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Raghav Chadha SIR विवाद: पंजाब की वोटर लिस्ट से नाम हटा, दिल्ली में 8 सितंबर को कैसे जुड़ा? AAP ने उठाए सवाल

Raghav Chadha SIR विवाद: पंजाब से BJP के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम Special Intensive Revision (SIR) के दौरान दिल्ली की वोटर लिस्ट में शामिल होने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। खास बात यह है कि पंजाब की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से उनका नाम हटाए जाने के कुछ दिन बाद ही उनका नाम दिल्ली की वोटर लिस्ट में दिखाई दिया।

दिल्ली की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट 31 अगस्त को जारी हुई थी, जबकि चड्ढा का नाम 8 सितंबर को अपडेट की गई सूची में शामिल 700 लोगों में था। आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि चड्ढा ने दिल्ली में नियमों के खिलाफ खुद को वोटर के रूप में रजिस्टर कराया है।

हालांकि, दिल्ली के चुनाव अधिकारियों ने PTI को बताया कि चड्ढा का नाम वोटर लिस्ट के अपडेशन प्रोसेस के तहत जोड़ा गया है। चड्ढा ने अपनी पूर्व पार्टी AAP पर प्रतिक्रिया देते हुए उसे ‘डंप्ड लवर’ यानी ‘छोड़े गए प्रेमी’ जैसा व्यवहार करने वाला बताया।

Raghav Chadha का नाम दिल्ली की वोटर लिस्ट में कब जुड़ा?
AAP के पूर्व सांसद राघव चड्ढा वर्ष 2024 से पंजाब में वोटर के तौर पर रजिस्टर्ड हैं। दिल्ली की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में उनका नाम राजिंदर नगर विधानसभा क्षेत्र की वोटर लिस्ट में शामिल किया गया है।

दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय के एक अधिकारी ने PTI को बताया कि मंगलवार तक दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों में वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने के लिए कुल 700 Form 6 आवेदन EROs द्वारा मंजूर किए गए थे। इनमें राघव चड्ढा का नाम भी शामिल था।

यह प्रक्रिया इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दिल्ली की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट पहले ही 31 अगस्त को प्रकाशित हो चुकी थी।

सबसे बड़ा सवाल: ड्राफ्ट लिस्ट के बाद कैसे जुड़ा नाम?
राघव चड्ढा के वोटर रजिस्ट्रेशन को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि 31 अगस्त को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने के बाद उनका नाम दिल्ली की वोटर लिस्ट में कैसे शामिल हुआ?

SIR प्रक्रिया के तहत दिल्ली की वोटर लिस्ट को 16 जून से 31 अगस्त के बीच फ्रीज किया गया था। इसके बाद 31 अगस्त को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट प्रकाशित हुई।

इसी बीच 3 सितंबर को पंजाब की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से राघव चड्ढा का नाम हटाया गया। इसके बाद 8 सितंबर को उनका नाम दिल्ली की वोटर लिस्ट में दिखाई दिया। यही घटनाक्रम राजनीतिक विवाद की वजह बना है।

Delhi SIR में Form 6 का क्या है नियम?
दिल्ली के CEO कार्यालय के मुताबिक, 31 अगस्त तक करीब 2.14 लाख Form 6 प्राप्त हुए थे। Form 6 का इस्तेमाल वोटर लिस्ट में नए मतदाता के पंजीकरण के लिए किया जाता है। इसके बाद दावे और आपत्तियों की अवधि में अंतिम वोटर लिस्ट में नाम शामिल कराने के लिए 7 सितंबर तक 25,011 अतिरिक्त Form 6 जमा किए गए।

चुनाव अधिकारियों के मुताबिक, जिन लोगों का नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में शामिल नहीं हो पाया था, वे दावे और आपत्तियों की अवधि में Form 6 दाखिल कर सकते हैं। ERO द्वारा आवेदन मंजूर किए जाने के बाद संबंधित नाम को अंतिम वोटर लिस्ट में शामिल किया जाता है।

दिल्ली की फाइनल वोटर लिस्ट 4 नवंबर को जारी की जानी है।

बूथ नंबर 46 में क्या हुआ?
यहीं से AAP ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। AAP दिल्ली के प्रमुख सौरभ भारद्वाज ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि राघव चड्ढा का नाम राजिंदर नगर विधानसभा क्षेत्र के बूथ नंबर 46 की वोटर लिस्ट में जोड़ा गया है।

ECI के पोर्टल पर चड्ढा का नाम बूथ नंबर 46 में सीरियल नंबर 747 पर दिखाई दे रहा था। AAP के मुताबिक, 31 अगस्त को जारी बूथ नंबर 46 की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में आखिरी सीरियल नंबर 746 था। यानी उस ड्राफ्ट सूची में चड्ढा का नाम नहीं था।

AAP ने इसी आधार पर चुनाव आयोग से सवाल किया है कि आखिर उनका नाम बाद में किस प्रक्रिया के तहत जोड़ा गया।

AAP ने चुनाव आयोग से क्या सवाल पूछा?
सौरभ भारद्वाज ने सवाल उठाया कि क्या राघव चड्ढा का वोट पंजाब से दिल्ली ट्रांसफर किया गया है। AAP का कहना है कि चड्ढा खुद यह दावा कर चुके थे कि वह पंजाब के वोटर हैं और वहीं से मतदान करेंगे। ऐसे में पार्टी ने सवाल उठाया कि जब दिल्ली की वोटर लिस्ट SIR प्रक्रिया के दौरान फ्रीज थी, तो बाद में उनका नाम दिल्ली की सूची में कैसे शामिल हुआ।

हालांकि, चुनाव अधिकारियों का पक्ष है कि Form 6 के जरिए नाम जोड़ने की प्रक्रिया के तहत आवेदन मंजूर होने के बाद नाम अपडेट किया जा सकता है। इसलिए पूरे विवाद का अहम बिंदु यह है कि चड्ढा का आवेदन कब दाखिल हुआ, किस आधार पर मंजूर हुआ और उनका नाम दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची में किस प्रक्रिया के तहत शामिल होगा।

2022 में भी दिल्ली के राजिंदर नगर से जुड़ा था नाम
राघव चड्ढा का दिल्ली की राजिंदर नगर विधानसभा क्षेत्र की वोटर लिस्ट से पुराना संबंध रहा है। 2022 के राज्यसभा चुनाव के लिए दाखिल हलफनामे में AAP नेता ने बताया था कि वह राजिंदर नगर के बूथ नंबर 52 के रजिस्टर्ड वोटर थे।

बाद में पंजाब से राज्यसभा जाने के बाद उन्होंने अपना वोटर रजिस्ट्रेशन बदल लिया। उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में मोहाली के SAS नगर के एक बूथ पर मतदान भी किया था। अब दिल्ली की वोटर लिस्ट में उनका नाम दोबारा सामने आने के बाद यह मामला राजनीतिक और चुनावी बहस का विषय बन गया है।

क्या राघव चड्ढा का दिल्ली में वोटर बनना नियमों के खिलाफ है?
सिर्फ ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने के बाद किसी व्यक्ति का नाम दिखाई देना अपने आप में अवैध रजिस्ट्रेशन साबित नहीं करता। चुनाव अधिकारियों के अनुसार, ड्राफ्ट लिस्ट के बाद दावे और आपत्तियों की अवधि में Form 6 के जरिए नाम जोड़ने की प्रक्रिया मौजूद है।

इसलिए यह तय करने के लिए कि राघव चड्ढा का रजिस्ट्रेशन नियमों के अनुरूप हुआ या नहीं, उनके आवेदन, पुराने वोटर रजिस्ट्रेशन और ERO द्वारा की गई जांच की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

फिलहाल विवाद का केंद्र यही है कि पंजाब की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से नाम हटने और दिल्ली की वोटर लिस्ट में नाम जुड़ने के बीच क्या प्रक्रिया अपनाई गई।

Raghav Chadha SIR विवाद: आगे क्या होगा?
दिल्ली की अंतिम वोटर लिस्ट 4 नवंबर को जारी होनी है। उससे पहले दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया के दौरान वोटर रजिस्ट्रेशन से जुड़े मामलों की जांच की जाएगी।

राघव चड्ढा के मामले में भी यही प्रक्रिया यह स्पष्ट करेगी कि उनका दिल्ली में वोटर रजिस्ट्रेशन किस आवेदन और किस आधार पर मंजूर हुआ।

फिलहाल Raghav Chadha SIR विवाद में AAP के आरोप और चुनाव अधिकारियों की ओर से दी गई प्रक्रिया संबंधी जानकारी आमने-सामने है। अंतिम स्थिति संबंधित चुनावी रिकॉर्ड और ERO की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

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Vande Mataram Row: नेशनल कॉन्फ्रेंस को पूरे वंदे मातरम पर आपत्ति नहीं, कांग्रेस भड़की; BJP बोली- अलगाववादियों को भी नहीं ऐतराज

Vande Mataram Row: जम्मू-कश्मीर में वंदे मातरम् के पूरे संस्करण को लेकर कांग्रेस, नेशनल कॉन्फ्रेंस और बीजेपी के बीच सियासी घमासान तेज हो गया है। दरअसल सोमवार को श्रीनगर में आयोजित जम्मू-कश्मीर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में वंदे मातरम् का पूरा संस्करण बजाया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला भी मौजूद थे।

कांग्रेस महासचिव और संगठन प्रभारी केसी वेणुगोपाल ने इस पर आपत्ति जताते हुए नेशनल कॉन्फ्रेंस से पार्टी के रुख का समर्थन करने को कहा। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि वंदे मातरम् का पूरा संस्करण भारत के बहुलतावादी और साझा सांस्कृतिक मूल्यों के साथ सहज नहीं बैठता। उन्होंने महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, सुभाष चंद्र बोस, राजेंद्र प्रसाद, मौलाना आजाद और अन्य स्वतंत्रता सेनानियों के विचारों का हवाला देते हुए कहा कि पार्टी कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के वही दो अंतरे गाए जाने चाहिए, जिन्हें कांग्रेस ने 1937 के फैसले के अनुसार अपनाया था।

NC बोली- थोपना स्वीकार नहीं 
नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कांग्रेस के इस रुख पर पलटवार किया। पार्टी नेता बशीर अहमद ने कहा कि गठबंधन सहयोगी होने के नाते कांग्रेस यह तय नहीं कर सकती कि दूसरा सहयोगी कितना गीत गाए। उन्होंने कहा कि वे किसी पर कुछ थोपने के पक्ष में नहीं हैं और लोगों को अपनी पसंद से निर्णय लेने का अधिकार है।

इसके बाद कांग्रेस नेता कपिल सिंह ने भी नेशनल कॉन्फ्रेंस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उमर अब्दुल्ला और फारूक अब्दुल्ला INDIA गठबंधन का हिस्सा हैं और उन्हें कांग्रेस के फैसले का सम्मान करना चाहिए।

बीजेपी बोली- कांग्रेस 21वीं सदी की मुस्लिम लीग
वहीं बीजेपी ने इस विवाद को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला किया। बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि पूरे वंदे मातरम् पर कांग्रेस की आपत्ति उसके राजनीतिक रुख को दिखाती है। उन्होंने कांग्रेस पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए उसे 21वीं सदी की मुस्लिम लीग तक कह दिया। बीजेपी नेता आरएस पठानिया ने भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि घाटी में अलगाववादियों ने भी राष्ट्रीय गीत के पूरे संस्करण पर ऐसी आपत्ति नहीं जताई थी।

गौरतलब है कि कांग्रेस कार्यसमिति ने पिछले महीने 1937 के अपने फैसले का पालन करने का निर्णय लिया था। इसके तहत पार्टी के कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के केवल दो अंतरे गाने की बात कही गई थी। दूसरी ओर केंद्र सरकार ने इस साल की शुरुआत में सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों और आधिकारिक समारोहों में राष्ट्रगान जन गण मन से पहले वंदे मातरम् के सभी 6 अंतरे बजाने का निर्देश दिया था। इस फैसले के बाद अब वंदे मातरम् सिर्फ गीत नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा भी बनता दिखाई दे रहा है।

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