दिल्ली सत्य निकेतन हादसे पर CJP ने खोला मोर्चा, सरकार के सामने रखी एक करोड़ मुआवजे सहित 7 सूत्रीय मांग
Satya Niketan Tragedy: राजधानी दिल्ली के साउथ कैंपस से सटे सत्य निकेतन इलाके में हुआ दर्दनाक हादसा अब एक बड़े सियासी और प्रशासनिक विवाद का रूप लेता जा रहा है. इलाके में एक बहुमंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर पड़ी, जिसमें दबकर जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर अब सात हो गई है. हादसे में पांच अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हैं, जिनमें से तीन की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है और वे अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं. मलबे में दबकर जान गंवाने वालों में ज्यादातर दिल्ली यूनिवर्सिटी के मासूम छात्र थे, जो बेहतर भविष्य के सपने लेकर राजधानी आए थे और इस इलाके में पेइंग गेस्ट के तौर पर रह रहे थे. इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी ने गहरा शोक व्यक्त किया है और छात्रों की सुरक्षा को लेकर दिल्ली सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.
हादसे के पीछे बड़ा पीजी माफिया
सोशल मीडिया मंच एक्स पर पार्टी का रुख सामने रखते हुए सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने पूरे मामले पर कड़ा ऐतराज जताया है. उन्होंने कहा कि यह महज एक हादसा नहीं है, बल्कि सिस्टम की लापरवाही का नतीजा है. सौरव दास ने कहा कि उन्होंने सरकार के सामने सात सूत्रीय मांगें रखी हैं ताकि छात्रों और युवाओं की जान के साथ खिलवाड़ करने वालों को सजा दिलाई जा सके. पार्टी ने अपनी पहली मांग में इस पूरे मामले की स्वतंत्र आपराधिक जांच कराने की बात कही है. प्रवक्ता का कहना है कि कार्रवाई सिर्फ इमारत के मालिक तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उस बड़े पीजी माफिया की जड़ तक पहुंचना जरूरी है जो अवैध निर्माणों के जरिए छात्रों की जिंदगी जोखिम में डाल रहा है. पार्टी का आरोप है कि ऐसे अवैध निर्माण सत्ता में बैठे रसूखदार नेताओं और भ्रष्ट अफसरों के संरक्षण के बिना फल-फूल ही नहीं सकते.
इमारतों का स्ट्रक्चरल ऑडिट और सख्त नियम लागू हों
सीजेपी ने अपनी मांगों की फेहरिस्त में छात्रों के रहने की जगहों की सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया है. प्रवक्ता सौरव दास के अनुसार, पार्टी की दूसरी सबसे बड़ी मांग यह है कि सरकार राजधानी की सभी इमारतों की इंजीनियरिंग जांच कराए. खासकर उन इलाकों, स्कूलों और कॉलेजों के आसपास मौजूद इमारतों का स्ट्रक्चरल ऑडिट बेहद जरूरी है जहां बड़ी संख्या में छात्र रहते हैं. पार्टी का कहना है कि युवा और छात्र इस देश की सबसे बड़ी पूंजी हैं, इसलिए उनके रहने के ठिकानों को सुरक्षित बनाना सरकार की पहली जिम्मेदारी है. इसके साथ ही अवैध रूप से चल रहे निर्माणों को तुरंत प्रभाव से सील करने और नियमों का उल्लंघन करने वाले मकान मालिकों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है.
सार्वजनिक डेटाबेस बने और छात्रों को मिले सरकारी हॉस्टल
छात्रों की बुनियादी दिक्कतों पर बात करते हुए सीजेपी ने मांग रखी है कि एक ऐसा ऑनलाइन पब्लिक सर्च डेटाबेस तैयार किया जाए जिसे कोई भी नागरिक देख सके. इस पोर्टल से छात्रों को यह पता चल सकेगा कि जिस इमारत या पीजी में वे रहने जा रहे हैं, उसे प्रशासन से जरूरी मंजूरी मिली है या नहीं और वह रहने के लिहाज से सुरक्षित है या खतरनाक. इसके अलावा पार्टी ने दिल्ली यूनिवर्सिटी और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों के छात्रों के लिए बड़े पैमाने पर नए सरकारी हॉस्टल बनाने की मांग उठाई है, ताकि छात्रों को मजबूरन प्राइवेट पीजी संचालकों की मनमानी का शिकार न होना पड़े. मुआवजे को लेकर सीजेपी ने साफ कहा कि इस हादसे में जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये और गंभीर रूप से घायल लोगों को बीस लाख रुपये की आर्थिक मदद तुरंत दी जाए.
पुरानी कमेटियों की विफलता और मंत्रियों की जवाबदेही पर सवाल
पार्टी ने जून के महीने में मालवीय नगर के एक होटल में लगी भीषण आग की घटना का हवाला देते हुए सरकार की कार्यशैली पर कड़े सवाल दागे. सीजेपी ने याद दिलाया कि उस समय तेरह जिला कमेटियों का गठन किया गया था, जिनका काम अवैध निर्माणों की पहचान करना, सुरक्षा ऑडिट करना और नियमों का पालन न करने वालों को सील करना था. सौरव दास ने आरोप लगाया कि ये तमाम कमेटियां महज तीन महीने के भीतर ठंडे बस्ते में चली गईं और उनका कामकाज पूरी तरह बंद हो गया. सीजेपी ने मांग की है कि सत्य निकेतन सर्वे और कमेटियों की पुरानी कार्रवाई रिपोर्ट को अड़तालीस घंटे के भीतर सार्वजनिक किया जाए. इसके साथ ही दिल्ली के शहरी विकास और शिक्षा मंत्री आशीष सूद से सीधा सवाल करते हुए पूछा गया है कि उनके रहते इन कमेटियों का काम क्यों रोक दिया गया और इस विफलता के लिए उनकी जवाबदेही तय होनी चाहिए.
हाई कोर्ट सख्त, एमसीडी को उच्च स्तर पर जांच का आदेश
इस बीच दिल्ली हाई कोर्ट ने भी सत्य निकेतन की इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है. चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ऑफ दिल्ली यानी एमसीडी को निर्देश दिया है कि वह अपने सबसे ऊंचे स्तर के अधिकारियों के जरिए इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए. अदालत ने साफ लफ्जों में कहा कि पहली नजर में देखने पर ऐसा लगता है कि इस तरह की घटनाओं के लिए सिर्फ इमारत के मालिक ही जिम्मेदार नहीं हैं, बल्कि स्थानीय प्रशासन, एमसीडी और यूनिवर्सिटी प्रशासन भी अपनी जिम्मेदारियों से बच नहीं सकते. हाई कोर्ट ने एमसीडी को निर्देश दिया है कि वह यह स्पष्ट करे कि क्या गिरी हुई इमारत नियमों के तहत बनी थी, उसमें किस स्तर पर खामियां पाई गईं और जिन अफसरों की निगरानी में यह लापरवाही हुई, उनके खिलाफ क्या सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है. कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद अब प्रशासन में हड़कंप मच गया है.
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