भारत की एफआईयू ने पीएमएलए के गैर-अनुपालन को लेकर 15 क्रिप्टो प्लेटफॉर्म्स को नोटिस जारी किए
नई दिल्ली, 9 सितंबर (आईएएनएस)। भारत की फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट (एफआईयू) ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के गैर-अनुपालन के लिए 15 वर्चुअल डिजिटल एसेट सर्विस प्रोवाइडर्स को नोटिस जारी किए हैं। यह जानकारी बुधवार को जारी बयान में दी गई।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, एफआईयू-इंडिया के डायरेक्टर ने उन संस्थाओं के खिलाफ अनुपालन कार्रवाई के तहत ये नोटिस जारी किए हैं, जो जरूरी शर्तों को पूरा किए बिना काम कर रही थीं।
इन संस्थाओं में वीक्स, ब्लोफिन, रेजोरेक्स, बिटयूनिक्स , डिजीफाइनेंस, टूबीट, एक्सटी.कॉम, लाटोकन, वू एक्स, पायनिक्स, चेंज नाउ, सिंपल स्वैप, फिक्स्डफ्लोट, व्हाइटबीआईटी और गार्डेरियन शामिल हैं।
मंत्रालय ने बताया कि एफआईयू डायरेक्टर ने भारत के सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत नोडल ऑफिसर के तौर पर नोटिस जारी किए हैं। इन नोटिस में 15 संस्थाओं से जुड़े ऐप्स और यूआरएल को पब्लिक एक्सेस से हटाने के लिए कहा गया है।
मंत्रालय ने आगे कहा कि ये प्लेटफॉर्म भारत के पीएमएलए से संबंधित नियमों का पालन किए बिना गैर-कानूनी तरीके से चल रहे थे।
इसके अलावा, मार्च 2023 में वर्चुअल डिजिटल एसेट सर्विस प्रोवाइडर्स को भारत के पीएमएलए और आतंकवाद के वित्तपोषण-रोधी ढांचे के दायरे में लाया गया था।
भारत में काम करने वाले वीडीए सर्विस प्रोवाइडर्स (चाहे वे विदेशी हों या घरेलू) के लिए एफआईयू-इंडिया के साथ रिपोर्टिंग संस्थाओं के तौर पर रजिस्टर करना जरूरी है, अगर वे वर्चुअल डिजिटल एसेट्स को फिएट करेंसी के बदले एक्सचेंज करने, डिजिटल एसेट्स को ट्रांसफर करने या कस्टडी या एडमिनिस्ट्रेशन सर्विस देने जैसी गतिविधियां करते हैं।
मंत्रालय ने कहा कि ये जिम्मेदारियां गतिविधियों पर आधारित हैं और ये तब भी लागू होती हैं, जब किसी कंपनी की भारत में कोई फिजिकल मौजूदगी न हो।
इसके अलावा, रजिस्टर्ड वीडीए सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए पीएमएलए और उसके तहत बने नियमों के अनुसार रिपोर्टिंग, रिकॉर्ड रखने और दूसरी जिम्मेदारियों का पालन करना जरूरी है।
साथ ही, वित्त मंत्रालय ने लोगों को यह भी चेतावनी दी कि क्रिप्टो प्रोडक्ट्स और नॉन-फंजिबल टोकन (एफएफटी) रेगुलेटेड नहीं हैं और इनमें बहुत ज्यादा जोखिम हो सकता है।
मंत्रालय ने कहा, ऐसे ट्रांजैक्शन से होने वाले किसी भी नुकसान के लिए कोई रेगुलेटरी उपाय नहीं है।
--आईएएनएस
एबीएस
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सरकार की तैयारी, झारखंड में आएगा 1 लाख करोड़ का निवेश! नई नीति से 25 हजार से ज्यादा रोजगार होंगे पैदा
Jharkhand Government: झारखंड सरकार राज्य में निवेश और रोजगार बढ़ाने के लिए दो नई औद्योगिक नीतियां लागू करने की तैयारी कर रही है. सरकार झारखंड टेक्सटाइल, परिधान एवं फुटवियर नीति और झारखंड औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति को नए रूप में फिर से लागू करेगी. पुरानी दोनों नीतियों की अवधि खत्म हो चुकी है, इसलिए उनके स्थान पर नई नीतियां लाई जा रही हैं. उद्योग विभाग ने दोनों नीतियों का ड्राफ्ट पहले ही जारी कर दिया है. इस पर हितधारकों से सुझाव भी मांगे गए थे. अधिकारियों के अनुसार, मिले सुझावों को नई नीति में शामिल किया जाएगा. उम्मीद है कि अगले पखवाड़े तक दोनों नीतियों को अंतिम रूप दे दिया जाएगा.
एक लाख करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य
सरकार का लक्ष्य निवेशक-अनुकूल नीतियों के जरिए झारखंड में करीब एक लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करना है. इसके साथ ही 25 हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार देने की योजना है. औद्योगिक विकास को गति देने के लिए झारखंड औद्योगिक एवं निवेश प्रोत्साहन नीति (JIIPP) 2026 का मसौदा भी जारी किया गया है.
एमएसएमई और बड़े उद्योगों को सब्सिडी
नई औद्योगिक नीति में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को स्थिर पूंजी निवेश का 20 प्रतिशत, अधिकतम 15 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी देने का प्रस्ताव है. वहीं गैर-एमएसएमई इकाइयों को 25 प्रतिशत, अधिकतम 30 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी मिल सकती है. एससी, एसटी, महिला और दिव्यांग उद्यमियों को इसके अलावा 5 प्रतिशत अतिरिक्त लाभ देने का प्रावधान है.
टेक्सटाइल और फुटवियर उद्योग को बढ़ावा
प्रस्तावित टेक्सटाइल नीति वर्ष 2016-2021 की पुरानी वस्त्र नीति की अगली कड़ी है. पिछली नीति के दौरान झारखंड में करीब 500 से 1,000 करोड़ रुपये का निवेश आया था और 10 हजार से 15 हजार प्रत्यक्ष रोजगार मिले थे. नई नीति में योग्य इकाइयों को स्थिर पूंजी निवेश का 20 प्रतिशत, अधिकतम 50 करोड़ रुपये तक सब्सिडी देने का प्रस्ताव है. फुटवियर और तकनीकी वस्त्र क्षेत्र को 5 प्रतिशत अतिरिक्त लाभ मिलेगा. एससी, एसटी, महिला और दिव्यांग उद्यमियों को भी 5 प्रतिशत अतिरिक्त सब्सिडी मिलेगी. इस तरह अधिकतम प्रभावी सब्सिडी 35 प्रतिशत तक हो सकती है. इसके अलावा बैंक ऋण पर 7 प्रतिशत सालाना ब्याज या ब्याज दर का 50 प्रतिशत, अधिकतम 3 करोड़ रुपये तक, पांच साल के लिए सहायता दी जाएगी.
बिजली और एसजीएसटी में राहत
नई नीति में पहले सात वर्षों तक 100 प्रतिशत एसजीएसटी प्रतिपूर्ति का प्रस्ताव है. इसके बाद अगले तीन वर्षों तक 40 प्रतिशत प्रतिपूर्ति दी जा सकती है. पांच वर्षों तक बिजली टैरिफ की की 50 प्रतिशत प्रतिपूर्ति और विद्युत कर की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति का प्रावधान है. नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने वाली इकाइयों को विद्युत कर की सुविधा सात साल तक मिल सकती है. स्टांप ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क की भी 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति का प्रस्ताव है.
रोजगार और कौशल विकास पर जोर
नई नीति में रोजगार बढ़ाने और कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है. पुरुष कर्मचारियों के लिए 5,000 रुपये और महिला कर्मचारियों के लिए 6,000 रुपये प्रति माह वेतन सब्सिडी का प्रावधान है. एससी, एसटी और दिव्यांग कर्मचारियों को अतिरिक्त 1,000 रुपये मिलेंगे. पिछड़े जिलों यानी जोन-3 में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए भी 1,000 रुपये अतिरिक्त सहायता का प्रस्ताव है. प्रत्येक प्रशिक्षु को 13,000 रुपये तक की एकमुश्त प्रशिक्षण सहायता मिलेगी. नियोक्ता के ईपीएफ और ईएसआई योगदान की भी 1,000 रुपये प्रति व्यक्ति प्रति माह तक प्रतिपूर्ति की जाएगी.
पिछड़े क्षेत्रों पर खास ध्यान
नीति में संताल परगना के औद्योगिक विकास पर विशेष जोर दिया गया है. राज्य के जिलों को तीन जोन में बांटकर पिछड़े क्षेत्रों में उद्योग लगाने को प्रोत्साहित किया जाएगा. टेक्सटाइल और अपैरल पार्कों के पास डॉर्मिटरी निर्माण के लिए भूमि सहायता, छात्रावास के लिए 50 लाख रुपये तक की मदद और मंडी शुल्क में छूट भी दी जाएगी. नई नीति में पीएम मित्रा, उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI), समर्थ और राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन जैसी केंद्र सरकार की योजनाओं के साथ तालमेल बनाने की भी तैयारी है. इससे झारखंड में टेक्सटाइल, फुटवियर और अन्य उद्योगों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
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