Responsive Scrollable Menu

भारत को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के जरिए ग्लोबल साउथ के संबंधों को व्यापार, निवेश वृद्धि में बदलना चाहिए: इंडस्ट्री

नई दिल्ली, 9 सितंबर (आईएएनएस)। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशंस (फियो) ने बुधवार को कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में होने वाला आगामी 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन भारत के लिए ग्लोबल साउथ के साथ बढ़ते रणनीतिक जुड़ाव को निर्यात, निवेश, प्रौद्योगिकी और मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं के रूप में लाभ में बदलने का बड़ा अवसर है।

फियो ने कहा कि 12-13 सितंबर को होने वाले इस शिखर सम्मेलन में कारोबारियों के लिए कुछ व्यावहारिक परिणामों पर ध्यान दिया जाना चाहिए। इनमें सीमा शुल्क प्रक्रियाओं में तेजी, गैर-टैरिफ बाधाओं में कमी, अधिक नियामकीय पारदर्शिता, मानकों और अनुरूपता मूल्यांकन की पारस्परिक मान्यता, बेहतर लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी, डिजिटल व्यापार दस्तावेज और सीमा पार भुगतान को आसान बनाना शामिल हैं।

फियो के अध्यक्ष एससी रहलान ने कहा, “ब्रिक्स को रणनीतिक संवाद से आगे बढ़कर ऐसे वाणिज्यिक परिणामों पर ध्यान देना चाहिए जिन्हें मापा जा सके। भारतीय कारोबारियों के लिए इसकी वास्तविक उपयोगिता आसान बाजार पहुंच, मजबूत आपूर्ति श्रृंखला साझेदारी, निवेश प्रवाह, प्रौद्योगिकी सहयोग और कुशल भुगतान तंत्र में होगी।”

रहलान ने आगे कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच बेहतर सहयोग से भारत की महत्वपूर्ण खनिजों, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, पूंजी और नई विनिर्माण साझेदारियों तक पहुंच बेहतर हो सकती है।

रहलान ने कहा कि भारत के पास इंजीनियरिंग सामान, फार्मास्यूटिकल्स, रसायन, कपड़ा और परिधान, ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, खाद्य एवं कृषि उत्पाद, नवीकरणीय ऊर्जा, स्वास्थ्य सेवा और डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में काफी अवसर हैं।

एशिया, अफ्रीका, खाड़ी, लैटिन अमेरिका और यूरेशिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं तक फैला विस्तारित ब्रिक्स समूह भारतीय निर्यातकों को काफी व्यापक आर्थिक पहुंच प्रदान करता है।

ब्रिक्स अर्थव्यवस्थाएं संयुक्त रूप से वैश्विक व्यापार में करीब 26 प्रतिशत हिस्सेदारी रखती हैं, जिससे भारत को अपने पारंपरिक बाजारों से आगे निर्यात में विविधता लाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच मिलता है।

उन्होंने कहा, “अवसर केवल ब्रिक्स देशों को अधिक सामान बेचने का नहीं है। भारत को इन अर्थव्यवस्थाओं में विकसित हो रही उत्पादन, सोर्सिंग और वैल्यू चेन का अभिन्न हिस्सा बनना चाहिए।”

रहलान ने स्थानीय मुद्राओं में ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार के अधिक निपटान के लिए व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य तंत्र विकसित करने के महत्व पर जोर दिया।

उन्होंने कहा, “भुगतान को लेकर अनिश्चितता खुद एक व्यापार बाधा बन सकती है। कुशल, पारदर्शी और नियमों के अनुरूप भुगतान व्यवस्था लेनदेन की लागत कम कर सकती है और खासकर एमएसएमई सहित कारोबारियों का नए बाजारों में प्रवेश को लेकर भरोसा बढ़ा सकती है।”

फियो ने ब्रिक्स के भीतर कारोबारियों के बीच संबंधों को मजबूत करने के लिए एक बेहतर बिजनेस-टू-बिजनेस व्यवस्था की भी मांग की। इसमें क्षेत्र-विशेष के खरीदार-विक्रेता सम्मेलन, निवेश के लिए साझेदार तलाशने की व्यवस्था, तकनीकी साझेदारी, संयुक्त उद्यम और नियमित व्यापार प्रतिनिधिमंडल शामिल हैं।

--आईएएनएस

एबीएस

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

Continue reading on the app

एआई की रफ्तार पर सवाल: एंथ्रोपिक रिसर्चर ने दिया इस्तीफा, कहा- ‘मानव जीवन के लिए खतरा बन सकती है सुपरइंटेलिजेंस’

सैन फ्रांसिस्को, 9 सितंबर (आईएएनएस)। युवा रिसर्चर जैकब कॉक्सन अचानक से सुर्खियों में आ गया है। जानी मानी एआई कंपनी एंथ्रोपिक से इस्तीफा देते हुए कुछ ऐसे सवाल उठा दिए हैं जिस पर मंथन जरूरी है। कॉक्सन ने बुधवार को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की दुनिया में तेजी से आ रहे बदलाव को लेकर सवाल उठाते हुए चेतावनी दी कि एआई कंपनियां ऐसे सिस्टम विकसित करने की होड़ में हैं, जो आने वाले कुछ वर्षों में मानव जीवन के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं।

कॉक्सन के इस्तीफे की खबर सबसे पहले वॉल स्ट्रीट जर्नल ने दी। रिपोर्ट के मुताबिक, यह एंथ्रोपिक के किसी कर्मचारी के एआई सुरक्षा संबंधी आशंकाओं के चलते कंपनी छोड़ने के शुरुआती प्रमुख मामलों में से एक है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स थ्रेड में शोधकर्ता ने अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। नए एआई मॉडल को भारी मात्रा में डेटा ट्रेन करने में माहिर कॉक्सन ने कहा, मैंने एन्थ्रोपिक से इस्तीफा दे दिया। मैंने पिछले तीन साल ओपनएआई और एन्थ्रोपिक दोनों में प्री-ट्रेनिंग रिसर्च में बिताए हैं।

उन्होंने दोनों कंपनियों के मौजूदा रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि वे तेजी से ऐसे एआई सिस्टम की ओर बढ़ रही हैं जो खुद को बेहतर बनाने में सक्षम होंगे। लिखा, कंपनियां सेल्फ-इंप्रूविंग सुपरइंटेलिजेंस विकसित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं और इस प्रक्रिया में मानव जीवन को जोखिम में डाल रही हैं।

कॉक्सन के मुताबिक, इस तकनीक की क्षमता को कम करके नहीं आंका जाना चाहिए। आने वाले समय में एआई सिस्टम इंसानों से बेहतर प्रदर्शन करने लग सकते हैं, साइबर सिस्टम में सेंध लगाने, विभिन्न क्षेत्रों में रातोंरात बड़े बदलाव लाने और वास्तविक दुनिया में शक्ति तथा संसाधन हासिल करने में सक्षम हो सकते हैं। इन क्षेत्रों में एआई की प्रगति पहले ही दिखाई दे रही है और इसकी रफ्तार धीमी होती नजर नहीं आ रही।

कॉक्सन की सबसे गंभीर चेतावनी एआई उद्योग के अंदर मौजूद आशंकाओं को लेकर थी। उन्होंने कहा कि एआई विकसित करने वाले कई शोधकर्ता और वरिष्ठ अधिकारी निजी तौर पर मानते हैं कि यह तकनीक इस दशक के अंत तक मानवता के अस्तित्व के लिए खतरा बन सकती है।

उन्होंने कहा, यह कोई मार्केटिंग रणनीति नहीं है। सार्वजनिक मंचों पर कई अधिकारी भले ही एआई के भविष्य को लेकर संतुलित भाषा का इस्तेमाल करते हों, लेकिन निजी बातचीत में उनमें से कई लोग तकनीक के संभावित परिणामों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करते हैं।

कॉक्सन ने उस विरोधाभास पर भी सवाल उठाया कि यदि एआई के संभावित खतरे को लेकर इतनी चिंता है तो कंपनियां इसका विकास जारी क्यों रख रही हैं?

उन्होंने कहा कि ओपनएआई में कई लोग अभी तक इस तकनीक के “सभ्यतागत दांव” को पूरी तरह महसूस नहीं कर पाए हैं। वहीं एंथ्रोपिक में स्थिति अलग है। उनके अनुसार, वहां जोखिम को बेहतर ढंग से समझा जाता है, लेकिन कंपनी इस दौड़ में इसलिए बनी हुई है क्योंकि उसे डर है कि अगर वह पीछे हट गई तो दूसरी कंपनियां बिना पर्याप्त सुरक्षा उपायों के आगे बढ़ जाएंगी।

कॉक्सन ने एआई शोधकर्ताओं से भी आत्ममंथन करने की अपील की। उन्होंने सवाल उठाया, क्या शोधकर्ताओं को ऐसे सुपरइंटेलिजेंट सिस्टम का प्रशिक्षण शुरू कर देना चाहिए, जिसके दिमाग या व्यवहार को वे अभी पूरी तरह समझते तक नहीं हैं?

उन्होंने एआई लैब्स में काम कर रहे वैज्ञानिकों से कहा कि वे केवल यह सोचकर आगे न बढ़ें कि “यह तो होना ही है, बल्कि इस समय का इस्तेमाल विकास की शर्तों और सुरक्षा मानकों को बदलने के लिए करें।

उन्होंने यह भी बताया कि एआई उद्योग में कुछ लोग अब मौजूदा दौड़ को “क्रंचटाइम” और “एंडगेम” जैसे शब्दों से परिभाषित करने लगे हैं। ये शब्द इस बात का संकेत देते हैं कि उद्योग का एक वर्ग आत्म-सुधार करने वाले एआई मॉडल्स के विकास को निर्णायक दौर के रूप में देख रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, कॉक्सन उन 1,000 से अधिक एआई शोधकर्ताओं में भी शामिल रहे हैं, जिन्होंने हाल में वैश्विक सरकारों के बीच बेहतर समन्वय की अपील करने वाले एक बयान पर हस्ताक्षर किए।

--आईएएनएस

केआर/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

Continue reading on the app

  Sports

Ollie Robinson: 100 साल का वर्ल्ड रिकॉर्ड ध्वस्त! ऑली रॉबिन्सन ने पूरे किए 100 टेस्ट विकेट, बुमराह को पछाड़ा

Ollie Robinson 100 Test Wickets: इंग्लैंड के तेज गेंदबाज ऑली रॉबिन्सन ने टेस्ट क्रिकेट में अपने 100 विकेट पूरे कर लिए हैं. इस दौरान उन्होंने जसप्रीत बुमराह का एक बड़ा रिकॉर्ड भी तोड़ा है. Wed, 09 Sep 2026 16:07:08 +0530

  Videos
See all

ओडिशा में कहां से आए 5 ऑरंगुटान? | #Orangutans #shorts #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-09T10:34:39+00:00

Ujjain में Hanuman Temple हटाने की कोशिश पर श्रद्धालुओं की महाआरती, प्रशासन के सामने चुनौती #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-09T10:38:31+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers