Rajasthan के 162 नगर निकायों में पहले चरण की Voting बुधवार को, तैयारियां पूरी
जयपुर, आठ सितंबर राजस्थान में नगर निकाय चुनाव के पहले चरण के लिए बुधवार को मतदान होगा जिसके लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों के अनुसार, पहले चरण में बुधवार को जयपुर जिले के 18 नगर निकाय समेत राज्य के 162 नगर निकायों में मतदान होगा।
मतदान सुबह सात बजे से शाम छह बजे तक होगा। उन्होंने बताया कि पहले चरण में पार्षद के 5,393 पदों के लिए 20 हजार से अधिक उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। जिन 162 नगर निकायों में बुधवार को मतदान होने जा रहे हैं उनमें चार नगर निगम, 27 नगर परिषद और 131 नगरपालिकाएं शामिल हैं।
पहले चरण में शामिल चार नगर निगम अलवर, भरतपुर, बीकानेर और भीलवाड़ा हैं। इस चरण में कुल 20,623 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। अधिकारियों के अनुसार, 162 नगर निकायों में 7,683 मतदान केंद्रों पर 57,52,278 मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकेंगे।
जयपुर जिले में 18 नगर निकायों के लिए 565 केंद्रों पर मतदान होगा। जयपुर जिले में जिन निकायों में चुनाव हो रहे हैं, उनमें मनोहरपुर, फुलेरा, सांभर, किशनगढ़-रेनवाल, शाहपुरा, दूदू, चाकसू, फागी, जोबनेर, खेजरोली, जमवारामगढ़, वाटिका, कानोता, बस्सी, बगरू, कालाडेरा और चौमूं शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, बुधवार को होने वाले मतदान के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
मतदान दल मंगलवार को अपने-अपने मतदान केंद्रों का जिम्मा संभाल लेंगे। राज्य के सभी 309 नगरीय निकायों के चुनाव के लिए दो चरणों में नौ और 11 सितंबर को मतदान होगा, जबकि परिणाम 14 सितंबर को घोषित किए जाएंगे।
KN Nehru और 12 अन्य पर DVAC ने 1020 करोड़ के टेंडर घोटाले में दर्ज की FIR
चेन्नई, आठ सितंबर सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (डीवीएसी) ने सरकारी निविदाओं में बड़े पैमाने पर कथित हेरफेर और रिश्वत वसूली से जुड़े 1,020 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार मामले में पूर्व मंत्री के. एन. नेहरू को ‘‘मुख्य आरोपी’’ बनाते हुए उनके तथा 12 अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। प्राथमिकी में द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) नेता नेहरू के भाइयों के साथ-साथ पार्टी के दो पूर्व विधायकों एस. सुदर्शनम (ए10) और जे. जे. एबेनेजर (ए11) को भी आरोपी बनाया गया है। उन पर ठेकेदारों के नाम की सिफारिश करने तथा निविदाओं से जुड़ी जानकारी और कथित रिश्वत की रकम का ब्योरा साझा करने का आरोप है।
डीवीएसी के दस्तावेज में दावा किया गया है कि नेहरू ने वरिष्ठ नौकरशाहों तक पहुंच उपलब्ध कराई और निविदाएं आवंटित करने की प्रक्रिया को ‘‘प्रभावित’’ किया। दस्तावेज में आरोप लगाया गया है कि नगर प्रशासन एवं जलापूर्ति विभाग के पूर्व मंत्री ने अपने भाइयों को अपने एक करीबी सहयोगी के साथ मिलकर ठेकेदारों और सरकारी कर्मचारियों से ‘‘पार्टी फंड’’ के नाम पर अवैध रूप से रिश्वत वसूलने की अनुमति दी। इसमें 1,020 करोड़ रुपये का अनुचित लाभ पहुंचाए जाने का आरोप लगाते हुए कहा गया है कि ठेकों की कुल राशि का 7.5 से 10 प्रतिशत ‘‘पार्टी फंड’’ के रूप में वसूला गया।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की 258 पृष्ठों की रिपोर्ट के आधार पर डीवीएसी की जांच के बाद शुक्रवार को मामला दर्ज किया गया। ईडी की रिपोर्ट में 2021 से 2025 के बीच सरकारी ठेकों में अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है। दस्तावेज में नेहरू को मुख्य आरोपी बताया गया है और आरोप लगाया गया है कि उनके भाई के. एन. मणिवन्नन (ए2) और एन. रविचंद्रन (ए3) कथित रिश्वत की वसूली करने और उसे आगे पहुंचाने में मदद करते थे।
इसमें दावा किया गया है कि नेहरू ने अपने भाइयों को अपने करीबी सहयोगी कवि प्रसाद के साथ मिलकर ठेकेदारों और सरकारी कर्मचारियों से कथित रिश्वत वसूलने की अनुमति दी, जिसे बाद में उन्हें पहुंचाया जाता था। दस्तावेज में अविनाशी और तिरुप्पुर स्थित कुछ कंपनियों के नाम भी दिए गए हैं, जिन पर यह रकम देने का आरोप है। कोयंबटूर के नगर नियोजन अधिकारी और तिरुप्पुर के क्षेत्रीय इंजीनियरों पर भी नगरपालिका के कार्यों और कथित रिश्वत के लेन-देन में मदद करने का आरोप लगाया गया है।
प्राथमिकी में चेन्नई स्थित एक निर्माण कंपनी के मालिक एवं पदाधिकारियों तथा कुछ अज्ञात अधिकारियों के नाम भी शामिल हैं। दस्तावेज में सुदर्शनम और प्रसाद के बीच छह सितंबर 2021 को व्हाट्सऐप पर हुई बातचीत तथा एबेनेजर से संबंधित संदेशों को भी आधार बनाया गया है। मणिवन्नन के फोन से कुछ रसीदें भी बरामद की गईं।
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