सरकार की तैयारी, झारखंड में आएगा 1 लाख करोड़ का निवेश! नई नीति से 25 हजार से ज्यादा रोजगार होंगे पैदा
Jharkhand Government: झारखंड सरकार राज्य में निवेश और रोजगार बढ़ाने के लिए दो नई औद्योगिक नीतियां लागू करने की तैयारी कर रही है. सरकार झारखंड टेक्सटाइल, परिधान एवं फुटवियर नीति और झारखंड औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति को नए रूप में फिर से लागू करेगी. पुरानी दोनों नीतियों की अवधि खत्म हो चुकी है, इसलिए उनके स्थान पर नई नीतियां लाई जा रही हैं. उद्योग विभाग ने दोनों नीतियों का ड्राफ्ट पहले ही जारी कर दिया है. इस पर हितधारकों से सुझाव भी मांगे गए थे. अधिकारियों के अनुसार, मिले सुझावों को नई नीति में शामिल किया जाएगा. उम्मीद है कि अगले पखवाड़े तक दोनों नीतियों को अंतिम रूप दे दिया जाएगा.
एक लाख करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य
सरकार का लक्ष्य निवेशक-अनुकूल नीतियों के जरिए झारखंड में करीब एक लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करना है. इसके साथ ही 25 हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार देने की योजना है. औद्योगिक विकास को गति देने के लिए झारखंड औद्योगिक एवं निवेश प्रोत्साहन नीति (JIIPP) 2026 का मसौदा भी जारी किया गया है.
एमएसएमई और बड़े उद्योगों को सब्सिडी
नई औद्योगिक नीति में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को स्थिर पूंजी निवेश का 20 प्रतिशत, अधिकतम 15 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी देने का प्रस्ताव है. वहीं गैर-एमएसएमई इकाइयों को 25 प्रतिशत, अधिकतम 30 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी मिल सकती है. एससी, एसटी, महिला और दिव्यांग उद्यमियों को इसके अलावा 5 प्रतिशत अतिरिक्त लाभ देने का प्रावधान है.
टेक्सटाइल और फुटवियर उद्योग को बढ़ावा
प्रस्तावित टेक्सटाइल नीति वर्ष 2016-2021 की पुरानी वस्त्र नीति की अगली कड़ी है. पिछली नीति के दौरान झारखंड में करीब 500 से 1,000 करोड़ रुपये का निवेश आया था और 10 हजार से 15 हजार प्रत्यक्ष रोजगार मिले थे. नई नीति में योग्य इकाइयों को स्थिर पूंजी निवेश का 20 प्रतिशत, अधिकतम 50 करोड़ रुपये तक सब्सिडी देने का प्रस्ताव है. फुटवियर और तकनीकी वस्त्र क्षेत्र को 5 प्रतिशत अतिरिक्त लाभ मिलेगा. एससी, एसटी, महिला और दिव्यांग उद्यमियों को भी 5 प्रतिशत अतिरिक्त सब्सिडी मिलेगी. इस तरह अधिकतम प्रभावी सब्सिडी 35 प्रतिशत तक हो सकती है. इसके अलावा बैंक ऋण पर 7 प्रतिशत सालाना ब्याज या ब्याज दर का 50 प्रतिशत, अधिकतम 3 करोड़ रुपये तक, पांच साल के लिए सहायता दी जाएगी.
बिजली और एसजीएसटी में राहत
नई नीति में पहले सात वर्षों तक 100 प्रतिशत एसजीएसटी प्रतिपूर्ति का प्रस्ताव है. इसके बाद अगले तीन वर्षों तक 40 प्रतिशत प्रतिपूर्ति दी जा सकती है. पांच वर्षों तक बिजली टैरिफ की की 50 प्रतिशत प्रतिपूर्ति और विद्युत कर की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति का प्रावधान है. नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने वाली इकाइयों को विद्युत कर की सुविधा सात साल तक मिल सकती है. स्टांप ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क की भी 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति का प्रस्ताव है.
रोजगार और कौशल विकास पर जोर
नई नीति में रोजगार बढ़ाने और कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है. पुरुष कर्मचारियों के लिए 5,000 रुपये और महिला कर्मचारियों के लिए 6,000 रुपये प्रति माह वेतन सब्सिडी का प्रावधान है. एससी, एसटी और दिव्यांग कर्मचारियों को अतिरिक्त 1,000 रुपये मिलेंगे. पिछड़े जिलों यानी जोन-3 में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए भी 1,000 रुपये अतिरिक्त सहायता का प्रस्ताव है. प्रत्येक प्रशिक्षु को 13,000 रुपये तक की एकमुश्त प्रशिक्षण सहायता मिलेगी. नियोक्ता के ईपीएफ और ईएसआई योगदान की भी 1,000 रुपये प्रति व्यक्ति प्रति माह तक प्रतिपूर्ति की जाएगी.
पिछड़े क्षेत्रों पर खास ध्यान
नीति में संताल परगना के औद्योगिक विकास पर विशेष जोर दिया गया है. राज्य के जिलों को तीन जोन में बांटकर पिछड़े क्षेत्रों में उद्योग लगाने को प्रोत्साहित किया जाएगा. टेक्सटाइल और अपैरल पार्कों के पास डॉर्मिटरी निर्माण के लिए भूमि सहायता, छात्रावास के लिए 50 लाख रुपये तक की मदद और मंडी शुल्क में छूट भी दी जाएगी. नई नीति में पीएम मित्रा, उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI), समर्थ और राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन जैसी केंद्र सरकार की योजनाओं के साथ तालमेल बनाने की भी तैयारी है. इससे झारखंड में टेक्सटाइल, फुटवियर और अन्य उद्योगों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
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ओपनएआई का 100 साल पुरानी गणित पहेली सुलझाने का दावा:दुनिया के 7 सबसे मुश्किल सवालों में से 1 हल किया; 88 घंटे में जवाब ढूंढा
ओपनएआई ने दावा किया है कि उसकी नई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक ने गणित की दुनिया की सबसे मुश्किल समस्याओं में से एक नेवियर–स्टोक्स प्रॉब्लम को हल कर लिया है। इसे सुलझाने में सिर्फ 88 घंटे लगे। गणित की चर्चित क्ले मैथमेटिक्स इंस्टीट्यूट ने साल 2000 में गणित के 7 बेहद मुश्किल और अनसुलझे सवाल चुने थे। इनमें से कई सवाल 100 साल से भी ज्यादा पुराने थे। इन्हें ‘मिलेनियम प्रॉब्लम्स’ कहा गया। इनमें से किसी एक को सही तरीके से हल करने वाले के लिए 10 लाख डॉलर का इनाम रखा गया था। ओपनएआई के इस दावे से पहले इन सात में से सिर्फ एक समस्या हल हुई थी। इसे 2003 में एक रूसी गणितज्ञ ग्रिगोरी पेरेलमैन ने सुलझाया था। यानी कंपनी का दावा सही है तो अब तक दो सवालों के जवाब ढूंढ़ निकाले गए हैं। पहले समझिए, नेवियर–स्टोक्स प्रॉब्लम क्या है मान लीजिए आपने एक गिलास पानी फर्श पर गिरा दिया। पानी इधर-उधर फैलने लगेगा। वैज्ञानिक गणित की मदद से यह अनुमान लगाने की कोशिश करते हैं कि पानी किस दिशा में जाएगा, कितनी तेजी से जाएगा और उसका बहाव कैसा होगा। इसके लिए कुछ गणितीय समीकरण हैं, जिन्हें नेवियर–स्टोक्स इक्वेशन कहा जाता है। अब वैज्ञानिकों की समस्या यह थी: बस, यही नेवियर–स्टोक्स प्रॉब्लम है। ओपनएआई का दावा क्या है? ओपनएआई के मुताबिक, उसके एक नए AI मॉडल ने इस समस्या का समाधान निकाला है। यह मॉडल अभी आम लोगों के इस्तेमाल के लिए जारी नहीं किया गया है, न ही इसके नाम का खुलासा किया गया है। ओपनएआई ने अपने नए मॉडल को GPT-6 अस्ट्रा से भी ज्यादा सक्षम इंटरनल मॉडल बताया है। GPT-6 अस्ट्रा 3 सितंबर 2026 को रिलीज हुआ है। हालांकि AI ने यह काम अकेले एक सिस्टम की तरह नहीं किया। ओपनएआई ने करीब 10,000 AI एजेंट्स को इस काम में लगाया था। ओपनएआई के रिसर्चर डैन रॉबर्ट्स ने इसकी तुलना भौंरे के अलग-अलग फूलों के बीच जाकर पराग पहुंचाने से की। यानी अलग-अलग AI समूहों से मिली जानकारी को दूसरे समूहों तक पहुंचाया गया, जिससे समाधान खोजने में मदद मिली। 7 मिलेनियम प्रॉब्लम्स इतनी अहम क्यों हैं? साल 2000 में जब अमेरिकी संस्था ने ये 7 सवाल चुने, तब इन्हें गणित की दुनिया की सबसे मुश्किल अनसुलझी समस्याओं में माना जाता था। इन्हें गणित के सामने बड़ी चुनौतियों के तौर पर रखा गया था, ताकि दुनिया के गणितज्ञ इन्हें हल करने की कोशिश करें और इस दौरान गणित में नई खोजें हों। ओपनएआई के दावे से पहले इन 7 में से सिर्फ एक समस्या का समाधान हुआ था। इसलिए ओपनएआई का दावा इतना बड़ा माना जा रहा है। गणित की 7 बड़ी समस्याएं क्या हैं? 1. रिमान हाइपोथेसिस किस बारे में: प्राइन नंबर्स (अभाज्य संख्याएं) यानी 2, 3, 5, 7 जैसी संख्याएं। सवाल: ये संख्याएं देखने में बेतरतीब लगती हैं, लेकिन क्या इनके पीछे कोई छिपा हुआ नियम या पैटर्न है, जिससे पता चल सके कि अगली प्राइम नंबर्स कहां मिलेगी? स्थिति: अभी अनसुलझी। 2. P vs NP किस बारे में: कंप्यूटर के लिए मुश्किल सवाल। सवाल: क्या कंप्यूटर हर ऐसे मुश्किल सवाल का जवाब जल्दी ढूंढ सकता है, जिसका सही जवाब मिलने के बाद उसे जल्दी जांचा जा सकता है? उदाहरण: जैसे किसी बहुत बड़ी पहेली का सही जवाब मिल जाए तो उसे चेक करना आसान है। लेकिन सही जवाब खुद ढूंढना बहुत मुश्किल हो सकता है। P vs NP यही पूछता है कि क्या कंप्यूटर के लिए ऐसे जवाब ढूंढना भी उतना ही आसान हो सकता है। स्थिति: अभी अनसुलझी। 3. नेवियर स्टोक्स प्रोब्लम किस बारे में: पानी और हवा के बहने के बारे में। सवाल: पानी या हवा कैसे बहती है, इसे बताने वाली गणित स्थिति: सुलझाने का दावा किया। 4. यांग–मिल्स और मास गैप किस बारे में: बहुत छोटे कणों और उनकी ऊर्जा के बारे में। सवाल: क्या सबसे कम ऊर्जा वाले कण और उससे ज्यादा ऊर्जा वाले कण के बीच एक निश्चित न्यूनतम अंतर होता है? स्थिति: अभी अनसुलझी। 5. हॉज कन्जेक्चर किस बारे में: बहुत मुश्किल आकृतियों के बारे में। सवाल: क्या इन मुश्किल आकृतियों को आसान गणितीय समीकरणों की मदद से समझाया जा सकता है? स्थिति: अभी अनसुलझी। 6. बर्च एंड स्विनर्टन-डायर कन्जेक्चर किस बारे में: खास तरह के गणितीय समीकरणों के बारे में। सवाल: क्या समीकरण को देखकर यह पता लगाया जा सकता है कि उसके कितने संभावित जवाब हो सकते हैं? स्थिति: अभी अनसुलझी। 7. प्वांकारे कन्जेक्चर किस बारे में: 3D आकृतियों के बारे में। सवाल: अगर कोई 3D आकृति गोल जैसी है और उसमें कोई छेद नहीं है, तो क्या वह असल में 3D गोले जैसी ही होगी? स्थिति: रूसी गणितज्ञ ग्रिगोरी पेरेलमैन ने 2002-03 में इसका हल निकाला। यह करीब 100 साल पुरानी गणितीय पहेली थी, जिसे फ्रांसीसी गणितज्ञ हेनरी प्वांकारे ने 1904 में सामने रखा था। पेरेलमैन के इसका हल निकालने के बाद क्ले मैथमेटिक्स इंस्टीट्यूट ने 2010 में उन्हें इस समस्या के लिए 10 लाख डॉलर का इनाम देने की घोषणा की। हालांकि, पेरेलमैन ने यह इनामी राशि स्वीकार नहीं की। AI इतनी मुश्किल गणित कैसे कर पा रही है? AI को हजारों गणित के सवाल हल करने के लिए दिए जाते हैं। वह अलग-अलग तरीके आजमाती है और सही-गलत से सीखती है। इस तरह रिइनफोर्समेंट लर्निंग की मदद से AI धीरे-धीरे ऐसे तरीके सीखती है, जिनसे मुश्किल सवाल हल करने की संभावना बढ़ जाती है। यह पहली बार नहीं है जब AI ने बड़ी गणितीय समस्या हल करने का दावा किया है। जनवरी में ओपनएआई ने हंगरी के मशहूर गणितज्ञ पॉल इरदोस की एक गणितीय समस्या हल करने की जानकारी दी थी। गणितज्ञों को AI से चिंता क्यों है? AI की क्षमता से कई गणितज्ञ खुश हैं, लेकिन कुछ को चिंता भी है। टेरेंस ताओ का कहना है कि किसी मुश्किल गणितीय सवाल को खुद हल करना जरूरी है। इससे गणितज्ञ नई चीजें सीखते हैं और उनकी समझ बढ़ती है। उन्होंने इसे जिम का उदाहरण देकर समझाया। अगर मशीन आपके लिए 100 किलो वजन उठा दे, तो वजन तो उठ जाएगा, लेकिन आपकी ताकत नहीं बढ़ेगी। इसी तरह, अगर AI मुश्किल गणितीय सवाल खुद हल करने लगे और इंसानों को सिर्फ जवाब मिले, तो हो सकता है कि इंसान गणित को समझने और खुद समस्या हल करने की क्षमता खोने लगें। फिर AI का फायदा क्या है? AI का सबसे बड़ा फायदा इसकी रफ्तार है। एक इंसान किसी गणितीय समस्या के हजारों संभावित रास्ते आजमाने में बहुत लंबा समय लगा सकता है। AI बहुत कम समय में बड़ी संख्या में संभावनाएं जांच सकती है। इससे गणितज्ञों को ऐसे रास्ते मिल सकते हैं, जिनके बारे में उन्होंने पहले नहीं सोचा था। लेकिन यहां दूसरी चिंता भी है। अगर AI खुद रास्ता खोज लेती है और इंसान सिर्फ उस रास्ते पर चलकर जवाब तक पहुंचते हैं, तो हो सकता है कि इंसान उस खोज की पूरी प्रक्रिया को समझ ही न पाएं। ताओ ने इसे जंगल में छिपे झरने के उदाहरण से समझाया। अगर कोई खुद जंगल में रास्ता खोजकर झरने तक पहुंचता है, तो रास्ता खोजने की पूरी प्रक्रिया में उसे बहुत कुछ सीखने को मिलता है। लेकिन अगर कोई मशीन पहले ही रास्ता खोजकर बता दे, तो बाकी लोग सीधे उसी रास्ते से झरने तक पहुंच सकते हैं। -----------------------
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