जबलपुर में सांडों की लड़ाई बनी मौत की वजह, युवक को उठाकर पटका, इलाज के दौरान दम तोड़ा
जबलपुर के हनुमानताल इलाके में सड़क पर लड़ रहे दो सांडों की चपेट में आने से एक युवक की जान चली गई। सांड ने युवक को उठाकर सड़क पर पटक दिया और फिर उसके ऊपर से गुजर गया। इलाज के दौरान युवक ने दम तोड़ दिया।
घटना 5 सितंबर की शाम करीब 6 बजे की बताई जा रही है। पूरी घटना पास लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई है। मृतक की पहचान गोराबाजार निवासी रवि यादव के रूप में हुई है। घटना के बाद शहर में आवारा मवेशियों की समस्या को लेकर नगर निगम की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
हनुमानताल में सड़क पर लड़ रहे थे दो सांड
5 सितंबर की शाम हनुमानताल क्षेत्र में दो सांड बीच सड़क पर आपस में लड़ रहे थे। सांडों की लड़ाई के कारण सड़क पर यातायात भी रुक गया था। आसपास मौजूद दुकानदारों ने उन्हें हटाने के लिए पानी डालना शुरू किया। इसी दौरान एक युवक सड़क किनारे से वहां से निकल रहा था।
युवक सांडों से बचकर निकलने की कोशिश कर रहा था, लेकिन तभी एक सांड ने पीछे से उस पर हमला कर दिया। सांड ने युवक को सींगों से उठाकर सड़क पर पटक दिया। इसके बाद सांड उसके ऊपर से गुजरते हुए वहां से भाग गया। अचानक हुए इस हमले से आसपास मौजूद लोगों में भी अफरा-तफरी मच गई।
सीसीटीवी में कैद हुई पूरी घटना
हनुमानताल में हुई सांड के हमले की यह घटना पास लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई। वीडियो में सड़क पर दो सांडों को लड़ते हुए देखा जा सकता है। इसी दौरान वहां से गुजर रहा युवक उनकी चपेट में आ जाता है।
हमले के बाद युवक काफी देर तक सड़क पर पड़ा रहा। मौके पर मौजूद लोगों ने उसे उठाया और ऑटो की मदद से जिला अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने उसका इलाज शुरू किया, लेकिन हालत गंभीर होने के कारण उसकी जान नहीं बच सकी। इलाज के दौरान रवि यादव की मौत हो गई।
आवारा मवेशियों पर उठे नगर निगम की कार्रवाई पर सवाल
इस घटना के बाद जबलपुर में आवारा मवेशियों की समस्या एक बार फिर चर्चा में आ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर की कई सड़कों पर सांड और दूसरे आवारा मवेशी खुलेआम घूमते रहते हैं। कई बार ये सड़क के बीच में बैठ जाते हैं या आपस में लड़ने लगते हैं।
स्थानीय निवासी गणेश कुमार ने कहा कि सिर्फ हनुमानताल ही नहीं, बल्कि शहर के कई इलाकों में सांडों का आतंक है। लोगों का आरोप है कि नगर निगम की हाका गैंग की कार्रवाई का असर जमीन पर दिखाई नहीं दे रहा है। सड़क पर घूमते मवेशियों के कारण वाहन चालकों और पैदल चलने वालों को लगातार खतरा बना रहता है।
दूध कारोबारी था मृतक
हनुमानताल थाना प्रभारी सुभाषचंद्र बघेल के अनुसार, मृतक रवि यादव दूध का व्यवसाय करता था और घटना के समय दूध लेकर आया था। घटना के बाद पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज और घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की भी जानकारी जुटा रही है।
इस हादसे ने शहर में आवारा मवेशियों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। सड़क पर घूमते सांड सिर्फ यातायात में परेशानी नहीं बन रहे, बल्कि लोगों की जान के लिए भी खतरा पैदा कर रहे हैं। ऐसे में स्थानीय लोगों की नजर अब नगर निगम की कार्रवाई पर है। लोगों की मांग है कि सड़कों से आवारा मवेशियों को हटाने के लिए स्थायी और प्रभावी व्यवस्था की जाए, ताकि आगे किसी और परिवार को ऐसी घटना का सामना न करना पड़े।
वंदना झा, जबलपुर
भोपाल में जूनियर डॉक्टरों के समर्थन में आए कमलनाथ, कहा “‘सरकार राजहठ छोड़कर मांगें मानें”
भोपाल में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे इंटर्न और जूनियर डॉक्टरों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर मध्यप्रदेश की सियासत गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने डॉक्टरों के प्रदर्शन पर लाठीचार्ज और वाटर कैनन के इस्तेमाल को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार संवाद के बजाय “लाठी-डंडे की भाषा” बोल रही है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे जूनियर डॉक्टरों पर जिस तरह कार्रवाई की गई वह शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि सरकार को राजहठ छोड़कर डॉक्टरों की मांगों पर ध्यान देना चाहिए।
‘हर वर्ग आंदोलन के लिए मजबूर’
कमलनाथ ने सरकार पर प्रदेश में ऐसा माहौल बनाने का आरोप लगाया है जिसमें अलग-अलग वर्गों को अपनी मांगों के लिए आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले एक महीने में स्कूल के बच्चों, शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों, किसानों, व्यापारियों और अब डॉक्टरों के आंदोलनों ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।
उन्होंने सरकार पर समस्याओं के समाधान में विफल रहने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार को “राजहठ” छोड़कर डॉक्टरों की मांगों पर बातचीत करनी चाहिए। उनका कहना है कि विवाद का जल्द समाधान जरूरी है, ताकि डॉक्टरों के आंदोलन का असर मरीजों के इलाज पर न पड़े।
क्या है डॉक्टरों की मांग
भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज से जुड़े एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टर स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर राजधानी में आंदोलन कर रहे हैं। इनका मौजूदा स्टाइपेंड 14,337 है और उनकी मांग है कि इसे बढ़ाकर 30,000 प्रतिमाह किया जाए। इससे पहले भी प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों के इंटर्न डॉक्टरों ने इस मांग को लेकर आंदोलन किया था।
7 सितंबर को भोपाल में डॉक्टर मुख्यमंत्री निवास की ओर मार्च कर रहे थे, जिन्हें पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर रोका। इस दौरान वाटर कैनन का इस्तेमाल हुआ और पुलिस द्वारा लाठीचार्ज भी किया गया। डॉक्टरों का कहना है कि कुछ प्रदर्शनकारी घायल हुए। इसके बाद 8 सितंबर को ये आंदोलन और तेज हो गया है। आंदोलनरत डॉक्टर्स ने हमीदिया अस्पताल में नियमित ओपीडी और निर्धारित ओटी सेवाओं के बहिष्कार का ऐलान किया। हालांकि आपातकालीन सेवाएं जारी रखने की बात कही गई है।
भाजपा की सरकार संवाद की भाषा भूलकर सिर्फ लाठी-डंडे की भाषा बोल रही है।
कल भोपाल में अपना स्टाइपेंड बढ़ाने के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे जूनियर डॉक्टरों पर जिस तरह लाठियाँ भाँजी गईं, वह अत्यंत शर्मनाक है।
इसके विरोध में प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में डॉक्टर आज भी प्रदर्शन कर… pic.twitter.com/bOJkoNAcrU
— Kamal Nath (@OfficeOfKNath) September 8, 2026
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