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'ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026' दुनिया के सबसे बड़े फिनटेक मंचों में शामिल, भारतीय बाजार पर वैश्विक निवेशकों और कंपनियों की नजर: इंफोसिस के सह-संस्थापक
मुंबई, 8 सितंबर (आईएएनएस)। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में 8 से 11 सितंबर तक आयोजित होने वाले ग्लोबल फिनटेक फेस्ट (जीएफएफ) 2026 के शुभारंभ अवसर पर मंगलवार को जीएफएफ 2026 के अध्यक्ष, इंफोसिस के सह-संस्थापक और एक्सिलर वेंचर्स के चेयरमैन क्रिस गोपालकृष्णन ने कहा कि भारत आज भी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और यही कारण है कि वैश्विक निवेशकों तथा फिनटेक कंपनियों की नजर भारतीय बाजार पर केंद्रित है।
वहां उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इस वर्ष का आयोजन दुनिया के सबसे बड़े और प्रभावशाली फिनटेक सम्मेलनों में से एक बनने जा रहा है। उन्होंने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि इस बार सम्मेलन में 1 लाख से अधिक प्रतिनिधियों, 8,000 से अधिक संस्थानों, 1,200 से ज्यादा वक्ताओं, 500 से अधिक निवेशकों, 5,000 से ज्यादा स्टार्टअप्स, 450 से अधिक सत्रों, 350 से ज्यादा प्रदर्शकों और 200 से अधिक उत्पाद लॉन्च के शामिल होने की उम्मीद है।
क्रिस गोपालकृष्णन ने आगे कहा कि इतनी व्यापक भागीदारी इस आयोजन को वैश्विक फिनटेक उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बनाती है, जहां नीति निर्माता, नियामक, केंद्रीय बैंक, वित्तीय संस्थान, तकनीकी कंपनियां, निवेशक और स्टार्टअप्स एक साथ मिलकर वित्तीय सेवाओं के भविष्य पर चर्चा करेंगे।
उन्होंने कहा कि भारत में डिजिटल भुगतान, वित्तीय समावेशन और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में जिस गति से विकास हुआ है, उसने देश को वैश्विक फिनटेक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाया है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस वर्ष का ग्लोबल फिनटेक फेस्ट भी पिछले आयोजनों की तरह उद्योग, निवेशकों और नीति निर्माताओं के लिए उपयोगी साबित होगा।
क्रिस गोपालकृष्णन ने कहा, यह लगातार तीसरा वर्ष है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ग्लोबल फिनटेक फेस्ट को संबोधित कर रहे हैं। उन्होंने इसे भारत के फिनटेक क्षेत्र और डिजिटल नवाचार के प्रति सरकार की मजबूत प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया।
उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री की उपस्थिति इस आयोजन के महत्व को और बढ़ाती है तथा यह दर्शाती है कि भारत वित्तीय तकनीक, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और नवाचार-आधारित आर्थिक विकास को कितनी प्राथमिकता दे रहा है।
क्रिस गोपालकृष्णन ने आगे कहा कि ग्लोबल फिनटेक फेस्ट अब केवल एक सम्मेलन नहीं रह गया है, बल्कि यह एक अंतरराष्ट्रीय विचार मंच (थॉट लीडरशिप फोरम) बन चुका है, जहां दुनिया भर के नीति निर्माता, केंद्रीय बैंक, नियामक संस्थाएं, वित्तीय सेवा प्रदाता, फिनटेक कंपनियां, तकनीकी विशेषज्ञ, निवेशक और शिक्षाविद वित्तीय क्षेत्र के भविष्य को आकार देने वाले विषयों पर चर्चा करते हैं।
उन्होंने कहा कि इस मंच का उद्देश्य नवाचार, नियमन और वित्तीय समावेशन के बीच संतुलन बनाते हुए वैश्विक स्तर पर बेहतर वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है।
इससे पहले, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने यहां लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत का फिनटेक क्षेत्र वित्तीय समावेशन, डिजिटल नवाचार और ग्राहक सेवाओं को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है। उन्होंने बताया कि फिनटेक कंपनियों ने देश की विशाल और विविध आबादी को औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जोड़ने का काम पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज, सुलभ और कम लागत पर किया है।
मल्होत्रा ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक ने हमेशा फिनटेक क्षेत्र में जिम्मेदार नवाचार को बढ़ावा देने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि आरबीआई ने उद्योग के भीतर आत्म-नियमन को प्रोत्साहित किया है और ऐसा डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना ढांचा (पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर) विकसित करने में सहयोग किया है, जिस पर फिनटेक कंपनियां नए समाधान तैयार कर सकें।
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि फिनटेक की बदौलत बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं तक पहुंच में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। पहले जहां खाता खोलने और भुगतान निपटान जैसी प्रक्रियाओं में काफी समय लगता था, वहीं अब तकनीक के कारण ये प्रक्रियाएं तेज और अधिक प्रभावी हो गई हैं।
बता दें कि इस वर्ष ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 की थीम पोटेंशियल टू इंपैक्ट: एजेंटिक एआई, टोकेनाइजेशन एंड ट्रस्टेड, कनेक्टेड ग्लोबल सिस्टम्स फॉर इन्क्लूसिव फाइनेंस रखी गई है।
इस थीम के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टोकनाइजेशन, डिजिटल वित्तीय अवसंरचना, वैश्विक कनेक्टेड पेमेंट सिस्टम, साइबर सुरक्षा और समावेशी वित्त जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा होगी। विशेषज्ञ इस बात पर विचार करेंगे कि उभरती तकनीकों को वास्तविक आर्थिक प्रभाव में कैसे बदला जाए और वित्तीय सेवाओं को दुनिया के अंतिम व्यक्ति तक कैसे पहुंचाया जाए।
--आईएएनएस
डीबीपी
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