े आकार के आधुनिक डिस्प्ले और बेहतरीन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सिस्टम मौजूद रहेंगे. इससे शासन स्तर की जरूरी बैठकें सीधे पहाड़ से ही आधुनिक संचार माध्यमों के जरिए संचालित हो सकेंगी.
पर्यावरण नियमों का कड़ाई से होगा पालन
पहाड़ों के नाजुक पर्यावरण को देखते हुए रतूड़ा के इस निर्माण कार्य में सभी नियमों का कड़ाई से पालन करने का फैसला लिया गया है. कार्यदायी संस्था लोक निर्माण विभाग को साफ तौर पर कहा गया है कि निर्माण स्थल की दूरी नदी से कम से कम 200 मीटर होनी चाहिए, जिससे राष्ट्रीय हरित अधिकरण के नियमों का पूरा पालन हो सके. इसके अतिरिक्त संबंधित अनापत्ति प्रमाण पत्र को भी सरकारी फाइलों में शामिल करना अनिवार्य किया गया है. भवन की पहचान को अलग और सुंदर रूप देने के लिए मुख्य द्वार और मुख्य इमारत पर एक बड़ा और आकर्षक लोगो लगाया जाएगा, जिससे इसकी पहचान दूर से ही स्थापित हो सके.
देहरादून के रेसकोर्स में बनेंगे 48 नए सरकारी आवास
राजधानी देहरादून के रेसकोर्स क्षेत्र में स्थित पुरानी और जर्जर हो चुकी ऑफिसर्स कॉलोनी की जगह नए आवासीय भवनों का निर्माण होगा. इस खाली जमीन पर 48 नए श्रेणी-3 आवास बनाने के लिए लगभग 28.07 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है. यह कदम सरकारी कर्मचारियों के लिए आधुनिक और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उठाया गया है. इस परियोजना की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें इमारतों के बाहरी हिस्से में ऐसी निर्माण सामग्री और फिनिशिंग का उपयोग करने का फैसला लिया गया है, जिससे भविष्य में बार-बार रंग-रोगन या मरम्मत का भारी खर्च न उठाना पड़े. इससे सरकारी खजाने पर रखरखाव का बोझ काफी कम हो जाएगा.
रेन वाटर हार्वेस्टिंग और ग्रीन बिल्डिंग बनेगी पहचान
देहरादून की इस आवासीय परियोजना को पर्यावरण के अनुकूल स्वरूप देने के लिए पूरी तरह ग्रीन बिल्डिंग मानकों पर ढाला जाएगा. परिसर में पानी की बचत और भूजल स्तर को सुधारने के लिए आधुनिक रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य किया गया है. इस व्यवस्था से बारिश के पानी को सहेजकर दोबारा इस्तेमाल किया जा सकेगा. इसके अलावा पूरी कॉलोनी की सुंदरता और पहचान को बेहतर बनाने के लिए प्रवेश द्वार पर आकर्षक नाम पट्टिकाएं लगाने की भी तैयारी है. यह व्यवस्था सरकारी कॉलोनियों को एक व्यवस्थित और सुंदर स्वरूप प्रदान करेगी.
पहाड़ और मैदान के संतुलित विकास की रणनीति
राज्य सरकार की यह पहल दर्शाती है कि निर्माण कार्य अब केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं हैं. पहाड़ के रतूड़ा से लेकर मैदान के देहरादून तक सरकारी संपत्तियों को आधुनिक तकनीक, कम रखरखाव और टिकाऊ मॉडल के आधार पर विकसित किया जा रहा है. सचिव आवास एवं राज्य संपत्ति डॉ. आर. राजेश कुमार ने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में इन सभी निर्माण कार्यों में पारदर्शिता, गुणवत्ता और तय समयसीमा का पूरा ध्यान रखा जाएगा. साथ ही पर्वतीय क्षेत्रों में स्थानीय वास्तुशैली को भी प्रमुखता दी जाएगी ताकि राज्य की पारंपरिक पहचान बनी रहे. आने वाले समय में ये परियोजनाएं धरातल पर उतरकर सरकारी संपत्तियों के प्रबंधन का एक नया उदाहरण पेश करेंगी.
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मध्य प्रदेश : प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान में 43 गर्भवती महिलाओं की जांच, 15 हाई रिस्क केस चिन्हित
बुरहानपुर, 9 सितंबर (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में जिला चिकित्सालय की एएनसी ओपीडी में बुधवार को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत विशेष स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किया गया। अभियान के दौरान 43 गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच की गई, जिसमें 15 महिलाओं को उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था के रूप में चिन्हित किया गया।
स्वास्थ्यकर्मियों ने चिन्हित महिलाओं और उनके परिजनों को समय पर उपचार, नियमित फॉलोअप, सुरक्षित एवं संस्थागत प्रसव तथा मातृ-शिशु स्वास्थ्य की सुरक्षा को लेकर आवश्यक परामर्श दिए। गर्भवती महिलाओं को शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य, गर्भावस्था के दौरान होने वाली संभावित जटिलताओं तथा जरूरी सावधानियों की जानकारी भी दी गई।
आवश्यकता होने पर मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहायता के लिए मनहित ऐप और टोल-फ्री हेल्पलाइन 14416 की जानकारी दी गई। दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाली उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को बर्थ वेटिंग एरिया यूनिट की सुविधा के बारे में भी बताया गया।
कार्यक्रम में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. पूनम सिंघल, डॉ. मोइना अंसारी सहित चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ और आशा कार्यकर्ता मौजूद रहे। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत हर महीने की 9 और 25 तारीख को विशेष प्रसव पूर्व जांच की जाती है।
आईएएनएस से बातचीत में जिला अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मोइना अंसारी ने बताया कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली गर्भवती महिलाओं के लिए बेहद लाभकारी है। उन्होंने इसे एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य कार्यक्रम बताया। यह ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली गर्भवती महिलाओं के लिए बहुत ज्यादा फायदेमंद है। यह बहुत ही महत्वपूर्ण कार्यक्रम है। हम गर्भवती महिलाओं की सभी जरूरी जांच करते हैं। इस दौरान हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं को चिन्हित किया जाता है, ताकि उन्हें बेहतर इलाज मुहैया कराया जा सके और जरूरत पड़ने पर उच्च स्वास्थ्य केंद्र में रेफर करने की सुविधा दी जा सके।
जिला स्वास्थ्य समिति के स्तर पर भी इस दिशा में लगातार प्रयास किए जाते हैं, ताकि मातृ-शिशु मृत्यु दर को कम किया जा सके। स्वास्थ्य विभाग की कोशिश गर्भवती महिलाओं को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की है।
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान की जिला प्रभारी एवं सलाहकार सीमा डेविड ने कहा कि यह अभियान हर महीने की 9 और 25 तारीख को आयोजित किया जाता है। इसका आयोजन जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर किया जाता है। इस अभियान के जरिए मातृ और शिशु मृत्यु दर को कम करने में काफी मदद मिली है।
--आईएएनएस
डीकेएम/एबीएम
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