Jefferies की बड़ी रिपोर्ट! टेक्सटाइल सेक्टर में आ सकती है जोरदार तेजी, जानें किन स्टॉक्स पर लगा सकते हैं दांव
Top Textile Stock Picks: घरेलू बाजार में बुधवार 9 सितंबर को Welspun Living Ltd. के शेयर करीब 2% की तेजी के साथ ट्रेड करते नजर आए. जबकि सुबह के कारोबार के दौरान Raymond Lifestyle Ltd. के शेयरों में करीब 2% की गिरावट देखी गई. यह हलचल ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म Jefferies की ओर से दोनों स्टॉक्स पर कवरेज शुरु करने के बाद हुई है, जिसने इन दोनों कंपनियों के लिए अलग-अलग नजरिए पेश किए.
दोनों कंपनियों को मिली 'Buy' रेटिंग
Jefferies ने Welspun Living पर 'बाय' रेटिंग के साथ कवरेज शुरू की है और प्रति शेयर ₹260 का टारगेट प्राइस तय किया है. ब्रोकरेज ने Raymond Lifestyle को भी 'बाय' रेटिंग दी है और इसका टारगेट प्राइस ₹900 प्रति शेयर रखा है. आसान शब्दों में कहें तो, ब्रोकरेज का मानना है कि भविष्य में दोनों शेयर अपने मौजूदा स्तर से ऊपर जा सकते हैं.
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टेक्सटाइल सेक्टर को लेकर क्यों बना है भरोसा?
Jefferies के अनुसार, भारत का टेक्सटाइल सेक्टर अब एक बड़े और लंबे ग्रोथ साइकिल में एंट्री कर रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह China+1 थीम है. यानी दुनियाभर की कंपनियां अब सिर्फ चीन पर निर्भर रहने की बजाय भारत जैसे दूसरे देशों से भी सामान मंगवाने लगी हैं. इसके अलावा यूनाइटेड किंगडम और यूरोपियन यूनियन के साथ हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स की वजह से भारत के टैरिफ भी अब पहले से ज्यादा कॉम्पिटिटिव हो गए हैं. जिससे भारतीय एक्सपोर्टर्स को फायदा मिल सकता है.
Welspun Living पर क्यों है Jefferies बुलिश?
Jefferies का मानना है कि ग्लोबल होम-टेक्सटाइल एक्सपोर्ट मार्केट में अपनी मजबूत स्थिति की वजह से Welspun Living इस सेक्टर में एक अच्छा दांव है. ब्रोकरेज को उम्मीद है कि कंपनी का रेवेन्यू FY26 और FY29 के बीच सालाना 14% की दर से बढ़ेगा. इसके अलावा, मार्जिन में सुधार के कारण, EBITDA और नेट प्रॉफिट (PAT) में सालाना क्रमशः 38% और 71% की बढ़ोतरी हो सकती है. ब्रोकरेज को यह भी उम्मीद है कि कंपनी का ROCE 13% अंक बढ़कर 19% तक पहुंच सकता है.
Raymond Lifestyle को लेकर क्या है नजरिया?
Raymond Lifestyle के मामले में Jefferies का मानना है कि यह एक आकर्षक रिस्क-रिवॉर्ड ऑपर्च्युनिटी है. यानी इसमें रिस्क के मुकाबले फायदे की गुंजाइश ज्यादा दिख रही है. इसकी वजह है कंपनी की ब्रांडेड टेक्सटाइल्स में मजबूत पकड़ और इसके अपैरल बिजनेस में संभावित रिकवरी. ब्रोकरेज को उम्मीद है कि FY26-FY29 के दौरान कंपनी का EPS यानी प्रति शेयर कमाई सालाना 23% की दर से बढ़ सकती है. इसके अलावा ब्रोकरेज का यह भी कहना है कि स्टॉक फिलहाल करीब 6 गुना वन-ईयर फॉरवर्ड EV/EBITDA पर ट्रेड कर रहा है, जो एक आकर्षक वैल्यूएशन मानी जाती है. आसान शब्दों में समझें तो कंपनी अभी अपनी कमाई के मुकाबले सस्ते भाव पर उपलब्ध है.
एनालिस्ट्स की राय भी है पॉजिटिव
दोनों ही स्टॉक्स को लेकर एनालिस्ट्स का सेंटिमेंट काफी पॉजिटिव बना हुआ है. Welspun Living को ट्रैक करने वाले सभी 13 एनालिस्ट्स की इस पर 'Buy' रेटिंग है, यानी इस स्टॉक को कवर करने वाला हर एक एनालिस्ट इसे खरीदने की सलाह दे रहा है. वहीं Raymond Lifestyle को कवर करने वाले सभी चार एनालिस्ट्स की भी इस पर 'Buy' कॉल बनी हुई है.
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डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए दी गई है और इसे निवेश की सलाह नहीं माना जाना चाहिए. किसी भी निवेश फैसले से पहले कृपया अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लें.
भारत की एफआईयू ने पीएमएलए के गैर-अनुपालन को लेकर 15 क्रिप्टो प्लेटफॉर्म्स को नोटिस जारी किए
नई दिल्ली, 9 सितंबर (आईएएनएस)। भारत की फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट (एफआईयू) ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के गैर-अनुपालन के लिए 15 वर्चुअल डिजिटल एसेट सर्विस प्रोवाइडर्स को नोटिस जारी किए हैं। यह जानकारी बुधवार को जारी बयान में दी गई।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, एफआईयू-इंडिया के डायरेक्टर ने उन संस्थाओं के खिलाफ अनुपालन कार्रवाई के तहत ये नोटिस जारी किए हैं, जो जरूरी शर्तों को पूरा किए बिना काम कर रही थीं।
इन संस्थाओं में वीक्स, ब्लोफिन, रेजोरेक्स, बिटयूनिक्स , डिजीफाइनेंस, टूबीट, एक्सटी.कॉम, लाटोकन, वू एक्स, पायनिक्स, चेंज नाउ, सिंपल स्वैप, फिक्स्डफ्लोट, व्हाइटबीआईटी और गार्डेरियन शामिल हैं।
मंत्रालय ने बताया कि एफआईयू डायरेक्टर ने भारत के सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत नोडल ऑफिसर के तौर पर नोटिस जारी किए हैं। इन नोटिस में 15 संस्थाओं से जुड़े ऐप्स और यूआरएल को पब्लिक एक्सेस से हटाने के लिए कहा गया है।
मंत्रालय ने आगे कहा कि ये प्लेटफॉर्म भारत के पीएमएलए से संबंधित नियमों का पालन किए बिना गैर-कानूनी तरीके से चल रहे थे।
इसके अलावा, मार्च 2023 में वर्चुअल डिजिटल एसेट सर्विस प्रोवाइडर्स को भारत के पीएमएलए और आतंकवाद के वित्तपोषण-रोधी ढांचे के दायरे में लाया गया था।
भारत में काम करने वाले वीडीए सर्विस प्रोवाइडर्स (चाहे वे विदेशी हों या घरेलू) के लिए एफआईयू-इंडिया के साथ रिपोर्टिंग संस्थाओं के तौर पर रजिस्टर करना जरूरी है, अगर वे वर्चुअल डिजिटल एसेट्स को फिएट करेंसी के बदले एक्सचेंज करने, डिजिटल एसेट्स को ट्रांसफर करने या कस्टडी या एडमिनिस्ट्रेशन सर्विस देने जैसी गतिविधियां करते हैं।
मंत्रालय ने कहा कि ये जिम्मेदारियां गतिविधियों पर आधारित हैं और ये तब भी लागू होती हैं, जब किसी कंपनी की भारत में कोई फिजिकल मौजूदगी न हो।
इसके अलावा, रजिस्टर्ड वीडीए सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए पीएमएलए और उसके तहत बने नियमों के अनुसार रिपोर्टिंग, रिकॉर्ड रखने और दूसरी जिम्मेदारियों का पालन करना जरूरी है।
साथ ही, वित्त मंत्रालय ने लोगों को यह भी चेतावनी दी कि क्रिप्टो प्रोडक्ट्स और नॉन-फंजिबल टोकन (एफएफटी) रेगुलेटेड नहीं हैं और इनमें बहुत ज्यादा जोखिम हो सकता है।
मंत्रालय ने कहा, ऐसे ट्रांजैक्शन से होने वाले किसी भी नुकसान के लिए कोई रेगुलेटरी उपाय नहीं है।
--आईएएनएस
एबीएस
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