हनी-ट्रैप के लिए आईएसआई की नई चाल, अधिकारियों की फंसाने के लिए मनोवैज्ञानिकों का कर रही इस्तेमाल
नई दिल्ली, 8 सितंबर (आईएएनएस)। भारत में पिछले कुछ सालों में हनी-ट्रैप के मामले बढ़े हैं। चेतावनियों और सलाहों के बावजूद कई अधिकारी इन नेटवर्क का शिकार बन रहे हैं।
एक अधिकारी ने बताया कि पाकिस्तान की आईएसआई, जो ये नेटवर्क चलाती है, ने ऐसे अधिकारियों की पहचान करने के लिए कई मनोवैज्ञानिकों को काम पर रखा है जिनके पास संवेदनशील जानकारी होती है। मकसद ऐसे लोगों का अध्ययन करना, उनकी निजी समस्याओं को समझना और फिर उनसे जानकारी निकलवाना है।
इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक अधिकारी ने कहा कि आईएसआई इस काम के लिए मनोवैज्ञानिकों को नियुक्त कर रही है और उन्हें टारगेट खोजने से पहले महिलाओं के नाम से सोशल मीडिया अकाउंट बनाने का निर्देश देती है। ये बहुत अच्छी तरह से प्रशिक्षित लोग होते हैं जो निजी समस्याओं वाले अधिकारियों को फंसाने में माहिर होते हैं।
ये मनोवैज्ञानिक पहले सोशल मीडिया पर अधिकारियों की पहचान करते हैं और फिर उनके द्वारा पोस्ट किए गए संदेशों का गहराई से अध्ययन करते हैं।
अधिकारी ने कहा कि चूंकि वे प्रशिक्षित मनोवैज्ञानिक होते हैं, इसलिए वे आसानी से ऐसे अधिकारियों की मानसिकता को समझ लेते हैं। एक बार पहचान हो जाने के बाद, आईएसआई द्वारा नियुक्त ये मनोवैज्ञानिक उन अधिकारियों से बातचीत शुरू करते हैं और उनके प्रति बहुत सहानुभूति दिखाते हैं।
वे इन लोगों की कमजोरियों का पता लगाने में महीनों बिताते हैं। इन अधिकारियों का भरोसा जीतने में उन्हें लगभग दो से तीन महीने लगते हैं। जब भरोसा बन जाता है, तो इन लोगों को अपने सिस्टम पर कुछ एप्लिकेशन इंस्टॉल करने के लिए कहा जाता है।
इनमें से ज्यादातर एप्लिकेशन में चुपके से काम करने वाले स्पाइवेयर और मैलवेयर होते हैं, जो चीन में बने होते हैं।
अधिकारियों का कहना है कि हनी-ट्रैप नेटवर्क अब पैसे और डराने-धमकाने जैसे तरीकों का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। इसके बजाय कमजोरियों का फायदा उठाया जाता है, और करीबीपन व आकर्षण का इस्तेमाल करके संवेदनशील जानकारी रखने वाले अधिकारियों को फंसाया जाता है। मनोवैज्ञानिक इन तरीकों का सबसे बेहतर इस्तेमाल करते हैं। फंसने वाले व्यक्ति को पता भी नहीं चलता और वह डिजिटल कम्युनिकेशन चैनलों के ज़रिए संवेदनशील जानकारी दे बैठता है।
हाल के मामलों में यह पाया गया है कि अधिकारियों की निजी समस्याओं का फायदा उठाना आईएसआई के लिए कारगर रहा है। ये अधिकारी कमजोर स्थिति में होते हैं और अपनी निराशा निकालने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं। चूंकि यह तरीका आईएसआई के लिए अच्छा काम कर रहा है, इसलिए पाकिस्तान में मनोवैज्ञानिकों की मांग बढ़ गई है।
हाल ही में हनी-ट्रैप नेटवर्क में मनोवैज्ञानिकों को शामिल करने के मामलों में हुई बढ़ोतरी ने भारतीय एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।
एक अधिकारी ने बताया कि यह स्थिति चिंताजनक है क्योंकि नियमित रूप से एडवाइजरी जारी किए जाने के बावजूद, कई अधिकारी इस जाल में फंसते जा रहे हैं और अपने सिस्टम में डेटा लीक करने वाला या मैलवेयर साफ्टवेयर तक इंस्टॉल कर लेते हैं।
--आईएएनएस
पीआईएम/पीएम
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CM धामी ने नन्हे पर्वतारोही रियांश और प्रिशा से की मुलाकात, दोनों ने फतह की है अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी
CM Dhami: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास में उत्तराखंड के नन्हे पर्वतारोही मास्टर रियांश पंत और प्रिशा रावत ने भेंट की. दोनों ने हाल ही में तंजानिया स्थित अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो का सफल आरोहण किया है.
मुख्यमंत्री ने दोनों बच्चों को इस उपलब्धि के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की. उन्होंने कहा कि इतनी कम उम्र में माउंट किलिमंजारो जैसी चुनौतीपूर्ण चोटी का सफल आरोहण करना उनके साहस, दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास का परिचायक है. दोनों बच्चों ने अपनी इस उपलब्धि से उत्तराखंड का गौरव बढ़ाया है. सीएम ने कहा कि उनकी सफलता प्रदेश के अन्य बच्चों और युवाओं को भी बड़े लक्ष्य निर्धारित कर उन्हें हासिल करने के लिए प्रेरित करेगी.
Uttarakhand | Young mountaineers Master Riyansh Pant and Prisha Rawat from Uttarakhand, who successfully scaled Mount Kilimanjaro—the highest peak in Africa, located in Tanzania—met Chief Minister Pushkar Singh Dhami at the Chief Minister's residence. Congratulating both children… pic.twitter.com/wzcdBBhppV
— ANI UP/Uttarakhand (@ANINewsUP) September 8, 2026
9 और 10 साल है उम्र
9 वर्षीय मास्टर रियांश पंत अल्मोड़ा के चीनाखान और 10 वर्षीय प्रिशा रावत नैनीताल जनपद के बैलपड़ाव की निवासी हैं. दोनों ने 22 अगस्त 2026 को 5,895 मीटर ऊंची माउंट किलिमंजारो चोटी का सफल आरोहण कर तिरंगा फहराया था.
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सीएम धामी ने साहस को सराहा
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के बच्चों और युवाओं में प्रतिभा, साहस और सामर्थ्य की कोई कमी नहीं है. प्रदेश के युवा पर्वतारोहण, खेल एवं अन्य साहसिक गतिविधियों में अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन कर राज्य का नाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन कर रहे हैं. राज्य सरकार युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और उन्हें आगे बढ़ने के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है.
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