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Vande Mataram Row: नेशनल कॉन्फ्रेंस को पूरे वंदे मातरम पर आपत्ति नहीं, कांग्रेस भड़की; BJP बोली- अलगाववादियों को भी नहीं ऐतराज

Vande Mataram Row: जम्मू-कश्मीर में वंदे मातरम् के पूरे संस्करण को लेकर कांग्रेस, नेशनल कॉन्फ्रेंस और बीजेपी के बीच सियासी घमासान तेज हो गया है। दरअसल सोमवार को श्रीनगर में आयोजित जम्मू-कश्मीर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में वंदे मातरम् का पूरा संस्करण बजाया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला भी मौजूद थे।

कांग्रेस महासचिव और संगठन प्रभारी केसी वेणुगोपाल ने इस पर आपत्ति जताते हुए नेशनल कॉन्फ्रेंस से पार्टी के रुख का समर्थन करने को कहा। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि वंदे मातरम् का पूरा संस्करण भारत के बहुलतावादी और साझा सांस्कृतिक मूल्यों के साथ सहज नहीं बैठता। उन्होंने महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, सुभाष चंद्र बोस, राजेंद्र प्रसाद, मौलाना आजाद और अन्य स्वतंत्रता सेनानियों के विचारों का हवाला देते हुए कहा कि पार्टी कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के वही दो अंतरे गाए जाने चाहिए, जिन्हें कांग्रेस ने 1937 के फैसले के अनुसार अपनाया था।

NC बोली- थोपना स्वीकार नहीं 
नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कांग्रेस के इस रुख पर पलटवार किया। पार्टी नेता बशीर अहमद ने कहा कि गठबंधन सहयोगी होने के नाते कांग्रेस यह तय नहीं कर सकती कि दूसरा सहयोगी कितना गीत गाए। उन्होंने कहा कि वे किसी पर कुछ थोपने के पक्ष में नहीं हैं और लोगों को अपनी पसंद से निर्णय लेने का अधिकार है।

इसके बाद कांग्रेस नेता कपिल सिंह ने भी नेशनल कॉन्फ्रेंस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उमर अब्दुल्ला और फारूक अब्दुल्ला INDIA गठबंधन का हिस्सा हैं और उन्हें कांग्रेस के फैसले का सम्मान करना चाहिए।

बीजेपी बोली- कांग्रेस 21वीं सदी की मुस्लिम लीग
वहीं बीजेपी ने इस विवाद को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला किया। बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि पूरे वंदे मातरम् पर कांग्रेस की आपत्ति उसके राजनीतिक रुख को दिखाती है। उन्होंने कांग्रेस पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए उसे 21वीं सदी की मुस्लिम लीग तक कह दिया। बीजेपी नेता आरएस पठानिया ने भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि घाटी में अलगाववादियों ने भी राष्ट्रीय गीत के पूरे संस्करण पर ऐसी आपत्ति नहीं जताई थी।

गौरतलब है कि कांग्रेस कार्यसमिति ने पिछले महीने 1937 के अपने फैसले का पालन करने का निर्णय लिया था। इसके तहत पार्टी के कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के केवल दो अंतरे गाने की बात कही गई थी। दूसरी ओर केंद्र सरकार ने इस साल की शुरुआत में सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों और आधिकारिक समारोहों में राष्ट्रगान जन गण मन से पहले वंदे मातरम् के सभी 6 अंतरे बजाने का निर्देश दिया था। इस फैसले के बाद अब वंदे मातरम् सिर्फ गीत नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा भी बनता दिखाई दे रहा है।

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Quinoa vs Brown Rice: जानिए Fiber और Protein के मामले में सेहत के लिए कौन सा सुपरफूड है बेस्ट

आजकल लोग अपनी सेहत को लेकर काफी ध्यान दे रहे हैं। वजन को घटाने और बेहतरीन पाचन के लिए लोग ब्राउन राइस और क्विनोआ का सेवन कर रहे हैं। दोनों में ही फाइबर से भरपूर मात्रा पाई जाती है। अब सवाल बनता है कि इन दोनों में से कौन-सा अनाज ज्यादा फायदेमंद होता है? तो चलिए इस लेख में आपको बताते हैं कि कौन सबसे बेहतर है आपकी सेहत के लिए, किसका सेवन करें।

Brown Rice vs Quinoa: किसमें कितना होता है फाइबर?
अगर 100 ग्राम पके हुए अनाज के तौर पर तुलना करें, तो दोनों के पोषक तत्वों में काफी अंतर दिखाई देगा।
 - 100 ग्राम पका हुआ क्विनोआ- करीब 2.8 ग्राम फाइबर प्रदान करता है।

 - 100 ग्राम पका हुआ ब्राउन राइस- लगभग 1.6 से 1.8 ग्राम फाइबर देता है।

 अब कह सकते हैं कि क्विनोआ में ब्राउन राइस की तुलना में लगभ 50 से 75 प्रतिशत अधिक फाइबर होता है। लेकिन दोनों ही अनाज शरीर की फाइबर जरुरतों को पूरा करने में सहायक है। हालांकि, उतनी ही मात्रा में खाने पर क्विनोआ में आपको सबसे ज्यादा फाइबर मिलेगा।

शरीर के लिए क्यों जरूरी है फाइबर?
अगर आप फाइबर युक्त भोजन करते हैं, तो इससे आपका पेट साफ रहेगा और पाचन दुरुस्त रहेगा, इसके साथ ही आपको अन्य बड़े फायदे मिलेंगे-

 - भूख पर नियंत्रण:  'न्यूट्रिशन रिव्यूज' में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, फाइबर से भरपूर भोजन पचने में थोड़ा अधिक समय लेता है। इससे पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है और आपको बार-बार अनहेल्दी खाने चीजों से छुटकारा मिल जाता है।
 - गंभीर बीमारियों का खतरा कम: 'द लैंसेट' की एक रिपोर्ट के अनुसार, अधिक फाइबर खाने से टाइप-2 डायबिटीज, दिल की बीमारियों और कोलन (आंत) के कैंसर का जोखिम को कम करता है।

फाइबर ही नहीं, प्रोटीन में भी आगे है क्विनोआ
असल में ब्राउन राइस और क्विनोआ के बीच का अंतर सिर्फ फाइबर तक ही सीमित नहीं है। प्रोटीन और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों (Micronutrients) के मामले में भी क्विनोआ सबसे आगे है।

 - प्रोटीन की मात्रा: आपको बताते चलें कि, 100 ग्राम पके क्विनोआ में लगभग 4.4 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है। इतनी मात्रा में ब्राउन राइस में सिर्फ 2.3 से 2.7 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है।

 - कम्प्लीट प्रोटीन: असल में क्विनोआ को 'कम्प्लीट प्रोटीन' माना जाता है क्योंकि इसमें शरीर के लिए जरुरी सभी 9 एसेंशियल एमीनो एसिड मौजूद होते हैं। पारंपरिक अनाज होने के कारण ब्राउन राइस में कुछ एमीनो एसिड की कमी होती है।

जरुर मिनरल्स: क्विनोआ में मैग्नीशियम, आयरन और फोलेट जैसे पोषक तत्व भी अधिक मात्रा में पाए जाएंगे। 

किसके सेवन से लंबे समय तक भूख नहीं लगती है
यदि आप लंबे समय तक पेट को भरा रखना चाहती हैं, तो क्विनोआ एक बेहतरीन विकल्प साबित होगा। इसमें फाइबर और प्रोटीन दोनों की मात्रा अधिक देखने को मिलती हैं। असल में पेट भरा रहना सिर्फ अनाज पर निर्भर नहीं करता, बल्कि इस बात पर भी निर्भर होता है कि आप किस तरह और किन सब्जियों, दालों या हेल्दी फैट्स के साथ सेवन कर रही हैं।

ब्राउन राइस या क्विनोआ: किसे अपनी थाली में शामिल करें?
 
क्विनोआ आपके लिए सही है यदि आप चाहते हैं-
 - प्रति सर्विंग अधिक फाइबर

 - भोजन में प्रोटीन की ज्यादा मात्रा

 - सभी जरुरी एमीनो एसिड्स से भरपूर प्लांट प्रोटीन

 - पोषक तत्वों से भरपूर नया विकल्प

ब्राउन राइस आपके लिए सही है यदि आप चाहते हैं-
 - डेली के खाने में आसानी से घुल-मिले जाने वाले टेस्ट

 - बजट फ्रेंडली है और किफायती अनाज है

 - इसको आप भारतीय दाल और करी के साथ खा सकते हैं

 - इसमें होल-ग्रेन कार्बोहाइड्रेट का अच्छा स्रोत

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