OYO की पेरेंट कंपनी Prism चालू वित्त वर्ष में लाएगी 6650 करोड़ का IPO
नयी दिल्ली, नौ सितंबर वैश्चिक यात्रा-प्रौद्योगिकी मंच ओयो की मूल कंपनी प्रिज्म चालू वित्त वर्ष में 6,650 करोड़ रुपये का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) लाने की तैयारी कर रही है। कंपनी के संस्थापक रितेश अग्रवाल ने यह जानकारी दी। प्रिज्म के संस्थापक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) रितेश अग्रवाल ने ‘ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026’ से इतर ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘उम्मीद है कि हम चालू वित्त वर्ष में ही आईपीओ पेश करेंगे।
आईपीओ लाने से पहले हम मूल्य निर्धारण पर ध्यान देंगे।’’ कंपनी ने दिसंबर, 2025 में गोपनीय माध्यम से आईपीओ के लिए दस्तावेजों का मसौदा दाखिल किया था। इसके बाद उसने 30 जून, 2026 को भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास अद्यतन मसौदा दस्तावेज पेश किया। प्रस्तावित आईपीओ में 6,650 करोड़ रुपये तक के नए शेयर जारी किए जाएंगे।
इसमें मौजूदा शेयरधारकों की ओर से शेयरों की बिक्री पेशकश (ओएफएस) का कोई हिस्सा नहीं होगा। दस्तावेजों के अनुसार, आईपीओ से प्राप्त शुद्ध राशि में से 4,987.5 करोड़ रुपये का इस्तेमाल कंपनी के बकाया कर्ज के भुगतान के लिए किया जाएगा। शेष राशि का उपयोग सामान्य कारोबारी जरूरतों के लिए किया जाएगा।
इस बीच, अग्रवाल ने कहा कि ओयो को नासिक में होने वाले आगामी सिंहस्थ कुंभ के दौरान पर्यटन गतिविधियों में जोरदार बढ़ोतरी की उम्मीद है। उन्होंने इसकी तुलना प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ से करते हुए इसे अबतक के सबसे बड़े ऐसे आयोजनों में से एक बताया।
Razorpay CEO बोले, तत्काल भुगतान से भारत में बनेंगी अरबों डॉलर की Fintech कंपनियां
नयी दिल्ली, नौ सितंबर रेजरपे के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) हर्षिल माथुर ने बुधवार को कहा कि तत्काल भुगतान के क्षेत्र में भारत का नेतृत्व ऐसी कई अरब डॉलर की वित्तीय प्रौद्योगिकी कंपनियों के उभरने का रास्ता खोल सकता है, जो वैश्विक बाजारों में सेवाएं दे सकेंगी। ‘ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026’ में एक सत्र के दौरान माथुर ने कहा कि इंटरनेट के क्षेत्र में अमेरिका के नेतृत्व के कारण वहां गूगल, अमेजन जैसी बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियां उभरीं। इसी तरह भारत के वित्तीय प्रौद्योगिकी (फिनटेक) परिवेश का लाभ स्थानीय कंपनियां उठा सकती हैं और वैश्विक स्तर पर बड़ी कंपनियों के रूप में उभर सकती हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘हमें गर्व है कि दुनिया में होने वाले सभी तत्काल भुगतान में से 49 प्रतिशत भारत के जरिये हो रहे हैं और यह अच्छी बात है। लेकिन मैं उम्मीद करता हूं कि दुनिया के दूसरे हिस्से भी इस वृद्धि का बड़ा लाभ उठाएं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘तत्काल भुगतान भारतीय कंपनियों के लिए दूसरे देशों में जाकर अपनी वृद्धि दर्ज करने का बड़ा अवसर पैदा करने वाला है। मेरा मानना है कि भारत से कई बड़ी, अरबों डॉलर की कंपनियां उभर सकती हैं क्योंकि वे दुनिया के दूसरे हिस्सों में अपनी वृद्धि का लाभ उठा सकेंगी।’’ माथुर ने कहा कि भारत के पास एक अनूठा अवसर है, जहां नीति-निर्माताओं और नियामकों ने बुनियादी ढांचा तैयार किया तथा निजी कंपनियों ने यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) जैसी प्रणालियों के आधार पर समाधान विकसित किए।
उन्होंने कहा कि किसी अन्य देश में इस तरह की व्यवस्था नहीं है। माथुर ने कहा, ‘‘कार्ड की पहुंच अभी उतनी व्यापक नहीं है, जिससे भारत के सामने मौजूद एक बड़ी समस्या या स्थिति पैदा होती है। इसी स्थिति ने यूपीआई को आगे बढ़ाने और उसके विकास में मदद की।
मेरा मानना है कि इन बाजारों में भी ऐसे ही कई तत्व मौजूद हैं।’’ व्यापार में कृत्रिम मेधा (एआई) का लाभ उठाने के बारे में पूछे जाने पर माथुर ने कहा कि हर नई प्रौद्योगिकी अपने साथ अवसर और जोखिम लेकर आती है। माथुर ने कहा कि इंटरनेट ने भी अपनी तरह की कई चुनौतियां पैदा की थीं, लेकिन प्रौद्योगिकी के जरिये उनका समाधान किया गया। उन्होंने कहा, ‘‘इसी तरह, जब कोई नई प्रौद्योगिकी जोखिम पैदा करती है तो उसका बेहतर समाधान भी प्रौद्योगिकी के जरिये ही किया जा सकता है।
इसका मतलब यह नहीं है कि हम इसकी गति धीमी कर दें बल्कि हमें बचाव के लिए प्रौद्योगिकी विकसित करने के प्रयास भी तेज करने चाहिए।
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