Hartalika Teej: परंपराएं वही, अंदाज नया! बदलते दौर में बदली हरतालिका तीज की रंगत
Hartalika Teej: भारतीय पर्व परंपरा में हरतालिका तीज एक ऐसा पर्व है, जो प्राकृतिक जुड़ाव, दांपत्य प्रेम, सौभाग्य और पारिवारिक रिश्तों की सुंदर डोर से गुंथा होता है। भीगे-भीगे मौसम की हरियाली, झूले, लोकगीत, मेहंदी और श्रंगार से सजे इस त्योहार का स्वरूप आज के दौर में कुछ बदल गया है। लेकिन आधुनिकता के इस स्पर्श से पर्व की सुंदरता और निखर उठी है।
हरतालिका तीज भारतीय संस्कृति का एक ऐसा पर्व है, जो प्रकृति, प्रेम, सौभाग्य और पारिवारिक रिश्तों का सुंदर संगम माना जाता है। बरखा ऋतु की हरियाली, झूले, लोकगीत, मेहंदी और पारंपरिक श्रंगार, सदियों से इस त्योहार की पहचान रहे हैं।
समय के साथ जीवनशैली, परिवारों की संरचना और उत्सव मनाने के तरीके जरूर बदले हैं, लेकिन हरतालिका तीज का महत्व आज भी बरकरार है। फर्क सिर्फ इतना है कि अब परंपराओं के साथ आधुनिकता का संतुलन भी देखने को मिलता है।
बरकरार है परंपराओं का मूल भाव
हरतालिका तीज केवल एक धार्मिक-सांस्कृतिक पर्व ही नहीं, बल्कि परिवार और समाज को जोड़ने वाला उत्सव भी है। इस अवसर पर आज भी महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं, व्रत रखती हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।
बदलते समय और जीवनशैली में अनेक बदलाव आने के बावजूद इस पर्व से जुड़ी परंपराओं का मूल भाव आज भी पहले जैसा ही बना हुआ है।
पारंपरिक श्रंगार में जुड़ा मॉडर्न टच
कुछ दशक पहले तक हरतालिका तीज पर महिलाएं पारंपरिक साड़ी, लहंगा और कुछ निश्चित तरह के पुश्तैनी भारी गहनों से श्रंगार करती थीं। अब इसके साथ इंडो-वेस्टर्न ड्रेसेस, लाइट ज्वेलरी सेट और ट्रेंडी मेकअप भी शामिल हो गए हैं।
हालांकि हरी चूड़ियां, मेहंदी, बिंदी और सिंदूर आज भी तीज के श्रंगार की सबसे महत्वपूर्ण पहचान बने हुए हैं।
सोशल मीडिया से बढ़ी उत्सव की रौनक
आज हरतालिका तीज केवल घर या मोहल्ले तक सीमित नहीं रह गई है। सोशल मीडिया के माध्यम से लोग अपनी मेहंदी, पारंपरिक लुक, पूजा की झलक और पारिवारिक तस्वीरें साझा करते हैं।
डिजिटल माध्यमों ने त्योहार की खुशियों को दूर-दराज रहने वाले रिश्तेदारों तक भी पहुंचाने का काम किया है। कहने का मतलब है कि इसके जरिए महिलाएं अपने आस-पास ही नहीं दूर रहने वाले रिश्तेदारों और दोस्तों से भी जुड़ पाती हैं।
पर्यावरण के प्रति बढ़ी जागरूकता
पर्व के उल्लास के साथ महिलाएं पर्यावरण संरक्षण कस भी ध्यान रखती हैं। प्लास्टिक की सजावट की जगह प्राकृतिक फूलों, पत्तियों और मिट्टी से बनी सजावटी वस्तुओं का उपयोग बढ़ा है। कई परिवार हरतालिका तीज के अवसर पर पौधारोपण भी करते हैं, जिससे पर्व का संबंध प्रकृति से और मजबूत होता है।
संयुक्त परिवार से बना है जुड़ाव
पहले हरतालिका तीज जैसे पर्व संयुक्त परिवारों में बड़े स्तर पर मनाए जाते थे। आज न्यूक्लियर फैमिली यानी एकल परिवारों का चलन बढ़ा है। लेकिन महिलाएं अपने पारिवारिक जुड़ाव को नहीं भूलती हैं।
ऑनलाइन माध्यम से परिवार के अन्य सदस्यों से जुड़कर त्योहार का आनंद लेती हैं। वीडियो कॉल पर पूजा में शामिल होना, शुभकामनाएं देना और साथ में वर्चुअल सेलिब्रेशन करना अब आम बात बन गई है।
पारंपरिक व्यंजनों के साथ पौष्टिक विकल्प
एक समय तक हरतालिका तीज पर घेवर, मालपुआ, खीर और पूड़ी जैसे पारंपरिक व्यंजन ही बनाए जाते थे। आज भी इनका महत्व बना हुआ है, लेकिन स्वास्थ्य के प्रति बढ़ी जागरूकता की वजह से महिलाएं खुद और परिवार के लिए कम चीनी, बाजरे या मल्टीग्रेन से बने विकल्पों को भी अपनाने लगी हैं। इससे स्वाद और सेहत दोनों का संतुलन बना रहता है।
काम-काजी महिलाओं का सेलिब्रेशन
आज बड़ी संख्या में महिलाएं नौकरी और व्यवसाय से जुड़ी हैं। ऐसे में पूरे दिन की व्यस्तता के बावजूद वे हरतालिका तीज पर सुविधानुसार समय पर पूजा जरूर करती हैं और परिवार के साथ समय भी बिताती हैं। कई संस्थानों में हरतालिका तीज थीम पर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिससे कार्यस्थल पर भी उत्सव का माहौल बनता है।
बरकरार लोकगीत-झूलों की परंपरा
हरतालिका तीज की पहचान लोकगीतों और झूलों से भी जुड़ी रही है। शहरों में भले ही बड़े पेड़ों पर झूले कम दिखाई देते हों, लेकिन सांस्कृतिक संस्थाएं, आवासीय सोसाइटीज और सामुदायिक केंद्र इस परंपरा को जीवित रखने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित करते हैं। इसमें पुरानी के साथ मिलकर नई पीढ़ी भी अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ती है।
उपहारों में भी आया बदलाव
पहले तीज पर सिंधारा में पारंपरिक मिठाइयां, कपड़े और श्रंगार का सामान दिया जाता था। अब इनके साथ पौधे, हस्तनिर्मित उपहार, ऑर्गेनिक ब्यूटी प्रोडक्ट्स और व्यक्तिगत पसंद के अनुसार गिफ्ट देने का चलन बढ़ा है। इससे परंपरा के साथ आधुनिक सोच भी दिखाई देती है। महिलाएं बड़े चाव से पसंदीदा उपहार खरीदती और अपनों को देती हैं।
पर्व-संस्कृति से जुड़ रही नई पीढ़ी
हरतालिका तीज का वास्तविक महत्व तभी बना रहेगा, जब नई पीढ़ी इसके सांस्कृतिक और सामाजिक मूल्यों को समझेगी। सुखद है कि पूजा की परंपरा, लोककथाओं, त्योहार के महत्व और प्रकृति से इसके संबंध के बारे में जानने और इससे जुड़ने के लिए नई पीढ़ी में काफी उत्साह दिखता है।
पुरानी पीढ़ी की महिलाएं पूरे मन से नई पीढ़ी को पर्व संस्कृति की विरासत सौंप रही हैं। कहने का सार है कि हरतालिका तीज, बदलते समय के साथ नई पहचान जरूर बना रही है, लेकिन इसकी आत्मा आज भी प्रेम, आस्था, प्रकृति और पारिवार से जुड़ी है।
आधुनिक जीवनशैली ने इसके स्वरूप को नया अंदाज दिया है, पर इसकी परंपराएं आज भी लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने का काम कर रही हैं। यही संतुलन हरतालिका तीज की खूबसूरती है, जो आज भी इसे प्रासंगिक बनाता है।
गौरी देवी (संस्कृति एवं लोक परंपरा विशेषज्ञ)
प्रस्तुति:नैंसी गुप्ता
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Nails Health: नाखूनों में छिपा है सेहत का राज! रंग और बनावट में दिखने वाले ये बदलाव न करें नजरअंदाज
Nails Health: नाखून सिर्फ हाथों की खूबसूरती बढ़ाने का काम नहीं करते, बल्कि उनमें होने वाले कुछ बदलाव शरीर की सेहत से जुड़े संकेत भी दे सकते हैं। नाखूनों का रंग, मोटाई, सतह की बनावट और बढ़ने का तरीका कभी-कभी पोषण की कमी, संक्रमण या कुछ स्वास्थ्य समस्याओं की ओर इशारा कर सकता है। हालांकि, हर बदलाव किसी बीमारी का संकेत हो, यह जरूरी नहीं है। चोट, उम्र, नेल पॉलिश और रोजमर्रा के कामों से भी नाखूनों में बदलाव आ सकते हैं।
यही वजह है कि नाखूनों को देखकर खुद किसी बीमारी का निष्कर्ष निकालना सही नहीं है। लेकिन अगर नाखूनों में अचानक या लगातार कोई असामान्य बदलाव नजर आए और उसके साथ दूसरे लक्षण भी मौजूद हों, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे मामलों में डॉक्टर से जांच कराना ज्यादा सुरक्षित रहता है।
पीले नाखून दिखें तो क्या समझें?
नाखूनों का हल्का पीला पड़ना कई कारणों से हो सकता है। लंबे समय तक नेल पॉलिश लगाने, धूम्रपान या फंगल इंफेक्शन के कारण भी नाखून पीले दिखाई दे सकते हैं। अगर नाखून मोटे होने लगें, टूटने लगें या उनके नीचे गंदगी जैसी परत दिखे, तो फंगल संक्रमण की संभावना हो सकती है। लगातार समस्या रहने पर त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।
नाखूनों पर सफेद निशान
नाखूनों पर छोटे सफेद धब्बे अक्सर चोट या नाखून को हुए मामूली नुकसान के कारण दिखाई दे सकते हैं। इन्हें देखकर तुरंत कैल्शियम की कमी मान लेना सही नहीं है। आमतौर पर नाखून बढ़ने के साथ ये निशान आगे की ओर चले जाते हैं और धीरे-धीरे काटने पर खत्म हो जाते हैं।
नाखूनों पर गहरी लाइन दिखे तो सावधान
नाखून पर हल्की ऊर्ध्वाधर धारियां उम्र बढ़ने के साथ सामान्य रूप से भी दिखाई दे सकती हैं। लेकिन अगर किसी एक नाखून पर अचानक गहरी भूरी या काली पट्टी दिखाई दे, खासकर वह चौड़ी होती जाए या आसपास की त्वचा तक फैलती नजर आए, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। ऐसे बदलावों को केवल घरेलू उपायों से ठीक करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
नाखून बहुत भुरभुरे हों तो
बार-बार नाखून टूटना और परतों में बंटना पानी, डिटर्जेंट या केमिकल के अधिक संपर्क से हो सकता है। कभी-कभी पोषण संबंधी कमी या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी इसकी वजह हो सकती हैं। हाथों को लंबे समय तक पानी में रखने और तेज केमिकल के इस्तेमाल से बचना, दस्ताने पहनना और मॉइस्चराइजर लगाना नाखूनों की देखभाल में मदद कर सकता है।
चम्मच जैसे मुड़े नाखून
अगर नाखून बीच से धंसने लगें और किनारे ऊपर की ओर उठे हुए दिखाई दें, तो इसे कोइलोनिखिया (स्पून नेल्स) कहा जाता है। यह कभी-कभी आयरन की कमी से जुड़ा हो सकता है, लेकिन इसके अन्य कारण भी हो सकते हैं। इसलिए ऐसे नाखून दिखने पर बिना जांच के आयरन सप्लीमेंट लेना उचित नहीं है।
नाखूनों की सेहत के लिए अपनाएं ये आदतें
नाखूनों को साफ और सूखा रखें, उन्हें बहुत छोटा काटने से बचें और क्यूटिकल को बार-बार काटने या खींचने से बचें। संतुलित आहार लें, जिसमें पर्याप्त प्रोटीन, आयरन, जिंक और अन्य जरूरी पोषक तत्व मिलें। नाखूनों में लगातार बदलाव, दर्द, सूजन, रंग में असामान्य परिवर्तन या संक्रमण के संकेत दिखाई दें तो डॉक्टर से सलाह लें। नाखून शरीर की सेहत के कुछ संकेत दे सकते हैं, लेकिन वे बीमारी की पक्की जांच का विकल्प नहीं हैं।
(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी विशेषज्ञ/डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)
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लेखक: (कीर्ति)
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