'प्रेशर में मेरा बेस्ट गेम...', 522 मिनट बैटिंग करने के बाद ईशान किशन का बयान वायरल, बताया कैसे की सिराज की पिटाई
Ishan Kishan : दलीप ट्रॉफी 2026 का फाइनल मैच ईस्ट जोन और साउथ जोन के बीच खेला जा रहा है. एमए चिदंबरम स्टेडियम में खेले जा रहे हाईवोल्टेज मैच में ईशान किशन ने कमाल कर दिखाया. उन्होंने पहली पारी में 270 रन ठोक दिए, जिसकी मदद से उनकी टीम ने 700 से अधिक रन बना डाले. ईशान ने अपनी पारी को काफी समझदारी से बुना, जो साफ नजर आ रहा था. वह बखूबी जानते थे कि उन्हें किन गेंदों को सम्मान देना है और किन गेंदों को बाउंड्री के पार भेजना है. वहीं, अब बीसीसीआई ने एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें ईशान किशन अपनी पारी के बारे में बात कर रहे हैं और उन्होंने खासतौर पर बताया कि मोहम्मद सिराज के खिलाफ उन्होंने कौन सा प्लान आजमाया.
ईशान किशन ने खेली 270 रनों की पारी
दलीप ट्रॉफी 2026 के फाइनल मैच में ईशान किशन ने कमाल की बल्लेबाजी की. ईस्ट जोन के कप्तान ईशान ने पहली पारी में 270 रन ठोके, जिसकी बदौलत उनकी टीम ने पहली पारी में 708 रन बोर्ड पर लगा दिए हैं. ईशान ने कुल 588 मिनट बल्लेबाजी की, जिसमें उन्होंने 334 गेंद पर 270 रन बनाए. अपनी पारी में ईशान किशन ने 30 चौके और 7 छक्के जड़े. उनका स्ट्राइक रेट 80.84 का रहा. ईशान पहले 250 के स्कोर पर रिटायर्ड हर्ट होकर पवेलियन लौट गए थे, लेकिन फिर वह वापस लौटे और उन्होंने अपनी पारी में 20 रन और जोड़े.
4️⃣,4️⃣,4️⃣
— BCCI Domestic (@BCCIdomestic) September 7, 2026
Ishan Kishan is on the charge ????
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ईशान किशन ने बताया अपना गेम प्लान
ईशान किशन ने वीडियो में बताया है कि उन्होंने किस तरह से अपनी पारी को आगे बढ़ाया और टीम के लिए अहम रन जोड़े. ईशान ने कहा, "मुझे लगता है कि प्रेशर में मेरा बेस्ट गेम निकलकर बाहर आता है. मुझे लगता है कि मैंने जितनी भी गेंद खेलीं, मैंने मिडलिंग की. बहुत अच्छा लगा. ऐसा नहीं था कि मैं शॉट्स खेलने पर चांसेस ले रहा था बल्कि गैप में मार रहा था. बॉल अच्छे से पिक कर रहा था. तो ये चीजें कॉन्फिडेंस देती हैं. आज के मैच में मैंने जैसे रन बनाए, उससे मैं काफी खुश हूं."
"बहुत ज्यादा मुश्किल होता है, जब आपको दम लगाकर शॉट्स मारने होते हैं, क्योंकि एक साइड की बाउंड्री काफी बड़ी थी. बॉल बीच-बीच में सॉफ्ट हो रही थी, तो बाउंड्री के लिए काफी जोर लगाना पड़ रहा था. लेकिन, आप प्रैक्टिस ही ऐसी करते हो, कभी-कभी आपको खुद को पुश करना होता है कि मेरा क्या प्लान है.. मुझे कितना आगे ले जाना है. आप टीम के स्कोर पर फोकस रखते हो, अपने खुद के स्कोर पर नहीं. टीम के लिए क्या फायदेमंद रहेगा और जब आप ऐसे सोचते हैं, तो अपने आप ही बैटिंग काफी अच्छी हो जाती है. शॉर्ट बॉल्स मैं खेलते तो आ रहा हूं और जब वो डाल रहे थे, तो आप छोड़ते भी हैं. उसी समय पर अगर आप बॉल को अच्छे से जज करते हो कि कौन सी बॉल कैसी है... मुझे लगता है मेरा वो जजमेंट अच्छा हो रहा था, जिससे मुझे ये फैसला करने में आसानी हो रही थी कि मुझे किन गेंदों को हिट करना है."
A 522-minute magnificent 2️⃣7️⃣0️⃣-run knock ⏳????
— BCCI Domestic (@BCCIdomestic) September 8, 2026
Big-match player acing the finals yet again ????
Team always comes first ????❤️
Ishan Kishan breaks down his Chepauk heroics ???? - By @jigsactin
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मोहम्मद सिराज के लिए बनाया था स्पेशल प्लान
मोहम्मद सिराज के सामने ईशान किशन ने डटकर सामना किया. ईशान ने कहा, "जब सिराज जब बॉलिंग कर रहा था, तो मैं और ज्यादा झुककर बैटिंग कर रहा था कि अगर उसने गेंद को पटका तो वो पार हो जाएगी. वो ट्रिक बाउंसर के लिए नहीं था, बस अपने विकेट को गंवाने से बचाने के लिए था. कभी मैं मारने के चक्कर में आउट न हो जाऊं, क्योंकि उस समय टीम सिच्युएशन जरूरी थी. जब बड़ा मैच आता है, तो उसमें प्रेशर भी आता है और उसमें मुझे लगता है कि मेरा बेस्ट गेम आता है. जब आप बैटिंग के लिए जा रहे होते हैं, तो थोड़ी नर्वसनेस होती है, लेकिन उस समय आप थोड़े अग्रेसिव भी होते हो कि अगर बॉल मिली तो आप मारोगे."
हनी-ट्रैप के लिए आईएसआई की नई चाल, अधिकारियों की फंसाने के लिए मनोवैज्ञानिकों का कर रही इस्तेमाल
नई दिल्ली, 8 सितंबर (आईएएनएस)। भारत में पिछले कुछ सालों में हनी-ट्रैप के मामले बढ़े हैं। चेतावनियों और सलाहों के बावजूद कई अधिकारी इन नेटवर्क का शिकार बन रहे हैं।
एक अधिकारी ने बताया कि पाकिस्तान की आईएसआई, जो ये नेटवर्क चलाती है, ने ऐसे अधिकारियों की पहचान करने के लिए कई मनोवैज्ञानिकों को काम पर रखा है जिनके पास संवेदनशील जानकारी होती है। मकसद ऐसे लोगों का अध्ययन करना, उनकी निजी समस्याओं को समझना और फिर उनसे जानकारी निकलवाना है।
इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक अधिकारी ने कहा कि आईएसआई इस काम के लिए मनोवैज्ञानिकों को नियुक्त कर रही है और उन्हें टारगेट खोजने से पहले महिलाओं के नाम से सोशल मीडिया अकाउंट बनाने का निर्देश देती है। ये बहुत अच्छी तरह से प्रशिक्षित लोग होते हैं जो निजी समस्याओं वाले अधिकारियों को फंसाने में माहिर होते हैं।
ये मनोवैज्ञानिक पहले सोशल मीडिया पर अधिकारियों की पहचान करते हैं और फिर उनके द्वारा पोस्ट किए गए संदेशों का गहराई से अध्ययन करते हैं।
अधिकारी ने कहा कि चूंकि वे प्रशिक्षित मनोवैज्ञानिक होते हैं, इसलिए वे आसानी से ऐसे अधिकारियों की मानसिकता को समझ लेते हैं। एक बार पहचान हो जाने के बाद, आईएसआई द्वारा नियुक्त ये मनोवैज्ञानिक उन अधिकारियों से बातचीत शुरू करते हैं और उनके प्रति बहुत सहानुभूति दिखाते हैं।
वे इन लोगों की कमजोरियों का पता लगाने में महीनों बिताते हैं। इन अधिकारियों का भरोसा जीतने में उन्हें लगभग दो से तीन महीने लगते हैं। जब भरोसा बन जाता है, तो इन लोगों को अपने सिस्टम पर कुछ एप्लिकेशन इंस्टॉल करने के लिए कहा जाता है।
इनमें से ज्यादातर एप्लिकेशन में चुपके से काम करने वाले स्पाइवेयर और मैलवेयर होते हैं, जो चीन में बने होते हैं।
अधिकारियों का कहना है कि हनी-ट्रैप नेटवर्क अब पैसे और डराने-धमकाने जैसे तरीकों का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। इसके बजाय कमजोरियों का फायदा उठाया जाता है, और करीबीपन व आकर्षण का इस्तेमाल करके संवेदनशील जानकारी रखने वाले अधिकारियों को फंसाया जाता है। मनोवैज्ञानिक इन तरीकों का सबसे बेहतर इस्तेमाल करते हैं। फंसने वाले व्यक्ति को पता भी नहीं चलता और वह डिजिटल कम्युनिकेशन चैनलों के ज़रिए संवेदनशील जानकारी दे बैठता है।
हाल के मामलों में यह पाया गया है कि अधिकारियों की निजी समस्याओं का फायदा उठाना आईएसआई के लिए कारगर रहा है। ये अधिकारी कमजोर स्थिति में होते हैं और अपनी निराशा निकालने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं। चूंकि यह तरीका आईएसआई के लिए अच्छा काम कर रहा है, इसलिए पाकिस्तान में मनोवैज्ञानिकों की मांग बढ़ गई है।
हाल ही में हनी-ट्रैप नेटवर्क में मनोवैज्ञानिकों को शामिल करने के मामलों में हुई बढ़ोतरी ने भारतीय एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।
एक अधिकारी ने बताया कि यह स्थिति चिंताजनक है क्योंकि नियमित रूप से एडवाइजरी जारी किए जाने के बावजूद, कई अधिकारी इस जाल में फंसते जा रहे हैं और अपने सिस्टम में डेटा लीक करने वाला या मैलवेयर साफ्टवेयर तक इंस्टॉल कर लेते हैं।
--आईएएनएस
पीआईएम/पीएम
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
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