KN Nehru और 12 अन्य पर DVAC ने 1020 करोड़ के टेंडर घोटाले में दर्ज की FIR
चेन्नई, आठ सितंबर सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (डीवीएसी) ने सरकारी निविदाओं में बड़े पैमाने पर कथित हेरफेर और रिश्वत वसूली से जुड़े 1,020 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार मामले में पूर्व मंत्री के. एन. नेहरू को ‘‘मुख्य आरोपी’’ बनाते हुए उनके तथा 12 अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। प्राथमिकी में द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) नेता नेहरू के भाइयों के साथ-साथ पार्टी के दो पूर्व विधायकों एस. सुदर्शनम (ए10) और जे. जे. एबेनेजर (ए11) को भी आरोपी बनाया गया है। उन पर ठेकेदारों के नाम की सिफारिश करने तथा निविदाओं से जुड़ी जानकारी और कथित रिश्वत की रकम का ब्योरा साझा करने का आरोप है।
डीवीएसी के दस्तावेज में दावा किया गया है कि नेहरू ने वरिष्ठ नौकरशाहों तक पहुंच उपलब्ध कराई और निविदाएं आवंटित करने की प्रक्रिया को ‘‘प्रभावित’’ किया। दस्तावेज में आरोप लगाया गया है कि नगर प्रशासन एवं जलापूर्ति विभाग के पूर्व मंत्री ने अपने भाइयों को अपने एक करीबी सहयोगी के साथ मिलकर ठेकेदारों और सरकारी कर्मचारियों से ‘‘पार्टी फंड’’ के नाम पर अवैध रूप से रिश्वत वसूलने की अनुमति दी। इसमें 1,020 करोड़ रुपये का अनुचित लाभ पहुंचाए जाने का आरोप लगाते हुए कहा गया है कि ठेकों की कुल राशि का 7.5 से 10 प्रतिशत ‘‘पार्टी फंड’’ के रूप में वसूला गया।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की 258 पृष्ठों की रिपोर्ट के आधार पर डीवीएसी की जांच के बाद शुक्रवार को मामला दर्ज किया गया। ईडी की रिपोर्ट में 2021 से 2025 के बीच सरकारी ठेकों में अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है। दस्तावेज में नेहरू को मुख्य आरोपी बताया गया है और आरोप लगाया गया है कि उनके भाई के. एन. मणिवन्नन (ए2) और एन. रविचंद्रन (ए3) कथित रिश्वत की वसूली करने और उसे आगे पहुंचाने में मदद करते थे।
इसमें दावा किया गया है कि नेहरू ने अपने भाइयों को अपने करीबी सहयोगी कवि प्रसाद के साथ मिलकर ठेकेदारों और सरकारी कर्मचारियों से कथित रिश्वत वसूलने की अनुमति दी, जिसे बाद में उन्हें पहुंचाया जाता था। दस्तावेज में अविनाशी और तिरुप्पुर स्थित कुछ कंपनियों के नाम भी दिए गए हैं, जिन पर यह रकम देने का आरोप है। कोयंबटूर के नगर नियोजन अधिकारी और तिरुप्पुर के क्षेत्रीय इंजीनियरों पर भी नगरपालिका के कार्यों और कथित रिश्वत के लेन-देन में मदद करने का आरोप लगाया गया है।
प्राथमिकी में चेन्नई स्थित एक निर्माण कंपनी के मालिक एवं पदाधिकारियों तथा कुछ अज्ञात अधिकारियों के नाम भी शामिल हैं। दस्तावेज में सुदर्शनम और प्रसाद के बीच छह सितंबर 2021 को व्हाट्सऐप पर हुई बातचीत तथा एबेनेजर से संबंधित संदेशों को भी आधार बनाया गया है। मणिवन्नन के फोन से कुछ रसीदें भी बरामद की गईं।
Thane में 68 निवेशकों से ₹7.09 करोड़ की ठगी, छह Company Directors पर केस
ठाणे, आठ सितंबर महाराष्ट्र के ठाणे जिले में एक निजी निवेश कंपनी के छह निदेशकों के खिलाफ अधिक मुनाफे का वादा कर 68 निवेशकों से 7.09 करोड़ रुपये की ठगी करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि यह धोखाधड़ी कई वर्षों तक कई मुखौटा कंपनियों के जरिये की गई।
पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि मुंबई के मलाड का एक वड़ा पाव विक्रेता 2018 में बीमा पॉलिसी खरीदना चाहता था। इसी दौरान एक परिचित ने उसकी मुलाकात आरोपियों में से एक से कराई, जो उस समय शेयर ब्रोकिंग’ की एक कंपनी चलाता था। अधिकारी ने बताया कि उस व्यक्ति ने शुरुआत में 5,000 रुपये जमा किए और बाद में आरोपी की कंपनी में तीन लाख रुपये निवेश किए।
उसे हर महीने पांच प्रतिशत मुनाफा देने का वादा किया गया था। इसी तरह के वादे पर कई अन्य लोगों ने भी कंपनी में पैसा निवेश किया। अधिकारी के अनुसार, जब पीड़ित ब्याज की रकम लेने मुंबई के कांदिवली स्थित कंपनी के कार्यालय पहुंचे तो कर्मचारियों ने भुगतान में 45 दिन की देरी की और उन पर हलफनामों पर हस्ताक्षर करने का दबाव बनाया।
इन हलफनामों में निवेश की गई रकम को आरोपी को दिया गया निजी कर्ज बताया गया था। इसके बाद कंपनी की यह शाखा बंद कर दी गई। पुलिस के अनुसार, इसके बाद निवेशकों को मुंबई के भांडुप इलाके में स्थित कंपनी के मुख्य कार्यालय भेजा गया, जहां उन्हें ‘कैंसल्ड चेक’ और ऑनलाइन निकासी की रसीदें दी गईं।
बाद में उन्हें एक ईमेल मिला जिसमें बताया गया कि कंपनी का संचालन छह महीने के लिए निलंबित कर दिया गया है। भांडुप पुलिस ने शेयर ब्रोकिंग कंपनी चलाने वाले आरोपी को निवेश धोखाधड़ी के मामले में मई 2023 में गिरफ्तार किया था। हालांकि, बाद में उसे जमानत मिल गई।
इसके बाद उसने एक वीडियो संदेश जारी कर नयी कॉरपोरेट पहल की घोषणा की। अधिकारी ने बताया कि विक्रेता ने ठाणे के डोंबिवली में आरोपी से मुलाकात की। आरोपी ने उसे भरोसा दिलाया कि उसकी 5.37 लाख रुपये की फंसी रकम वापस पाने के लिए उसे 22 महीने की मुनाफा योजना के तहत 80,550 रुपये और देने होंगे।
विक्रेता ने यह रकम दे दी, लेकिन उसे वादे के मुताबिक भुगतान नहीं मिला। पुलिस ने बताया कि विक्रेता और अन्य पीड़ितों ने रविवार को रामनगर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई जिसके मुताबिक 68 लोगों से कुल 7.09 करोड़ रुपये की ठगी की गई। प्रत्येक व्यक्ति से 14 लाख रुपये से लेकर 84 लाख रुपये तक की रकम ठगी गई।
पुलिस ने संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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