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बांग्लादेश को दुश्मन खेमे में जाने से रोकने के लिए भारत ने चला बड़ा दांव! India-Banladesh के बीच फिर से शुरू हो सकती है रेल सेवाएं

बांग्लादेश को दुश्मन खेमे में जाने से रोकने के लिए भारत तेजी से सक्रिय हो गया है। ढाका के संभावित रूप से सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान से जुड़े ‘मक्का ज्वाइंट डिफेंस एग्रीमेंट’ जैसे सामूहिक सुरक्षा ढांचे में शामिल होने की खबरों ने नई दिल्ली की रणनीतिक चिंताएं बढ़ा दी हैं। भारत ने इस मुद्दे पर तीव्र बैकचैनल कूटनीति शुरू कर दी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि आखिर बांग्लादेश की असली मंशा क्या है। इसी बीच भारत और बांग्लादेश के बीच वर्षों से बंद पड़ी यात्री रेल सेवाओं को फिर शुरू करने की कवायद भी तेज हो गई है।

रिपोर्टों के मुताबिक, बांग्लादेश मक्का ज्वाइंट डिफेंस एग्रीमेंट में शामिल होने की संभावनाओं पर विचार कर रहा है। यह एक ऐसा पारस्परिक रक्षा ढांचा बताया जा रहा है, जिसमें सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान शामिल हैं। शेख हसीना सरकार के पतन के बाद बदले राजनीतिक माहौल में ढाका अपनी विदेश नीति को अधिक विविध बनाने की कोशिश कर रहा है। बांग्लादेशी रणनीतिक हलकों में संभावित सदस्यता को तुर्किये की सैन्य तकनीक, सऊदी अरब की आर्थिक सहायता और पाकिस्तान के साथ सुरक्षा सहयोग हासिल करने के अवसर के रूप में देखा जा रहा है। इसे व्यापक रूप से ‘मुस्लिम फैमिली’ के ढांचे में कूटनीतिक सहयोग बढ़ाने की कोशिश के तौर पर पेश किया जा रहा है।

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लेकिन नई दिल्ली की नजर से तस्वीर कहीं अधिक गंभीर है। भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि पाकिस्तान से जुड़े किसी सामूहिक रक्षा ढांचे का विस्तार सीधे उसके पूर्वी मोर्चे तक हो सकता है। यदि बांग्लादेश औपचारिक रूप से ऐसे किसी सैन्य समझौते में शामिल होता है, तो भारत के आसपास एक नए सामरिक समीकरण का निर्माण हो सकता है। बंगाल की खाड़ी तक फैला सामूहिक सुरक्षा ढांचा भारत की रणनीतिक गणनाओं को बदल सकता है।

हम आपको बता दें कि भारत और बांग्लादेश के बीच करीब 4,096 किलोमीटर लंबी सीमा है। ऐसे में पूर्वी सीमा पर किसी नए सुरक्षा गठबंधन की मौजूदगी नई दिल्ली के लिए साधारण कूटनीतिक घटनाक्रम नहीं होगी। भारत को अपने पड़ोस को केवल द्विपक्षीय रिश्तों के नजरिये से नहीं, बल्कि एक संभावित मल्टी-फ्रंट सिक्योरिटी थिएटर के रूप में देखना पड़ सकता है। यही वजह है कि भारतीय बैकचैनल यह टटोलने में जुटे हैं कि ढाका वास्तव में कोई बाध्यकारी सैन्य प्रतिबद्धता चाहता है या फिर इस तरह की संभावनाओं का इस्तेमाल भारत समेत अन्य शक्तियों से कूटनीतिक लाभ लेने के लिए कर रहा है।

इसी रणनीतिक तनाव के बीच भारत-बांग्लादेश संबंधों में एक सकारात्मक संकेत भी उभर रहा है। दोनों देश बंद पड़ी यात्री ट्रेन सेवाओं को फिर शुरू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। ढाका में आज से दोनों देशों के रेलवे अधिकारियों की बैठक शुरू हुई है, जिसमें मैत्री, बंधन और मिताली एक्सप्रेस को दोबारा पटरी पर लाने पर चर्चा हो रही है।

बांग्लादेश रेलवे के अतिरिक्त महानिदेशक (ऑपरेशंस) मोहम्मद नजमुल इस्लाम के अनुसार, दोनों देशों के बीच यात्री रेल संपर्क अगस्त 2024 के बाद से बंद है, जबकि मालगाड़ियां बिना किसी बाधा के लगातार चलती रही हैं। मैत्री एक्सप्रेस ढाका कैंटोनमेंट और कोलकाता के बीच चलती थी, बंधन एक्सप्रेस खुलना और कोलकाता को जोड़ती थी, जबकि मिताली एक्सप्रेस ढाका कैंटोनमेंट से न्यू जलपाईगुड़ी तक संचालित होती थी।

इन सेवाओं को जुलाई 2024 में आधिकारिक रूप से निलंबित किया गया था। इसके बाद देशव्यापी अशांति, शेख हसीना सरकार के पतन और 5 अगस्त 2024 को उनके भारत जाने के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ गया। नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम व्यवस्था के दौरान शेख हसीना की भारत में मौजूदगी और उनके प्रत्यर्पण की मांग जैसे मुद्दों ने संबंधों में खटास पैदा की।

हालांकि, बांग्लादेश में 22 फरवरी 2026 को हुए आम चुनाव के बाद एक नया राजनीतिक अध्याय शुरू हुआ। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की जीत के बाद तारिक रहमान के नेतृत्व में नई सरकार बनी और अब दोनों देशों के बीच सामान्य रिश्तों की बहाली की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा महसूस की जा रही है।

वर्तमान अंतर-सरकारी रेलवे बैठक यानी IGRM में केवल ट्रेनों को शुरू करने पर ही नहीं, बल्कि वित्तीय हिसाब-किताब, सीमा पार ट्रेन परिचालन, वार्षिक लेखा संतुलन, परिचालन क्षमता, रोलिंग स्टॉक और रेलवे ढांचे के विकास जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हो रही है। बांग्लादेश की योजना राजशाही से कोलकाता के लिए एक नई ट्रेन शुरू करने की भी है। साथ ही, मैत्री एक्सप्रेस को जमुना ब्रिज के बजाय पद्मा ब्रिज के रास्ते चलाने का प्रस्ताव भी सामने आ सकता है।

भारत द्वारा 27 जून से बांग्लादेशी नागरिकों के लिए पर्यटक वीजा फिर शुरू किए जाने के बाद आम लोगों के बीच भी रेल सेवाओं की बहाली की मांग तेज हुई है। भारतीय उच्चायुक्त ने भी दोनों देशों के बीच ‘पीपुल-टू-पीपुल रिलेशन’ को बेहद अहम बताया है।

दरअसल, यही इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण संदेश है। एक तरफ भारत बांग्लादेश के संभावित नए सैन्य समीकरणों को लेकर सतर्क है, दूसरी तरफ वह रेल, वीजा, व्यापार और जनसंपर्क के जरिए रिश्तों को सामान्य बनाने की कोशिश कर रहा है। नई दिल्ली समझती है कि अगर ढाका रणनीतिक रूप से दूर गया, तो भारत की पूर्वी सुरक्षा चुनौती स्थायी रूप से बदल सकती है। इसलिए कूटनीति अब सिर्फ दोस्ती बचाने की नहीं, बल्कि बांग्लादेश को किसी संभावित दुश्मन खेमे की ओर झुकने से रोकने की रणनीतिक लड़ाई बन चुकी है।

-नीरज कुमार दुबे

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यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ जंग शुरू:सरकार बोली- राजधानी सना को कब्जे में लेंगे; हूतियों का दावा- सऊदी एयरपोर्ट और अरामको को निशाना बनाया

यमन में हूती विद्रोहियों और सरकार के बीच फिर जंग तेज हो गई है। सरकार ने हूतियों के कब्जे वाली राजधानी सना को वापस लेने के लिए सैन्य अभियान शुरू कर दिया है। ताइज, अल-बायदा और अल-जौफ समेत कई इलाकों में लड़ाई हो रही है। दूसरी तरफ हूतियों ने दावा किया है कि उन्होंने सऊदी अरब के अबहा एयरपोर्ट, किंग खालिद एयरबेस और तेल और गैस कंपनी अरामको की सुविधाओं को मिसाइल और ड्रोन से निशाना बनाया है। सऊदी पर जेल पर हवाई हमले का आरोप 7 सितंबर को हूतियों ने आरोप लगाया था कि सऊदी अरब ने अल-जौफ प्रांत के अल-हज्म शहर की एक जेल पर हवाई हमला किया। शुरुआत में कहा गया था कि हमले में एक बच्चे समेत 7 लोगों की मौत हुई है और कम से कम 7 लोग घायल हुए हैं। बाद में अल-जौफ सिविल डिफेंस के प्रमुख हसन साबौला ने मौतों का आंकड़ा बढ़कर 11 बताया। उन्होंने कहा कि 20 कैदी अभी भी मलबे में लापता हैं। हूती मीडिया के मुताबिक, मरने वालों में जेल में किसी से मिलने आया एक बच्चा भी शामिल था। इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। सऊदी अरब ने जेल भी हमले के आरोप पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। हूतियों का दावा- सऊदी के 4 निगरानी ड्रोन गिराए जेल हमले के आरोप के बाद हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ मिसाइल और ड्रोन हमले करने का दावा किया। हूतियों ने कहा कि उन्होंने अबहा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, किंग खालिद एयर बेस और अरामको की कुछ सुविधाओं को निशाना बनाया। इसके अलावा सऊदी अरब के 4 निगरानी ड्रोन भी गिराए। इन हमलों से हुए नुकसान की जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है। सऊदी का दावा- हूती हमलों में 73 लोग घायल इधर हूतियों पर सऊदी शहरों में नागरिक और आर्थिक ठिकानों को निशाना बनाने का आरोप है। इन हमलों में 73 लोगों के घायल होने की जानकारी दी गई है। हमलों का असर अबहा, खमिस मुशैत, नजरान और जिजान में पड़ा। सऊदी पक्ष के मुताबिक, घायलों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। सऊदी अरब ने इन हमलों का कड़ा जवाब देने की चेतावनी दी है। यमनी सरकार ने कहा- अब सना वापस लेंगे बढ़ते तनाव के बीच यमन के डिप्टी डिफेंस मिनिस्टर मेजर जनरल समीर अल-साबरी ने कहा कि सरकार ने सना को वापस लेने का फैसला किया है। सरकार समर्थित सेना ने हूती ठिकानों पर रॉकेट और हवाई हमले किए हैं। जमीन पर भी दोनों पक्षों के बीच भारी लड़ाई चल रही है। सरकार समर्थित सेना के प्रवक्ता माजिद अल-नुजैली ने कहा कि लक्ष्य यमन को हूतियों के कब्जे से मुक्त कराना और सना को फिर से सभी यमनियों की राजधानी बनाना है। सरकार ने सना जाने वाली कुछ प्रमुख सड़कों पर आम लोगों को जाने से बचने की चेतावनी भी दी है। अल-जौफ क्यों बना अहम मोर्चा? यमन का अल-जौफ सऊदी अरब की सीमा के करीब है। यह इलाका सना की दिशा में जाने वाले महत्वपूर्ण रास्तों से जुड़ा है। इसलिए यहां बढ़त बनाने से सरकार समर्थित सेना को राजधानी की तरफ आगे बढ़ने में रणनीतिक फायदा मिल सकता है। इसी वजह से अल-जौफ में चल रही लड़ाई को मौजूदा सैन्य अभियान का अहम हिस्सा माना जा रहा है। ताइज और अल-बायदा में भी लड़ाई तेज सरकार और हूतियों के बीच लड़ाई सिर्फ अल-जौफ तक सीमित नहीं है। ताइज, अल-बायदा और मारिब में भी दोनों पक्षों के बीच संघर्ष तेज हुआ है। ताइज पश्चिमी यमन का महत्वपूर्ण इलाका है। यहां लंबे समय से सरकार और हूतियों के बीच संघर्ष रहा है। अल-बायदा यमन के बीच में स्थित है। यह उत्तर और दक्षिण के कई इलाकों को जोड़ता है। इन इलाकों पर नियंत्रण से दोनों पक्षों को सैनिकों और हथियारों की आवाजाही में फायदा मिल सकता है। संघर्ष की शुरुआत 2014 में हुई थी यमन में मौजूदा संघर्ष की शुरुआत 2014 में हुई थी। उस साल हूतियों ने राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था। राष्ट्रपति अबद्रब्बू मंसूर हादी की अपील पर 2015 में सऊदी अरब ने यमन में हस्तक्षेप किया। इसका मकसद हूतियों को पीछे हटाकर अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार को दोबारा मजबूत करना था। इसके बाद कई साल तक यमन में भीषण लड़ाई चली। 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से बड़े स्तर की लड़ाई काफी हद तक रुक गई लेकिन स्थायी राजनीतिक समझौता नहीं हो सका। --------------------- यह खबर भी पढ़ें… यमन में हूती विद्रोहियों के हमले में 129 की मौत:बाब अल-मंदेब पर कब्जे की कोशिश यमन में हूती विद्रोहियों और सरकारी फोर्स के बीच भीषण लड़ाई में 129 लोगों की मौत हुई है। हूती बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के करीब अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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