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PM Modi Vadodara Visit | पीएम मोदी के कार्यक्रम का ज़बरदस्त क्रेज! BookMyShow पर 1 घंटे में बुक हुए सभी टिकट, 42000 लोग वेटलिस्ट में शामिल

वडोदरा में होने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगामी कार्यक्रम को लेकर जनता के बीच अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिल रहा है। वडोदरा म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (VMC) द्वारा BookMyShow के माध्यम से आयोजित मुफ़्त पब्लिक रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू होते ही महज़ एक घंटे के भीतर सभी सीटें बुक हो गईं। गुजरात के गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म 'X' पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि सीटों की क्षमता पूरी होने के बाद 42,000 से अधिक आवेदकों को वेटलिस्ट में रखा गया है।
 इस कार्यक्रम का डिजिटल रजिस्ट्रेशन और एंट्री सिस्टम भी एक खास बात है, अधिकारियों ने एंट्री और भीड़ को संभालने के लिए एक प्राइवेट डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म का इस्तेमाल किया है।
 

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BookMyShow पर एक घंटे में ही रजिस्ट्रेशन पूरे हो गए
वडोदरा म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (VMC) ने BookMyShow के ज़रिए प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रम के लिए मुफ़्त पब्लिक रजिस्ट्रेशन शुरू किया था। इसे बहुत अच्छी प्रतिक्रिया मिली और रजिस्ट्रेशन शुरू होने के एक घंटे के अंदर ही सभी सीटें बुक हो गईं। बैठने की क्षमता पूरी होने के बाद रजिस्ट्रेशन बंद कर दिए गए और 42,000 से ज़्यादा अतिरिक्त आवेदकों को वेटलिस्ट में डाल दिया गया। सरकार ने इस तरह के कार्यक्रम के लिए पब्लिक रजिस्ट्रेशन के वास्ते प्राइवेट डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के इस्तेमाल को अपनी तरह की पहली पहल बताया है।
 

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एंट्री और भीड़ को संभालने के लिए डिजिटल M-टिकट
यह डिजिटल सिस्टम सिर्फ़ रजिस्ट्रेशन तक ही सीमित नहीं रहेगा। इसका इस्तेमाल वेन्यू पर एंट्री मैनेजमेंट के लिए भी किया जाएगा। जिन लोगों ने सफलतापूर्वक रजिस्ट्रेशन किया है, उन्हें अपने BookMyShow अकाउंट के ज़रिए एक डिजिटल M-टिकट मिलेगा। टिकट में एक सुरक्षित लाइव QR कोड होगा, जिसे वेन्यू पर वेरिफिकेशन के लिए स्कैन किया जाएगा।

अधिकारी डिजिटल रजिस्ट्रेशन, पहचान की पुष्टि, वेन्यू में एंट्री और बैठने की व्यवस्था को एक ही सिस्टम के तहत इस्तेमाल कर रहे हैं। इसका मकसद एंट्री प्रोसेस को ज़्यादा व्यवस्थित बनाना और साथ ही अधिकारियों को प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में आने वाली बड़ी भीड़ की आवाजाही को संभालने में मदद करना है।

PM मोदी वडोदरा में अहम इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स लॉन्च करेंगे
प्रधानमंत्री मोदी मंगलवार को वडोदरा के एक व्यस्त कार्यक्रम के लिए दौरा करेंगे, जिसके दौरान वे कई डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन और लोकार्पण करेंगे और नए प्रोजेक्ट्स की आधारशिला रखेंगे।

एक मुख्य आकर्षण वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (WDFC) के तीन सेक्शन की शुरुआत होगी। ये सेक्शन कुल मिलाकर 326 रूट किलोमीटर में फैले हैं और इन्हें 20,700 करोड़ रुपये से ज़्यादा की लागत से तैयार किया गया है। ये तीन सेक्शन हैं: साणंद (नॉर्थ)-मकरपुरा, न्यू उमरगाँव-न्यू सफाले और न्यू सफाले-JNPT। इनके शुरू होने से जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी के साथ सीधा संपर्क बनने की उम्मीद है। 'टाइम्स ऑफ़ इंडिया' की रिपोर्ट के अनुसार, इस इंफ्रास्ट्रक्चर से एक्सपोर्ट-इंपोर्ट कार्गो की आवाजाही आसान होगी और इंडस्ट्रियल सेंटर्स और पोर्ट्स के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी।

मालगाड़ी सेवाओं की शुरुआत
पीएम मोदी मुंबई में न्यू साणंद (नॉर्थ), न्यू मकरपुरा, न्यू उमरगाँव और न्यू JNPT से मालगाड़ी सेवाओं को भी हरी झंडी दिखाएंगे। इस नए इंफ्रास्ट्रक्चर का मकसद कॉरिडोर पर माल की आवाजाही को मज़बूत करना और प्रमुख इंडस्ट्रियल इलाकों और पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना है। माल ढुलाई कनेक्टिविटी के अलावा, प्रधानमंत्री वडोदरा और टांडा रोड के बीच एक नई पैसेंजर ट्रेन सेवा को भी हरी झंडी दिखाएंगे। इस सेवा से वडोदरा, छोटा उदेपुर और अलीराजपुर ज़िलों में यात्रा करने वाले यात्रियों को फ़ायदा होने की उम्मीद है।

पीएम के एजेंडे में तीन बड़े रेलवे प्रोजेक्ट
वडोदरा कार्यक्रम में कुल 329 किलोमीटर की दूरी वाले तीन रेलवे प्रोजेक्ट्स की आधारशिला भी रखी जाएगी। इन प्रोजेक्ट्स की अनुमानित लागत 9,700 करोड़ रुपये से ज़्यादा है और इनमें वडोदरा और रतलाम के बीच तीसरी और चौथी रेलवे लाइन, मियागाम करजन-चोरंडा-मलसार गेज कन्वर्ज़न प्रोजेक्ट और विश्वामित्री-डभोई रेलवे डबलिंग प्रोजेक्ट शामिल हैं। ये प्रोजेक्ट गुजरात में बड़े रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट का हिस्सा हैं और इनके पूरा होने पर रेल क्षमता बढ़ने और कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है।

हाईवे और गुजरात सरकार के प्रोजेक्ट भी शामिल
प्रधानमंत्री लगभग 1,780 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले तीन नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट्स की आधारशिला भी रखेंगे। केंद्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के साथ-साथ, गुजरात सरकार के लगभग 2,600 करोड़ रुपये के कई डेवलपमेंट कार्य भी इस कार्यक्रम का हिस्सा हैं। 
 
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Satya Niketan Building Collapse | दिल्ली में अवैध निर्माण और जर्जर इमारतों का सच, सत्य निकेतन हादसे के बाद उठे गंभीर सवाल

दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक पांच मंजिला इमारत ढहने से कम से कम सात लोगों की मौत हो गई। इस भीषण हादसे ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में अवैध निर्माण, नियम-कायदों की अनदेखी और जर्जर इमारतों के रखरखाव को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जून में हुए एमसीडी के सर्वे में करीब 28 लाख इमारतों की जांच के बाद केवल 19 इमारतों को खतरनाक पाया गया था। इस बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता विजय गोयल ने दिल्ली में अवैध निर्माण और जर्जर इमारतों को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो अनधिकृत बहुमंजिला इमारतें और पुरानी जर्जर संपत्तियां और अधिक हादसों का कारण बन सकती हैं।

एमसीडी के एक बयान के अनुसार, रविवार को ढही इमारत का निर्माण 1990 के दशक में पुनर्वास कॉलोनी में करीब 55 वर्ग गज के प्लॉट पर किया गया था। हालांकि, कुछ स्थानीय निवासियों का दावा है कि यह इमारत करीब 50 साल पुरानी थी और इसे 1970 के दशक में बनाया गया था। अधिकारियों ने बताया कि इन पुनर्वास कॉलोनियों में शुरुआत में केवल भूतल और एक मंजिल (ग्राउंड प्लस वन) के निर्माण की अनुमति दी गई थी।

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अधिकारियों के अनुसार, दशकों पुरानी यह पांच मंजिला इमारत लड़कों के पीजी के रूप में इस्तेमाल की जा रही थी। एमसीडी ने कहा कि इस इमारत का कोई स्वीकृत नक्शा नहीं था और इसके खिलाफ कोई शिकायत भी नहीं मिली थी। अधिकारियों ने बताया कि यह इलाका 1970 के दशक में पुनर्वास कॉलोनी के रूप में विकसित किया गया था, जहां लोगों को छोटे-छोटे भूखंड दिए गए थे।

एमसीडी आयुक्त संजीव खिरवार ने कहा कि मजिस्ट्रेट जांच के बाद इमारत ढहने के तात्कालिक कारणों के बारे में अधिक जानकारी मिलेगी। खिरवार ने कहा, “बेसमेंट में कोई काम हो रहा था या नहीं, यह मजिस्ट्रेट जांच के बाद पता चलेगा।” स्थानीय निवासियों ने इमारत ढहने के लिए मरम्मत कार्य और बेसमेंट में जमा पानी को जिम्मेदार ठहराया है। नगर निकाय ने पास की इमारत खाली कराकर सील कर दी है, जिसमें लड़कियों का पीजी था।

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अधिकारियों के अनुसार, आसपास की कम से कम चार इमारतों को दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 की धारा 349 के तहत खाली करने के नोटिस जारी किए गए हैं। धारा 349 और धारा 491 के तहत, नगर निगम (एमसीडी) किसी भी ऐसी इमारत को, जिसे खतरनाक या जोखिमपूर्ण माना जाता है, खाली कराने और उसे खतरनाक घोषित करने संबंधी नोटिस जारी कर सकता है। अधिकारियों ने बताया कि एमसीडी के दस्तावेजों के अनुसार, इमारत के मालिक ने पिछले साल संपत्ति कर और 2007 में कन्वर्जन शुल्क जमा किया था।

जून से सितंबर के बीच नगर निकाय ने करीब 980 संपत्तियों पर तोड़फोड़ की कार्रवाई की, 460 संपत्तियां सील कीं, अवैध निर्माण के लिए 1,500 से अधिक कारण बताओ नोटिस और 708 सीलिंग संबंधी कारण बताओ नोटिस जारी किए। अधिकारियों ने बताया कि 720 से अधिक तोड़फोड़ आदेश जारी किए। इस घटना ने एमसीडी के हर साल मानसून से पहले किए जाने वाले कमजोर इमारतों के सर्वे की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े किए हैं।

अधिकारियों के अनुसार, इस साल की शुरुआत में किए गए सर्वे में एमसीडी ने 27,84,286 इमारतों की जांच की थी, जिनमें से केवल 19 को खतरनाक पाया गया। उन्होंने बताया कि इमारतों के सर्वेक्षण के दौरान एमसीडी की टीम दरारें, झुकी हुई दीवारें और इमारत की कमजोरी के अन्य दिखाई देने वाले संकेतों को देखती हैं। अधिकारी आमतौर पर इमारतों की बाहर से जांच करते हैं और विस्तृत संरचनात्मक जांच नहीं करते।

इस साल शहर में खासकर दक्षिण क्षेत्र में इमारत ढहने और आग लगने की कई घटनाएं हुई हैं। 30 मई को सैदुल अजायब में इमारत ढहने की घटना में छह लोगों की मौत हुई थी। वहीं, तीन जून को हौज रानी इलाके में एक ‘बेड एंड ब्रेकफास्ट’ में आग लगने से 23 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें 11 विदेशी नागरिक शामिल थे। जून में मलका गंज सब्जी मंडी इलाके में एक मकान ढह गया था और इसी महीने करावल नगर में चार मंजिला इमारत भी ढह गई थी।

एमसीडी ने सत्य निकेतन में इमारत ढहने की घटना के बाद सोमवार को दक्षिण क्षेत्र के उपायुक्त राकेश कुमार और चार इंजीनियरों को अनुशासनात्मक कार्रवाई लंबित रहने तक निलंबित कर दिया। भाजपा नेता गोयल ने कहा कि उन्होंने शहर में अवैध निर्माण के मुद्दे को कई बार उठाया, लेकिन इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, आज भी पुरानी दिल्ली और चांदनी चौक में खुलेआम छह मंजिल तक के अवैध निर्माण हो रहे हैं।

वहीं, कई पुरानी इमारतें पहले से ही जर्जर और खतरनाक स्थिति में हैं। गोयल ने कहा कि यह स्थिति किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली नगर निगम वर्षों से चली आ रही इस समस्या से निपटने में विफल रहा है।

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फ्लैट पिच पर मोहम्मद शमी की मास्टर क्लास बॉलिंग, फिर भी टीम में जगह नहीं, सिराज के तो छूट गए पसीने

टीम इंडिया से बाहर चल रहे तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने दलीप ट्रॉफी के नॉकआउट मुकाबलों में धूम मचा दी. फ्लैट पिच पर जहां गेंदबाजों के लिए करने के लिए कुछ खास नहीं होता है, वहां शमी ने विकेट निकाले. हालांकि, इसके बावजूद उन्हें टीम इंडिया में शामिल नहीं किया था. दूसरी तरफ मोहम्मद सिराज जैसे गेंदबाजों की हालत खराब हो गई जो कि लगातार रेड बॉल टीम में हैं. Wed, 9 Sep 2026 10:44:05 +0530

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