Vande Mataram Row: नेशनल कॉन्फ्रेंस को पूरे वंदे मातरम पर आपत्ति नहीं, कांग्रेस भड़की; BJP बोली- अलगाववादियों को भी नहीं ऐतराज
Vande Mataram Row: जम्मू-कश्मीर में वंदे मातरम् के पूरे संस्करण को लेकर कांग्रेस, नेशनल कॉन्फ्रेंस और बीजेपी के बीच सियासी घमासान तेज हो गया है। दरअसल सोमवार को श्रीनगर में आयोजित जम्मू-कश्मीर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में वंदे मातरम् का पूरा संस्करण बजाया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला भी मौजूद थे।
कांग्रेस महासचिव और संगठन प्रभारी केसी वेणुगोपाल ने इस पर आपत्ति जताते हुए नेशनल कॉन्फ्रेंस से पार्टी के रुख का समर्थन करने को कहा। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि वंदे मातरम् का पूरा संस्करण भारत के बहुलतावादी और साझा सांस्कृतिक मूल्यों के साथ सहज नहीं बैठता। उन्होंने महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, सुभाष चंद्र बोस, राजेंद्र प्रसाद, मौलाना आजाद और अन्य स्वतंत्रता सेनानियों के विचारों का हवाला देते हुए कहा कि पार्टी कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के वही दो अंतरे गाए जाने चाहिए, जिन्हें कांग्रेस ने 1937 के फैसले के अनुसार अपनाया था।
The full version of Vande Mataram sits uneasily with the syncretic and pluralist ethos that our freedom fighters envisioned and nurtured for India.
— K C Venugopal (@kcvenugopalmp) September 8, 2026
For us, the considered judgment of Mahatma Gandhi, Pandit Nehru, Sardar Patel, Subhash Chandra Bose, Rajendra Prasad, Acharya… pic.twitter.com/VngmVUmevz
NC बोली- थोपना स्वीकार नहीं
नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कांग्रेस के इस रुख पर पलटवार किया। पार्टी नेता बशीर अहमद ने कहा कि गठबंधन सहयोगी होने के नाते कांग्रेस यह तय नहीं कर सकती कि दूसरा सहयोगी कितना गीत गाए। उन्होंने कहा कि वे किसी पर कुछ थोपने के पक्ष में नहीं हैं और लोगों को अपनी पसंद से निर्णय लेने का अधिकार है।
इसके बाद कांग्रेस नेता कपिल सिंह ने भी नेशनल कॉन्फ्रेंस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उमर अब्दुल्ला और फारूक अब्दुल्ला INDIA गठबंधन का हिस्सा हैं और उन्हें कांग्रेस के फैसले का सम्मान करना चाहिए।
बीजेपी बोली- कांग्रेस 21वीं सदी की मुस्लिम लीग
वहीं बीजेपी ने इस विवाद को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला किया। बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि पूरे वंदे मातरम् पर कांग्रेस की आपत्ति उसके राजनीतिक रुख को दिखाती है। उन्होंने कांग्रेस पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए उसे 21वीं सदी की मुस्लिम लीग तक कह दिया। बीजेपी नेता आरएस पठानिया ने भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि घाटी में अलगाववादियों ने भी राष्ट्रीय गीत के पूरे संस्करण पर ऐसी आपत्ति नहीं जताई थी।
गौरतलब है कि कांग्रेस कार्यसमिति ने पिछले महीने 1937 के अपने फैसले का पालन करने का निर्णय लिया था। इसके तहत पार्टी के कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के केवल दो अंतरे गाने की बात कही गई थी। दूसरी ओर केंद्र सरकार ने इस साल की शुरुआत में सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों और आधिकारिक समारोहों में राष्ट्रगान जन गण मन से पहले वंदे मातरम् के सभी 6 अंतरे बजाने का निर्देश दिया था। इस फैसले के बाद अब वंदे मातरम् सिर्फ गीत नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा भी बनता दिखाई दे रहा है।
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