चुप्पी नहीं, संवेदनशील बातचीत जरूरी! आत्महत्या रोकथाम पर बदलें अपना नजरिया
नई दिल्ली, 9 सितंबर (आईएएनएस)। कई बार इंसान बाहर से बिल्कुल सामान्य नजर आता है, लेकिन उसके भीतर क्या चल रहा है, यह किसी को पता नहीं होता। उस मुस्कुराते चेहरे के पीछे चिंता, अकेलापन, निराशा या गहरा भावनात्मक दर्द छिपा हो सकता है। ऐसे में किसी की परेशानी को नजरअंदाज करने के बजाय उसकी बात सुनना और उसे समझने की कोशिश करना बेहद जरूरी है। विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस का संदेश भी यही है कि चुप्पी नहीं, बातचीत बदलाव की शुरुआत हो सकती है।
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