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Kanpur में दवा कारोबारी की हत्या कराने के आरोप में बहू Shalu Manocha गिरफ्तार

कानपुर (उप्र), आठ सितंबर कानपुर के दवा कारोबारी विनीत मनोचा की हत्या के मामले में पुलिस ने उनकी बहू को गिरफ्तार किया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी। अधिकारी के अनुसार, मनोचा की बहू शालू पर अपने ससुर की हत्या की साजिश रचने और इसे अंजाम देने के लिए परिवार के पूर्व घरेलू कर्मचारी को छह लाख रुपये की कथित सुपारी देने का आरोप है।

कानपुर के कल्याणपुर थाना क्षेत्र स्थित रतन ऑर्बिट अपार्टमेंट के सी-104 फ्लैट में शनिवार रात मनोचा (60) की चाकू से हमलाकर कथित तौर पर हत्या कर दी गई थी। घटना के समय उनका बेटा सुब्रत (35) और बहू शालू एक पार्टी में गए हुए थे। पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि शुरुआती जांच में एक घरेलू कर्मचारी विशाल गौतम (30) और उसके एक अन्य साथी राज किशोर (30) का नाम सामने आया।

सीसीटीवी फुटेज में सुब्रत के घर से निकलने के तुरंत बाद दोनों को अपार्टमेंट में प्रवेश करते देखा गया था। उन्होंने बताया कि इस मामले में रविवार को पुलिस मुठभेड़ के बाद विशाल और राज किशोर को गिरफ्तार कर लिया गया। लाल ने दावा किया, ‘‘पूछताछ के दौरान विशाल ने कथित तौर पर शालू का नाम लिया जिसने मनोचा की हत्या के लिए उन्हें सुपारी दी थी।’’ मनोचा अपने बेटे के साथ बिरहाना रोड पर ‘फार्मा ट्रेडर्स’ नाम से दवा का कारोबार था।

पुलिस आयुक्त ने कहा कि प्रारंभिक जांच में सामने आया कि शालू ने कथित तौर पर अपने ससुर की हत्या के लिए विशाल को छह लाख रुपये दिए थे। लाल ने कहा, “अभी तक की जांच में सामने आया है कि मनोचा ने अपने बेटे और बहू के वित्तीय मामलों और उनकी गतिविधियों पर कड़ा नियंत्रण रखा हुआ था। उन्होंने परिवार पर नजर रखने के लिए घर में सीसीटीवी कैमरे भी लगवा रखे थे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘जांच में सामने आया कि सुब्रत को पिता के कारोबार में काम करने के लिए 35 हजार रुपये मासिक वेतन मिलता था, जबकि शालू को अपने खर्च के लिए कथित तौर पर केवल 10-12 हजार रुपये दिए जाते थे।

दंपति घर में लगातार सीसीटीवी निगरानी से भी परेशान थी।” पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि शालू ने हत्या से करीब 20 दिन पहले विशाल से संपर्क किया था और उससे मनोचा की हत्या करने या उनकी मौत को दुर्घटना का रूप देने के लिए कहा था। उन्होंने कहा, ‘‘जब विशाल ने ऐसा करने से मना कर दिया तो शालू ने कथित तौर पर उसे सोते समय तकिये से दम घोंटने का सुझाव दिया, ताकि उनकी मौत को दिल का दौरा पड़ने का मामला बताया जा सके।’’ पुलिस के अनुसार, शालू ने हत्या के बाद विशाल को नौकरी देने का भी कथित तौर पर वादा किया था। पुलिस के मुताबिक, कुछ दिन पहले शालू ने विशाल को फ्लैट की चाबी दी थी तथा उसकी एक और चाबी बनवाने के लिए 1,200 रुपये दिए थे।

लाल ने बताया कि बाद में शालू ने दूसरी चाबी विशाल को दे दी और उसे यह भी बताया कि परिवार कब घर से बाहर रहेगा। पुलिस ने कहा, ‘‘शालू ने अपार्टमेंट के सुरक्षाकर्मी से कथित तौर पर कहा-‘शिवम’ नाम का एक व्यक्ति ‘गजरा’ लेकर आएगा और उसे अंदर जाने दिया जाए।’’ अधिकारी ने कहा, ‘‘शनिवार रात शालू के अपने पति और बच्चे के साथ घर से निकलने के बाद विशाल और उसका कथित साथी राज किशोर फ्लैट में दाखिल हुए। दोनों कथित तौर पर शालू के शयनकक्ष में छिपकर विनीत मनोचा के लौटने का इंतजार करने लगे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘रात 10 बजकर 58 मिनट पर मनोचा घर पहुंचे।

कमरों की जांच करने और दरवाजों पर ताला लगाने के दौरान उन्होंने अपने बेटे के शयनकक्ष की लाइट जलाई और वहां दो लोगों को छिपा देखा।’’ पुलिस के अनुसार, मनोचा ने विशाल को पहचान लिया और उससे सवाल-जवाब करने लगे जिसके बाद आरोपियों ने कथित तौर पर उन पर हमला कर दिया। पुलिस ने कहा कि विशाल ने मनोचा पर कथित रूप से कई बार चाकू से वार किए और दोनों वहां से भागने से पहले उनका गला रेत दिया। लाल ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज और फोन ‘कॉल डिटेल’ से पुलिस को कथित साजिश की कड़ियां जोड़ने में मदद मिली।

उन्होंने बताया कि हत्या वाले दिन और रात में शालू और विशाल के बीच 27 बार फोन पर बातचीत हुई थी। उन्होंने बताया कि शालू को सोमवार रात गिरफ्तार कर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया। इसके बाद उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

लाल ने बताया कि शालू के पति सुब्रत की भूमिका भी जांच के दायरे में है और पुलिस यह पता लगाने के लिए साक्ष्य जुटा रही है कि क्या सुब्रत को कथित साजिश की जानकारी थी या वह इसमें शामिल था। पुलिस आयुक्त ने कहा, “अगर उसकी संलिप्तता साबित होती है तो उसे भी गिरफ्तार किया जाएगा।

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नाराज फूफा खुश नहीं होंगे: डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की तारीफ करते हुए मोदी ने विपक्ष पर कसा तंज

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) को लागू करने में हुई देरी को लेकर पिछली UPA सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह महत्वाकांक्षी रेलवे प्रोजेक्ट सालों तक सरकारी प्रक्रियाओं में उलझा रहा, जबकि 2014 के बाद उनकी सरकार ने इसके काम में तेज़ी लाई। वडोदरा में ‘नमो फॉर विकसित भारत’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, मोदी ने 2,800 किलोमीटर लंबे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (माल ढुलाई गलियारे) के पूरा होने को भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी अभियान में एक बड़ी उपलब्धि बताया। 
 

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मोदी ने कहा कि इस प्रोजेक्ट की योजना 2004 में बनी थी और इसे पूरा करने के लिए 2006 में एक खास कंपनी बनाई गई थी, लेकिन जब तक उनकी सरकार नहीं आई, तब तक काम की रफ़्तार धीमी रही। मोदी ने कहा कि 2014 तक फाइलें बस एक जगह से दूसरी जगह घूमती रहती थीं। उन्होंने आगे कहा कि फाइलें इतनी “किस्मत वाली” नहीं थीं कि उन्हें एक डेडिकेटेड कॉरिडोर मिल पाता; इसके बजाय, वे अटकी रहीं और बिना किसी मकसद के भटकती रहीं।

डेडिकेटेड फ्रेट इंफ्रास्ट्रक्चर के असर पर ज़ोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले यात्री और मालगाड़ियों को एक ही ट्रैक का इस्तेमाल करना पड़ता था, जिससे माल ढुलाई और यात्री सेवाओं, दोनों की रफ़्तार पर असर पड़ता था। उन्होंने कहा कि DFC ने इस व्यवस्था को बदल दिया है और भारत के आर्थिक बदलाव को तेज़ करने में मदद कर रहा है। उन्होंने मुंबई के JNPT से वडोदरा तक हाल ही में चली डबल-स्टैक कंटेनर ट्रेन का भी ज़िक्र किया और कहा कि एक ही ट्रिप में 250 से ज़्यादा ट्रकों के बराबर सामान ले जाया गया। आलोचकों पर तंज़ कसते हुए मोदी ने मज़ाक में एक नाराज़ फूफा का ज़िक्र किया, जो शायद ट्रक ऑपरेटरों पर पड़ने वाले असर पर सवाल उठा सकते हैं।
 

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अलग-अलग सरकारों के समय रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर की तुलना करते हुए मोदी ने कहा कि पिछली सरकारें सालाना बजट में एक या दो ट्रेनों का ऐलान करती थीं और उनका खूब प्रचार-प्रसार करती थीं। इसके उलट, उन्होंने कहा कि अब पूरे साल नई ट्रेनें शुरू की जा रही हैं। मोदी ने यह भी दावा किया कि 2014 से भारत ने लगभग 50,000 आधुनिक रेलवे कोच बनाए हैं, जबकि पिछली सरकार 10 साल में 50,000 शौचालय भी नहीं बना पाई थी।
 
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Vaibhav Sooryavanshi DRS: ले लो भैया ले लो... कप्तान ईशान के पीछे पड़े वैभव सूर्यवंशी, जबरदस्ती दिलवाया DRS और बल्लेबाज आउट

vaibhav sooryavanshi drs video: वैभव सूर्यवंशी सिर्फ बैटिंग से ही तहलका नहीं मचा रहे, बल्कि उनकी पारखी नजर भी विपक्षी के लिए खतरा साबित हो रही है. दलीप ट्रॉफी फाइनल में ऐसा ही एक नजारा देखने को मिला, जिसमें उपकप्तान वैभव ने अपने और ईस्ट जोन के कप्तान ईशान किशन को डीआरएस लेने के लिए कहा और अंत में उनके ही पक्ष में ही गया, जिससे टीम को बड़ी सफलता मिली. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है. Tue, 8 Sep 2026 16:03:16 +0530

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