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Operation Sindoor वर्षों की तैयारी और रणनीतिक दूरदर्शिता का नतीजा: पूर्व Air Marshal जितेंद्र मिश्रा

लखनऊ, सात सितंबर अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट के नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) जितेंद्र मिश्रा ने सोमवार को ऑपरेशन सिंदूर को केवल एक सैन्य अभियान नहीं, बल्कि वर्षों की तैयारी और रणनीतिक दूरदर्शिता का परिणाम बताया। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी वायु कमान का नेतृत्व करने वाले जितेंद्र मिश्रा ने नयी दिल्ली में समाचार चैनल ‘आजतक’ द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि यह अभियान भारतीय वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और वायु सेना कर्मियों के सामूहिक कार्य को दर्शाता है। उन्होंने राम मंदिर के लिए अपनी नयी भूमिका पर ज्यादा कुछ नहीं कहा।

मिश्रा ने यह जरूर कहा कि उन्होंने अब तक श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सीईओ के रूप में औपचारिक रूप से कार्यभार नहीं संभाला है। इस वर्ष 30 अप्रैल को सेवानिवृत्त हुए पूर्व वायु सेना अधिकारी ने कहा कि भविष्य के युद्ध आज ही उन्नत प्रौद्योगिकी, योजना और स्वदेशी क्षमताओं के माध्यम से लड़े जा रहे हैं। प्रौद्योगिकी की युद्ध में बढ़ती भूमिका को समझाते हुए उन्होंने कहा, ‘‘जब कोई व्यक्ति पेट्रोल पंप पर एटीएम कार्ड स्वाइप करता है तो उपग्रह से जुड़ी प्रणालियां बैंकिंग नेटवर्क से तुरंत जुड़कर लेनदेन पूरा करती हैं।’’ उन्होंने कहा कि भविष्य के युद्ध परस्पर जुड़ी प्रौद्योगिकियों पर निर्भर होंगे, जो काफी हद तक सार्वजनिक दृष्टि से बाहर काम करती हैं।

मिश्रा ने कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई) में प्रगति बदलाव की गति को तेज कर रही है और चेतावनी दी कि इस गति के साथ तालमेल नहीं रख पाने वाले देश कुछ ही वर्षों में पिछड़ सकते हैं। इसे भारतीय प्रौद्योगिकी का ‘‘चमत्कार’’ बताते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने लगभग दो मीटर की सटीकता के साथ 250 से 300 किलोमीटर दूर लक्ष्यों पर हमला करने की क्षमता का प्रभावी प्रदर्शन किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसी क्षमताओं को बनाए रखने के लिए निरंतर सीखने और तकनीकी विशेषज्ञता की आवश्यकता है।

मिश्रा के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय हवाई क्षेत्र की रक्षा करने और सटीक हमलों को सक्षम बनाने वाली प्रणालियां वर्षों के निरंतर प्रयास का परिणाम थीं। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि 15 से 20 साल पहले भारतीय वायु सेना के अधिकतर रडार रूस, अमेरिका और फ्रांस जैसे देशों से आते थे। उन्होंने तर्क दिया कि व्यापक वायु रक्षा नेटवर्क के लिए विदेशी विक्रेताओं पर निर्भर रहने के लिए संवेदनशील परिचालन डेटा साझा करना पड़ता।

इस निर्भरता से बचने के लिए भारतीय वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और वायु सेना कर्मियों ने मिलकर एकीकृत वायु कमान और नियंत्रण प्रणाली का निर्माण किया, जो पूरी तरह से स्वदेशी नेटवर्क है, जिसे विकसित करने में लगभग 15 साल लगे। मिश्रा ने कहा कि आज यह प्रणाली देश भर के सैन्य और नागरिक रडारों को जोड़ती है और धीरे-धीरे नौसैनिक परिसंपत्तियों को भी इसमें एकीकृत कर रही है। उन्होंने 2019 के बालाकोट हवाई हमले और ऑपरेशन सिंदूर की तुलना करते हुए कहा कि बालाकोट के समय भी भारतीय वायु सेना के पास आवश्यक क्षमताएं थीं।

उन्होंने तर्क दिया कि अंतर संसाधनों में नहीं बल्कि विभिन्न चरणों में किए गए रणनीतिक विकल्पों में था। उन्होंने बालाकोट और सिंदूर को उरी हमले के बाद शुरू हुई सीमा पार खतरों के प्रति भारत की प्रतिक्रिया में एक प्रगति के रूप में वर्णित किया। उनके अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर को इस प्रगति का अंतिम चरण नहीं माना जाना चाहिए।

भारतीय हवाई अभियानों की सटीकता पर चर्चा करते हुए उन्होंने बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर दोनों से संबंधित उपग्रह चित्रों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बहावलपुर और मुरीद में नौ इमारतों पर हमलों से जुड़ी तस्वीरों ने हमलों की सटीकता और विनाशकारी प्रभावशीलता को प्रदर्शित किया। सेवानिवृत्त वायु सेना अधिकारी ने कहा कि मौसम और अन्य कारकों के कारण बालाकोट के बाद जमीनी तस्वीरों की अनुपस्थिति ने कुछ पर्यवेक्षकों को अभियान के प्रभाव पर संदेह करने के लिए प्रेरित किया।

हालांकि, बाद की तस्वीरों की तुलना से भारतीय वायु सेना के हमलों की प्रभावशीलता प्रदर्शित हुई। उन्होंने ब्रह्मोस मिसाइल को दुनिया की एकमात्र परिचालन सुपरसोनिक हवा से प्रक्षेपित क्रूज मिसाइल बताया और कहा कि सरगोधा और रहीम यार खान जैसे लक्ष्यों पर कम से कम 200 किलोमीटर की दूरी से हमला किया जा सकता है। स्वदेशीकरण के मुद्दे पर मिश्रा ने कहा कि इसे केवल ‘मेक इन इंडिया’ पहल के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि राष्ट्रीय संप्रभुता के एक अनिवार्य तत्व के रूप में देखा जाना चाहिए।

उन्होंने तर्क दिया कि विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता संघर्षों के दौरान स्वतंत्र निर्णय लेने की देश की क्षमता को सीमित कर सकती है। हल्के लड़ाकू विमान तेजस कार्यक्रम में देरी पर मिश्रा ने कहा कि कोई भी देश पूरे विमान का निर्माण स्वतंत्र रूप से नहीं करता है। अत्याधुनिक एयरोस्पेस क्षमताओं वाले देश भी दुनियाभर से कलपुर्जे और उपकरण हासिल करते हैं।

उन्होंने कहा कि मुख्य बात उन महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों, डिजाइन विशेषज्ञता, सामग्रियों और विनिर्माण क्षमताओं पर नियंत्रण हासिल करना है जो परिचालन स्वतंत्रता निर्धारित करती हैं। उन्होंने कहा कि पोखरण-द्वितीय परमाणु परीक्षणों के बाद लगाए गए प्रतिबंधों ने महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों तक पहुंच को धीमा कर दिया, लेकिन भारत के बढ़ते आर्थिक, राजनीतिक और कूटनीतिक प्रभाव ने बाद में प्रगति को तेज करने में मदद की। पूर्व लड़ाकू पायलट ने कहा कि मानव रहित प्रणालियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, लेकिन वे पारंपरिक लड़ाकू विमानों की जगह नहीं लेती हैं।

उन्होंने कहा कि ईरान-इजराइल संघर्ष के शुरुआती चरणों के दौरान भी बड़े पैमाने पर अभियान अब भी मानवयुक्त लड़ाकू विमानों पर बहुत अधिक निर्भर थे। उन्होंने कहा कि ड्रोन उन मिशनों के लिए सबसे उपयोगी होते हैं जहां पायलट वाले विमानों को तैनात करना बहुत जोखिम भरा या महंगा होता है।

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Bhadohi Police ने फर्जी BSA बनकर 50 लाख ठगने वाले आरोपी को किया गिरफ्तार

भदोही (उप्र), सात सितंबर भदोही जिले में बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसएस) बनकर लोगों से साइबर ठगी करने वाले एक युवक को पुलिस ने सोमवार को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने कहा कि आरोपी के खिलाफ नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर 40 से अधिक शिकायत दर्ज है। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि प्रयागराज जिले के निवासी राम सिंह यादव उर्फ अमित यादव उर्फ राजा यादव (25) ने मनोज कुमार सिंह नाम से एक नकली आधार कार्ड बनाकर उसके जरिये लोगो को शिक्षा विभाग में नियुक्ति दिलाने और शिक्षा विभाग के अभ्यर्थी का नम्बर बढ़ाने का झांसा देकर अब तक 50 लाख की ठगी की है।

अपर पुलिस अधीक्षक (एएसपी) शुभम अग्रवाल ने बताया कि राम सिंह ने पूछताछ में बताया कि वो लोगों को नियुक्ति दिलाने के नाम पर अपना बीएसए का फर्जी पहचान पत्र दिखा कर किसी भी जनसेवा केंद्र के बार कोड पर पैसे मांगता था। आरोप है कि उसने तत्काल जरूरत का हवाला देते हुए जनसेवा केंद्र संचालकों से उनके क्यूआर कोड के जरिए पैसे मंगवाए और बाद में उनसे नकद रकम ले ली। एक मामले में संचालक के क्यूआर कोड के जरिए 40,000 रुपये प्राप्त किए गए।

लेनदेन के फर्जी पाए जाने के बाद संचालक का बैंक खाता ब्लॉक कर दिया गया। पुलिस के अनुसार, यादव के खिलाफ प्रयागराज, आजमगढ़, अमरोहा और भदोही में छह आपराधिक मामले दर्ज हैं।

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  Sports

जब क्रिकेट के 'भगवान' के सामने खेला गया इतिहास का सबसे रहस्यमयी मैच, क्या था 54 गेंदों पर सिर्फ 16 रन बनने का राज?

cricket unique stories: 1994 में कानपुर में खेले गए भारत-वेस्टइंडीज वनडे मैच में अंतिम 9 ओवरों (54 गेंदों) में जहां आक्रामक बल्लेबाजी की उम्मीद थी, वहां मोंगिया और प्रभाकर मिलकर केवल 16 रन ही बना सके. मोंगिया ने 21 गेंदों में महज 4 रन बनाए. दूसरी तरफ, प्रभाकर ने अपना शतक तो पूरा किया (154 गेंदों में नाबाद 102 रन), लेकिन उन्होंने टीम को जीत दिलाने का कोई प्रयास नहीं किया. भारत यह मैच 46 रनों से हार गया और स्टेडियम में मौजूद दर्शक सन्न रह गए. Tue, 8 Sep 2026 13:16:22 +0530

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