Manoj Jarange का आरोप: Devendra Fadnavis ने मराठा आरक्षण पर एक साल गुमराह किया
(फाइल फोटो के साथ) जालना (महाराष्ट्र), आठ सितंबर आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने मंगलवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस और उनके मंत्रिमंडल के सहयोगी राधाकृष्ण विखे पाटिल पर आरोप लगाया कि वे एक साल से अधिक समय से आरक्षण के मुद्दे पर मराठा समुदाय को गुमराह कर रहे हैं। जालना के अंतरवाली सराटी गांव में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के 11वें दिन स्वास्थ्य बिगड़ने पर जरांगे को मंगलवार तड़के नस के जरिए (आईवी) तरल पदार्थ लेने के लिए मजबूर होना पड़ा। वहीं, मराठा आरक्षण पर बनी उपसमिति के प्रमुख विखे पाटिल ने उनसे ‘दो कदम आगे बढ़ने’ और अपनी मांगों पर राज्य सरकार के सकारात्मक फैसलों को स्वीकार करने का आग्रह किया।
वाडीगोडरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा अधिकारी डॉ. शुभम राठौड़ के अनुसार, जरांगे पानी की कमी की समस्या से पीड़ित हो गए। मंत्रियों की ओर से सरकार द्वारा जल्द कार्रवाई किए जाने का आश्वासन मिलने के बाद रात ढाई बजे से सुबह सात बजे के बीच उन्हें आईवी के जरिए चार बोतल तरल पदार्थ चढ़ाए गए। जरांगे मराठा समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के तहत आरक्षण देने की मांग कर रहे हैं।
उनकी मांगों में हैदराबाद और सतारा गजट के रिकॉर्ड को लागू करना तथा मराठा समुदाय के पात्र सदस्यों को कुनबी जाति प्रमाणपत्र जारी करना शामिल है। कुनबी एक पारंपरिक कृषि समुदाय है, जिसे आधिकारिक तौर पर ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) श्रेणी में रखा गया है। इसके कारण इस समुदाय के लोग शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ पाने के पात्र हैं।
जरांगे ने फडणवीस से उनके उस पुराने वादे को लेकर सवाल किया, जिसमें उन्होंने दो महीने के भीतर हैदराबाद गजट के आधार पर आरक्षण देने की बात कही थी। उन्होंने फडणवीस से इस देरी की वजह बताने की चुनौती दी। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘विखे पाटिल ने एक साल तक मराठा समुदाय को गुमराह किया है और उन्हें इसकी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ेगी।’’ जरांगे ने कहा कि अगर प्रदर्शन स्थल पर कोई प्रतिनिधिमंडल नहीं भी आता है, तब भी आंदोलन जारी रहेगा।
उन्होंने बताया कि 12 सितंबर को अंतरवाली सराटी में पूरे महाराष्ट्र से मराठा समुदाय के सदस्यों की एक बड़ी बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें आंदोलन की आगे की रणनीति तय की जाएगी। मुंबई में संवाददाताओं से बातचीत में विखे पाटिल ने कहा कि राज्य सरकार ने जरांगे द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों पर फैसले लिए हैं। उन्होंने दावा किया कि फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के कार्यकाल में लिए गए फैसलों से मराठा समुदाय को न्याय मिला है और इससे पहले कभी ऐसे कदम नहीं उठाए गए।
विखे पाटिल ने कहा, ‘‘जरांगे द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों पर सरकार ने एक कदम आगे बढ़कर फैसले लिए हैं। जब सरकार फैसले ले रही है तो उन्हें भी दो कदम आगे बढ़ना चाहिए।
CMRL रिश्वत मामले में ED के पत्र पर कार्रवाई को सरकार बाध्य, बोले Kerala के गृहमंत्री
तिरुवनंतपुरम, आठ सितंबर केरलम के गृहमंत्री रमेश चेन्निथला ने मंगलवार को कहा कि कथित सीएमआरएल रिश्वत मामले में पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन, उनकी बेटी टी वीणा और दामाद पी ए मोहम्मद रियास के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के अनुरोध वाले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के पत्र पर सरकार कानूनी कार्रवाई करने के लिए बाध्य है। चेन्निथला ने कहा कि राज्य के पुलिस प्रमुख रवाडा ए चंद्रशेखर को मिले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के पत्र को पड़ताल के लिए गृह सचिव के पास भेज दिया गया है और उनकी सिफारिश मिलने के बाद इस पर फैसला लिया जाएगा। उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा कि गृह सचिव की सिफारिश के आधार पर और मुख्यमंत्री वी डी सतीशन से विचार-विमर्श करने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
चेन्निथला ने संवाददाताओं के सवालों के जवाब में कहा, ‘‘सरकार कानूनी रूप से अपेक्षित कार्रवाई करने के लिए बाध्य है। यह पत्र प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा जांच किए जाने के बाद दिया गया है। इसलिए हम इसे नजरअंदाज नहीं कर सकते।
यदि कानूनी सलाह लेने की जरूरत होगी तो वह ली जाएगी।’’ इससे पहले दिन में चेन्निथला ने कहा था कि उन्होंने डीजीपी से बात की है और पुलिस अधिकारी ने बताया कि उन्हें यह पत्र करीब 10 मिनट पहले ही मिला है। चेन्निथला ने कहा, ‘‘डीजीपी पत्र पर गौर करेंगे, जिसके बाद यह तय किया जाएगा कि कानून के अनुसार क्या कार्रवाई की जानी चाहिए। अगर डीजीपी को कोई पत्र मिलता है तो वह निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई करेंगे।
कृपया इसके लिए इंतजार करें।’’ सूत्रों ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि ईडी ने धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 66(2) के तहत यह पत्र भेजा है और इसमें उक्त मामले में की गई उसकी जांच के दौरान सामने आए निष्कर्षों का हवाला दिया गया है। धन शोधन रोधी कानून की यह धारा ईडी को अपनी आपराधिक जांच के निष्कर्ष किसी कानून प्रवर्तन एजेंसी के साथ साझा करने का अधिकार देती है, ताकि उसके आधार पर नयी प्राथमिकी या शिकायत दर्ज की जा सके। ऐसी पुलिस प्राथमिकी के आधार पर ईडी पीएमएलए का एक मामला दर्ज कर सकती है।
सूत्रों ने बताया कि ईडी ने पीएमएलए के तहत इस मामले में जांच और छापेमारी के दौरान मिले ‘‘साक्ष्यों’’ के आधार पर विजयन, उनकी बेटी वीणा, रियास और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ केरलम के डीजीपी से पुलिस प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध किया है। ईडी का आरोप है कि केरलम की खनन कंपनी ‘कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड’ (सीएमआरएल) ने वीणा की अब बंद हो चुकी कंपनी ‘एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस’ को ‘आईटी कंसल्टेंसी सेवाओं’ के नाम पर कथित तौर पर 2.78 करोड़ रुपये का फर्जी भुगतान किया था। केंद्रीय एजेंसी ने जून में वीणा के ठिकानों पर छापेमारी की थी।
उस समय वह राज्य की राजधानी तिरुवनंतपुरम में किराये के मकान में विजयन के साथ रह रही थीं। इसके बाद ईडी ने उनसे पूछताछ भी की थी। चंद्रशेखर ने कहा कि संघीय एजेंसी से एक विस्तृत पत्र मिला है, जिसमें कथित सीएमआरएल रिश्वत मामले में विजयन, वीणा और रियास के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध किया गया है।
उन्होंने कहा कि यहां पुलिस मुख्यालय में प्राप्त 25 पन्नों के पत्र का विश्लेषण किया जाएगा और उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि पत्र के कानूनी पहलुओं की भी पड़ताल की जानी है। राज्य के पुलिस प्रमुख ने संवाददाताओं से कहा, “पत्र का विश्लेषण करने और मामले के कानूनी पहलुओं की जांच करने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।” घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए केपीसीसी अध्यक्ष और बिजली मंत्री सनी जोसेफ ने कहा कि उनकी समझ के अनुसार, ईडी के पत्र में कथित तौर पर अवैध लेनदेन में शामिल करोड़ों रुपये के बारे में विवरण दिया गया है और पुलिस आवश्यक कानूनी कार्रवाई करेगी।
जोसेफ ने कहा कि जब वीणा के खिलाफ आरोप लगाए गए थे, तब उन्होंने न तो उन्हें खारिज किया था और न ही कानूनी रूप से उनका सामना करने की तैयारी दिखाई थी। उन्होंने कहा, “यह साबित मामला है और इसमें स्वीकार किए गए तथ्य मौजूद हैं। स्वीकार किए गए तथ्यों को साबित करने की जरूरत नहीं होती।” उन्होंने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) नेतृत्व से घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देने और आरोपों का सामना कर रहे लोगों के कृत्यों को सही ठहराने की कोशिश करने के बजाय तथ्यों को स्वीकार करते हुए जांच में सहयोग करने का आग्रह किया।
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