तिग्मांशु धूलिया ने ‘धुरंधर’ की कहानी पर सवाल उठाए:बोले- अंडरकवर स्पाई पाकिस्तान जाता है और तबाही मचा देता है, ये कोई कहानी हुई
निर्देशक और अभिनेता तिग्मांशु धूलिया ने मौजूदा हिंदी सिनेमा में कहानी कहने के तरीके पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि कॉरपोरेट कल्चर और एक जैसे फिल्मी टेम्पलेट के कारण फिल्मों में मौलिक कहानियां कम होती जा रही हैं। धूलिया ने यह टिप्पणी हाल ही में एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (EGI) की ओर से आयोजित राजेंद्र माथुर मेमोरियल लेक्चर के दौरान की। कार्यक्रम दिल्ली में आयोजित हुआ था। धूलिया ने कमर्शियल मेनस्ट्रीम सिनेमा का उदाहरण देते हुए ‘पुष्पा’, ‘केजीएफ’ और ‘धुरंधर’ का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “हर फिल्म एक फिक्शनल बायोपिक है।” ‘धुरंधर’ का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि अगर किसी से फिल्म की कहानी पूछी जाए तो शायद वह उसे ठीक से बता नहीं पाएगा। उन्होंने कहा, “मैंने वह फिल्म देखी है। मुझे फिल्म का पहला पार्ट काफी पसंद आया। बहुत अच्छी तरह प्रेजेंट किया गया है, काफी एंगेजिंग है और म्यूजिक भी अच्छा है, लेकिन आप उसकी कहानी पूछिएगा तो आप कहानी बता नहीं पाएंगे।” धूलिया ने फिल्म की कहानी को अपने अंदाज में समझाते हुए कहा, “एक आदमी है, अंडरकवर स्पाई है, पाकिस्तान जाता है और वहां तबाही मचा देता है। ये कोई कहानी हुई?” उन्होंने आगे कहा कि फिल्मों में कहानी कहने वाले लोग कम हो गए हैं और जो लोग अलग तरह की कहानी कहना चाहते हैं, उन्हें बनाने का मौका नहीं मिलता। उनके मुताबिक मेकर्स को डर रहता है कि ऐसी फिल्में चलेंगी नहीं। धूलिया बोले- फिल्मों में एक जैसा टेंपलेट दिखाई दे रहा है धूलिया ने कहा कि एक ही जैसा टेंपलेट हर जगह दिखाई दे रहा है। उन्होंने इसे एक्सट्रीम कैपिटलिज्म से जोड़ते हुए कहा कि जिस तरह शहरों, फैशन, गाड़ियों और दुकानों में एकरूपता बढ़ रही है, उसी तरह फिल्मों में भी इंडिविजुअलिटी कम होती जा रही है। उन्होंने पुराने हिंदी सिनेमा का जिक्र करते हुए कहा कि विमल रॉय, शक्ति सामंत, मनमोहन देसाई, प्रकाश मेहरा और सुभाष घई जैसे फिल्मकारों से लेकर 2017 तक हिंदी सिनेमा में स्थिति ठीक थी। इसके बाद अचानक बदलाव आया और हम कहानी कहना ही भूल चुके हैं। तिग्मांशु धूलिया के वर्कफ्रंट की बात करें तो उनकी अपकमिंग फिल्म ‘घमासान’ 11 सितंबर 2026 को ZEE5 पर रिलीज होने वाली है। फिल्म में प्रतीक गांधी और अरशद वारसी मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म बुंदेलखंड के डकैत संसार से प्रेरित कहानी पर आधारित है। ऋतिक ने ‘धुरंधर’ की पॉलिटिक्स से असहमति जताई थी बता दें कि पिछले साल एक्टर ऋतिक रोशन फिल्म ‘धुरंधर’ से जुड़ी एक पोस्ट करने पर ट्रोलर्स के निशाने पर आ गए थे। फिल्म रिलीज के बाद ऋतिक ने इसकी तारीफ में एक पोस्ट की, लेकिन साथ ही कहा कि वो फिल्म में दिखाई गई पॉलिटिक्स से सहमत नहीं हैं। बयान पर उनकी खिंचाई हुई, जिसके बाद अब एक्टर ने फिर धुरंधर की तारीफ में एक और पोस्ट शेयर की थी। ऋतिक ने पहले ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट पर फिल्म को लेकर लिखा था, मुझे सिनेमा से बहुत प्यार है। मुझे वे लोग पसंद हैं जो कहानी में पूरी तरह डूब जाते हैं, कहानी उन्हें घुमाती है, हिलाती है, और फिर जो कहना होता है वह सब परदे पर उतार देते हैं। धुरंधर ऐसी ही एक फिल्म है। इसकी कहानी मुझे बहुत पसंद आई। यही सिनेमा है। आगे उन्होंने लिखा था, हो सकता है कि मैं इसकी राजनीति से सहमत न होऊं और इस बात पर भी चर्चा हो सकती है कि एक नागरिक होने के नाते फिल्ममेकर की क्या जिम्मेदारियां होती हैं। फिर भी, इसे देखकर मैं बहुत कुछ सीखता हूं, जैसा कि मैंने हमेशा सिनेमा के स्टूडेंट के तौर पर सीखा है। वहीं, इसके बाद अगले दिन ऋतिक रोशन ने धुरंधर की तारीफ में ऑफिशियल X अकाउंट से लिखा था, अब भी धुरंधर मेरे दिमाग से नहीं निकल रही है। आदित्य धर आप कमाल के फिल्ममेकर हैं। रणवीर सिंह, एकदम शांत से लेकर बेहद तीखे किरदार तक, क्या सफर रहा है। और इसमें आपकी लगातार बेहतरीन परफॉर्मेंस शानदार है। अक्षय खन्ना हमेशा से मेरे फेवरेट रहे हैं, और यह फिल्म साबित करती है कि क्यों। आर माधवन, क्या जबरदस्त शालीनता, दम और गरिमा दिखाई है आपने। और राकेश बेदी आपने जो किया, वह कमाल से भी ऊपर था। क्या एक्टिंग थी, शानदार। मेकअप और प्रोस्थेटिक्स टीम को भी बहुत बड़ी वाहवाही। अब तो पार्ट 2 का इंतजार नहीं हो रहा। राम्या ने ‘धुरंधर 2’ की आलोचना की बता दें कि कन्नड़ एक्ट्रेस राम्या ने फिल्म ‘धुरंधर’ के दूसरे पार्ट की आलोचना की थी। फिल्म को देखने के बाद राम्या ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर एक लंबा पोस्ट शेयर किया था। उन्होंने दर्शकों को सलाह दी है कि वे सिनेमाघरों में जाकर अपना समय और पैसा बर्बाद न करें, बल्कि इसके ओटीटी (OTT) पर आने का इंतजार करें। राम्या ने यह भी लिखा कि लोग कह रहे हैं कि रणवीर ने फिल्म को अपने कंधों पर उठाया है, लेकिन मुझे तो सिर्फ उनके बाल दिखाई दिए। राम्या ने फिल्म में दिखाई गई हिंसा की भी आलोचना की थी। उन्होंने फिल्म को हथियारों का विजुअल हैंडबुक बताया, जिसमें सिरिंज और स्पैनर जैसी साधारण चीजों को भी हथियार के रूप में इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने फिल्म के लॉजिक पर सवाल उठाते हुए कहा था, “दोनों पैर कटने और शरीर पर केरोसिन डालने के बाद भी किरदार ऐसे डायलॉग बोल रहा है जैसे वह किसी 'टेड टॉक' में हो। इसके लिए ऑस्कर नहीं बल्कि नोबेल प्राइज मिलना चाहिए। मेडिकल साइंस की जय हो।”
जबलपुर में सांडों की लड़ाई बनी मौत की वजह, युवक को उठाकर पटका, इलाज के दौरान दम तोड़ा
जबलपुर के हनुमानताल इलाके में सड़क पर लड़ रहे दो सांडों की चपेट में आने से एक युवक की जान चली गई। सांड ने युवक को उठाकर सड़क पर पटक दिया और फिर उसके ऊपर से गुजर गया। इलाज के दौरान युवक ने दम तोड़ दिया।
घटना 5 सितंबर की शाम करीब 6 बजे की बताई जा रही है। पूरी घटना पास लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई है। मृतक की पहचान गोराबाजार निवासी रवि यादव के रूप में हुई है। घटना के बाद शहर में आवारा मवेशियों की समस्या को लेकर नगर निगम की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
हनुमानताल में सड़क पर लड़ रहे थे दो सांड
5 सितंबर की शाम हनुमानताल क्षेत्र में दो सांड बीच सड़क पर आपस में लड़ रहे थे। सांडों की लड़ाई के कारण सड़क पर यातायात भी रुक गया था। आसपास मौजूद दुकानदारों ने उन्हें हटाने के लिए पानी डालना शुरू किया। इसी दौरान एक युवक सड़क किनारे से वहां से निकल रहा था।
युवक सांडों से बचकर निकलने की कोशिश कर रहा था, लेकिन तभी एक सांड ने पीछे से उस पर हमला कर दिया। सांड ने युवक को सींगों से उठाकर सड़क पर पटक दिया। इसके बाद सांड उसके ऊपर से गुजरते हुए वहां से भाग गया। अचानक हुए इस हमले से आसपास मौजूद लोगों में भी अफरा-तफरी मच गई।
सीसीटीवी में कैद हुई पूरी घटना
हनुमानताल में हुई सांड के हमले की यह घटना पास लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई। वीडियो में सड़क पर दो सांडों को लड़ते हुए देखा जा सकता है। इसी दौरान वहां से गुजर रहा युवक उनकी चपेट में आ जाता है।
हमले के बाद युवक काफी देर तक सड़क पर पड़ा रहा। मौके पर मौजूद लोगों ने उसे उठाया और ऑटो की मदद से जिला अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने उसका इलाज शुरू किया, लेकिन हालत गंभीर होने के कारण उसकी जान नहीं बच सकी। इलाज के दौरान रवि यादव की मौत हो गई।
आवारा मवेशियों पर उठे नगर निगम की कार्रवाई पर सवाल
इस घटना के बाद जबलपुर में आवारा मवेशियों की समस्या एक बार फिर चर्चा में आ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर की कई सड़कों पर सांड और दूसरे आवारा मवेशी खुलेआम घूमते रहते हैं। कई बार ये सड़क के बीच में बैठ जाते हैं या आपस में लड़ने लगते हैं।
स्थानीय निवासी गणेश कुमार ने कहा कि सिर्फ हनुमानताल ही नहीं, बल्कि शहर के कई इलाकों में सांडों का आतंक है। लोगों का आरोप है कि नगर निगम की हाका गैंग की कार्रवाई का असर जमीन पर दिखाई नहीं दे रहा है। सड़क पर घूमते मवेशियों के कारण वाहन चालकों और पैदल चलने वालों को लगातार खतरा बना रहता है।
दूध कारोबारी था मृतक
हनुमानताल थाना प्रभारी सुभाषचंद्र बघेल के अनुसार, मृतक रवि यादव दूध का व्यवसाय करता था और घटना के समय दूध लेकर आया था। घटना के बाद पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज और घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की भी जानकारी जुटा रही है।
इस हादसे ने शहर में आवारा मवेशियों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। सड़क पर घूमते सांड सिर्फ यातायात में परेशानी नहीं बन रहे, बल्कि लोगों की जान के लिए भी खतरा पैदा कर रहे हैं। ऐसे में स्थानीय लोगों की नजर अब नगर निगम की कार्रवाई पर है। लोगों की मांग है कि सड़कों से आवारा मवेशियों को हटाने के लिए स्थायी और प्रभावी व्यवस्था की जाए, ताकि आगे किसी और परिवार को ऐसी घटना का सामना न करना पड़े।
वंदना झा, जबलपुर
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