ऐसे कैसे WTC फाइनल खेलेगा भारत! दलीप ट्रॉफी में खुली भारतीय गेंदबाज की पोल, नहीं ले सका एक भी विकेट, हुई जमकर पिटाई
Duleep Trophy Final: ईस्ट जोन और सेंट्रल जोन की टीम के बीच दलीप ट्रॉफी 2026 का फाइनल मुकाबला खेला जा रहा है. इस मुकाबले में ईशान किशन की कप्तानी वाली टीम टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी, जहां टीम ने पहली ही पारी में 708 रन बोर्ड पर लगा दिए हैं. ईस्ट जोन के बल्लेबाजों ने विपक्षी गेंदबाजों की जमकर पिटाई की और रन लुटाने वाले गेंदबाजों में भारत के मुख्य गेंदबाजों में शुमार तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज भी शामिल रहे. सिराज ने न केवल रन लुटाए बल्कि उन्हें एक भी विकेट नहीं मिला. इसके बाद से ही क्रिकेट के गलियारों में चर्चा होने लगी है कि ऐसे प्रदर्शन के साथ टीम इंडिया WTC के फाइनल तक का सफर कैसे तय कर पाएगी.
मोहम्मद सिराज को नहीं मिला एक भी विकेट
दलीप ट्रॉफी के फाइनल मुकाबले में ईस्ट जोन के गेंदबाजों ने साउथ जोन के गेंदबाजों की जमकर पिटाई की. मोहम्मद सिराज की बात करें, तो उन्होंने पहली पारी के दौरान 26 ओवर फेंके, जिसमें वह एक भी विकेट निकालने में सफल नहीं हो पाए और उन्होंने 140 रन लुटा दिए. सिराज ने अपनी गेंदबाजी में काफी वेरिएशन किए और बाउंसर्स का भी इस्तेमाल किया, लेकिन कोई भी ट्रिक काम नहीं आई और उनकी जमकर पिटाई हुई.
ऐसे कैसे WTC फाइनल खेलेगा भारत?
डोमेस्टिक टूर्नामेंट में मोहम्मद सिराज की बुरी हालत को देखकर हर किसी के जहन में यही सवाल आ रहा है कि अगर मोहम्मद सिराज, जो टीम इंडिया के सबसे अहम तेज गेंदबाजों में गिने जाते हैं, उनकी ऐसी पिटाई हो रही है. तो फिर, भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए वह अपनी टीम के लिए कैसे विकेट निकाल सकेंगे.
टीम इंडिया नंबर-5 पर है काबिज
वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप की अंक तालिका में फिलहाल टीम इंडिया अभी नंबर-5 पर काबिज है. भारत ने 11 मैच खेले हैं, जिसमें 5 जीते हैं, 4 हारे हैं और 2 मैच ड्रॉ पर खत्म हुए हैं. इस तरह टीम इंडिया के पास 68 अंक हैं और उनका PCT 51.52 है. इस बात में कोई दोराय नहीं है कि टीम इंडिया अभी भी WTC फाइनल की रेस में शामिल है, लेकिन उसके लिए ये सफर तय करना आसान नहीं होने वाला है. चूंकि, फाइनल में पहुंचने के लिए भारत को बचे हुए अपने सभी मैचों में जीत दर्ज करनी होगी.
भारत को इस संस्करण में खेलने हैं 7 मुकाबले
आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप 2025-27 के इस चक्र में श्रीलंका के खिलाफ सीरीज खत्म होने के बाद भारत को अब कुल 7 टेस्ट मैच और खेलने हैं. भारतीय टीम के कुल 18 मैचों में से 11 मैच (इंग्लैंड, वेस्टइंडीज, साउथ अफ्रीका और श्रीलंका के खिलाफ) पूरे हो चुके हैं. वहीं, अब टीम इंडिया को 7 मैच और खेलने हैं. इसमें अक्टूबर-नवंबर में टीम इंडिया न्यूजीलैंड दौरे पर जाएगी, जहां, दोनों टीमों के बीच 2 टेस्ट मैच खेले जाएंगे. फिर, ऑस्ट्रेलिया के साथ जनवरी-फरवरी 2027 में भारतीय टीम अपनी सरजमीं पर ऑस्ट्रेलिया की मेजबानी करेगी, जहां दोनों टीमों के बीच 5 टेस्ट मैच की एक बड़ी सीरीज खेली जाएगी.
ऐसा है WTC प्वॉइंट्स टेबल का हाल
| रैंक | टीम | मैच | जीत | हार | ड्रॉ | अंक | PCT |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 1 | ऑस्ट्रेलिया | 10 | 8 | 2 | 0 | 96 | 80.00% |
| 2 | दक्षिण अफ्रीका | 4 | 3 | 1 | 0 | 36 | 75.00% |
| 3 | न्यूजीलैंड | 6 | 4 | 1 | 1 | 40 | 72.22% |
| 4 | बांग्लादेश | 5 | 3 | 1 | 1 | 40 | 55.56% |
| 5 | भारत | 11 | 5 | 4 | 2 | 64 | 51.52% |
| 6 | इंग्लैंड | 15 | 6 | 8 | 1 | 62 | 34.44% |
| 7 | श्रीलंका | 6 | 1 | 2 | 3 | 24 | 33.33% |
| 8 | वेस्टइंडीज | 12 | 2 | 8 | 0 | 30 | 22.83% |
| 9 | पाकिस्तान | 8 | 2 | 6 | 2 | 16 | 16.67% |
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Copper Price Hike: अमेरिका के टैरिफ लगाने से आंशका से तांबा ऑल-टाइम हाई पर पहुंचा
Copper Price Hike: लंदन मेटल एक्सचेंज (एलएमई) पर तांबे की कीमत रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई है. इसकी वजह रिफाइंड तांबे पर अमेरिका द्वारा टैरिफ लगाए जाने की आशंका है, जिससे कारोबारियों ने तांबे की आपूर्ति अमेरिका भेजनी शुरू कर दी है और अन्य बाजारों के उपलब्धता कम हो गई है.
एलएमई पर तीन महीने के वायदा में तांबे की कीमत 0.8 प्रतिशत बढ़कर 14,533 डॉलर मीट्रिक टन के नए ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गई है, जो कि जनवरी में दर्ज उच्चतम स्तर 14,527.50 मीट्रिक टन से अधिक है.
इस साल अब तक तांबे की कीमत में करीब 17 प्रतिशत और पिछले 12 महीनों में करीब 47 प्रतिशत की तेजी आई है.
घरेलू बाजार में भी तांबा वायदा (सितंबर) 1.21 प्रतिशत यानी 16.8 रुपए तक बढ़कर सुबह 10:30 बजे तक मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर 1,403.50 रुपए के इंट्राडे उच्च स्तर पर पहुंच गया.
तांबे में यह तेजी लंबे समय से चली आ रही आपूर्ति और मांग के बीच असंतुलन को दर्शाती है. पुरानी होती खदानें डेटा सेंटर, नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं और बिजली ग्रिड से बढ़ती मांग के साथ तालमेल बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो रहा है.
हालांकि, तांबे की कीमतों में हालिया उछाल अंतिम उपभोक्ताओं की मांग में अचानक वृद्धि की बजाय टैरिफ से जुड़े आपूर्ति प्रवाह के कारण अधिक आया है.
इसके अलावा, अमेरिकी वाणिज्य विभाग को रिफाइंड तांबे पर टैरिफ लगाने की जरूरत को लेकर व्हाइट हाउस को सलाह देनी थी, लेकिन 30 जून की समयसीमा के दो महीने से अधिक समय बाद भी अंतिम फैसला सामने नहीं आया है.
वैश्विक स्तर पर तांबे का भंडार अभी भी अपेक्षाकृत ऊंचा है, लेकिन तांबे का स्टॉक अमेरिका में केंद्रित हो गया है. इसके कारण एलएमई नेटवर्क के जरिए उपलब्ध तांबे की मात्रा कम हो गई है.
इसी तरह, हाजिर तांबा अभी भी तीन महीने के वायदा भाव से प्रीमियम पर कारोबार कर रहा है. बाजार की इस स्थिति को ‘बैकवर्डेशन’ कहा जाता है और यह निकट अवधि में तांबे की आपूर्ति में कमी का संकेत देती है.
हालांकि, रिपोर्टों के अनुसार, 2026 की पहली छमाही में वैश्विक तांबा खदान उत्पादन करीब 1 प्रतिशत घटा, जबकि कॉन्संट्रेट उत्पादन में 2.6 प्रतिशत की गिरावट आई.
स्रोत- आईएएनएस
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