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Modi-Putin ने दुनिया को दिया बड़ा संदेश, भारत के आसमान को मिलेंगी 5 और S-400 Triumf, जमीन पर Indo-Russian AK-203 Sher Rifles मचाएंगी तहलका

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की एससीओ शिखर सम्मेलन में होने वाली मुलाकात से ठीक पहले भारत-रूस रक्षा साझेदारी से जुड़ी दो बड़ी तस्वीरें सामने आई हैं। एक तरफ रूस ने भारत को पांच और एस-400 ट्रायम्फ स्क्वाड्रन देने के लिए 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक का प्रस्ताव सौंप दिया है, तो दूसरी तरफ अमेठी के कोरवा में भारतीय सेना के नए ‘शेर’ यानी एके-203 की पूरी तरह स्वदेशी यात्रा निर्णायक पड़ाव पर पहुंच गई है। इस तरह एक ओर मिसाइल कवच भारत के आसमान को अभेद्य बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है और दूसरी तरफ राइफल सीमा पर खड़े सैनिक के हाथ को और मजबूत बना रही है।

हम आपको बता दें कि रूस का प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय को मिल चुका है और उस पर प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद मार्च 2026 में पांच अतिरिक्त एस-400 स्क्वाड्रन खरीदने को मंजूरी दी थी। इनकी तैनाती पश्चिमी और पूर्वी मोर्चों पर किए जाने की संभावना है, जिससे भारत की लंबी दूरी की वायु रक्षा क्षमता और मजबूत होगी। मौजूदा एस-400 बेड़े के लिए 280 से अधिक अतिरिक्त मिसाइलें भी खरीदी जा रही हैं, ताकि इंटरसेप्टर का पर्याप्त भंडार बना रहे।

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हम आपको बता दें कि एस-400 केवल एक मिसाइल प्रणाली नहीं, बल्कि भारत की बहुस्तरीय वायु रक्षा का बेहद महत्वपूर्ण लंबी दूरी वाला हिस्सा है। यह लड़ाकू विमानों, रणनीतिक विमानों, क्रूज मिसाइलों और अन्य हवाई लक्ष्यों को पहचानने, ट्रैक करने और निशाना बनाने में सक्षम है। अलग-अलग इंटरसेप्टर मिसाइलों के कारण यह विभिन्न ऊंचाइयों और दूरियों पर खतरे से निपट सकता है। इसकी कुछ मिसाइलें लगभग 400 किलोमीटर तक के लक्ष्य को निशाना बना सकती हैं। कई लक्ष्यों को एक साथ ट्रैक और एंगेज करने की क्षमता इसे एयरबेस, कमांड सेंटर और अन्य महत्वपूर्ण सैन्य प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए खास बनाती है।

हम आपको याद दिला दें कि भारत ने 2018 में पांच एस-400 स्क्वाड्रन का मूल समझौता किया था। इनमें चार की डिलीवरी हो चुकी है, जबकि पांचवें और अंतिम स्क्वाड्रन के नवंबर 2026 तक आने की उम्मीद है। नए पांच स्क्वाड्रन की डिलीवरी समझौते पर हस्ताक्षर के करीब तीन साल बाद शुरू होने की संभावना है। इस तरह भारत अब सिर्फ तात्कालिक जरूरत ही पूरी नहीं कर रहा, बल्कि आने वाले वर्षों के लिए देश की एयर-डिफेंस छतरी का दायरा भी बढ़ा रहा है।

लेकिन आसमान की सुरक्षा के साथ जमीन पर सैनिक के हाथ में मौजूद हथियार भी उतना ही निर्णायक है। यहीं अमेठी का एके-203 ‘शेर’ कहानी का दूसरा और ज्यादा आत्मनिर्भर चेहरा सामने लाता है। कोरवा स्थित इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड में बन रही एके-203 पूरी तरह भारतीय कलपुर्जों और सामग्री से बनी है। हालांकि यह रूसी डिजाइन को भारतीय क्षमता में बदलने की करीब एक दशक लंबी यात्रा है। इस परियोजना के लिए रूस से लगभग 90 हजार पन्नों का तकनीकी दस्तावेज मिला था। कोविड महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण तकनीक का हस्तांतरण प्रभावित हुआ और अंतिम टेक्नोलॉजी पैकेज 2024 में मिला। अगस्त 2023 में कोरवा में बनी पहली राइफल में भारतीय सामग्री की हिस्सेदारी करीब 5 प्रतिशत थी, दिसंबर 2024 में यह 15 प्रतिशत हुई और अगस्त 2026 तक सभी 50 प्रमुख तथा लगभग 180 छोटे कलपुर्जे भारत में बनने लगे।

इस स्वदेशीकरण की असली चुनौती सिर्फ असेंबली नहीं थी। विशेष स्टील मिश्रधातुओं, स्प्रिंग, इंजीनियरिंग प्लास्टिक, कंपोजिट, कोटिंग और सटीक रासायनिक संरचना वाली धातुओं को भारतीय स्तर पर विकसित करना पड़ा। इसके लिए एडवांस्ड वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड और अडानी डिफेंस सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजीज समेत भारतीय औद्योगिक साझेदारों ने सप्लायर नेटवर्क तैयार किया। टीमों ने देशभर में करीब 76 सब-वेंडरों का निरीक्षण किया, जिनमें लगभग आधे उत्तर प्रदेश, खासकर कानपुर और लखनऊ क्षेत्र में हैं।

अब कोरवा में करीब 76 तरह के परीक्षण करने वाली अपनी प्रयोगशाला है। हर राइफल को स्वीकार किए जाने से पहले करीब 70 राउंड फायर किए जाते हैं, जिनमें दो हाई-प्रेशर राउंड सामान्य से करीब 50 प्रतिशत अधिक दबाव पैदा करते हैं। पहली पूरी तरह भारतीय एके-203 ने लगातार 3,000 राउंड की फायरिंग परीक्षा भी सफलतापूर्वक पूरी की। साथ ही सेना के परीक्षण के लिए 100 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री वाली 10 राइफलें तैयार की जा रही हैं।

बताया जा रहा है कि अब तक करीब 70 हजार राइफलें सेना को दी जा चुकी हैं। अप्रैल 2027 से उत्पादन क्षमता एक राइफल हर 100 सेकंड तक पहुंचाने का लक्ष्य है। कंपनी को 1.5 लाख से अधिक राइफलों की संभावित मांग के संकेत मिल चुके हैं और आगे निर्यात तथा कलाश्निकोव श्रेणी के अन्य हथियारों की दिशा में भी संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।

बहरहाल, रणनीतिक संदेश साफ है कि भारत अब केवल हथियार खरीदने वाला देश नहीं रहना चाहता, बल्कि तकनीक को आत्मसात कर अपनी रक्षा औद्योगिक क्षमता खड़ी कर रहा है। एस-400 भारत की दूर से आने वाले हवाई खतरे को रोकने की क्षमता बढ़ाता है, जबकि पूरी तरह स्वदेशी एके-203 युद्ध के सबसे बुनियादी स्तर पर सैनिक की आत्मनिर्भरता मजबूत करता है। यही संयोजन भारत की बदलती सैन्य शक्ति की असली तस्वीर है। यानि आसमान में मजबूत सुरक्षा कवच और जमीन पर भारतीय हाथों से बना ‘शेर’।

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Mike Hesson का बड़ा खुलासा: Rizwan और Imam-ul-Haq को हटाने के फैसले में मेरा कोई हाथ नहीं, PCB पर फोड़ा ठीकरा

पाकिस्तान क्रिकेट टीम इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में लगातार दो हार के बाद मुश्किल दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में टीम में किए गए बड़े बदलावों को लेकर अंतरिम लाल गेंद कोच माइक हेसन ने अपनी स्थिति साफ कर दी है। हेसन ने कहा कि मोहम्मद रिजवान, सलमान अली आगा और इमाम-उल-हक को टीम से बाहर करने के फैसले में उनकी कोई भूमिका नहीं थी, क्योंकि जब उन्हें जिम्मेदारी संभालने के लिए कहा गया, तब तक ये तीनों खिलाड़ी टीम छोड़कर स्वदेश लौट चुके थे।

बता दें कि इंग्लैंड ने सीरीज के पहले मुकाबले में हेडिंग्ले में पाकिस्तान को पारी और 103 रन से करारी शिकस्त दी थी। इसके बाद लॉर्ड्स में खेले गए दूसरे टेस्ट में भी इंग्लैंड ने 194 रन से जीत दर्ज की। इन लगातार दो हार के साथ इंग्लैंड ने तीन मैचों की सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त हासिल कर ली। अब दोनों टीमों के बीच तीसरा और अंतिम टेस्ट 9 सितंबर से एजबेस्टन में खेला जाना है।

इन हार के बाद पाकिस्तान बोर्ड ने टीम प्रबंधन और खिलाड़ियों के स्तर पर बड़े बदलाव किए। मोहम्मद रिजवान, सलमान अली आगा, इमाम-उल-हक, अली उस्मान, आमिर जमाल, मुहम्मद आवैस जफर और खुर्रम शहजाद को टीम से हटा दिया गया। इसके अलावा मुख्य कोच सरफराज अहमद और गेंदबाजी कोच उमर गुल को भी उनकी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया।

माइक हेसन को इसके बाद अंतिम टेस्ट के लिए पाकिस्तान की लाल गेंद वाली टीम की जिम्मेदारी सौंपी गई। बर्मिंघम में शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने रिजवान, आगा और इमाम को हटाए जाने के फैसले से खुद को अलग करते हुए कहा कि बोर्ड ने जब उनसे अंतिम टेस्ट की जिम्मेदारी संभालने के बारे में पूछा, तब तक तीनों खिलाड़ी टीम से बाहर किए जा चुके थे और घर लौट रहे थे।

हालांकि हेसन ने यह भी स्पष्ट किया कि बाकी खिलाड़ियों को हटाने और कुछ नए चेहरों को टीम में शामिल करने की प्रक्रिया में उनकी भूमिका थी। उनके मुताबिक, उनका उद्देश्य अंतिम टेस्ट के लिए टीम में बेहतर संतुलन तैयार करना था।

मौजूद जानकारी के अनुसार, हेसन पाकिस्तान की सीमित ओवरों वाली टीम के साथ काम करने के बाद जापान से लौटे थे। जापान में एशियाई खेलों का आयोजन चल रहा है। लाहौर में पाकिस्तान का सीमित ओवरों का प्रशिक्षण शिविर भी हुआ था। इसी दौरान क्रिकेट बोर्ड ने उनसे टेस्ट टीम की जिम्मेदारी संभालने के लिए कहा।

हेसन ने कहा कि अब उनका मुख्य जोर ऐसी गेंदबाजी इकाई तैयार करने पर है जिसमें अलग-अलग तरह के गेंदबाज मौजूद हों। वह टीम में कुछ ऐसे खिलाड़ियों को भी रखना चाहते हैं जो गेंदबाजी के साथ बल्लेबाजी में योगदान दे सकें। उनके अनुसार, अंतिम टेस्ट में टीम का संतुलन सुधारना सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में शामिल है।

नई पाकिस्तान टीम में सैम अयूब और अब्दुल्ला फजल जैसे खिलाड़ियों को शामिल किया गया है। इनके अलावा अराफात मिन्हास, मोहम्मद इमरान जूनियर, साद बैग, मोहम्मद इमरान और रजाउल्लाह जैसे ऐसे खिलाड़ी भी टीम का हिस्सा हैं जिन्हें अभी अंतरराष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट में खुद को साबित करना बाकी है।

गौरतलब है कि पाकिस्तान पहले ही श्रृंखला गंवा चुका है, इसलिए एजबेस्टन टेस्ट उसके लिए परिणाम से ज्यादा अपनी कमजोरियों को सुधारने का अवसर होगा। लगातार हार के बाद टीम प्रबंधन युवा खिलाड़ियों को मौका देकर भविष्य के लिए मजबूत संयोजन तैयार करना चाहता है। ऐसे में अंतिम मुकाबले में नए चेहरों के प्रदर्शन और माइक हेसन की रणनीति पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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बीवी तलाक दे देगी! टीम इंडिया के कोच बनने पर आशीष नेहरा ने बताई अपनी मजबूरी

भारत के पूर्व दिग्गज क्रिकेटर आशीष नेहरा ने टीम इंडिया के हेड बनने पर अपनी चुप्पी तोड़ी है. नेहरा है कहा कि नेशनल टीम का हेड कोच बनना उनके लिए सम्मान बात होगी, लेकिन उनकी फिलहाल ऐसी कोई इच्छा नहीं है. इसके अलावा नेहरा लगातार घर से दूर भी नहीं रहना चाहते हैं. यही वजह है कि वह टीम इंडिया के कोच बनने के इच्छुक नहीं हैं. Tue, 8 Sep 2026 10:02:49 +0530

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