‘हैवान’ के बाद बदल गया Akshay Kumar का नजरिया? 59वें बर्थडे पर कही दिल की बात
Akshay Kumar Birthday Post: बॉलीवुड के खिलाड़ी यानी अक्षय कुमार 9 सितंबर को अपना 59वां जन्मदिन मना रहे हैं. इस खास मौके पर उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर की है, जिसमें एक्टर ने अपने करियर और अपकमिंग फिल्म ‘हैवान’ (Haiwaan) को लेकर ऐसी बात कही है, जो शायद ही उन्होंने पहले इस अंदाज में बताई हो. आखिर 35 साल के करियर के बाद अक्षय को क्या एहसास हुआ और ‘हैवान’ ने उन्हें क्या सिखाया? चलिए जानते हैं.
बर्थडे पर अक्षय कुमार ने किया पोस्ट
अक्षय कुमार (Akshay Kumar) इन दिनों अपनी अपकमिंग फिल्म हैवान को लेकर चर्चा में हैं. इस फिल्म में उनके साथ सैफ अली खान (Saif Ali Khan) भी अहम रोल में नजर आने वाले हैं. वहीं, अब बर्थडे के मौके पर अक्षय ने अपने ऑफिशियल एक्स हैंडल पर हैवान का प्रोमो वीडियो शेयर किया है और दिल की बात कही हैं. एक्टर ने लिखा- 'मेरे जन्मदिन पर एक छोटा सा विचार. जो बुरा दिखता है वह हमेशा बुरा नहीं हो सकता और जो अच्छा दिखता है वह हमेशा अच्छा नहीं हो सकता. शायद हैवान ने मुझे यही सिखाया है.'
फैंस का किया शुक्रिया
अक्षय कुमार अपने पोस्ट में आगे फैंस के सपोर्ट और प्यार के लिए उनका शुक्रिया भी किया. एक्टर ने लिखा- 'इतने सालों में आपने मुझे जो प्यार दिया है, उसके लिए धन्यवाद।इस शुक्रवार, मैं आपको अपना वह पक्ष दिखा रहा हूं, जो आपने पहले नहीं देखा है.' बता दें, अक्षय कुमार ने अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम हैंडल पर स्टोरी में एक पोस्ट शेयर करते हुए इस बात की भी जानकारी दी है कि हैवान की एडवांस बुकिंग शुरू हो गई है.
On my birthday, a small thought…
— Akshay Kumar (@akshaykumar) September 9, 2026
What looks evil may not always be evil.
And what looks good may not always be good.
Maybe that’s what HAIWAAN taught me.
Thank you for all the love you’ve given me over the years.
This Friday, I’m giving you a side of me you haven’t seen… pic.twitter.com/SyC1l4G9DG
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टीबी के खिलाफ जंग तेज, डब्ल्यूएचओ के साउथ-ईस्ट एशिया क्षेत्र के देशों ने मिलकर उठाए ठोस कदम
नई दिल्ली, 9 सितंबर (आईएएनएस)। डब्ल्यूएचओ के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के सदस्य देशों ने बुधवार टीबी को खत्म करने के लिए एक ठोस कदम उठाया है, जिसके तहत बीमारी की जल्द पहचान, रोकथाम और इलाज की बेहतर सुविधा, परिवारों के लिए आर्थिक मदद और नई टीबी वैक्सीन की तैयारियों पर जोर दिया जाएगा।
डब्ल्यूएचओ के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के प्रभारी अधिकारी डॉ. नीलेश बुद्धा ने डब्ल्यूएचओ क्षेत्रीय समिति के 79वें सत्र में कहा, टीबी का इलाज संभव है और इसे रोका भी जा सकता है, फिर भी हमारे क्षेत्र में हर साल लाखों लोगों की जान इससे चली जाती है और कई परिवार गरीबी में चले जाते हैं। हमारे पास इसे बदलने के साधन हैं। जरूरत इस बात की है कि ये साधन जरूरतमंद हर व्यक्ति तक समय पर, बराबरी से और अच्छी प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा के तहत पहुंचें।
डब्ल्यूएचओ के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में दुनिया की लगभग एक चौथाई आबादी रहती है लेकिन साल 2024 में दुनिया में टीबी के कुल नए मामलों में से लगभग 34 प्रतिशत मामले यहीं से थे। अनुमान है कि यहां करीब 36.8 लाख नए मामले सामने आए और लगभग 4.33 लाख लोगों की मौत हुई हैं।
करीब 1.5 लाख लोगों में मल्टीड्रग और रिफाम्पिसिन-रेजिस्टेंट टीबी पाई गई, जो दुनिया के कुल मामलों का 38 प्रतिशत से ज्यादा है। देशों ने इस बात पर सहमति जताई है कि टीबी के मरीजों की जल्द और पूरी तरह से पहचान के लिए नियमित स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जाएगा, ज्यादा जोखिम वाले और वंचित लोगों की व्यवस्थित जांच और सक्रिय रूप से मरीजों की खोज की जाएगी।
इसके साथ ही डब्ल्यूएचओ द्वारा सुझाई गई तेज जांच तकनीकों, जैसे मॉलिक्यूलर टेस्ट और डिजिटल तकनीक का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल किया जाएगा।
उन्होंने टीबी केयर को ज्यादा लोगों पर केंद्रित बनाने का भी वादा किया, जिसमें ड्रग-रेसिस्टेंट टीबी के लिए बेहतर क्वालिटी का इलाज, न्यूट्रिशन और कम्युनिटी-बेस्ड सपोर्ट और लोगों को केयर पाने से रोकने वाली सामाजिक, फाइनेंशियल, ज्योग्राफिक और दूसरी रुकावटों को दूर करने के लिए पूरी कार्रवाई शामिल है।
रोकथाम को मजबूत करने के लिए घर में टीबी मरीज के संपर्क में आए लोगों और ज्यादा जोखिम वाले लोगों को टीबी से बचाव का इलाज मुहैया कराय जाएगा, संक्रमण की रोकथाम को बेहतर किया जाएगा और कुपोषण, डायबिटीज और तंबाकू के सेवन जैसे बड़े कारणों पर भी ध्यान दिया जाएगा। क्षेत्रीय मॉडल के अनुसार, टीबी के मामलों और मौतों में सबसे ज्यादा कमी तक आ सकती है, जब बेहतर इलाज और सरकारी-निजी भागीदारी, तेज जांच, लक्षित रोकथाम, ज्यादा जोखिम वाले लोगों में सक्रिय जांच और टीबी वैक्सीन का इस्तेमाल एक साथ किया जाए। इसलिए वैक्सीन लाने की तैयारी बहुत जरूरी है।
2015 के बाद से इस क्षेत्र में अच्छी प्रगति हुई है। अब इलाज की पहुंच 85 प्रतिशत से ज्यादा हो गई है और इलाज में सफलता की दर डब्लयूएचओ के सभी क्षेत्रों में सबसे ज्यादा है। नए टीबी मामलों की दर में 16 प्रतिशत की कमी आई है, जो वैश्विक औसत 12 प्रतिशत से ज्यादा है और टीबी से होने वाली मौतों में 23 प्रतिशत की गिरावट आई है लेकिन ये सुधार अभी 2030 तक एंड टीबी स्ट्रेटजी के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए काफी नहीं हैं। इसके तहत 2015 की तुलना में टीबी के मामलों में 80 प्रतिशत और मौतों में 90 प्रतिशत तक कमी लाना है।
टीबी जैसी बीमारी का बोझ पूरे परिवारों पर आर्थिक रूप से भी भारी देखने को मिलता है। लगभग 44 प्रतिशत टीबी प्रभावित परिवारों को भारी खर्च का सामना करना पड़ रहा है और दवा-प्रतिरोधी टीबी से पीड़ित परिवारों में यह आंकड़ा 80 प्रतिशत से भी ज्यादा है। टीबी के लिए मिलने वाली आर्थिक मदद जरूरत से बहुत कम है। साल 2024 में क्षेत्र में टीबी से निपटने के लिए लगभग 90 करोड़ अमेरिकी डॉलर उपलब्ध थे, जबकि जरूरत करीब 300 करोड़ डॉलर की है।
यह समझते हुए कि टीबी को खत्म करने के लिए सिर्फ स्वास्थ्य क्षेत्र ही नहीं बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी काम करना होगा, देशों ने प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा और सभी के लिए स्वास्थ्य कवरेज के अंदर टीबी सेवाओं को और बेहतर तरीके से जोड़ने पर जोर दिया है।
टीबी के लिए फाइनेंसिंग अभी भी अनुमानित जरूरत से काफी कम है, इसलिए सदस्य देशों ने मजबूत घरेलू रिसोर्स जुटाने, उपलब्ध रिसोर्स का कुशल इस्तेमाल, पूल्ड प्रोक्योरमेंट और क्षेत्रीय सहयोग पर जोर दिया ताकि क्वालिटी-एश्योर्ड दवाओं, डायग्नोस्टिक्स और दूसरी ज़रूरी चीज़ों तक पहुँच बेहतर हो सके, खासकर उन देशों और हेल्थ सिस्टम के लिए जिनकी प्रोक्योरमेंट कैपेसिटी सीमित है।
डब्ल्यूएचओ साउथ-ईस्ट एशिया रीजन के ऑफिसर-इन-चार्ज डॉ. नीलेश बुद्ध ने कहा, टीबी को खत्म करने के लिए हेल्थ सिस्टम, कम्युनिटी सिस्टम और उससे भी आगे मजबूत क्षेत्रीय एकजुटता और एक्शन की जरूरत होगी। इक्विटी को सेंटर में रखकर, सस्टेनेबल रिस्पॉन्स में इन्वेस्ट करके, इनोवेशन को अपनाकर और यह पक्का करके कि कोई पीछे न छूटे, हम उन गैप को कम कर सकते हैं जो हमारे और 2030 तक टीबी को खत्म करने के लक्ष्य के बीच बने हुए हैं।
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एनएस/पीएम
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