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मध्य प्रदेश : प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान में 43 गर्भवती महिलाओं की जांच, 15 हाई रिस्क केस चिन्हित

बुरहानपुर, 9 सितंबर (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में जिला चिकित्सालय की एएनसी ओपीडी में बुधवार को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत विशेष स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किया गया। अभियान के दौरान 43 गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच की गई, जिसमें 15 महिलाओं को उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था के रूप में चिन्हित किया गया।

स्वास्थ्यकर्मियों ने चिन्हित महिलाओं और उनके परिजनों को समय पर उपचार, नियमित फॉलोअप, सुरक्षित एवं संस्थागत प्रसव तथा मातृ-शिशु स्वास्थ्य की सुरक्षा को लेकर आवश्यक परामर्श दिए। गर्भवती महिलाओं को शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य, गर्भावस्था के दौरान होने वाली संभावित जटिलताओं तथा जरूरी सावधानियों की जानकारी भी दी गई।

आवश्यकता होने पर मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहायता के लिए मनहित ऐप और टोल-फ्री हेल्पलाइन 14416 की जानकारी दी गई। दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाली उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को बर्थ वेटिंग एरिया यूनिट की सुविधा के बारे में भी बताया गया।

कार्यक्रम में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. पूनम सिंघल, डॉ. मोइना अंसारी सहित चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ और आशा कार्यकर्ता मौजूद रहे। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत हर महीने की 9 और 25 तारीख को विशेष प्रसव पूर्व जांच की जाती है।

आईएएनएस से बातचीत में जिला अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मोइना अंसारी ने बताया कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली गर्भवती महिलाओं के लिए बेहद लाभकारी है। उन्होंने इसे एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य कार्यक्रम बताया। यह ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली गर्भवती महिलाओं के लिए बहुत ज्यादा फायदेमंद है। यह बहुत ही महत्वपूर्ण कार्यक्रम है। हम गर्भवती महिलाओं की सभी जरूरी जांच करते हैं। इस दौरान हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं को चिन्हित किया जाता है, ताकि उन्हें बेहतर इलाज मुहैया कराया जा सके और जरूरत पड़ने पर उच्च स्वास्थ्य केंद्र में रेफर करने की सुविधा दी जा सके।

जिला स्वास्थ्य समिति के स्तर पर भी इस दिशा में लगातार प्रयास किए जाते हैं, ताकि मातृ-शिशु मृत्यु दर को कम किया जा सके। स्वास्थ्य विभाग की कोशिश गर्भवती महिलाओं को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की है।

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान की जिला प्रभारी एवं सलाहकार सीमा डेविड ने कहा कि यह अभियान हर महीने की 9 और 25 तारीख को आयोजित किया जाता है। इसका आयोजन जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर किया जाता है। इस अभियान के जरिए मातृ और शिशु मृत्यु दर को कम करने में काफी मदद मिली है।

--आईएएनएस

डीकेएम/एबीएम

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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BCCI से सुप्रीम कोर्ट का तीखा सवाल, पूछा - आप पर नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट क्यों न लागू हो? 2 राज्य संघ भी AGM से बाहर

भारतीय क्रिकेट के मैनेजमेंट को लेकर एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में हलचल तेज हो गई है. देश की सर्वोच्च अदालत ने BCCI और राज्य क्रिकेट संघों से एक सीधा और बड़ा सवाल पूछा है. अदालत का कहना है कि जब देश में 'नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट, 2025' लागू हो चुका है, तो फिर क्रिकेट से जुड़ी इन संस्थाओं को इस कानून के दायरे से अलग क्यों रखा जाए? अदालत ने क्रिकेट बोर्ड के वकीलों को इस पूरे मामले पर अपना रुख साफ करने के कड़े निर्देश दिए हैं. दरअसल, आज कोर्ट की इस तल्खी के साथ-साथ आईपीएल गवर्निंग काउंसिल के चुनाव और आगामी वार्षिक आम बैठक (AGM) को लेकर भी तीन बड़े फैसले सामने आए हैं. माना जा रहा है कि इन हालिया घटनाक्रमों का आने वाले दिनों में भारतीय क्रिकेट के पूरे प्रशासनिक ढांचे पर बहुत गहरा असर पड़ेगा.

'नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट' के दायरे में क्यों न आए BCCI - सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने BCCI और देश के सभी राज्य क्रिकेट संघों को नोटिस भेजकर पूछा है कि उन्हें 'नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट, 2025' के तहत क्यों नहीं लाया जाना चाहिए? चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने आज बोर्ड के वकीलों को इस पर निर्देश लेने को कहा है. अगर बीसीसीआई भारत सरकार के इस नए कानून के दायरे में आता है, तो बोर्ड सीधे RTI (सूचना का अधिकार) के तहत आ जाएगा और खेल प्रशासन में सरकार की निगरानी बढ़ जाएगी. 

अदालत की इस सख्ती के पीछे का मकसद खेल संगठनों में गड़बड़ियों को रोकना और पारदर्शिता लाना है. अगर बीसीसीआई इस नए कानून के दायरे में आ जाता है, तो उसके लिए मनमानी करना मुश्किल होगा. इसके बाद बोर्ड के रोजमर्रा के कामकाज, पैसों के लेन-देन और सभी बड़े प्रशासनिक फैसलों पर सरकार और कानून की सीधी नजर रहेगी. अब हर किसी की नजर इस बात पर है कि बीसीसीआई कोर्ट में इस पर क्या जवाब देता है. 

बड़ौदा और जम्मू-कश्मीर क्रिकेट बोर्ड पर चुनावी अधिकारी का कड़ा एक्शन

बीसीसीआई की बड़ी बैठक से पहले बड़ौदा और जम्मू-कश्मीर क्रिकेट बोर्ड को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है. बोर्ड के चुनाव अधिकारी एके जोटी ने नियमों और कागजी कमियों के चलते यह कड़ा फैसला लिया है. बड़ौदा के प्रणव अमीन और जम्मू-कश्मीर के देश रतन दुबे के नामांकन खारिज होने की वजह से इस बार दोनों राज्यों के प्रतिनिधि न तो बीसीसीआई की इस सालाना बैठक (AGM) में हिस्सा ले पाएंगे और न ही वोट डाल सकेंगे.

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अरुण धूमल और खैरुल जमाल मजूमदार का निर्विरोध चुना जाना तय

इंडियन प्रीमियर लीग के मैनेजमेंट में स्थिरता बनी रहने की उम्मीद है. हिमाचल प्रदेश के अरुण सिंह धूमल और मिजोरम के खैरुल जमाल मजूमदार ने IPL गवर्निंग काउंसिल के पदों के लिए अपना नामांकन भरा है. उनके खिलाफ कोई और मजबूत उम्मीदवार नहीं है, इसलिए उनका दोबारा काउंसिल में चुना जाना लगभग तय माना जा रहा है. अरुण धूमल के बने रहने से IPL के अगले सीजन की योजनाओं और आयोजनों को बिना किसी रुकावट के जारी रखने में मदद मिलेगी. 

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